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Tuesday, December 27, 2016

पृथ्वी की परिधि नापी Circumference of Earth

पृथ्वी की परिधि नापी Circumference of Earth
सीवी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने मापी पृथ्वी की परिधि 
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर 17 जगाधरी में सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्य क्लब प्रभारी दर्शन लाल, गौरव वलिया व विकास पुंडीर  विज्ञान अध्यापक के नेतृत्व में एकत्र हुए और उन्होंने   पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग से सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में छड़ी की परछायी को नाप कर गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। 
क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 22 दिसम्बर के दिन इक्विनॉक्स यानी शरद विषुव होता है इस दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन छोटा व रात लम्बी होती हैं और आज के बाद दिन लम्बे और रात छोटी होनी शुरू हो जाती हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं। 
विद्यालय में चल रही विज्ञान कार्यशाला में भाग ले प्रतिभागियों ने भी यह प्रयोग करना सीखा।
अगला प्रयोग 21 मार्च 2017 को किया जाएगा। 
आज के प्रयोग में कुणाल, नमन, विधि, ईशा, मानसी, श्रिया, राशि, हर्षित, सार्थक, तान्या, उत्कर्ष, अनुज, सक्षम, जजवेंद्र, आरुषि, मुस्कान, अर्पित, जतिन, प्रिन्स, रितिक, ध्रुव, सुनैना, अभय, प्रज्ञा, यशपाल, विवेक ने भाग लिया।
परिणाम 


Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
Web Links 

Thursday, June 20, 2013

आज है इस साल का सबसे सबसे लंबा दिन Summer Solstice 2013

आज है इस साल का सबसे सबसे लंबा दिन Summer Solstice 2013
सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने किया पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग

इक्कीस जून का दिन साल का सबसे सबसे लंबा दिन होगा। इस दिन को ग्रीष्म सक्रांति यानि समर सॉल्स्टाइस कहा जाता है। इस दिन सूर्य कर्क रेखा पर होता है और उत्तर की ओर बढ़ता सूर्य इक्कीस जून को कर्क रेखा को छूकर पुनः दक्षिण की ओर बढ़ने लगता है। इस स्थिति को दक्षिणायन कहते हैं। सूर्य के उत्तरायन और दक्षिणायन होने के बारे में  क्लब सचिव दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने के दौरान पृथ्वी का एक गोलार्द्ध सूर्य से दूर चला जाता है। जिसे सूर्य का उत्तरायन और दक्षिणायन हो जाना कहा जाता है। पृथ्वी पर स्थित दो काल्पनिक रेखाएं कर्क और मकर रेखा है। सूर्य उत्तरायन के समय कर्क रेखा पर और दक्षिणायन के समय मकर रेखा पर होता है। पृथ्वी पर इसी परिवर्तन के कारण ग्रीष्मकाल तथा शीतकाल का आगमन होता है। आज के बाद दिन की अवधि छोटी होनी शुरू हो जायेगी जो कि कुछ सेकंड्स प्रतिदिन होती परन्तु बाद मे यह अंतर मिनट्स मे बढेगा यानि  इक्कीस जून के बाद से सूर्य दक्षिण दिशा की ओर गति करना प्रारंभ कर देगा, जिसे दक्षिणायन का प्रारंभ कहा जाता है। अब दिन क्रमशः छोटे होते जाएंगे और फिर तेईस सितंबर को रात-दिन बराबर होंगे।
क्या बदलाव आते हैं मौसम मे
सूर्य के उत्तरायन और दक्षिणायन होने से पृथ्वी के मौसम मे परिवर्तन आते हैं। पृथ्वी पर इसी परिवर्तन के कारण ग्रीष्मकाल तथा शीतकाल का आगमन होता है। हमारे यहा पर मुख्यरूप से तीन मौसम होते हैं। ग्रीष्मकाल की अवधि मार्च से जून तक वर्षाकाल की अवधि जुलाई से अक्टूबर तक व शीत काल की अवधि नवम्बर से फरवरी होती है। मौसम में इसी परिवर्तन के साथ हवा की दिशा भी बदलती है। जहां ज्यादा गर्मी होती है वहां से हवा गर्म हल्की होकर ऊपर उठने लगती है और पूरे क्षेत्र में निम्न वायुदबाव का क्षेत्र बन जाता है। ग्रीष्म काल में 21 मार्च से सूर्य उत्तरायण होने लगता है तथा 21 जून को कर्क रेखा पर लंबवत चमकता है। इस कारण मध्य एशिया का भूभाग काफी गर्म हो जाता है। फलस्वरूप हवा गर्म होकर ऊपर उठ जाती है और निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाता है। जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध के महासागरीय भाग पर ठंड के कारण स्थित उच्च वायुदाब की ओर से वायु उत्तर में स्थित कम वायुदाब की ओर चलने लगती है। इसे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहते हैं। ये हवा समुद्र की और से चलती है इसलिए इसमें जलवाष्प भरपूर होती हैं। इसी कारण एशिया महाद्वीप के इन क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है। यह मानसूनी जलवायु भारत, दक्षिण-पूर्वी एशिया में भरपूर वर्षा करती है।
यमुनानगर मे सूर्योदय और सूर्यास्त
यमुनानगर में सूर्योदय प्रातः पांच बजकर बीस मिनट पर और सूर्यास्त सायं सात बजकर उन्तीस मिनट पर होगा। यमुनानगर में इक्कीस जून का दिन चौदह घंटे आठ मिनट इक्कीस सेकंड का  होगा जो कि साल का सबसे बड़ा दिन होगा और रात की अवधि नो घंटे इक्यावन मिनट तथा नून टाइम बारह बज कर पच्चीस मिनट पर होगा। बारह बज कर पच्चीस मिनट पर किसी भी लम्बवत खड़ी वास्तु की परछाई न्यूनतम होगी।
क्लब सदस्यों ने किया प्रयोग
बीस व इक्कीस जून के दो दिन पृथ्वी की परिधि नापने के लिए महत्वपूर्ण होते है क्यूंकि सूर्य कर्क रेखा पर लम्बवत होता है। इस अवसर पर स्थानीय स्वामी विवेकानन्द सरोजिनी कालोनी मे क्लब सदस्यो अमन काम्बोज व कार्तिक ने अपनी टीम के साथ पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग किया। क्लब सचिव दर्शन बवेजा ने बताया कि विश्व के कई देशो के बच्चे एक साथ मिल के तेईस सौ वर्ष पुराना इरेटोस्थनीज प्रयोग करते हैं और विश्व समुदाय के साथ एकजुट होकर विडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये अपने अनुभव सांझा करते हैं व अपने अपने आंकड़ों का आदान प्रदान करके तुलनात्मक गणनाओं से पृथ्वी की परिधि का आंकलन करते हैं। यह प्रयोग बच्चों को  गणित, भूगोल व खगोलीय गणनाओं को समझने के लिए एक मंच प्रदान करता है। इस बार इस प्रयोग मे अमन, कार्तिक, पार्थवी, पारस, पलक, चारु, अवनी, काजल, अंशी, रीमा, जसमीत, सिमरन, अरुण, पारस बवेजा ने भागीदारी अदा की। सभी क्लब सदस्यों को प्रमाणपत्रो से नवाजा जाएगा। 
अखबार मे खबर 



 

Friday, September 21, 2012

22 व 23 सितम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने की तैयारियां जोरों पर measurement of circumference of earth on september equinox

22 व 23 सितम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने की तैयारियां जोरों पर Measurement of Circumference of Earth on September Equinox



22 सितम्बर को होंगें दिन और रात बराबर



सूर्य अपनी सामयिक चाल में आकाश से, वर्ष में दो बार, 21 मार्च और 23 सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है। इन दिनों भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह के एकदम लम्बवत पड़ती हैं।

पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक बार घूमने के साथ ही एक साल में सूरज का भी चक्कर पूरा कर लेती है। लेकिन अयनांश की गणना के कारण एक दिन कभी आगे तो कभी पीछे हो जाता है।  इसी कारण दिन -रात की बराबर अवधि कभी 22 सितम्बर और कभी 23 सितम्बर को आ जाती है।  इस वर्ष अयनांश की गणना के कारण यह दशा 22 सितम्बर को बन रही है। 22-23  सितम्बर के दिन को विषुव या इक्विनॉक्स कहा जाता है। आज दिन और रात दोनों का समय बराबर होगा।  दिन 12 घंटों का तो रात भी 12 घंटों की होगी। 
मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल


इस अवसर पर सी.वी.रमण विज्ञान क्लब के सदस्य मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल में पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग 23 सितम्बर को करेंगे। जिसमे 10 समूहों में बच्चे विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल, स्कूल अध्यापको के मार्गदर्शन में पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग की आवश्यक गणनाएं करेंगें।  


इस दिन सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण दिन-रात बराबर होंगे। भूमध्य रेखा पर स्थित प्रदेशों में सूर्योदय और सूर्यास्त अपेक्षाकृत अधिक देर से होता है। ऐसे स्थानों पर वर्ष भर, सैद्धांतिक रूप से, १२ घंटों के दिन और रात होते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में दिन का समय मौसम के अनुसार बदलता रहता है। जब इसके उत्तर में शीतकाल में दिन छोटे और रात लंबी होती हैं, तब इसके दक्षिण में ग्रीष्मकाल में दिन लंबे व रातें छोटी होती हैं। वर्ष के दूसरे छोर पर मौसम दोनों गोलार्धों में एकदम उलटे होते हैं। किंतु भूमध्य रेखा पर दिनमान के साथ साथ मौसम भी समान ही रहता है। भूमध्य रेखा 14  देशों के स्थल या जल से होकर जाती है। पृथ्वी की सतह पर अधिकतर भूमध्य रेखीय क्षेत्र समुद्र का भाग है। भूमध्य रेखा के आस-पास के स्थान अंतरिक्ष केंद्र के लिए अच्छे होते हैं।  इक्वाडोर देश भूमध्य रेखा पर है  जिसके आधार पर ही इस देश का नाम रखा गया है भूमध्य रेखा इक्वाडोर को दो भागों में विभाजित करती है। इसकी राजधानी क्विटो और सबसे बड़ा शहर गुआयाकिल है। जहां दोपहर को सूर्य एकदम लम्बवत होगा और परछाई शून्य हो जायेगी।

प्रगति विज्ञान संस्था
गौरतलब है कि प्रगति विज्ञान संस्था मेरठ और इरेटोस्थनीज़ संस्था फ्रांस के संयुक्त तत्वाधान पूरे भारत में बीस से भी अधिक स्थानों पर 45  टीम की 22 व 23 सितम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पृथ्वी की परिधि यानि अर्थ एक्क्स्पेरिमेंट के राष्ट्रीय संयोजक दीपक शर्मा जी ने बताया कि वर्षों की अथक मेहनत के बाद पूरे भारत में एक समूह बन कर तैयार हो चुका है जो कि अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिल कर लगभग 2300 वर्ष पुरानी 
Eratosthenes
इरेटोस्थनीज़ विधि से पृथ्वी की परिधि ज्ञात करेगा। दीपक शर्मा जी ने यह भी बताया कि यह प्रयोग वर्ष में चार बार किया जाता है मार्च विषुव, जून अयनांत, सितम्बर विषुव, दिसम्बर अयनांत चार ऐसी सूर्य स्तिथियां हैं जब सूर्य भूमध्य रेखा, कर्क रेखा और मकर रेखा पर होता है। इस बार 22  व 23 सितम्बर 2012 को शरद विषुव को सूर्य भूमध्य रेखा पर होगा और यदि कोई व्यक्ति भूमध्य रेखा पर खड़ा हो तो सूर्य उसे सीधे अपने सिर के ऊपर दिखाई देगा और एक निश्चित समय पर उस  की परछाई शून्य हो जायेगी। इसका यह भी अर्थ है कि आधा ग्रह पूरी तरह प्रकाशित होता है और इस समय दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। सूर्य अपनी सामयिक चाल में आकाश से, वर्ष में दो बार, २१ मार्च और २३ सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है। इन दिनों भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह के एकदम लम्बवत पड़ती हैं। भूमध्य रेखा पर स्थित प्रदेशों में सूर्योदय और सूर्यास्त अपेक्षाकृत अधिक देर से होता है। ऐसे स्थानों पर वर्ष भर, सैद्धांतिक रूप से, १२ घंटों के दिन और रात होते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में दिन का समय मौसम के अनुसार बदलता रहता है। जब इसके उत्तर में शीतकाल में दिन छोटे और रात लंबी होती हैं, तब इसके दक्षिण में ग्रीष्मकाल में दिन लंबे व रातें छोटी होती हैं। वर्ष के दूसरे छोर पर मौसम दोनों गोलार्धों में एकदम उलटे होते हैं। किंतु भूमध्य रेखा पर दिनमान के साथ साथ मौसम भी समान ही रहता है।
भूमध्य रेखा

भूमध्य रेखा 14  देशों के स्थल या जल से होकर जाती है। पृथ्वी की सतह पर अधिकतर भूमध्य रेखीय क्षेत्र समुद्र का भाग है। भूमध्य रेखा के आस-पास के स्थान अंतरिक्ष केंद्र के लिए अच्छे हैं गुयाना अंतरिक्ष केंद्र, कौरोऊ, फ्रेंच गुयाना भूमध्य रेखा पर ही स्थित है। कीनिया गणतंत्र पूर्वी अफ्रीका में भूमध्य रेखा पर स्थित है। इक्वाडोर देश भूमध्य रेखा पर है  जिसके आधार पर ही इस देश का नाम रखा गया है  भूमध्य रेखा इक्वाडोर को दो भागों में विभाजित करती है। इसकी राजधानी क्विटो और सबसे बड़ा शहर गुआयाकिल है।

इस बार सितम्बर विषुव पर भारत के राज्यों हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, जे एंड के, गुजरात, असम, महाराष्ट्र  राज्यों में पृथ्वी की परिधि को नापने का प्रयोग एक साथ 22  व 23 सितम्बर को किया जा रहा है  अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी के रूप में इस बार इस प्रयोग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी फ्रांस से अंतर्राष्ट्रीय सयोंजक एरिक वैसी के साथ अर्जेंटाइना, स्पेन, मलेशिया, जर्मनी, कनाडा,स्लोवेनिया, मोरक्को, रोमानिया, सर्बिया, माल्टा, इजिप्ट व यू एस ए देशों से बच्चे भाग लेंगें। इसके बाद परिणामों की गणना करके अंतर्जाल पर भी उपलब्ध कराया जायेगा, जिस में सभी समूह अपने अपने प्रयोग से प्राप्त आकडों को घोषित करेंगे और फिर इन आंकड़ों का प्रयोग करके विभिन्न देशों के युग्म बना कर सम्मिलित गणना की जायेगी और परिणाम निकाले जायेंगे।
प्रयोग के लिए तैयार बच्चे

दीपक शर्मा जी ने बताया कि इस प्रयोग की कमान विभिन्न राज्यों में उनके राज्य सयोंजक और जिला सयोंजक सम्भालेंगे जिनमे हरियाणा यमुनानगर से दर्शन लाल, यू. पी. बागपत से योगेश कुमार,गाजियाबाद से रोहणी गोले, मेरठ से मतीन अंसारी, पूना से डाक्टर अशोक कुमार, दिल्ली से रंजीता रानी, अश्विन कुमार भट्ट, ओ एन शुक्ल, जम्मू से जफरुल्लाह खान, कश्मीर से जावेद मंसूर, असाम से गणेश, भुज से नागेन्द्र गौड़ जोशी प्रयोग का प्रतिनिधित्व करेंगें। 22 तारीख को बाल चेतना वेबसाईट पर इस प्रयोग का सीधा प्रसारण मेरठ से होगा। 


श्री दीपक शर्मा
इस प्रयोग के इतिहास के बारे में बताते हुए श्री दीपक शर्मा जी ने बताया कि भारत में वो अकेले ही इस प्रयोग को करने चले थे और देखते ही देखते बहुत बड़ी संख्यां में विद्यार्थी, अध्यापक, विज्ञान संचारक, वैज्ञानिक और आमजन उनके साथ जुड़ते चले गये और आज यह स्तिथि है कि पृथ्वी की परिधि को नापने का यह प्रयोग पूरे भारत में एक लोकप्रिय विज्ञान और गणित की गातिविधि बन कर आकर्षण का केन्द्र बन रही है। भारत में उज्जैन देश का वह शहर हैं जो कि कर्क रेखा पर स्थित है और प्राचीनकाल से ही शुद्ध कालगणना के लिए विख्यात रहा है। 21 जून को प्रगति विज्ञान संस्था के कुशल मार्गदर्शन में हरियाणा के यमुनानगर के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल उज्जैन जा कर ये प्रयोग कर चुके हैं जहां के आंकड़ों का प्रयोग करके विश्व समुदाय के साथ आंकड़ो के तुलनात्मक अध्ययन से पृथ्वी की स्टीक परिणाम प्राप्त हुए हैं और नगण्य त्रुटि के साथ मानक परिधि सत्यापित हुई।

अभी  जारी........
अमर  उजाला में ......

 दैनिक भास्कर में .....
 एक अन्य खबर दिल्ली में भी नपेगी परिधि ......


प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा