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Monday, July 30, 2018

स्कूल में वर्षामापी से मापी वर्षा Rain Gauge

मानकीकृत वर्षामापी यंत्र से वर्षा मापना सीखा।
 
वर्षामापी यंत्र जानकारी
विद्यार्थियों ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैम्प के प्रांगण में सुबह दो घंटे में 15.7 एमएम वर्षा रिकार्ड की।
सीवी रमन विज्ञान क्लब, जामुन इको क्लब, हनिबी नेटवर्क, सृष्टि डॉट ऑर्ग व हरियाणा विज्ञान मंच के सदस्यों ने विज्ञान प्रसार नेटवर्क नोयडा (साइंस एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट नई दिल्ली गवर्मेंट आफ इंडिया की ऑटोनोमस बॉडी) द्वारा प्रदत्त मानकीकृत वर्षामापी यंत्र से वर्षा को मापना सीखा।
वर्षा का मापन
 विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा के नेतृत्व में प्रेरणा, हर्षिता, रितिका, नाजिश, सुहानी, साईमा, पूजा, अंजली, नेहा पांडे, दिव्या, विकास, सौरभ, सुमित, सौरव छात्र-छात्राओं ने वर्षा को मापा।
क्या है वर्षामापी यंत्र?
किस स्थान पर कितनी वर्षा हुई है, इसे मापने के लिए एक यंत्र काम में लाया जाता है, जिसे वर्षामापी यंत्र कहते हैं। यह एक प्लास्टिक का बेलनाकार बर्तन होता है जिसका व्यास 20 सेमी और इसकी ऊंचाई 50 सेमी होती है। इसके भीतर  एक मापक बेलन रखा जाता है।  इसे एक निश्चित समय में तथा निश्चित स्थान पर वर्षा में रखकर गिरे पानी की मात्रा को माप लिया जाता है।
छात्र विकास सैनी
वर्षामापी कई तरह का होता है। अलग अलग तरीके से समझने के लिए वर्षा  इंच, सेंटीमीटर या मिलीमीटर में मापी जाती है। इसकेे ऊपर एक कीप लगी रहती है। वर्षा का पानी कीप द्वारा बोतल में भर जाता है तथा बाद में पानी को मापक स्लेंडर द्वारा माप लिया जाता है। इस यंत्र को खुले स्थान में रखते हैं, ताकि वर्षा के पानी के कीप में गिरने मे किसी प्रकार की रुकावट न हो। और यह भी ध्यान रखा जाता है की आसपास कोई भवन या ऊंचा वृक्ष न हो जो वर्षा के गिरने में रुकावट बने।
'विद्यालय वर्षा का मापन' गतिविधि से बच्चों में अपने मौसम और जलवायु को समझने की दक्षता विकसित होती है। अध्यापक का फर्ज होता है की वह अपने विद्यार्थियों को प्रत्येक उस गतिविधि से परिचित करवाये जो उसको प्रकृति को समझने व आत्मसात करने का मौका दे।
वर्षा की पैमाइश से वर्षा के प्रकार
भारी वर्षा हेवी रेन - 8mm प्रति घंटा से अधिक वर्षा को भारी वर्षा कहा जाता है।
सामान्य वर्षा- 2mm से अधिक 8 mm से कम
फुहार या शावर- 2mm प्रति घंटा से कम
*खास
1mm वर्षा का मतलब एक वर्ग मीटर पर एक लीटर पानी।
अखबारों में

Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman VIPNET science Club VP-HR 0006 (Platinum category Science club-2017)  Yamuna Nagar
Distt. Coordinator NCSC-DST, Haryana Vigyan Manch Rohtak, Science Blogger, Sristi Mitra,
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments, Simple Science Experiments, TLM (Science) Developer
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Wednesday, August 11, 2010

बनायें अपना वर्षामापी Rain Gauge

बनायें अपना वर्षामापी Rain Gauge
आज स्कूल के विद्यार्थीयों/क्लब मेम्बर्स  ने आपनी बनाई रेन गेज से वर्षा के परिमाण  को मापा  इन्होने एक कीप ले कर उस के नीचे एक प्लास्टिक की खोखली गेंद को उल्टा कर के प्लास्टिक वेल्ड कर दिया 
गेंद  लगाने के पीछे  यह मकसद था कि कीप की बाहरी दीवारों पर जो पानी गिरेगा वो मापक सिलेन्डर मे नहीं गिरेगा | वर्षा रुकने पर पानी का  माप लिया और कुछ आवश्यक गणनाये करने के बाद मिली मीटर मे हुई वर्षा की  माप का पता लगा लिया |
जानकारी हेतु ,ये बच्चे स्कूल वैदर मोनेटरिंग का प्रोजेक्ट कर रहे है जिस मे ये 
१.वर्षा मापी 
२.वायु दाब मापी
३.सूर्य की तीव्रता
४.पवन की दिशा
५.पवन का वेग
६.आद्रता मापन
7.सन डायल के उक्त प्रयोग करेंगे  |
क्यु ना पहले ये जाना जाए कि वर्षामापी यंत्र है क्या ?
जानिए :-
--> वर्षामापी (rain gauge या udometer या pluviometer) एक ऐसी युक्ति है जो वर्षा की मात्रा की माप करता है। मौसमविज्ञानी इसका बहुत उपयोग करते हैं।
सन् १६६२ ई में ब्रिटेन के क्रिस्टोफर रेन ने पहला टिपिंग बकेत वर्षामापी tipping-bucket rain gauge विकसित किया ।
वर्षा की माप मिलीमीटर में की जाती है। इसका सिद्धान्त बहुत सरल है। इसके लिये एक चौड़े मुंह का बर्तन प्रयोग में लाया जाता है जिसका पेंदी से लेकर उपर तक का क्राससेक्शन समान हो। इसको ऐसी जगह पर रख दिया जाता है जहाँ वर्षा का जल बिना किसी व्यवधान के इसमें गिरता रहे। किसी निर्धारित समयावधि में इसमें एकत्र द्रव पानी की उँचाई ही उस अवधि में वर्षा की माप कहलाती है।
कई तरह के वर्षामापी उपयोग में आते हैं। इनमें चिन्हांकित बेलन (graduated cylinder), भाराधारित वर्षामापी weighing gauges टिपिंग बकेट वर्षामापी tipping bucket gauges तथा भूमिगत गड्ढे buried pit collectors शामिल हैं।
हमने  कैसे बनाया ?
हमने चिन्हांकित बेलन (graduated cylinder) विधि का प्रयोग किया |











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प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा