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Sunday, June 24, 2012

पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग हुआ सम्पन्न Earth experiment complete


पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग हुआ सम्पन्न Earth experiment complete
आज सी वी रमण विज्ञान क्लब सरोजिनी कालोनी के सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग के अंतिम चरण में उज्जैन से प्राप्त आंकड़ों को स्थानीय आंकड़ों के साथ  मिला कर गणना की और पृथ्वी की परिधि ज्ञात की। 
हालांकि यह आंकड़े प्रगति विज्ञान संस्था और अंतर्राष्ट्रीय इरेटोस्थनीज़ संस्था को भी भेज दिए गए हैं तब तक उज्जैन और डोंगला के परिणामों से यमुनानगर के परिणामों की गणना से यह देख लिया जाए कि अपने क्लब सदस्यों के परिणाम कैसे रहे।     
भारतीय काल गणना केन्द्र पद्म श्री डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, डोंगला तहसील महिदपुर जिला उज्जैन
क्लब समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि इस प्रयोग के लिए स्टीक आंकड़े प्राप्त करने के लिए वह खुद प्रवक्ता संजय शर्मा के साथ उज्जैन की जीवाजी व डोंगला काल गणना वेधशाला जंतर मंतर गए थे वहाँ उन दोनों ने 20 से 22 जून तक कर्क रेखा पर स्थित तीन अलग अलग जगह प्रयोग करके प्रेक्षण लिए गए। 
उज्जैन की जीवाजी काल गणना वेधशाला जंतर मंतर
जंतर मंतर जीवाजी वेधशाला उज्जैन और भारतीय काल गणना केन्द्र पद्म श्री डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, डोंगला तहसील महिदपुर जिला उज्जैन के प्रेक्षण और यमुनानगर के प्रेक्षण से प्राप्त रीडिंग  को सूत्रों में प्रतिस्थापित करके पृथ्वी की परिधि इरेटोस्थनीज़ विधि से ज्ञात की गयी। 
क्या है विधि
क्लब के पदाधिकारी प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि सबसे पहले दो स्थानों का चयन किया जाता है जहां प्रयोग किया जाना है उन दो स्थानों में यदि एक स्थान ऐसा है जो कि कर्क रेखा स्थित पर है। 21 जून को जिस समय वहाँ शंकु यंत्र की परछाई शून्य हो जाती है तो उस समय वहाँ सूर्य का उन्नयन शून्य प्राप्त होगा।
डोंगला का गूगल अर्थ चित्र
उसी समयांतराल में यह प्रयोग दूसरी युग्म टीम किसी दूसरे स्थान पर कर रही होती है जो की कर्क रेखा से अच्छी खासी अक्षांशीय दूरी पर हो। दोनों टीमों के न्यूनतम परछाई से प्राप्त उन्नयन कोणों के अंतर को सूत्र में दोनों स्थानों के बीच अक्षांशीय दूरी के साथ प्रतिस्थापित किये जाने पर हल करके पृथ्वी की परिधि ज्ञात हो जाती है। इस प्राप्त परिणाम को पृथ्वी की मानक परिधि के साथ तुलना करके त्रुटि ज्ञात की जाती है जितनी कम त्रुटि होगी उतना ही स्टीक परिणाम माना जाएगा। पृथ्वी की परिधि का स्टैंडर्ड मान 40075 किलोमीटर है।
पाठयांक 
Group
Group Leader
Gnomon
Shadow
Angle
Yamunanagar Group-1
Aman Kamboj
100 cm
12.2 cm
6°57' = 6.956°
Yamunanagar
Group-2
Simran, Vishvaas 
49.5 cm
5.80 cm
6°40' = 6.683°
Yamunanagar
Group-3
Arun
50 cm
5.7 cm
6°30' = 6.504°
परिणाम इस प्रकार रहे
अमन और उसकी टीम
युग्म टीम एक में पहला प्रयोग किया अमन और उसकी टीम ने सरोजिनी कालोनी में जिनको 100 सेमी शंकु यंत्र की न्यूनतम परछाई प्राप्त हुई 12.2 सेमी और गणना से सूर्य का उन्नयन कोण प्राप्त हुआ 6.95 डिग्री और दूसरी टीम ने प्रयोग किया उज्जैन के जंतर मंतर में जहां परछाई की न्यूनतम लम्बाई प्राप्त हुई शून्य सेमी जिस कारण कोण का मान शून्य प्राप्त हुआ। सूत्र में यह मान प्रतिस्थापित करने पर इस युग्म टीम को पृथ्वी की परिधि 40058 किलोमीटर प्राप्त हुई। इस टीम का त्रुटि प्रतिशत 0.04 प्रतिशत रहा।
सिमरन और विश्वास और उसकी टीम
युग्म टीम दो में पहला प्रयोग किया सिमरन और विश्वास और उसकी टीम ने इंदिरा गार्डन कालोनी में जिनको 49.5 सेमी के शंकु यंत्र पर न्यूनतम परछाई प्राप्त हुई 5.8 सेमी और गणना से सूर्य का उन्नयन कोण प्राप्त हुआ 6.68 डिग्री और इस युग्म की दूसरी टीम ने प्रयोग किया उज्जैन से 30 किलोमीटर उत्तर दिशा में महिदपुर तहसील के गावं डोंगला की डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, जहां परछाई की न्यूनतम लम्बाई प्राप्त हुई शून्य सेमी जिस कारण कोण का मान शून्य प्राप्त हुआ। सूत्र में यह मान प्रतिस्थापित करने पर इस युग्म टीम को पृथ्वी की परिधि 40041 किलोमीटर प्राप्त हुई। इस टीम का त्रुटि प्रतिशत 0.08 प्रतिशत रहा।
क्या है लाभ?
सिर पर सूर्य
दर्शन लाल ने बताया कि आधुनिक विज्ञान ने भौतिकवाद को बढ़ाया है मनुष्य को अपने प्राचीन विज्ञान को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों व खगोलविदों ने साधनों के आभाव में वर्षों के प्रायोगिक अनुभव से काल गणना करना सीखा और समस्त विश्व को भी सिखाया यदि ऐसा है तभी तो विदेशों से खगोलविद आज भी स्टीक काल गणना के लिए उज्जैन आते है। इस बार भी इस दुर्लभ दृश्य के गवाह बनने के लिए देश भर के खगोल वैज्ञानिकों के साथ आम लोग भी उज्जैन जिले के इस छोटे-से गांव में उमड़ पड़े।  22 जून से सूर्य सायन कर्क राशि में प्रवेश करके दक्षिण की ओर गति करना प्रारंभ कर देगा। ज्योतिष शास्त्र की जुबान में इसे सूर्य का दक्षिणायन होना कहा जाता है। इसके बाद रात के मुकाबले दिन लगातार छोटे होते जाते हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग करोडो रुपयों की लागत से उज्जैन जिले में कर्क रेखा पर भारतीय काल गणना केन्द्र पद्म श्री डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला व शोधकेन्द्र का निर्माण करवा रहा है। यहीं पर कोणार्क सूर्य मंदिर की तर्ज पर विशाल सूर्य मंदिर निर्माण का प्रस्ताव भी है। दोनों के बन जाने पर उज्जैन जिला विश्व के नक़्शे पर एक और कुम्भ मेले ‘खगोलविदो का कुम्भ’ के लिए विश्वविख्यात हो जाएगा।
शून्य परछाई की स्थिति
साल में चार बार इस प्रयोग से पृथ्वी की परिधि ज्ञात करके यमुनानगर जिले के 120 बच्चे लाभान्वित होते हैं और शुद्ध देसी काल गणना विधि के ज्ञानवर्धन से लाभान्वित होते हैं व उनके मन में प्राचीन भारतीय विज्ञान के प्रति सम्मान व जिज्ञासा उत्पन्न होती है।
अगली  पोस्ट में अंतर्राष्ट्रीय इरेटोस्थनीज़ संस्था के सदस्य देशो के बच्चों के साथ परिणाम इस प्रकार रहे, 
अखबारों में खबर .....
 प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा

Wednesday, August 31, 2011

21 जून 2011 को क्लब सदस्यों ने ज्ञात की पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth date june 21,2011

21 जून 2011 को क्लब सदस्यों ने ज्ञात की पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth date june 21,2011
21 जून 2011 सबसे लंबे दिन  को क्लब सदस्यों सलोनी,अभीजीत,चारु,पलक,स्पर्श व पार्थवी ने पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने के लिए एक प्रयोग किया.इस प्रयोग की विधि का जिक्र इस पोस्ट से पहली पोस्ट मे किया जा चुका है.
 पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने के लिए किया प्रयोग 
पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की इरैटोस्थनिज़ गणनाEratosthenes' measurement of the Earth's circumference   विधि का प्रयोग कर के इन क्लब सदस्यों ने  पृथ्वी की परिधि ज्ञात की.
इस प्रयोग को करने के लिए एक छड चाहिए होती है जो पृथ्वी पर खड़ी की जा सके यानी जैसे क्रिकेट की विकेट होती है उसे हम जमीन मे गाड़ देते हैं या फिर लकड़ी के तख्ते पर एक स्टिक छडी खड़ी कर लेते हैं.
21 जून के दिन 11 AM से 1 PM के बीच इस स्टिक को जमीन पर खडा कर के प्रत्येक 4 मिनट के बाद परछाई की लम्बाई ज्ञात करते हैं 
और इस प्रकार की सारणी मे लिख लेते हैं 
समय
छड की ऊँचाई
परछाई की लम्बाई 
11 AM
75 cm
26cm
11.04 AM
75 cm
24 cm
11.08 AM
75 cm
22 cm
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11.56 AM
75cm
10 cm
12 Noon
75 cm
9.1 cm
12.04 PM
75 cm
9.3 cm
12.08 PM
75 cm
10.6 cm
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12.56 PM
75 cm
20.02 cm
01.00 PM
75 cm
20.08 cm

