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Saturday, July 30, 2011

विज्ञान प्रदर्शनियों का निर्णायक मंडल कैसा हो? fair judgment of science exhibition, how ?


विज्ञान प्रदर्शनियों का निर्णायक मंडल कैसा हो?

गत १५ वर्षों मे कईं बार मैंने विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनियों मे बच्चों के प्रदर्शों का मूल्यांकन करने वाले निर्णायक मंडल के ऐसे ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने मे छात्रों को उलझते देखा है कि सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि निर्णायक मंडल का चयन आयोजन समिति के पदाधिकारियों के द्वारा बस यूँ ही कर लिया जाता है या किसी मापदंड का प्रयोग इनके चयन मे भी किया जाता है.

मैंने विज्ञान की एक प्रतियोगिता मे देखा था कि एक कमरे मे एक मीटिंग हो रही थी गलती से किसी को खोजते मै उस कमरे मे पहुँच गया तो मुझे पता चला कि ये निर्णयको का ओरियेंटेशन कार्यक्रम चल रहा है जिस मे विशेषज्ञ द्वारा नियुक्त किये गए निर्णायक मंडल को कैसे कैसे मूल्यांकन किया जाना है उस के टिप्स दिए जा रहे थे. किन किन बिंदुओं को ध्यान मे रखा जाए ये भी बताया गया था और वहां मैंने एक खास बात यह भी सुनी की नवाचार को विशेष महत्व दिया जाये.

मैंने बहुत सी जिला,राज्य,राष्ट्रीय व संस्थाओं की विज्ञान प्रदर्शनियों व प्रतियोगिताओं मे बच्चो को भाग दिलवाया है और उन पर कोई दबाव नहीं देकर सहज भाव से जवाब देने के लिए प्रेरित किया और यहाँ तक भी कहा कि डरने की कोई जरूरत नही है यदि निर्णयको के किसी प्रश्न का जवाब नहीं दिया गया तो तुमने डरना नहीं है और गलत जवाब नहीं देना है.

एक बार ऐसी स्तिथि उत्त्पन्न हो गयी जब एक विद्यार्थी से एक निर्णायक ने उस के प्रतिदर्श मे से एक गत्ते का बना समांतर चतुर्भुज पैरल्लोग्राम उठा कर उस के आयतन वोल्यूम का सूत्र पूछ लिया. वो बच्चा हैरान हो कर मेरी तरफ देखने लगा. तब मैंने मुहँ पर ऊँगली रख कर उस बच्चे को चुप रहने यानी कोई उत्तर ना देने का इशारा किया. 
एक बार एक वर्किंग माडल को देख कर एक निर्णायक साहेबान बोले,क्या यह प्रैक्टिकली काम कर लेगा?

एक अन्य बच्चे से पूछा ‘बता बे तैने इस मे क्या आविष्कार किया’ ? निर्णायक का यह प्रश्न पूछना हास्यास्पद है की उस मोडल मे क्या आविष्कार है ये तो उस ने खुद पता लगाना है.

असल मे जब से निर्णायकों के लिए मानदेय देने का प्रावधान शुरू हुआ है तब से कुछ आयोजक ऐसे लोगो को भी जज बनाने लग पड़े है जिन्हें वो खुश रखना चाहते हैं २५० रुपयों से लेकर ५०० रुपयों तक नगद मानदेय देने का प्रावधान या फिर उन्हें गिफ्ट देकर सम्मानित करने का प्रावधान कुछ गडबड जरूर पैदा करता है. आयोजन समिति के पास १० से १२ निर्णायकों की व्यवस्था करना काफी मशक्कत का काम होता है इस कारण भी आनन फानन मे निर्णय जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए बस शैक्षणिक योग्यता या फिर पद नाम देख कर चुन लिया जाता है.

निर्णायक मंडल को निष्पक्ष हो कर काम करना चाहिए ये निर्णय देने की पहली और न्यूनतम शर्त है. आयोजन समिति को भी स्कूल स्तर के मूल्यांकन के लिए कम से कम स्नातक कालेज़  स्तर कर के प्राध्यापक,प्रोफेसर,वैज्ञानिक या इनके अलावा इंजीनियर्स की सेवाएं लेनी चाहियें. हर कार्यक्रम मे मूल्यांकन शीट दी जाती है जिस मे मूल्यांकन के अंक निर्धारित होते है जैसे एक विख्यात विज्ञान प्रतियोगिता की मूल्यांकन शीट कईं वर्ष पहले कुछ निम्न प्रकार से  होती थी.

