यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब सिखायेगा डाक टिकट संग्रह Yamunanagar Philatelic Club
यमुनानगर मे पहले फिलाटेलिक क्लब का गठन, क्लब सदस्य सीखेंगे डाक-टिकटों का व्यवस्थित संग्रह अर्थात ‘फिलेटली‘
आज यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब का ओपचारिक गठन किया गया व फिलेटली क्लब की पहली बैठक मे आज क्लब सदस्यों को डाक टिकट व अन्य दुर्लभ डाक सामग्री संग्रह करने के तरीके सिखाये गए। क्लब के संचालक दर्शन बवेजा ने सदस्यों को क्लब की निशुल्क सदस्यता ग्रहण करवाई व अपने सम्बोधन मे कहा कि उन्हें बचपन से ही रंग-बिरंगे डाक टिकट अच्छे लगते थे और वो डाक के लिफाफों से टिकट निकालकर सुरक्षित रख लेते थे।
धीरे धीरे उनका यह संग्रह विशाल रूप लेता गया और उनके संग्रह मे भारत मे डाक प्रणाली के शुरुआती दिनों के डाक लिफ़ाफ़े, पोस्टकार्ड्स, टेलीग्राम, प्रथम दिवस आवरण, विशेष आवरण, विदेशी डाक टिकट व अन्य दुर्लभ डाक सामग्री व स्टेशनरी का संग्रह है जिसे कि आज क्लब सदस्यों के अवलोकन हेतु प्रदर्शनी के रूप मे भी लगाया गया व आगामी दिनों मे इस फिलेटली प्रदर्शनी को विभिन्न स्कूलों मे भी लगाया जाएगा व विद्याथियों को फिलेटली शौंक को अपनाने की प्रेरणा दी जायेगी। क्लब गठन का उद्देश्य यह भी रहेगा कि जिले के सभी अज्ञात फिलेटली शौकीनों को एक मंच पर लाया जाएगा जिससे यमुनानगर का नाम भी फिलेटली जगत के नक्शे पर दर्ज हो सकेगा, क्लब सदस्यों को निशुल्क फिलेटलिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
क्या है फिलेटली
फिलेटली शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द फिलोस व एटलिया से हुई। जिसमे फिलोस का मतलब है कि आकर्षण और एटलिया का मतलब है कर व शुल्क से छूट अर्थात डाक टिकट लगाने के बाद से पत्र प्राप्त करने वाले को पत्र पहुचने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। तो इस आकर्षण के चलते लोग डाक टिकट उतार कर संग्रहित कर लिया करते थे। सन अठ्ठारह सौ चौसठ में एक फ्रांसीसी जार्ज हार्पिन ने फिलेटली शब्द का इजाद किया था। इससे पूर्व इस शौंक को टिम्बरोलोजी कहा जाता था। फ्रेंच में टिम्बर का अर्थ टिकट ही होता है। एडवर्ड लुइन्स पेम्बर्टन को साइन्टिफिक फिलेटली का जनक माना जाता है। बेशक डाक टिकट एक छोटा सा कागज का रंगबिरंगा टुकड़ा होता है यह वो राजदूत है जो खुद विभिन्न देशों सैर करता व हमे भी करवाता है और सब को अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है
किंग आफ हाबी है फिलेटली
डाक-टिकटों का व्यवस्थित संग्रह यानि कि फिलेटली मनुष्य का सबसे लोकप्रिय शौंक है। फिलेटली को दुनिया के सभी शौंकों मे शौकों का राजा और राजाओं का शौक भी कहा जाता है। वैसे तो डाक टिकटों का संग्रह ही फिलेटली माना जाता है पर बदलते वक्त के साथ फिलेटली डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरण, विशेष आवरण, पोस्ट मार्क, डाक स्टेशनरी एवं डाक सेवाओं से सम्बन्धित साहित्य का व्यवस्थित संग्रह एवं अध्ययन बन गया है। इस शौंक ने अब बहुत लोकप्रियता प्राप्त हासिल कर ली है इसके लिए भारतीय डाक विभाग भी समय समय पर विभिन्न आकर्षक योजनाये चलाता है सदस्यों को इसकी जानकारी भी दी जायेगी।
विश्व की मशहूर हस्तियाँ भी डाक-टिकट संग्रहकर्ता
हमारे देश भारत मे आधा करोड़ से भी कुछ अधिक लोग क्रमबद्ध डाक-टिकट संग्रह करते हैं। आज विश्व में डाक-टिकटों का सबसे बड़ा संग्रह ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पास है। किंग जार्ज पंचम, महारानी एलिजाबेथ, चार्ली चेप्लिन, किंग फरौक, राजकुमार रैनिएर, फ्रेंकलिन रूजवेल्ट, जोन हेन्मुलर, जोन लेन्नों, शतरंज खिलाड़ी अनातोली कारपोव, टेनिस खिलाड़ी मारिया शरापोवा और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु आदि हस्तियाँ भी डाक-टिकट संग्रहकर्ता थे।
कौन थे डाक-टिकट के जनक
बात उन दिनों की है जब डाक शुल्क दूरी के हिसाब से लिया जाता था तो देखा गया कि बहुत से पत्र पाने वालों ने पत्रों को लेने से इन्कार कर दिया जिस कारण अस्वीकृत पत्रों का ढेर लग जाता था इस कारण सरकारी निधि की हानि हो रही थी। सर रोलैण्ड हिल जो कि पेशे से एक अध्यापक थे उन्हें ही डाक-टिकटों का जनक कहा जाता है उन्होंने बिना दूरी की बाध्यता के एक समान व एकमुश्त शुल्क की दरों का सुझाव दिया और लिखने की बजाय चिपकाए जाने वाले लेबिल की बिक्री का क्रांतिकारी सुझाव दिया। रोलैण्ड हिल के सुझाव पर छह मई सन अठ्ठारह सौ चालीस को विश्व का पहला डाक टिकट पेनी ब्लैक ब्रिटेन मे जारी किया गया। भारत व एशिया का पहला डाक टिकट एक जुलाई अठ्ठारह सौ बावन को सिन्ध प्रांत मे आधे आने के मूल्य का जारी किया गया, इस टिकट को सिर्फ सिन्ध राज्य हेतु जारी करने के कारण सिंदे डाक कहते हैं इसी को प्रथम सर्कुलर डाक टिकट का स्थान भी प्राप्त है।
क्या हैं इस क्लब के गठन का उद्देश्य
विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा का कहना है कि जैसे पत्र लेखन का चलन कम होता जा रहा है और इसका स्थान एस एम एस व ई-मेल व अन्य अत्याधुनिक संचार साधनों ने ले लिया है ऐसे मे इस क्लब के जरिये क्लब सदस्यों को उनकी डाक विरासत से अवगत करवाया जाएगा। स्कूल विद्यार्थियों को फिलेटली के प्रति उत्साहित कर उनको अपनी संस्कृतिक विरासत से भी अवगत करवाया जाएगा व समय समय पर विभिन्न फिलेटलिक प्रतियोगिताए भी आयोजित करवाई जायेंगी और बच्चों को विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फिलेटलिक प्रतियोगिताओं मे भाग दिलवाया जाएगा।
संस्थापक सदस्य
आज आंचल काम्बोज, पारस, पलक, स्पर्ष, अमन, शगुन, अभिजात धस्माना, पार्थवी, कार्तिक, छवि, इंदु, आरुषि, काजल, अवनी, वंशिका, पारुल, शिरीष, युक्ता गल्होत्रा, सुमेधा गल्होत्रा, टविंकल, रमन, उपहार आदि ने यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब की सदस्यता ग्रहण की व प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
अखबारों मे खबरें
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| फिलाटेलिक क्लब के सदस्य |
आज यमुनानगर फिलाटेलिक क्लब का ओपचारिक गठन किया गया व फिलेटली क्लब की पहली बैठक मे आज क्लब सदस्यों को डाक टिकट व अन्य दुर्लभ डाक सामग्री संग्रह करने के तरीके सिखाये गए। क्लब के संचालक दर्शन बवेजा ने सदस्यों को क्लब की निशुल्क सदस्यता ग्रहण करवाई व अपने सम्बोधन मे कहा कि उन्हें बचपन से ही रंग-बिरंगे डाक टिकट अच्छे लगते थे और वो डाक के लिफाफों से टिकट निकालकर सुरक्षित रख लेते थे।
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| डाक टिकट व डाक सामग्री व स्टेशनरी का संग्रह |
क्या है फिलेटली
फिलेटली शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द फिलोस व एटलिया से हुई। जिसमे फिलोस का मतलब है कि आकर्षण और एटलिया का मतलब है कर व शुल्क से छूट अर्थात डाक टिकट लगाने के बाद से पत्र प्राप्त करने वाले को पत्र पहुचने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता था। तो इस आकर्षण के चलते लोग डाक टिकट उतार कर संग्रहित कर लिया करते थे। सन अठ्ठारह सौ चौसठ में एक फ्रांसीसी जार्ज हार्पिन ने फिलेटली शब्द का इजाद किया था। इससे पूर्व इस शौंक को टिम्बरोलोजी कहा जाता था। फ्रेंच में टिम्बर का अर्थ टिकट ही होता है। एडवर्ड लुइन्स पेम्बर्टन को साइन्टिफिक फिलेटली का जनक माना जाता है। बेशक डाक टिकट एक छोटा सा कागज का रंगबिरंगा टुकड़ा होता है यह वो राजदूत है जो खुद विभिन्न देशों सैर करता व हमे भी करवाता है और सब को अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है
किंग आफ हाबी है फिलेटली
डाक-टिकटों का व्यवस्थित संग्रह यानि कि फिलेटली मनुष्य का सबसे लोकप्रिय शौंक है। फिलेटली को दुनिया के सभी शौंकों मे शौकों का राजा और राजाओं का शौक भी कहा जाता है। वैसे तो डाक टिकटों का संग्रह ही फिलेटली माना जाता है पर बदलते वक्त के साथ फिलेटली डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरण, विशेष आवरण, पोस्ट मार्क, डाक स्टेशनरी एवं डाक सेवाओं से सम्बन्धित साहित्य का व्यवस्थित संग्रह एवं अध्ययन बन गया है। इस शौंक ने अब बहुत लोकप्रियता प्राप्त हासिल कर ली है इसके लिए भारतीय डाक विभाग भी समय समय पर विभिन्न आकर्षक योजनाये चलाता है सदस्यों को इसकी जानकारी भी दी जायेगी।
विश्व की मशहूर हस्तियाँ भी डाक-टिकट संग्रहकर्ता
हमारे देश भारत मे आधा करोड़ से भी कुछ अधिक लोग क्रमबद्ध डाक-टिकट संग्रह करते हैं। आज विश्व में डाक-टिकटों का सबसे बड़ा संग्रह ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के पास है। किंग जार्ज पंचम, महारानी एलिजाबेथ, चार्ली चेप्लिन, किंग फरौक, राजकुमार रैनिएर, फ्रेंकलिन रूजवेल्ट, जोन हेन्मुलर, जोन लेन्नों, शतरंज खिलाड़ी अनातोली कारपोव, टेनिस खिलाड़ी मारिया शरापोवा और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु आदि हस्तियाँ भी डाक-टिकट संग्रहकर्ता थे।
कौन थे डाक-टिकट के जनक
बात उन दिनों की है जब डाक शुल्क दूरी के हिसाब से लिया जाता था तो देखा गया कि बहुत से पत्र पाने वालों ने पत्रों को लेने से इन्कार कर दिया जिस कारण अस्वीकृत पत्रों का ढेर लग जाता था इस कारण सरकारी निधि की हानि हो रही थी। सर रोलैण्ड हिल जो कि पेशे से एक अध्यापक थे उन्हें ही डाक-टिकटों का जनक कहा जाता है उन्होंने बिना दूरी की बाध्यता के एक समान व एकमुश्त शुल्क की दरों का सुझाव दिया और लिखने की बजाय चिपकाए जाने वाले लेबिल की बिक्री का क्रांतिकारी सुझाव दिया। रोलैण्ड हिल के सुझाव पर छह मई सन अठ्ठारह सौ चालीस को विश्व का पहला डाक टिकट पेनी ब्लैक ब्रिटेन मे जारी किया गया। भारत व एशिया का पहला डाक टिकट एक जुलाई अठ्ठारह सौ बावन को सिन्ध प्रांत मे आधे आने के मूल्य का जारी किया गया, इस टिकट को सिर्फ सिन्ध राज्य हेतु जारी करने के कारण सिंदे डाक कहते हैं इसी को प्रथम सर्कुलर डाक टिकट का स्थान भी प्राप्त है।
क्या हैं इस क्लब के गठन का उद्देश्य
विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा का कहना है कि जैसे पत्र लेखन का चलन कम होता जा रहा है और इसका स्थान एस एम एस व ई-मेल व अन्य अत्याधुनिक संचार साधनों ने ले लिया है ऐसे मे इस क्लब के जरिये क्लब सदस्यों को उनकी डाक विरासत से अवगत करवाया जाएगा। स्कूल विद्यार्थियों को फिलेटली के प्रति उत्साहित कर उनको अपनी संस्कृतिक विरासत से भी अवगत करवाया जाएगा व समय समय पर विभिन्न फिलेटलिक प्रतियोगिताए भी आयोजित करवाई जायेंगी और बच्चों को विभिन्न राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फिलेटलिक प्रतियोगिताओं मे भाग दिलवाया जाएगा।
संस्थापक सदस्य
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