यहाँ से हमे दो गणनाएं प्राप्त होती हैं 
छड की लम्बाई                       = 75 cm             ........( हमने खुद इतनी बड़ी छड ली )
परछाई की न्यूनतम लम्बाई = 9.1 cm   
अब इन दोनों गणनाओं की सहायता से हम सूर्य का कोण ज्ञात कर सकते है.
बायें हाथ के समकोण त्रिभुज मे,    
लम्ब = 9.1 cm
आधार = 75 cm
tan Q = 9.1/75


tan Q  = 0.121333

Q = tan-1(0.121333)

Q = 6.92°


यहाँ से हमें सूर्य का उन्नयन कोण प्राप्त हो गया.
हम जानते हैं कि मध्य प्रदेश के उज्जैन नामक शहर से कर्क रेखा गुजरती है हमने इस कैलकुलेटर की सहायता से यमुनानगर (हरियाणा) से उज्जैन (मध्य प्रदेश) के बीच की दूरी ज्ञात कर ली.

दो शहरों के बीच की दूरी ज्ञात करने का केलकुलेटर यहाँ है.


उज्जैन से यमुनानगर की सरोजिनी कालोनी के बीच की दूरी = 776 किलोमीटर


अब सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि के सूत्र से पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर ली.

   पृथ्वी की परिधि = (दूरी x 360) / सूर्य का उन्नयन कोण  
                  
 पृथ्वी की परिधि =(776 x 360) / 6.92
                                       
हल करने पर,
पृथ्वी की परिधि =  40370 किलोमीटर                        
पृथ्वी की परिधि (स्टैंडर्ड) = 40075 किलोमीटर 
सदस्यों की गणना मे त्रुटि  =  0.73 %                          


City
यमुनानगर
Country
India
Date
21 June 2011
Solar Noon (UT)
Latitude
30°08’ N
Longitude
77°17’ E
Gnomon
75cm
Shadow
9.1 cm
Angle
6.92°



Circumference of Earth experimental 
 40370 km
Error
 o.73 %
  • अभी अगली पोस्ट मे दो और तरीके आपको बताए जायेंगे जिन से हम पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर सकते हैं 

    प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
  • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
    विज्ञानं संचार में अपना योगदान दें इस ब्लॉग के फालोअर बन कर    

Tuesday, August 16, 2011

पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth


पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth

पृथ्वी की परिधि 40075 किलोमीटर है जो कि 24901 मील (24,901.55 miles 40,075.16 kilometers).
के बराबर होती है अगर आप इक्वेटर के उपर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से जमीन  समुन्दरों को लांघते हुए  बिना रुके 24 घंटे चलते रहो तो पृथ्वी पूरा चक्कर  करने मे लगभग 17 दिन लगेंगे.
आप खुद भी पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर सकते हो
इसके लिए आप को एक सूत्र प्रयोग करना होगा
पृथ्वी की परिधि = 2 x पाई x पृथ्वी की त्रिज्या