नवाचार ६० अंक + प्रस्तुतीकरण  २० अंक + फाईल १० अंक + समस्या की सार्थकता व टीम वर्क १० अंक  = १०० अंक

परन्तु मैंने कईं विज्ञान प्रदर्शनियों मे माडल मे नवाचार की बजाय बच्चे के प्रस्तुतीकरण मात्र को को चयन का आधार बनते देखा है और बाद मे जजो से बात करने पर यह भी सूना की बच्चा बहुत बढ़िया बोला.परन्तु ऐसा केवल ब्लोक एवं जिला स्तर जैसे निचले स्तर पर ही देखा है क्यूंकि ब्लाक या जिला स्तर पर खास तौर पर निर्णायकों का चयन ही गंभीरता से नहीं किया जाता.
NCERT की यह गाइड लाइन स्पष्ट कहती है कि प्रस्तुतिकरण अंतिम व गौण बिंदु है.  
NCERT की यह गाइड लाइन

एक बच्चा जो ग्रामीण परिवेश के सरकारी स्कूल का है वह  शहरी क्षेत्र के अंग्रेजी माध्यम के पब्लिक स्कूल के बच्चे के समान प्रस्तुति नहीं दे पायेगा और वो भी अंग्रेजी माध्यम मे,हिंदी माध्यम का बच्चा तो दिक्कत महसूस करेगा.ऐसी स्थिति मे जहां ग्रामीण और शहरी,हिंदी और अंग्रेजी माध्यम,सरकारी और प्राईवेट स्कूलों की कोई सम्मिलित विज्ञान स्पर्धा  हो वहां पर निर्णय को अनुपातिक बाँट लेना चाहिए तांकि केवल वो ही बच्चे व्यवस्था का लाभ ना उठा सके जिन के पक्ष मे पहले से निर्णायक,धन,सुविधाएँ और अध्यापकों और अभिभावकों का भरपूर सहयोग पहले से ही है.

ग्रामीण क्षेत्र मे अभिभावकों के पास दो वक्त रोजी रोटी कमाने से ही फुर्सत नहीं मिलती कि वो अपने बच्चों को कोई रचनात्मक सुपोर्ट दे सकें ऐसे मे वो और उन के बच्चे पूर्णतया स्कूल के अध्यापकों पर ही निर्भर होते है अध्यापक की उसकी क्षमता मुताबिक़ तैयारी करवाता है और ले जाता है बच्चे को भाग दिलवाने और फिर वो सिस्टम का शिकार हो जाए तो बच्चे के कोमल मन पर बुरा असर पड़ता है.

निर्णायक मंडल का चुनाव आयोजन समिति के लिए एक बहुत बड़ा काम होना चाहिए जिसे अक्सर हल्के फुल्के ले लिया जाता है.यदि जिले से ही कुछ अध्यापकों का निर्णायकों के रूप मे चयन करना है तो कम से कम यह भी देखा जाए कि अमुक निर्णायक ने क्या कभी अपने सेवा काल के दौरान राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों  पहुंचाया है यानी भाग दिलवाया है  या कम से कम किसी बड़े स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी को देखा मात्र भी है या नहीं,बस तुष्टिकरण के लिए ही तो नही निर्णय जैसा महत्वपूर्ण कार्य उन्हें सौंप दिया गया है.

सेमीनार,भाषण,प्रदर्शनी,नाटक,निबन्ध,क्विज ये पांच-छह विज्ञान स्पर्धाएं बच्चो को वर्ष भर के दौरान करवाई जाती हैं इन सब मे बच्चा अपने द्वारा कौशल दस्तकारी नवाचार कल्पनाशीलता का प्रदर्शन केवल विज्ञान प्रदर्शनी मे ही कर सकता है.ये तो इस देश का दुर्भाग्य है कई कि प्रतिभाओं का चयन ही नहीं हो पता और सिफारशी उपर जा कर फेल हो जाते हैं
ये किसी मोडल के लिए पूछे गए आदर्श प्रश्न यहाँ दे रहां हूँ आप यहाँ एक अच्छा निर्णायक होने के गुणों को पढ़ सकते हैं .

  • How did you come up with the idea for this project?
  • What did you learn from your background search?
  • How long did it take you to build the apparatus?
  • How did you build the apparatus?
  • How much time (many days) did it take to run the experiments?
  • How many times did you run the experiment with each configuration?
  • How many experiment runs are represented by each data point on the chart?
  • Did you take all data (run the experiment) under the same conditions, e.g., at the same temperature (time of day) (lighting conditions)?
  • How does your apparatus (equipment) (instrument) work?
  • What do you mean by (terminology or jargon used by the student)?
  • Do you think there is an application in industry for this knowledge (technique)?
  • Were there any books that helped you do your analysis (build your apparatus)?
  • When did you start this project? or, How much of the work did you do this year? (some students bring last year's winning project back, with only a few enhancements)
  • What is the next experiment to do in continuing this study?
  • Are there any areas that we not have covered which you feel are important?
  • Do you have any questions for me?
  • प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
  • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Tuesday, March 01, 2011

ताम्बे का सोना चाँदी बनवा लो Gold Magishian

ताम्बे का सोना चाँदी बनवा लो Gold Magishian
विज्ञान नाटिका शृंखला-२
मीना का कारनामा
Meena's  Science World
(नेपथ्य से उठती आवाज ...और फिर एक आदमी का मंच पर अवतरित होना)
गहने साफ़ करवा लो …नए से बनवा लो …..चांदी सोने के गहने धुलवा लो |
चमकवा लो नए बना कर दूंगा …………५ रुपयों में ……
औरत-१ : भईया मेरे गहने साफ़ कर दो इन्हें चमका कर नए जैसे बना दो |
ठग : ला बहन इन्हें तो मै दो मिनट में चमका देता हूँ | 
औरत-२ : क्या कर रहे हो तुम सब यहाँ ? (कौतूहलवश पूछती एक अन्य स्त्री)
औरत-१ : बहन मै अपने सोने चांदी के गहने चमकवा रही हूँ ५ रुपयों में |
औरत-१ : वाह भईया ! मेरे पास ताम्बे के सिक्के है पुराने समय के, उन को भी चमका दोगे ?
ठग :   अरे मै तेरे ताम्बे के सिक्के को सोने चाँदी के बना दूंगा, मेरे पास चमत्कारी जल है |
दोनों औरत : हैरत से, क्या ? सच में (मुंह खुला का खुला रह जाता है)
मै अभी लाई ,यह कह कर वह औरत अपने ताम्बे के सिक्के लेने घर चली गयी |
(इतने में उसने, औरत-१ को उस के गहने चमका कर दे दिए)
और कहा,
ठग : इन्हें अब तीन दिन तक पानी में डूबों कर रखना है फिर ये जिंदगी में कभी गंदे नहीं होने के |
औरत-२ : लो भईया, ये लो ताम्बे के सिक्के बना दो इन्हें सोने के
(उस ठग ने अपने बक्से से एक चमत्कारी द्रव निकाला, अपने छोटे से स्टोव को जला कर द्रव को गर्म किया और उस में ताम्बे के सिक्के डाल दिए ५-६ मिनट बाद वो चाँदी के बन गए,
