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Monday, September 23, 2013

खगोल-विज्ञान जागरूकता अभियान Astronomy Awareness campaign

खगोल-विज्ञान जागरूकता अभियान Astronomy Awareness campaign 
खगोल-विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम 
सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर ने स्थानीय मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे अंतरिक्ष विज्ञान संचार कार्यक्रम के अंतर्गत खगोल-विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम की शुरुवात की। इस कार्यक्रम मे क्लब सदस्यों व अध्यापकों को विभिन्न पूर्व व भविष्य मे होने वाली खगोलीय घटनाओं से अवगत करवाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमति शशि बाठला ने किया। क्लब प्रभारी व विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने विद्यार्थियों को  कार्यक्रम में इरैटोस्थनीज प्रयोग, उन्नयन कोण, त्रिकोणमितीय गणनाओं, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी प्रेक्षण, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं की स्थिति,
नवम्बर मे दृश्यमान होने वाला आइसोन धूमकेतू 
नवम्बर मे दृश्यमान होने वाले आइसोन धूमकेतू अवलोकन, अक्टूबर मे घटित होने वाले चन्द्र ग्रहण अवलोकन आदि की सैद्धान्तिक व प्रायोगिक जानकारियां  दी गई।
आज है शरद विषुव पर होंगे दिन व रात बराबर
शरदकालिक विषुव प्रस्तुति 

शरदकालिक विषुव तेईस सितम्बर यानि कि आज का दिन एक खास विशेषता रखता है कि आज दिन व रात की अवधि बराबर होगी। विषुव एक खगोलीय घटना है जो साल मे दो बार होती है मार्च मे वसंत विषुव और सितम्बर मे शरद विषुव या शरद सम्पत होता है ये दो सम्पात संक्रान्तियाँ कहलाती हैं। स्थानीय मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे सी वी रमण विज्ञान क्लब सदस्यों को ऐसी जानकारी देते हुए विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने कहा कि प्रत्येक वर्ष चार बार ऐसी स्थितियां आती हैं जब सूर्य भूमध्य रेखा, कर्क रेखा और मकर रेखा पर होता है तब क्रमश मार्च विषुव, जून अयनांत, सितम्बर विषुव, दिसम्बर अयनांत चार सूर्य स्तिथियां बनती है। इस बार तेइस सितम्बर यानि आज शरद विषुव को सूर्य भूमध्य रेखा पर होगा और यदि कोई व्यक्ति भूमध्य रेखा पर खड़ा हो तो सूर्य उसे सीधे अपने सिर के ऊपर दिखाई देगा और एक निश्चित समय पर उस  की परछाई शून्य हो जायेगी। इसका यह भी अर्थ है कि आधा ग्रह पूरी तरह प्रकाशित होता है और इस समय दिन और रात लगभग बराबर होते हैं।
कहाँ कहाँ से गुजरती है भूमध्य रेखा 
भूमध्य रेखा चौदह देशों मे से स्थल या जल से होकर जाती है। पृथ्वी की सतह पर अधिकतर भूमध्य रेखीय क्षेत्र समुद्रीय ही है। भूमध्य रेखा के आस-पास के स्थान अंतरिक्ष केंद्र की स्थापना के लिए अच्छे होते हैं गुयाना अंतरिक्ष केंद्र, कौरोऊ व  फ्रेंच गुयाना का अंतरिक्ष केंद्र भी भूमध्य रेखा पर ही स्थित है। कीनिया गणतंत्र पूर्वी अफ्रीका में भूमध्य रेखा पर स्थित है। इक्वाडोर देश भूमध्य रेखा पर है  जिसके आधार पर ही इस देश का नाम इक्वाडोर रखा गया है  भूमध्य रेखा इक्वाडोर को दो भागों में विभाजित करती है। इसकी राजधानी क्विटो और सबसे बड़ा शहर गुआयाकिल है।
क्यूं होता है ऐसा ? 
सूर्य अपनी सामयिक चाल में आकाश से वर्ष में दो बार इक्कीस मार्च और तेइस सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है। इन दिनों भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह के एकदम लम्बवत पड़ती हैं। भूमध्य रेखा पर स्थित प्रदेशों में सूर्योदय और सूर्यास्त अपेक्षाकृत अधिक देर से होता है। ऐसे स्थानों पर वर्ष भर सैद्धांतिक रूप से बारह  घंटों के दिन और रात होते हैं।
क्या होता है इस कारण?
शरद विषुव से मौसम मे बदलाव के असर दिखाई देने लग जाते हैं इस दिन से भूमध्य रेखा के  उत्तर में दिन छोटे और रात लंबी होती हैं जो शीतकाल की शुरुआत का संकेत है और इसके उल्ट भूमध्य रेखा के  दक्षिण में दिन लंबे व रातें छोटी होती हैं जो ग्रीष्मकाल की शुरुआत का संकेत है। भूमध्य रेखा के दोनों और के गोलार्धों में मौसम एकदम उलटे होते हैं। किंतु भूमध्य रेखा पर दिनमान के साथ साथ मौसम भी लगभग समान ही रहता है।
 पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग
क्लब सदस्यों ने किया पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग
शरद विषुव के अवसर का लाभ उठाते हुए क्लब सदस्यों व स्कूल के विद्यार्थियों ने अपना चिर परिचित पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग भी किया। इस  प्रयोग मे बच्चो ने दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक के मार्गदर्शन मे इस प्रयोग से समबन्धित प्रेक्षण लिए व आवश्यक गणना की व पृथ्वी की परिधि ज्ञात की। उन्होंने बताया कि क्लब पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग को पब्लिक इवेंट बनाने की योजना पर विचार कर रहा है। विश्व मे बहुत से देशो के विज्ञान संचारक व अध्यापक नियमित रूप से इस प्रयोग को कर रहे हैं जिनके साथ यमुनानगर को भी इन अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर लाया जाएगा। इस प्रयोग मे कार्तिक, अमन, पारस, निखिल, स्पर्ष, सूर्यांश, क्रमिका सान्याल, सुमेधा गल्होत्रा, श्रेया सचदेवा, युक्ता, साविया, आरुषि व पार्थवी ने भाग लिया। इस अवसर पर ममता वर्मा सचदेवा, अमनदीप कौर, शिव कुमार, रोमी, वीना, किरण,विदुषी, मनीषा,मंजू  आदि अध्यापको का योगदान सराहनीय रहा।
२२/०९/२०१३ को पृथ्वी से ISON की स्थिति
अखबारों मे







Thursday, June 20, 2013

आज है इस साल का सबसे सबसे लंबा दिन Summer Solstice 2013

आज है इस साल का सबसे सबसे लंबा दिन Summer Solstice 2013
सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने किया पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग

इक्कीस जून का दिन साल का सबसे सबसे लंबा दिन होगा। इस दिन को ग्रीष्म सक्रांति यानि समर सॉल्स्टाइस कहा जाता है। इस दिन सूर्य कर्क रेखा पर होता है और उत्तर की ओर बढ़ता सूर्य इक्कीस जून को कर्क रेखा को छूकर पुनः दक्षिण की ओर बढ़ने लगता है। इस स्थिति को दक्षिणायन कहते हैं। सूर्य के उत्तरायन और दक्षिणायन होने के बारे में  क्लब सचिव दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने के दौरान पृथ्वी का एक गोलार्द्ध सूर्य से दूर चला जाता है। जिसे सूर्य का उत्तरायन और दक्षिणायन हो जाना कहा जाता है। पृथ्वी पर स्थित दो काल्पनिक रेखाएं कर्क और मकर रेखा है। सूर्य उत्तरायन के समय कर्क रेखा पर और दक्षिणायन के समय मकर रेखा पर होता है। पृथ्वी पर इसी परिवर्तन के कारण ग्रीष्मकाल तथा शीतकाल का आगमन होता है। आज के बाद दिन की अवधि छोटी होनी शुरू हो जायेगी जो कि कुछ सेकंड्स प्रतिदिन होती परन्तु बाद मे यह अंतर मिनट्स मे बढेगा यानि  इक्कीस जून के बाद से सूर्य दक्षिण दिशा की ओर गति करना प्रारंभ कर देगा, जिसे दक्षिणायन का प्रारंभ कहा जाता है। अब दिन क्रमशः छोटे होते जाएंगे और फिर तेईस सितंबर को रात-दिन बराबर होंगे।
क्या बदलाव आते हैं मौसम मे
सूर्य के उत्तरायन और दक्षिणायन होने से पृथ्वी के मौसम मे परिवर्तन आते हैं। पृथ्वी पर इसी परिवर्तन के कारण ग्रीष्मकाल तथा शीतकाल का आगमन होता है। हमारे यहा पर मुख्यरूप से तीन मौसम होते हैं। ग्रीष्मकाल की अवधि मार्च से जून तक वर्षाकाल की अवधि जुलाई से अक्टूबर तक व शीत काल की अवधि नवम्बर से फरवरी होती है। मौसम में इसी परिवर्तन के साथ हवा की दिशा भी बदलती है। जहां ज्यादा गर्मी होती है वहां से हवा गर्म हल्की होकर ऊपर उठने लगती है और पूरे क्षेत्र में निम्न वायुदबाव का क्षेत्र बन जाता है। ग्रीष्म काल में 21 मार्च से सूर्य उत्तरायण होने लगता है तथा 21 जून को कर्क रेखा पर लंबवत चमकता है। इस कारण मध्य एशिया का भूभाग काफी गर्म हो जाता है। फलस्वरूप हवा गर्म होकर ऊपर उठ जाती है और निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाता है। जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध के महासागरीय भाग पर ठंड के कारण स्थित उच्च वायुदाब की ओर से वायु उत्तर में स्थित कम वायुदाब की ओर चलने लगती है। इसे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहते हैं। ये हवा समुद्र की और से चलती है इसलिए इसमें जलवाष्प भरपूर होती हैं। इसी कारण एशिया महाद्वीप के इन क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है। यह मानसूनी जलवायु भारत, दक्षिण-पूर्वी एशिया में भरपूर वर्षा करती है।
यमुनानगर मे सूर्योदय और सूर्यास्त
यमुनानगर में सूर्योदय प्रातः पांच बजकर बीस मिनट पर और सूर्यास्त सायं सात बजकर उन्तीस मिनट पर होगा। यमुनानगर में इक्कीस जून का दिन चौदह घंटे आठ मिनट इक्कीस सेकंड का  होगा जो कि साल का सबसे बड़ा दिन होगा और रात की अवधि नो घंटे इक्यावन मिनट तथा नून टाइम बारह बज कर पच्चीस मिनट पर होगा। बारह बज कर पच्चीस मिनट पर किसी भी लम्बवत खड़ी वास्तु की परछाई न्यूनतम होगी।
क्लब सदस्यों ने किया प्रयोग
बीस व इक्कीस जून के दो दिन पृथ्वी की परिधि नापने के लिए महत्वपूर्ण होते है क्यूंकि सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत होता है। इस अवसर पर स्थानीय स्वामी विवेकानन्द सरोजिनी कालोनी मे क्लब सदस्यो अमन काम्बोज व कार्तिक ने अपनी टीम के साथ पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग किया। क्लब सचिव दर्शन बवेजा ने बताया कि विश्व के कई देशो के बच्चे एक साथ मिल के तेईस सौ वर्ष पुराना इरेटोस्थनीज प्रयोग करते हैं और विश्व समुदाय के साथ एकजुट होकर विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपने अनुभव सांझा करते हैं व अपने अपने आंकड़ों का आदान प्रदान करके तुलनात्मक गणनाओं से पृथ्वी की परिधि का आंकलन करते हैं। यह प्रयोग बच्चों को  गणित, भूगोल व खगोलीय गणनाओं को समझने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इस बार इस प्रयोग मे अमन, कार्तिक, पार्थवी, पारस, पलक, चारु, अवनी, काजल, अंशी, रीमा, जसमीत, सिमरन, अरुण, पारस बवेजा ने भागीदारी अदा की। सभी क्लब सदस्यों को प्रमाणपत्रो से नवाजा जाएगा। 
अखबार मे खबर 



 

Wednesday, December 26, 2012

शरद अयनांत को इरेटोस्थनीज प्रयोग किया Eratosthenes Experiment on Winter Solstice

शरद अयनांत को इरेटोस्थनीज प्रयोग किया Eratosthenes Experiment on Winter Solstice 
प्रगति विज्ञान संस्था के कुशल निर्देशन में क्लब सदस्य साल में चार दिन अपनी नियमित गातिविधि पृथ्वी की परिधि ज्ञात करते हैं भारत के विभिन्न राज्यों व दुनिया  के 16 देश साथ मिल कर इरेटोस्थनीज प्रयोग दोहराते हैं। इस प्रयोग को करने के लिए विद्यार्थियों में बहुत उत्साह है। इस प्रयोग में अब बच्चे बहुत रूचि लेते हैं। विज्ञान संचारक श्री दीपक शर्मा जी के कुशल मार्गदर्शन में इस वर्ष के अंतिम माह में शरद अयनांत के दिन यह प्रयोग किया गया। 
क्लब गातिविधि रिपोर्ट 
पहला दिन 20 दिसम्बर  
21 दिसम्बर आज के दिन होगा वर्ष का सबसे छोटा दिन होगा। आज दिन 10 घंटे 19 मिनट 14 सेकंड का होगा। रात वर्ष की सबसे लंबी रात होगी। इन दिनों पृथ्वी के सूर्य के सापेक्ष ऐसी स्तिथि बनती है कि सूर्य की किरणे 23.5 डिग्री के न्यूनतम कोण पर होती हैं । जिस कारण सूर्य की किरणों में न्यूनतम तपिश होती हैं।

विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि विंटर सोलिस्टीस के इस अवसर पर राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के विद्यार्थी पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की अपनी नियमित गातिविधि करेंगे। सी वी रमण विज्ञान क्लब के सहयोग से 21 दिसम्बर को अलाहर स्कूल के विद्यार्थी और 23 दिसम्बर को मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी यमुनानगर के 100 विद्यार्थी 20 समूहों में दुनिया के 16 देशों के विद्यालयों के विद्यार्थियों के साथ मिल कर पृथ्वी की परिधि मापने का 2300 वर्ष पुराना विश्व प्रसिद्ध इरेटोस्थनीज प्रयोग करेंगें। मुकंद लाल पब्लिक स्कूल में 23 दिसम्बर को पांच विद्यालयों के 120 विद्यार्थी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिल कर इस प्रयोग में अपने जौहर दिखाएंगें।
प्रत्येक वर्ष में खगोलिय घटनाएं होती है जिनसे ऋतूचक्र चलता है इन चार खगोलीय घटनाओं के में दो बार अयनांत व दो बार विषुव की खगोलीय स्तिथि आती है इन खगोलीय घटनाओं के तहत सौरमंडल का मुखिया सूर्य के आज दक्षिणायन से उत्तरायन में प्रवेश करने की वजह से आज वर्ष का सबसे छोटा दिन होगा।
इस घटना के दौरान सूर्य मकर रेखा को लंबवत्‌ किंतु कर्क रेखा को, जहां हम रहते हैं, सर्वाधिक तिरछा स्पर्श करता है। हमारे उत्तरी ट्रॉपिकल जोन से सूर्य तिरछा गमन करता है, इससे सूर्यास्त भी बहुत तेजी से हो जाता है। इस खगोलीय घटना से मौसम में परिवर्तन आने से ठंड बढ़ जाती है। आम आदमी और विद्यार्थियों के लिए यह घटना बहुत ही महत्वपूर्ण है। इससे विद्यार्थी प्राकृतिक व प्रायोगिक तौर पर भौगोलिक स्थिति को समझ सकते हैं।
बच्चों को समझाते हुए क्लब के प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि साल में दो बार यह स्तिथि आती है, जब पृथ्वी अपनी धुरी पर या तो सूर्य की ओर झुक जाती है या उससे काफी दूर हो जाती है। इसके कारण सूर्य या तो आकाश में सर्वाधिक उत्तर में या दक्षिणतम छोर पर पहुंच जाता है। शीत अयनांत के दिन उत्तरी ध्रुव सूर्य से दूर हो जाता है जबकि दक्षिणी ध्रुव सूर्य की ओर हो जाता है। उन्होंने कहा कि सूर्य उत्तरी क्षेत्र में आकाश में न्यूनतम ऊंचाई पर प्रकाशमान होता है और दक्षिणी क्षेत्र में आकाश में सूर्य अधिकतम ऊंचाई पर प्रकाशमान होता है। जिस कारण पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे छोटा दिन और पृथ्वी के दक्षणी गोलार्द्ध में सबसे लंबा दिन होता है।
इस प्रयोग को करवाने के लिए प्रधानचार्य श्री नरेंद्र ढींगरा और श्री मति शशि बाठला ने सहर्ष स्वीकृति प्रदान की है। इस प्रयोग को करवाने के लिए श्रीश शर्मा, संजय शर्मा, कपिल कुमार और अमन काम्बोज भी सहयोग देंगें।
दूसरा  दिन 21 दिसम्बर  
एक तरफ तो जहां दुनिया आज महाप्रलय को लेकर आशंकित थी वही दूसरी और राजकीय वरिष्ठ विद्यालय अलाहर के होनहार बाल विज्ञानी शरद अयनांत के दिन पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने का २३०० वर्ष पुराना प्रयोग दोहरा कर महान भूगोलवेत्ता और वैज्ञानिक इरेटोस्थनीज को याद कर रहे थे श्रद्धांजली समर्पित कर रहे थे। सी वी रमण विज्ञान क्लब के सहयोग से अलाहर स्कूल के विद्यार्थी और विश्व के विभिन्न देशों के विद्यार्थियों के साथ मिल कर यह प्रयोग कर रहे थे।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि गत ३ वर्षों से साल में चार बार बाल विज्ञानी इस प्रयोग को करते हैं। इस प्रयोग को करने से विद्यार्थियों का गणित, विज्ञान और भूगोल विषयों को समझने के प्रति रूचि विकसित होती है प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र ढींगरा ने कहा कि अलाहर स्कूल बे बच्चे इस प्रयोग में आज अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान स्थापित कर चुके हैं। उन्होंने विज्ञान विषय की पढ़ाई गतिविधियों के जरिये करवाने व विभिन्न खगोलीय, वैज्ञानिक तथ्यों को प्रमाण सहित समझाने के लिए अध्यापकों की प्रशंसा की व बाल विज्ञानियों को आशीर्वाद दिया।
इस प्रयोग में कपिल कुमार, विशु कुमार व दिव्या की टीम ने प्रेक्षण लिए व इन आंकड़ों को वैश्विक समुदाय के आंकड़ों के साथ मिलान करके सम्मिलित परिणाम निकालने के लिए इरेटोस्थनीज संस्था को फ्रांस भेजा जाएगा।
संस्था के विशेषज्ञ सभी देशों के युग्म बना कर परिणाम निकालेंगे व उनकी तुलना मानक परिणाम से की जायेगी सब से कम त्रुटि वाले समूह के बच्चो व विद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय प्रमाण से नवाजा जाएगा।
इस प्रयोग के दूसरी कड़ी में २३ दिसम्बर रविवार को स्थानीय मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी यमुनानगर में १२० विद्यार्थी जुटेंगें और पांच पांच के समूहों में इस प्रयोग को करेंगें।
आज इस प्रयोग को सम्पन्न करवाने में सुनील कुमार, संजय शर्मा, मनोहर लाल, संजय गौतम, दर्शन लाल, राम नाथ बंसल का सहयोग सराहनीय रहा।
 
तीसरा  दिन 23 दिसम्बर
मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग संपन्न आज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया गया। इस प्रयोग व कार्यशाला का उद्घाटन प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाटला ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले दो घंटे बच्चों को इरैटोस्थनीज, उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं आदि की सैद्धान्तिक जानकारियाँ दी गई।
 इस प्रयोग में 20 समूहों में कुल 100 विद्यार्थियों ने भाग लिया। 11 बजे से 12:30 बजे तक सीवी रमण विज्ञान क्लब के प्रभारी दर्शन लाल बवेजा ने प्रगति विज्ञान संस्था के सहयोग से बच्चों को यह प्रयोग करना सिखाया, जिसमें पाँच-पाँच विद्यार्थियों का समूह बनाकर जमीन पर लंबवत खड़ी नोमोन (छड़ी) की परछायी को चार-चार मिनट के अंतराल पर नाप कर दर्ज किया गया। छड़ी की परछायी जब घटते-घटते न्यूनतम हो जाती है तो उसे माप लेते हैं और त्रिकोणमिति के सूत्रों की सहायता से सूर्यकोण ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद विशेष प्रकार की गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की गई तथा परिणामों को फ्राँस की अंतर्राष्ट्रीय संस्था को ईमेल द्वारा भेजा गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस प्रयोग में बहुत से देशों के बच्चे भाग ले रहे हैं। इनमें फ्राँस, अर्जेंटीना, स्पेन, मलेशिया, जर्मनी, कनाडा, स्लोवेनिया, मोरक्को, रोमानिया, सर्बिया, माल्टा, मिश्र तथा अमेरिका आदि देशों के बच्चे शामिल हैं। भारत में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू तथा कश्मीर, गुजरात, असम, महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों के बच्चे इस प्रयोग को 21, 22 और 23 दिसम्बर को कर रहे हैं। 27 दिसम्बर को इस प्रयोग को करने वाले सभी देशों के बच्चे एक अंतर्राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आपस में रूबरू होंगे और प्रयोग से संबंधित अपने अनुभव साँझे करेंगे तथा प्रयोग के परिणाम घोषित किए जाएँगे। सबसे कम त्रुटि के साथ पृथ्वी की परिधि मापने वाले समूह को अंतर्राष्ट्रीय प्रमाण पत्र से नवाजा जाएगा। इस अवसर पर काजल, अमन, पारस, कार्तिक, आदित्य, प्रेरणा, नमन, इशिता, श्रेया, स्पर्श, विभूति, मीली, वंशिका आदि प्रतिभागियों ने यह प्रयोग करना सीखा। इस अवसर पर डॉ॰ ममता वर्मा, श्रीमती साधना मेहता, मेघा शर्मा, गीतू साहनी, साक्षी ग्रोवर, साक्षी गुप्ता, रीमा, मुक्ता, रोमी, दर्शन लाल बवेजा, श्रीश बेंजवाल शर्मा आदि ने सहयोग दिया।  
जारी .......
अखबारों में