पाई का मान 22/7=3.1415 लगभग लेते है
जबकि पृथ्वी की त्रिज्या = 6371.1 किलोमीटर है
सूत्र मे मान डालने पर
पृथ्वी की परिधि = 2 x 3.1415 x 6371.1 = 40,075 किलोमीटर  
 पाई का मान दशमलव के बाद जितने अधिक अंकों तक लेंगे उतना ही अधिक शुद्ध परिधि प्राप्त होगी.
आपको जान कर हैरानी होगी यदि हम उत्तरी ध्रुव से दक्षणी ध्रुव के बीच पृथ्वी की परिधि ज्ञात करें तो वो और भी अलग होगी क्यूंकि पृथ्वी पूरी गोल नहीं है.ध्रुवों पर पृथ्वी की परिधि थोड़ी सी कम है.
ध्रुव से ध्रुव पृथ्वी की परिधि पृथ्वी की परिधि = 40008 किलोमीटर है.
इक्वेटर और ध्रुवों की तरफ से पृथ्वी की परिधि मे 67 किलोमीटर का अंतर है
यदि हम तुलना की दृष्टी से देखें तो चंद्रमा की परिधि 10,921 किलोमीटर है. 
 बृहस्पति की परिधि 500000 किलोमीटर है.  
आओ कुछ और गणनाओं को जाने :
पृथ्वी की परिधि किलोमीटर मे =
40,075 km
पृथ्वी की परिधि  मीटर मे =40,075,000 meters
पृथ्वी की परिधि सेंटीमीटर मे = 4,007,500,000 centimeters
पृथ्वी की परिधि मील मे = 24,901 miles
पृथ्वी की परिधि फीट मे = 131,477,280 feet
पृथ्वी की परिधि इंच मे = 1,577,727,360 inches
हम पृथ्वी की परिधि की गणना खुद भी कर सकते हैं
प्राचीन ग्रीकवासी अपने विकसित किये गए तरीके से पृथ्वी की परिधि निकाला करते थे उनकी विधि बहुत ही साधारण थी . अगर हमारी पृथ्वी समतल है तो हमारी धूप मे बनने वाली परछाई सब जगह एकसमान होगी (जैसा कि निम्न चित्र की बाईं तस्वीर मे दिखाया गया है) परन्तु ऐसा नहीं है हमारी पृथ्वी समतल नहीं गोल है इस कारण हमारी परछाई दो अलग अलग स्थानों पर अलग अलग लम्बाई की होगी. (जैसा कि निम्न चित्र की दाईं तस्वीर मे दिखाया गया है) आप भी दो दोस्त अगर दो अलग अलग स्थानों पर रहते हों तो आप दोनों मिल कर ग्रीकवासीयों की विधि से पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर सकते हो.
    
इरैटोस्थनिज़ Eratosthenes
पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की इरैटोस्थनिज़ गणना
Eratosthenes' measurement of the Earth's circumference
इरैटोस्थनिज़ Eratosthenes एक ग्रीक गणितज्ञ, शोक कवि,एथेलीट,भूगोलवेत्ता,खगोलशास्त्री और संगीतकार भी थे उन्होंने एक गणना विधि का आविष्कार किया. इनका काल 276 BC - 194 BC था.इन्होने ही सर्वप्रथम जियोग्राफी शब्द का प्रयोग किया. सर्वप्रथम प्राचीन यूनानी विद्वान इरैटोस्थनिज़ ने भूगोल को धरातल के एक विशिष्टविज्ञान के रुप में मान्यता दी.

कैसे किया इरैटोस्थनिज़ ने अपना प्रयोग ...
इरैटोस्थनिज़ ने पृथ्वी की परिधि नापने के लिए मिस्र के आस्वान क्षेत्र में साइने नामक स्थान को अपना प्रयोगस्थल बनाया
माना मैं साइने Syene मे रहता हूँ और मैं यह भी जानता हूँ कि ग्रीष्म अयनांत summer solstice 21 जून के दिन इस शहर मे सूर्य सीधा मेरे सिर पर रहता है और ठीक इसी वक्त मेरा एक अन्य दोस्त जो की यहाँ से 800 किलोमीटर दूर अलक्जेंडरिया मे रहता है वह वहां किसी खम्बे की ऊँचाई और उस की न्यूनतम परछाई की लम्बाई से सूर्य के उन्नयन कोण का मान 7°12' (the angle of elevation of the sun was 7°12') पाता है.
गणना करने पर,
अलक्जेंडरिया से Syene के बीच की दूरी =7°12'/360°
(क्यूंकि पृथ्वी गोलाकार है इसलिए 360° से प्राप्त उन्नयन कोण को भाग दिया)
                                                           =1/50
अर्थार्त अलक्जेंडरिया से Syene के बीच की दूरी पृथ्वी की कुल परिधि की 1/50 है.
और यह ज्ञात था कि अलक्जेंडरिया से Syene के बीच की दूरी 800 किलोमीटर है.
हल करने पर,
पृथ्वी की कुल परिधि = 800 x 50/1 = 40,000 किलोमीटर    
इरैटोस्थनिज़ की पृथ्वी की परिधि की गणना मे कुछ त्रुटि रह गयी थी परन्तु उस जमाने मे यह ज्यादा महत्वपूर्ण था कि पृथ्वी की परिधि और पृथ्वी की त्रिज्या ज्ञात की जा सकी.
क्लब सदस्यों के द्वारा यमुनानगर मे पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने का प्रयोग २१ जून २०११ को किया गया जल्द ही उस प्रयोग की पोस्ट लगाई जायेगी.


  • प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
  • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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