अब उसने चिमटी से पकड़ कर उन सिक्को को थोड़ा सा गर्म किया वो सब गर्म हो कर सोने के बनते चले गए)
औरत-१,औरत-२ : वाह जी वाह, आपकी जय हो ….जय हो …
ठग : बहन इनकी गर्मी निकालने के लिए इनको तीन दिन तक पानी में डुबो कर रखना है फिर इनका जो करना है वो कर लेना |
औरत-२ : (ठग से बहुत प्रभावित) आप मेरे भी सोने चाँदी के गहने चमका दो |
ठग :  लाओ, एक बड़ा सा लाल कपड़ा भी लेती आना |
औरत-२ : जी अभी लाई |
ठग ने औरत-२ के गहने एक दम बढ़िया चमका दिए,और ठग ने औरत-२ से पूछा क्या वो अपने गहने हीरे पन्ने के बनवाना चाहती है|
औरत-२ : हाँ जी हाँ, मुझे हीरे पन्ने बहुत पसंद हैं |
(ठग ने लाल कपड़ा मांगा और उस में अपनी पोटली से नकली गहने लपेट कर दे दिए और घर के पूजा स्थल में रख कर आने को कहा)
ठग : औरत-२ से इनको पूर्णीमा के दिन खोल कर देखना इनमे चाँद तारे जैसे रत्न जड़ चुकंगे |
औरत-२ : ठीक है जी,मै रख आयी लाल कपडे में लिपटे सारे गहने |
ठग : अच्छा अब मै चलता हूँ तीन दिन बाद आ कर  बहन तेरे घर भोजन करूँगा यह कह कर ठग वहां से चम्पत हो गया |
(तभी मीना आती है उस को सारी बात पता चलती है कि कोई सोने चांदी के आभूषण चमका गया   है गावं में और ताम्बे  के सिक्कों को चांदी और सोने की अशर्फियाँ में बदल गया है | मीना को हैरानी होती है,वैज्ञानिक सोच और तार्किक होने के कारण उस को पता था कि चमत्कार कभी नहीं हो सकते चमत्कारों के होने धोखा दिया जा सकता है)
(स्कूल जा कर मीना ने अपने विज्ञान अध्यापक को सारी बात बतायी)
मीना(अध्यापक से) : ऐसा कैसे हुआ,गहने कैसे चमक गए सर ?
विज्ञान अध्यापक : सोने-चाँदी के गहनों को किसी अम्ल-राज (Aqua regia)  में डाल देने से अम्ल-राज  सोने के साथ क्रिया कर के सोने को अपने अंदर घोल लेता है जिस को बाद में अन्य रासायनिक क्रियाएँ करवा कर वापस प्राप्त कर लिया जाता है |
मीना : और ताम्बे के सिक्के चाँदी और  सोने में कैसे बदल जाते है ?
विज्ञान अध्यापक : हाँ यह प्रयोग बहुत ज्ञानवर्धक है और तुम्हारे पाठ्यक्रम में भी है कक्षा के सब बच्चों को बुला लो,अब ये प्रयोग मै तुम्हे कर के दिखता हूँ |
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(बीकर में 250 ml पानी ले कर उस में 15-15 ग्राम सोडियम हाइड्रोक्साइडNaOH और जस्ते (जिंक) घोल कर गर्म कर लेते है फिर उस गर्म घोल में ताम्बे का सिक्का डाल देते हैं थोड़ी ही देर में जस्तीकरण की क्रिया शुरू हो जाती है और ताम्बे के सिक्के पर जस्त की पतली परत चढ़ जाती है जिस देखने  पर वह सिक्का चांदी जैसा लगने लगता है वास्तव में वह होता है जस्तीकृत कापर का सिक्का) coins gold_1 (3)_cmp 
मीना : अब इस  जस्तीकृत सिक्के को सोने का कैसे बनाते है ?
विज्ञान अध्यापक : वो भी बना देते हैं पहले आप बताओ कि पीतल मिश्रधातु किस किस धातु से मिल कर बनी होती है
मीना : ताम्बे और ज़स्ते को पिंघला कर मिलाने से |
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विज्ञान अध्यापक : सही कहा,इस सिक्के को देखों इस के नीचे तम्बा और उपर जिंक है अब मै इस सिक्के को गर्म करता हूँ उपर की परत पर पीतल बन जाएगा और जिसे वह ठग सोने का बता कर चला गया |





मीना : सच में ! यह तो सोने का ही सिक्का लगता है | परन्तु उस ने तीन दिन तक पानी में रखने को क्यों कहा ?
विज्ञान अध्यापक : ताकि ठगी का भेद  तीन दिन बाद खुले और कोई उसे ढूंड ना सके |
मीना : क्या लाल पोटली वाले गहनों पर हीरे पन्ने जड़ेंगे ?
विज्ञान अध्यापक : नहीं,उस लाल पोटली में तो वो गहने भी नहीं होंगे जो उस औरत-२ ने दिए होंगे,उस पोटली में ठग के द्वारा बदल दिए गए नकली गहने होंगे |
मीना : अरे ! ये तो लुट गई बेचारी भोली ओरतें |
विज्ञान अध्यापक : तभी तो कहा है लालच बुरी बला और अज्ञानता अति बुरी बला | 
इस पूरे प्रयोग की वैज्ञानिक डिटेल यहाँ पर पढ़े |       
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा

Monday, February 28, 2011

विज्ञान पहेली-7 Science Quiz-7(और Science Quiz-6 का उत्तर)

अफ़सोस के साथ बताना पड़ रहा है पिछली पहेली की तरह इस पहेली का जवाब भी कोई ना दे सका
मान्यवर राज भाटिया जी का आधा जवाब सही था उनको बधाईयाँ …….
अब मैंने तो बताना ही है इसका ज़वाब 
तो फिर लीजिए 
मिटाए गए शब्द हैं
Wheel Of Progress
RK Lakshman ji आर. के. लक्ष्मण जी के मशहूर कार्टून में से एक है ये भी 
लक्ष्मण
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विज्ञान पहेली -6 Science Quiz -6
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पहेली का जवाब 15-3-2011 , 9 बजे तक दे सकते है |
आपने इस जीव का नाम बताना है ? जिस का यह कंकाल है|
कंकाल_फोटो_संग्रह
कंकाल को पहचानने का एक खास तरीका होता है जो जानता है वो किसी भी ज्ञात जीव का कंकाल पहचान सकता है |
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा
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                                    उत्साहवर्धन करें |                                  
 
 

Monday, February 21, 2011

मीना ने खोली सयाने की पोल Meena’s Science World

विज्ञान नाटिका शृंखला-1
मीना का कारनामा
सयाने की पोल मीना ने दी खोल
Meena's  Science World
(नेपथ्य से उठती आवाज ...और फिर एक प्रौढ़ महिला का मंच पर अवतरित होना )
आ हा  अहा….
अब नहीं आयेंगे मुझे भयानक सपन,
नहीं तंग करेगी मुझे तडपती काली रूह ..
जय पीर बाबा की...जय हो ... जय जय हो...
सयाने जी ने मुझको तंग करने वाली रूह को भगा दिया है
(अब महिला के सामने मंच पर एक छात्रा  का भी आगमन )
मीना: वो कैसे चाची जी !
चाची: उसने उस रूह को काली मिर्चों में बुला कर पानी में डाल कर भगा दिया है |
मीना: अच्छा जी !  कितने पैसे लिए आपस ?
चाची:  सयाने जी ने कुछ नहीं लिया, वो तो मेरे सारे गहने और पैसे वो बुरी रूह ले गयी|
मीना: चाची जी ये काम यानि आपकी बुरी रूह को  तो मै भी भगा सकती थी वो भी मुफ्त में, मैंने भी अपने स्कूल में बुरी रूह भागने का यह तरीका सीखा  है|
चाची: अरे! नहीं ,मीना अगर ऐसा है तो कर के दिखा |
मीना: रुको,अभी सामान ले कर आयी |
चाची: तो दिखा रूह को भगा कर |
मीना: लो चाची एक सफेद प्लेट में पानी लेते है|
imp-1
फिर उस पानी में बुरी रूह को पकड़ने वाली पीसी हुई काली मिर्च  डालते है |
imp-2
मीना: हाँ तो चाची जी ऐसा ही किया था ना उस सयाने ने भी |
imp-3 चाची: पर वो तो साथ साथ बड़े बड़े कलमे भी पढ़ रहे थे|
मीना: लो चाची जी वो तो मै भी पढ़ सकती हूँ |अब आप अपनी ऊँगली लाओ, पानी से छुवाओ, वो बुरी रूह आप के शरीर से निकल कर काली मिर्च के पाउडर में आ जाएगी|

(चाची  ने ऐसा ही किया अपनी ऊँगली को पानी से छुवाया तो पहले कुछ नहीं हुआ| फिर मीना ने शैम्पू या साबुन के पानी से थोड़ा सा भीगे हुए कपड़े से चाची जी की वो ही ऊँगली साफ़ करने का नाटक किया और इस धोखे से उस ने चाची जी की ऊँगली में शैम्पू लगा दिया और मुहँ मुहँ में कुछ बुदबुदाने लगी जैसे कुछ पढ़ रही हो |
imp-4 अब उस ने  चाची को कहा कि वो अपनी ऊँगली से पानी के मध्य में डुबोये जैसे ही चाची ने ऐसा किया  काली मिर्च का पाउडर पलेट के किनारे की और भाग गया)
चाची: हाँ!वहां भी वो बुरी रूह ऐसे ही भागी थी अरे ! ये काला इल्म तुने कहाँ से सीखा |
मीना: चाची ये कोई काला इल्म नहीं है| यह तो पृष्ठ तनाव का सिद्धांत है और साबुन,शैम्पू और डिटर्जेंट आदि इसी सिद्धांत पर ही तो कपड़ो की सफाई करते है हम सब बच्चों ने अपने विज्ञान अध्यापक से स्कूल में यह सब सीखा है और भी बहुत कुछ जैसे वैज्ञानिक प्रयोग,हाथ की सफाई और चमत्कारों का पर्दाफ़ाश करना भी सीखा है ताकि कोई हमें ना ठग सके, जैसे आप को वो सयाना ठग गया |
चाची: मै अभी जाती हूँ उस सयाने से अपने गहने वापिस लेने |
मीना: रहने दो चाची ,अब वो नहीं मिलेगा | वो तो कभी का भाग गया होगा | अपने अगले शिकार की तलाश में.....
चाची: ये सब कुछ  तुझे कैसे पता ?
मीना: ये भी मेरे मास्टर जी ने ही बताया है और ये रूह,आत्मा कुछ नहीं होती और ना ही कोई भूत प्रेत  |
चाची: अरे वाह  ! मीना बड़ा ‘सयाना’ है रे तेरा मास्टर तो.......
हा हा हा हा हा …………..
और मै चली थाने ऍफ़.आई.आर. करवाने |
इस का वीडियो
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा

Monday, November 08, 2010

आपकी हथेली में छेद हो जाना Hole in your Palm

हथेली में छेद हो जाना  Hole in the Palm
क्या  हो अगर बिना दर्द आपकी हथेली में छेद हो जाए? 
तो आईये फिर कर के देखे अपनी हथेली में छेद। एक प्लास्टिक का पाइप (पी वी सी पाइप) या कागज  को रोल करके बनाया गया बेलनाकार  पाइप  ही तो चाहिए बस या अभी अपने पास रखा कोई कागज गोल लपेट कर पाईप बना लो।
दोनों आंखे खुली रखनी है एक आँख पर पाइप के एक सिरे को लगा लेते है अपनी  दूसरी हथेली को पाइप के साथ कही भी चित्रानुसार सटा लेते है। दोनों आँखे खुली रखनी है अब आपको अपनी हथेली जो पाईप के साथ सटी है उस में छेद दिखाई देगा। दोनों आंखे खुली रख कर किसी भी वस्तु को देखते है  वो हथेली के छेद में से भी दिखेगी।
One of your eyes sees a hole, the other sees a hand. Your eyes and brain add the two images together, creating a hand with a hole in it! ... That's because one eye is likely dominant, which means your brain has a slight preference for visual information from that eye over the other.
नोट: रौशनी की तरफ देखोगे तो अच्छे परिणाम मिलेगे, हथेली को पाइप के साथ जोड़ना है न की आगे लाना है।
हमारी दोनों आँखे एक ही समय में दो अलग अलग ऑब्जेक्ट्स को देख रही है,दोनों आँखों के रेटिना पर भी अलग अलग प्रतिबिंब बनेगा जो की अतिच्छादन overlap करने से छेद को हथेली पर दिखायेगा।
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा










Monday, August 30, 2010

नाटक द्वारा विज्ञान संचार Science Drama

नाटक द्वारा विज्ञान संचार Science Drama 
नाटक संचार  का एक सशक्त माध्यम है नाटकों द्वारा लोगो को जल्द से जल्द प्रेरित किया जा सकता है नाटक द्वारा कही गई बात जल्द समझ आती है क्युंकि  नाटक को देख कर समझने वाले  यानी दर्शक को ज्यादा पढ़ा लिखा होना जरूरी नहीं है नाटक अनपढ़ ,कम पढेलिखे और शिक्षित सब को समझ आने वाली कला है |
नाटकों  से विज्ञान संचार और अंधविश्वास निवारण :-नाटक कला द्वारा जन मानस  को कोई भी विषय जैसे अंधविश्वास ,कन्या भ्रूण हत्या ,दहेज प्रथा ,बाल विवाह ,टीकाकरण ,जनसंख्या वृद्धि ,निरक्षरता आदि को आराम से समझाया जा सकता है |
नाटक लोगो के जेहन मे समस्या के प्रति सीधा वार करते है बशर्ते की नाटक के कलाकार जिवंत किरदार अदा करे और नाटक की स्क्रिप्ट जानदार हो ,नाटक की स्क्रिप्ट सत्य घटना पर और कथा/कहानी प र  आधरित हो सकती है बस स्क्रिप्ट किसी व्यक्ति विशेष और जाति को सीधे सीधे हिट ना करती  हो|
नाटक के संवाद सरल और लोकल भाषा मे हो तो अच्छा है अब माना  हम नाटक तो भोजपुरी भाषा मे तैयार करते है और उस को प्रस्तुत करते है हरियाणा के किसी गांव  मे तब इस स्तिथि  मे वो नाटक मनोरंजन तो करेगा पर उद्देश्य की प्राप्ति के पथ से भटक जाएगा | इस लिए नाटक की भाषा वहीं  की  हो जहाँ उस का प्रस्तुतिकरण  किया जाना हो |
नाटक के कलाकार समय समय पर जनमानस के बीच वास्तविकता मे भी समस्या को डिस्क्स करे लिखी-लिखाई स्क्रिप्ट से अमुक स्थान की समस्या भिन्न हो सकती है |
आज क्लब सदस्यों एवं स्कूल के छात्रों को स्वाध्याय ग्रुप के छात्रों ने कथित धर्म बाबा के  द्वारा फैलाए गये आडम्बरों का निवारण करता एक शानदार नाटक दिखाया गया |
युवा  निर्देशक संदीप जी  के  निर्देशन मे तैयार सब  छात्रों ने अंधविश्वास को दूर भागता एक नाटक देखा और बाबा के कारनामों का  पर्दाफाश होता देखा और भविष्य मे इन बाबा ,मोलवियों ,सयानो ,कलन्दरों के जाल मे ना फसने  की शिक्षा ली |
नाटक की स्क्रिप्ट जोरदार थी और विज्ञान संचार को जन सामान्य के शब्दों संचारित कर पाने मे सक्षम थी 
झलकियां :-

      
 छात्रों ने कोई फोर्मल कोस्टयूम  नहीं पहन रखा था उन्होंने साधरण यूनिफ़ोर्म मे ही परफोर्मेंस दी| आवाज़ इतनी साफ़ और शशक्त थी कि कोई साऊंड सिस्टम की भी जरूरत नहीं पड़ी | नाटक शत प्रतिशत अंधविश्वास निवारण और विज्ञान संचार पर बेस्ड था |

स्कूल के छात्रों  और आध्यापको  ने
नाटक का आनंद लिया और यह सीखा की किसी भी घटना को चमत्कार नहीं मानना है कोई भी चमत्कार संभव नहीं है हर चमत्कार के पिछे कोई ना कोई वैज्ञानिक नियम या सिद्धांत काम करता है जिस का लाभ उठा कर बाबे टाईप लोग अन्य को मूर्ख बना जाते  है |  
नाटककारों की टीम का ग्रुप फोटो,
इनमे से कोई भी व्यवसायिक नाटक कलाकार नहीं है सब नोकरी पेशा/किसान/विद्यार्थी आदि है 
प्रस्तुति :-सी. वी. रमण साईंस क्लब ,यमुना नगर ,हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा   

Monday, April 12, 2010

हथेली में छेद हो जाना Hole in the Palm

हथेली में छेद हो जाना  Hole in the Palm
क्या  हो अगर बिना दर्द आपकी हथेली में छेद हो जाए ,तो आईये फिर कर के देखे अपनी हथेली में छेद,         एक प्लास्टिक का पाइप (पी वी सी पाइप) या कागज  को रोल कर के बनाया गया बेलनाकार  पाइप  ही तो चाहिए बस या अभी अपने पास रखा कोई कागज गोल लपेट कर पाईप बना लो | 
दोनों आंखे खुली रखनी है एक आँख पर पाइप के एक सिरे को लगा लेते है अपनी  दूसरी हथेली को पाइप के साथ कही भी चित्रानुसार सटा लेते है | दोनों आँखे खुली रखनी है अब आपको अपनी हथेली जो पाईप के साथ सटी है उस में छेद दिखाई देगा | दोनों आंखे खुली रख कर किसी भी वस्तु को देखते है  वो हथेली के छेद में से भी दिखेगी |
नोट: रौशनी की तरफ देखोगे तो अच्छे परिणाम मिलेगे, हथेली को पाइप के साथ जोड़ना है न की आगे लाना है |
हमारी दोनों आँखे एक ही समय में दो अलग अलग ऑब्जेक्ट्स को देख रही है,दोनों आँखों के रेटिना पर भी अलग अलग प्रतिबिंब बनेगा जो की अतिच्छादन overlap करने से छेद को हथेली पर दिखायेगा   
द्वारा–दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा