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Saturday, August 11, 2012

रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला Two days Workshop on Robotics

रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला लगाई गयी Two days Workshop on Robotics
दिनांक  11 अगस्त 2012
मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल में रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरु, सी॰ वी॰ रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर, रोबोसिस इंडिया संगठन, नई दिल्ली तथा भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद, यमुनानगर के संयुक्त तत्वाधान में मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल, सरोजिनी कालोनी यमुनानगर में प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाटला के मार्गदर्शन में रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला का आरम्भ हुआ। 
कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य अतिथि यमुना इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऍण्ड टैक्नोलॉजी के ऍप्लाइड साइंसिज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर के॰ सी॰ ठाकुर ने दीप जलाकर किया। उन्होंने रोबोटिक्स में अभियांत्रिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला। क्लब सचिव दर्शन लाल बवेजा ने वर्कशॉप की रूप-रेखा की जानकारी देते हुये आधुनिक विज्ञान में रोबोटिक्स के महत्व पर प्रकाश डाला। सूचना प्रोद्यौगिकी विशेषज्ञ श्रीश बेंजवाल ने रोबोटिक्स में कम्प्यूटर विज्ञान के प्रयोग की जानकारी दी।
इस कार्यशाला में दिल्ली से आये विशेषज्ञ कक्षा 10 से 12 के विद्यार्थियों को दो दिनों तक रोबोटिक्स का सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक ज्ञान देंगे और बच्चों से रोबोट के मॉडल भी बनवाएंगे। विशेष तौर पर तैयार की गयी रोबोटिक किट्स से बच्चे रोबोट का क्रियात्मक मॉडल तैयार करेंगे। रोबोट शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को प्रारंभिक स्तर के रोबोट बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जायेगा। उम्मीद है कि इस रोबो शिक्षा कार्यशाला से बच्चों की मानसिक क्षमता बढ़ेगी। 
दिल्ली के रोबोसिस इंडिया संगठन के यश कुमार, मुहम्मद सादिक व सुनील कुमार इस कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षण अधिकारी हैं।
क्लब प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि इस दो दिन की कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों के कुल 35 छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यहाँ से चुने गए कुछ छात्र आगामी चरण की कार्यशाला में प्रवेश करेंगे। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिए जायेंगे। इस अवसर पर प्रोफेसर के॰ सी॰ ठाकुर, डॉ॰ चन्द्रशेखर शर्मा, संजय शर्मा, श्रीश बेंजवाल, डॉ॰ ममता वर्मा, साधना मेहता, देवेन्द्र कुमार, रविन्द्र पुँज आदि का योगदान सराहनीय रहा।
अखबारों  में ......
दिनांक  12 अगस्त 2012
मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल में दो दिवसीय रोबोटिक्स कार्यशाला संपन्न
आज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजिनी कॉलोनी यमुनानगर में सी. वी.रमण विज्ञान क्लब के सौजन्य से चल रही दो दिवसीय रोबोटिक्स कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला में 35 विद्यार्थि
यों और 8 अध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस कार्यशाला में छात्रों को रोबोट बनाने सिखाए गए और विभिन्न प्रकार के रोबोटों का प्रदर्शन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम चरण में छात्रों ने रोबोटिक्स का सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्त किया और द्वितीय चरण में स्वयं अपने हाथों से रोबोट बनाए। पाँच–पाँच छात्रों के समूह में कुल सात रोबोट बनाकर उनका क्रियात्मक प्रदर्शन किया गया।
स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाठला ने कहा कि इस तरह के कार्यशालाएँ छात्रों में विज्ञान शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक साबित होती हैं। भविष्य में हमारे जीवन में रोबोटों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और हमारे दैनिक जीवन के विभिन्न कार्य रोबोटों द्वारा ही संचालित किए जाएँगे। यातायात, अन्तरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, खनन, रक्षा, व्यावसायिक कार्यों, स्वचालित वितरण प्रणालियाँ रोबोटों द्वारा ही संचालित होंगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में चयनित होने वाले छात्र आगामी चरण की कार्यशाला में प्रवेश करेंगे।
प्रशिक्षण चार समूहों में दिया गया।
समूह संख्या 1


समूह संख्या 2
समूह संख्या 3
समूह संख्या 4
दिल्ली से आए प्रशिक्षण अधिकारियों यश कुमार, मुहम्मद सादिक तथा सुनील कुमार ने रोबोटिक्स की सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक जानकारी दी। रोबोट मॉडलों का डेमो भी दिखाया गया।
रोबोट शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को प्रारंभिक स्तर के रोबोट बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया। छात्रों ने विशेष तौर पर तैयार की गई रोबोटिक किट्स से रोबोट के क्रियात्मक मॉडल तैयार किए।
कार्यशाला के समापन पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर के सी ठाकुर, चन्द्रशेखर शर्मा तथा डॉ. ममता वर्मा द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर दर्शनलाल बवेजा, श्रीश बेंजवाल, साधना मेहता, देवेन्द्र कुमार आदि का योगदान सराहनीय रहा।
अखबारों  में .....
अमर उजाला
दैनिक भास्कर

प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा

Friday, July 13, 2012

रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला जल्द Two days Workshop on Robotics

रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला जल्द Two days Workshop on Robotics
सी.वी. रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर और रोबोसिसइंडिया संगठन नयी दिल्ली के सयुंक्त तत्वाधान में यमुनानगर के दो स्कूलों व एक पोलिटेक्निक कालेज में अतिशीघ्र रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन करने जा रहा है। इस कार्यशाला में रोबोट्स के विशेषज्ञ कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक ज्ञान देंगे और बच्चों को रोबोट के माडल भी बनवाएंगे। वशेष तौर पर तैयार की गयी रोबोटिक किट से बच्चे अपना अपना रोबोट का माडल तैयार करेंगे। रोबो शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को प्रारंभिक स्तर के रोबोट बनाने भी सिखाए जायेंगे। उम्मीद है इस कि रोबो शिक्षा कार्यशाला से बच्चों की मानसिक क्षमता बढ़ेगी।
दिल्ली में स्थापित रोबोसिसइंडिया संगठन से यश कुमार, मुहम्मद सादिक व सुनील कुमार इस कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षण अधिकारी रहेंगे।           
क्लब समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि यहाँ क्लब सदस्यों द्वारा अपने स्तर पर तैयार विभिन्न रोबोट्स का प्रदर्शन भी किया जाएगा। इस कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा पांच सत्रों में कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों को सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक तरीके से रोबोट बनाने के सारे गुर सिखाए जायेंगे। विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी के बढ़ते कदम रोबोटिक इंजिनयरिंग में विशेष सम्भावना तलाश चुके हैं इसके मद्देनजर सी.वी. रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर, रोबोसिसइंडिया संगठन के साथ मिल कर  बच्चों की रूचि रोबोटिक्स के क्षेत्र में जगाने के लिए एक बड़ा प्रयास करने जा रहा है। 
विज्ञान संचार के क्षेत्र में क्लब सदस्य व क्लब पदाधिकारी खुले दिल से सहयोग करते हैं व सदैव क्लब की गतिविधियों में सहभागी होते हैं। क्लब सदस्यों के अथक प्रयासों से क्लब आज अंतर्राष्ट्रीय पहचान स्थापित कर चुका है पृथ्वी की परिधि, कम लागत के विज्ञान माडल, साइंस प्रोजेक्ट, खगोलिकी, गणित गतिविधियों (पास्कल का रहस्यमयी षटकोण) और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के साथ अब रोबोट मेकिंग भी क्लब की नियमित गातिविधि बनने जा रही है। हालांकि रोबोट मेकिंग कार्यशाला एक बहुत खर्चीला प्रोजेक्ट है, परन्तु क्लब के विज्ञान संचार प्रेम के आगे कोई कठिनाई आड़े नहीं आ सकती। 
क्लब प्रवक्ता संजय शर्मा जी ने बताया कि मनुष्य के दिल बहलाने और खेल के लिए बैटरी लगा कर बने रोबोट्स के दिन अब लद गए। रोबोटिक्स विज्ञान और तकनीक में नई क्रांति हो रही है जिसे इवोल्यूशनरी रोबोटिक कहा जाता है। अब रोबोट्स का पालतू जानवर की तरह इस्तेमाल करने का विचार वैज्ञानिकों के जेहन में बलवान हो रहा है। रोबोट्स को सिर्फ पालतू बनाने का विचार ही नहीं बल्कि वे रोबोटों को पैदा करने की भी बात कर रहे हैं। इवोल्यूशनरी रोबोटिक की खासियत है कि इसके तहत रोबोट्स में मनुष्यों वाली विशेषताएं भी होंगी। रोबोट में इस्तेमाल होने वाली मशीनें डायनामिक होंगी, आस-पास के वातावरण से खुद को समायोजित कर लेंगी, खुद को बदल सकेंगी, आदेश दे सकेंगी, साथ ही अपने आप सीख सकेंगी, सहायता करेंगी, विकसित होंगी और जिंदा प्राणी या व्यक्ति की तरह खुद को विकसित कर सकेंगी। 
इवोल्यूशनरी शब्द की व्याख्या करते हुए क्लब के गणित विशेषज्ञ मुकेश रोहिल ने बताया कि यह शब्द रोबोटिक्स विज्ञान में काम करने वाले अलग-अलग विभागों के लिए बहुत महत्वपूर्ण शब्द है। उनका विचार है कि अगर रोबोट तकनीक में विकास का सिद्धांत आ जाए तो रोबोट अपने दम पर हल निकाल सकेंगे, ऐसा हल जो उनके सॉफ्टवेयर में नहीं इंस्टाल किया गया होगा। जिस प्रकार जीवित प्राणियों में प्राकृतिक इवोल्यूशन का आधार म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन होता है। इसका मतलब है आनुवांशिक धरोहर में छोटे-छोटे बदलाव होते है जिन में से लाभदायक स्थाई होते जाते हैं पीढ़ी दर पीढ़ी यह बदलाव अपने आप आगे जाते हैं। इस तरह के बदलाव उत्तरजीविता के लिए लाभदायक होते हैं ठीक इसी तर्ज पर बने नए रोबाट्स अपने आप अपनी उन्नत पीढ़ी तैयार कर सकेंगे।
रोबोटिक विज्ञान में अपार संभावनाओं को देखते हुए क्लब ने इस क्षेत्र में अन्य विशेषज्ञों से भी सम्पर्क किया है भूतपूर्व क्लब सदस्य होने के नाते वो कार्यशाला लगाने के लिए सहर्ष तैयार है व भविष्य की कार्यशालाओं के लिए मास्टर ट्रेनर्स भी वर्तमान क्लब सदस्यों में से ही चूने जायेंगे जिनके विशेष प्रशिक्षण के अलग से व्यवस्था होगी।  
अखबारों  में .....
 आओ देखें वो 7 शानदार ह्युमनोइड रोबोट जो बनाएंगे आपका जीवन आसान। 

रोबोटिक दुनिया में अनुसंधान लगातार जारी हैं और अब ऐसे रोबोट बन रहे हैं जो काफी हद तक इंसानों के समकक्ष कार्य कर सकते हैं. इसलिए वैज्ञानिक और इंजीनियर अब अगले स्तर पर जा रहे हैं जहाँ रोबोट भावनाएँ भी व्यक्त करेंगे और भावनाओं को समझेंगे भी. प्रस्तुत है 7 शानदार ह्युमनोइड रोबोट की सूचि जो आजकल चर्चा में हैं. इस सूचि में होंडा का प्रसिद्ध रोबोट आसिमो शामिल नहीं है।

reem-a
Reem-A
स्पैन की पाल टेक्नोलोजी रोबोटिक्स ने यह शानदार रोबोट बनाया है. रीम-ए आगे पीछे चल सकता है, वजन उठा सकता है और शतरंज भी खेल सकता है। परंतु इसकी सबसे बडी विशेषता है इसकी चेहरा पहचानने की क्षमता. तो भूल जाइए कि आप कोई निर्देश देंगे और रीम-ए मान लेगा, क्योंकि यह सिर्फ अपने मालिक की सुनता है।
Nexi
Nexi
नेक्सी प्रसिद्ध संस्थान एमआईटी द्वारा विकसित यह रोबोट मोबाइल-क्लेवर-केरिंग तकनीक पर काम करता है
। यह रोबोट पहिओं पर चलता है और कई काम कर सकता है. इसमें थ्रीडी इंफ्रारेड कैमेरा है जो इसे चेहरों और चीजों की पहचान करने लायक बनाता है। इसकी सबसे बडी विशेषता है इसकी भावनाएँ व्यक्त करने की क्षमता। इससे बात कीजिए और यह मुस्कुराएगा, उदास होगा और अपनी भौएँ भी ऊपर नीचे करेगा. इसको विकसित करने वाली टीम का मानना है कि एकदिन नेक्सी इंसानों के साथ एक टीम की तरह काम करेगा।
Joe & Co
जर्मनी की म्यूनिख टेक्निकल यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित जो श्रेणी के रोबोट शानदार रोबोटिक इंजीनियरिंग का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं
। इस श्रेणी के रोबोट बनाने के पीछे का मूल उद्देश्य था इंसानों की पूरी तरह से नकल करना. तभी तो जॉनी नामक रोबोट, जिसको 2003 में बनाया गया था, एक वयस्क इंसान के जितना लम्बा है और 2.7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है. परंतु उसकी बहन लोला उससे भी अधिक निपुण है। वह 5 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से चल सकती है और जॉनी के 17 जोडों की विपरित लोला के पास 25 जोड़ हैं जो उसे इंसानों के और करीब लाते हैं।
CB2
CB2
जापान की एजेंसी फोर साइंस एंड टेक्नोलोजी ने यह रोबोट बनाया है
। सीबी2 का अर्थ है - Child Robot with Biomimetic Body, यानी की एक बच्चा रोबोट जिसके पास ऐसा शरीर है जो भावनाएँ व्यक्त कर सकता है. सीबी2 में 197 अत्यधिक सवेंदनशील सेंसर लगाए गए हैं. इसकी त्वचा मुलायम है उसमें टच सेंसर लगे हैं। इसके अलावा सीबी2 में 56 छोटी मोटरें भी लगी है. यह रोबोट 1 से 3 वर्ष के बच्चे की तरह काम करता है। इसके छूते ही यह अपनी भावनाएँ व्यक्त करने लगता है।
Ishiguro
Ishiguro
जापान की इंटेलिजेंट रोबोटिक्स लेब ने इशिगुरो परिवार के रोबोट बनाए हैं
। इस श्रेणी के अंतर्गत कई एडवांस रोबोट बनाए गए हैं जैसे कि वाकामारू और एवेली-पी1. ये रोबोट ना केवल ह्यूमनोइड [इंसानों की तरह चलते फिरते] बल्कि एंड्रोइड [इंसानों की तरह व्यवहार करने वाले] श्रेणी में भी आते हैं. ये रोबोट रोजमर्रा के कामकाज में इंसानों की मदद करने के लिए बनाए गए हैं।
Armar-3
Armar-3
जर्मनी के इंस्टिट्यूट फोर टेक्निकल इंफोर्मेटिक्स यूनिवर्सिटी ऑफ कार्लशु के द्वारा बनाया गया यह रोबोट रसोई में आपकी मदद करता है
। यह रोबोट स्टीरियो मोड में आपकी आवाज से निर्देश प्राप्त कर सकता है। लेजर बीम द्वारा चिह्नित की गई किसी चीज को उठाकर ला सकता है और अब इसे टेबल पर शराब और खाना परोसने लायक बनाया जा रहा है. इंजीनियर इससे एक कदम आगे की सोचते हुए इसमें रिमोट डायग्नोस्टिक सुविधा भी जोड रहे हैं ताकी भविष्य में यदि यह रोबोट अपनी मनमानी पर उतर आए तो इसे रोका जा सके।
Zoe Ren Ti 2
android_twin_robot
इस रोबोट का व्यवसायिक उपयोग नहीं होगा, इसे इस लायक बनाया भी नहीं गया है. परंतु फिर भी यह रोबोट चर्चा में है
। ऐसा इसलिए क्योंकि इसे बिल्कुल अपने मालिक के जैसा बनाया गया है। चीन की ज़ियान कोरेन स्कल्पचर रिसर्च इंस्टिट्यूट ने यह रोबोट बनाया है जो हंस सकता है, चेहरा घुमा सकता है और हाथ मिला सकता है। चीन के इस प्रसिद्ध संस्थान ने इस रोबोट को बनाने के लिए विशेष सिलिका जेल का इस्तेमाल किया है ताकी इसकी चमड़ी बिल्कुल इंसानों जैसी लगे। यह बिल्कुल अपने मालिक जो रेन टी की प्रतिकृति है। पहचानिए असली कौन है और नकली कौन!
प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा

      

Sunday, June 17, 2012

विज्ञान क्लब सदस्य जायेंगे उज्जैन जंतर मंतर में 21 व 22 जून को Ujjain Jantar Mantar Observatory


विज्ञान क्लब सदस्य जायेंगे उज्जैन जंतर मंतर 21 व 22 जून को Ujjain Jantar Mantar Observatory 21 June 
उज्जैन जंतर मंतर
आज सी. वी. रमण विज्ञान क्लब की एक बैठक सरोजिनी कालोनी में हुई जिस में 21 व 22 जून की क्लब गतिविधि की रूप रेखा तैयार  की गयी। क्लब संयोजक विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि 21 जून  को ग्रीष्म सक्रांति यानि समर सॉल्स्टाइस कहा जाता है। इस दिन सूर्य कर्क रेखा पर होता है और उत्तर की ओर बढ़ता सूर्य 21 जून को कर्क रेखा को छूकर पुनः दक्षिण की ओर बढ़ने लगता है। इस सतिथि को दक्षिणायन कहते हैं। इस दिन पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग लिया जाता है। इस बार 21 व 22  जून को क्लब सदस्य 3 जगह पर पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करेंगे।
21 जून 2011 का प्रयोग
एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय संयोजक प्रगति विज्ञान संस्था व अंतर्राष्ट्रीय इराटोस्थनिज संस्था के दिशा निर्देशों के अनुसार क्लब सदस्यों को 21 व 22  जून को उज्जैन जाकर कर्क रेखा पर सूर्य की उपस्तिथि के दौरान पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग की जिम्मेदारी दी गयी है जो कि क्लब के लिए गर्व का विषय है। स्थानीय प्रयोग के लिए राजकीय विद्यालय अलाहर में अरुण और उस की टीम, सरोजिनी कालोनी में अमन काम्बोज व उसकी टीम प्रयोग की कमान संभालेंगे। 
प्रवक्ता संजय शर्मा
क्लब संयोजक दर्शन लाल व प्रवक्ता संजय शर्मा उज्जैन मध्यप्रदेश जायेंगे और वहाँ पर विश्वविख्यात वेधशाला जंतर मंतर पर प्रयोग करके आवश्यक प्रेक्षण  लेंगे। उज्जैन में राजा जयसिंह ने यह जंतर मंतर  वेधशाला 1925 ई. से 1930 ई. के मध्य बनवाई थी। यह वेधशाला तभी से स्टीक कालगणना के लिए विख्यात है। परिभ्रमण पथ के दौरान 21 जून को दोपहर में सूर्य कर्क रेखा पर एकदम लंबवत हो जाएगा तब वहाँ खड़े लम्बवत दंड की परछाई शून्य हो जायेगी। इस स्तिथि को शून्य परछाई क्षेत्र या अंग्रेजी में नो शैडो जोन कहा जाता है  इस दिन भारत सहित उत्तरी गोलार्द्घ में स्थित सभी देशों में सबसे बड़ा दिन तथा रात सबसे छोटी होगी। भारत में से कर्क रेखा गुजरती है जो कि उज्जैन शहर से होकर जाती है इस लिए यह स्थान इस प्रयोग के लिए सबसे उत्तम स्थान है।
Shanku (Gnomon) शंकुयंत्र
जहां पर लम्बवत खड़े दंड की परछाई दोपहर में 12 बजे से 1 बजे के बीच एक बार शून्य हो जायेगी उज्जैन में सूर्योदय प्रातः 5.43 बजे तथा सूर्यास्त सायं 7.16 मिनट पर होगा, जिससे दिन 13 घंटे 33 मिनट तथा रात 10 घंटे 24 मिनट की होगी।
इस खगोलीय घटना जिसे समर सॉल्स्टाइस कहा जता है यानि  21 जून के बाद से सूर्य दक्षिण दिशा की ओर गति करना प्रारंभ कर देगा, जिसे दक्षिणायन का प्रारंभ कहा जाता है। अब दिन क्रमशः छोटे होते जाएंगे और फिर 23 सितंबर को रात-दिन बराबर होंगे। इस दिन पृथ्वी का अक्षीय झुकाव सूर्य की ओर अधिकतम होता है जिस कारण दिन की अवधि बढ़ जाती है। कर्क संक्रांति के समय पर पृथ्वी, सूर्य  की ओर अपनी धुरी पर 23 डिग्री और 26 मिनट तक झुकी रहती है, जोकि इसके झुकाव की अधिकतम सीमा है।
सूर्य के उत्तरायन और दक्षिणायन होने के बारे में  क्लब के पदाधिकारी संजय शर्मा ने बताया कि पृथ्वी द्वारा सूर्य का चक्कर लगाने के दौरान पृथ्वी का गोलार्द्ध कुछ समय के लिए सूर्य से दूर चला जाता है। जिसे सूर्य का उत्तरायन और दक्षिणायन हो जाना कहा जाता है। पृथ्वी पर स्थित दो काल्पनिक रेखाएं कर्क और मकर रेखा है। सूर्य उत्तरायन के समय कर्क रेखा पर और दक्षिणायन के समय मकर रेखा पर होता है। पृथ्वी पर इसी परिवर्तन के कारण ग्रीष्मकाल तथा शीतकाल का आगमन होता है। यहां पर मुख्यरूप से तीन मौसम होते हैं। ग्रीष्मकाल- ग्रीष्मकाल की अवधि मार्च से जून तक, वर्षाकाल- वर्षाकाल की अवधि जुलाई से अक्टूबर, शीतकाल- शीत काल की अवधि नवम्बर से फरवरी होती है। मौसम में इसी परिवर्तन के साथ हवा की दिशा भी बदलती है। जहां ज्यादा गर्मी होती है वहां से हवा गर्म होकर ऊपर उठने लगती है और पूरे क्षेत्र में निम्न वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है। ऐसी स्थिति में हवा के इस रिक्त स्थान को भरने के लिए ठंडे क्षेत्र से हवा गर्म प्रदेश की ओर बहने लगती है। शुष्क और वर्षा काल का बारी-बारी से आना मानसूनी जलवायु की मुख्य विशेषताएं हैं। ग्रीष्म काल में हवा समुद्र से स्थल की ओर चलती है जो कि वर्षा के अनुकूल होती है और शीत काल में हवा स्थल से समुद्र की और चलती है। ग्रीष्म काल में 21 मार्च से सूर्य उत्तरायण होने लगता है तथा 21 जून को कर्क रेखा पर लंबवत चमकता है। इस कारण मध्य एशिया का भूभाग काफी गर्म हो जाता है। फलस्वरूप हवा गर्म होकर ऊपर उठ जाती है और निम्न दबाव का क्षेत्र बन जाता है। जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध के महासागरीय भाग पर ठंड के कारण स्थित उच्च वायुदाब की ओर से वायु उत्तर में स्थित कम वायुदाब की ओर चलने लगती है। इसे दक्षिणी-पश्चिमी मानसून कहते हैं। ये हवा समुद्र की और से चलती है इसलिए इसमें जलवाष्प भरपूर होती हैं। इसी कारण एशिया महाद्वीप के इन क्षेत्रों में भारी वर्षा होती है। यह मानसूनी जलवायु भारत, दक्षिण-पूर्वी एशिया में भरपूर वर्षा करती है।

क्लब  प्रभारी दर्शन लाल ने बताया कि 21 व 22 जून को उज्जैन के जंतर महल और उज्जैन के नजदीक महिदपुर तहसील के डोंगला गांव में जुटाए जाने वाले आंक़डों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त होगी। उज्जैन की महिदपुर तहसील के डोंगला गांव भी खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह गांव कर्क रेखा पर स्थित है। यहां पर 21 व 22 जून को परछाईं खत्म हो जाती है मतलब सूर्य सीधे सिर के ऊपर चमकता है।
यमुनानगर में सूर्योदय प्रातः 5 बजकर 21 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 7 बजकर 28 मिनट पर होगा। यमुनानगर में 21 जून का दिन 14 घंटे 7 मिनट का साल का सबसे बड़ा दिन होगा।
अखबार में .....


प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा

Sunday, October 23, 2011

अंतर्राष्ट्रीय रसायन वर्ष के उपलक्ष्य मे भाषण प्रतियोगिता Declamation contest under International Year Of Chemistry

अंतर्राष्ट्रीय रसायन वर्ष के उपलक्ष्य मे भाषण प्रतियोगिता
 Declamation contest under International Year Of Chemistry
16-10-2010 को सी.वी. रमन विज्ञानं क्लब के सदस्यों ने विश्व खाद्य दिवस पर भाषण प्रतियोगिता के माध्यम से अपने विचार रखे ।
प्रतिभागियों में आंचल,विनीता,वंशिका,ईशप्रीत,अमन,कार्तिक,पारस,स्पर्श,अंशी,अर्श,लव तुली,वंशिका तुली,पाथर्वी,अंशवी ने अपने विचार रखे ।
निर्णायक का कार्य श्री श्रीश शर्मा जी किया
मंच संचालन का कार्य दर्शन लाल जी ने किया
इस प्रतियोगिता के मुख्य विषय थे,
रसायन विज्ञान दैनिक जीवन में;
मेरा मनपसंद विषय विज्ञान;
मशीने लील गयी बच्चों की ख़ुशी भरी आवाज;
जल है तो कल है;
भोजन : सब की आवश्यकता इसे बर्बाद न करें;  
प्रदुषण मुक्त दीवाली ।
झलकियां.......
ये हैं पुरूस्कार..आंचल,विनीता,वंशिका,ईशप्रीत,अमन,कार्तिक,पारस,स्पर्श,अंशी,अर्श,लव तुली,वंशिका तुली,पाथर्वी,अंशवी रसायन विज्ञान रोजमर्रा की जिन्दगी में  subject i like most chemistry in daily life blog-5 water for life science i like most मशीने लील गयी बच्चों की ख़ुशी भरी आवाज subject i like most is science  पुरस्कार वितरण प्रथम पुरस्कार वितरण द्वितीय पुरस्कार वितरण तृतीय पुरस्कार वितरण चतुर्थ प्रोत्साहन पुरस्कार निर्णायक श्री श्रीश शर्मा जी को भी सम्मानित किया गया
क्लब का आगामी कार्यक्रम निबन्ध लेखन रखा गया है।
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Saturday, October 15, 2011

सोडियम का डांस Dancing Sodium

सोडियम का डांस Dancing Sodium
आज काफी दिनो के बाद परीक्षाओं से निपट कर बच्चों ने  विज्ञान के खेल देखने की फरमाइश की तो आज फिर उन को दिखाया गया की सोडियम किस प्रकार  पानी और केरोसिन तेल के बीच में डांस करता है जब सोडियम पानी के सम्पर्क में आता है तो वो पानी से क्रिया कर के उछलता है और जैसे ही उछल कर पानी की सतह से उपर जाता है तो केरोसिन तेल में जाकर फिर नीचे आता है।  
प्रयोग के चरण़
1. एक परखनली मे थोड़ा पानी लेते हैं।
2. पानी में 2-3 बूँद फिनोफ्थलीन सूचक की डालते हैं।
3. मिट्टी का तेल डालते हैं।
4. अंत में एक छोटा सा टुकड़ा सोडियम का डालते हैं।
5. जैसे ही सोडियम पानी के सम्पर्क में आता है रासायनिक क्रिया होती हैं जिस का रासायनिक समीकरण यह है।
2 Na + 2 H2O = 2 NaOH + H2  
यदि सोडियम धातु के छोटे से टुकड़े पर पानी की बूंदे डाली जाएँ तो सोडियम हाइड्रोआक्साईड NaOH
क्षार बनता है और हाइड्रोजन गैस बनती है. 
6. जब सोडियम पानी के सम्पर्क में आता है तो वो पानी से क्रिया कर के उछलता है और जैसे ही उछल कर पानी की सतह से उपर जाता है तो केरोसिन तेल में जाकर कोई क्रिया नही होने के कारण फिर से नीचे आता है नीचे आ कर फिर से पानी से क्रिया कर के उछलता है।  
7. सोडियम की जल से क्रिया पानी मे फिनोफ्थलिन  सूचक के कारण घोल का रंग गुलाबी हो जाता है अर्थात यह घोल NaOH  क्षारीय प्रकृति का होता है.
8. सोडियम का यह नृत्य तब तक चलता रहता है जब तक पूरा सोडियम पानी से क्रिया कर के समाप्त ना हो जाये।

देखें यह विडीयो
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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