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Monday, March 25, 2013

बच्चों ने मापी पृथ्वी के परिधि Experiment Circumference Of Earth



बच्चों ने मापी पृथ्वी के परिधि Experiment Circumference Of Earth

आज बसंत विषुव के दिन मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया। इस प्रयोग व कार्यशाला संचालन डाक्टर ममता वर्मा सचदेवा ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले दो घंटे बच्चों को इरैटोस्थनीज, इसोन धूमकेतु, उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं आदि की सैद्धान्तिक जानकारियाँ दी गई। इन जानकारियों को विडियो और पावर पाइंट प्रस्तुतीकरण के द्वारा दिखाया गया। इस प्रयोग में पन्द्रह समूहों में कुल अस्सी विद्यार्थियों ने भाग लिया।
ग्यारह बजे से एक बजे तक सीवी रमण विज्ञान क्लब के प्रभारी दर्शन लाल बवेजा ने बच्चों को पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करना सिखाया जिसमें पाँच-पाँच विद्यार्थियों का समूह बनाकर जमीन पर लंबवत खड़ी नोमोन (छड़ी) की परछायी को पांच पांच मिनट के अंतराल पर नाप कर दर्ज किया गया। छड़ी की परछायी जब घटते-घटते न्यूनतम हो जाती है तो उसे माप लेते हैं और त्रिकोणमिति के सूत्रों की सहायता से सूर्यकोण ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद विशेष प्रकार की गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की गई तथा परिणामों को फ्राँस की अंतर्राष्ट्रीय संस्था को ईमेल द्वारा भेजा गया।
प्रगति विज्ञान संस्था के राष्ट्रीय सयोंजक दीपक शर्मा में बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस प्रयोग में बहुत से देशों के बच्चे भाग ले रहे हैं। इनमें फ्राँस, अर्जेंटीना, स्पेन, मलेशिया, जर्मनी, कनाडा, स्लोवेनिया, मोरक्को, रोमानिया, सर्बिया, माल्टा, मिश्र तथा अमेरिका आदि देशों के बच्चे शामिल हैं।
भारत में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू तथा कश्मीर, गुजरात, असम, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड राज्यों के बच्चे इस प्रयोग को 20, 21 मार्च को कर रहे हैं। पांच अप्रैल को इस प्रयोग को करने वाले सभी देशों के बच्चे एक अंतर्राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आपस में रूबरू होंगे और प्रयोग से संबंधित अपने अनुभव साँझे करेंगे तथा प्रयोग के परिणाम घोषित किए जाएँगे। सबसे कम त्रुटि के साथ पृथ्वी की परिधि मापने वाले समूह को अंतर्राष्ट्रीय प्रमाण पत्र से नवाजा जाएगा।
इस अवसर पर आंचल, अमन काम्बोज, पारस, कार्तिक, सक्षम, अमन सैनी, इशिता काम्बोज, रीमा कुमार, अनुराग, पारस बत्रा, श्रेया, पार्थवी बवेजा, सोनाली, दीक्षित बत्रा, अंकुर, इशिका मक्कड़, विश्वा, अनुकृती अग्निहोत्री, अक्षित अरोड़ा,कार्तिक काम्बोज,  आदि प्रतिभागियों ने यह प्रयोग किया और गणना की।
इस अवसर पर डॉ॰ ममता वर्मा, मेघा शर्मा, पूजा कालरा, किरण मनोचा, रीमा मालिक, मुक्ता भाटिया, दर्शन लाल, श्रीश शर्मा आदि अध्यापकों ने सहयोग दिया।
आंकड़े  इस प्रकार रहे .....


 अखबारां में 


Wednesday, October 24, 2012

विश्वास और तुषार के ग्रुप ने मापी सबसे सही पृथ्वी की परिधि Results of Circumference of Earth Experiment

प्रयोग व कार्यशाला में कक्षा पांच से ग्याराह तक के चुनिन्दा विद्यार्थी
विश्वास और तुषार के ग्रुप ने मापी सबसे सही पृथ्वी की परिधि Results of Circumference of Earth Experiment
विश्वास, तुषार व अंकुर की टीम
23 सितम्बर को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर mukund lal public school yamunanagar में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया था। इस प्रयोग व कार्यशाला में कक्षा पांच से ग्याराह तक के चुनिन्दा विद्यार्थियों को इरैटोस्थनीज प्रयोग के संदर्भ में उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति सूत्रों, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं, पृथ्वी की परिधि, पृथ्वी की त्रिज्या ज्ञात करने की सैद्धान्तिक व प्रायोगिक जानकारियाँ दी गई थी। इस प्रयोग में यमुनानगर जिले के कुल 55 विद्यार्थियों ने 11 समूहों में भाग लिया था। इन विद्यार्थियों के प्रयोगों से प्राप्त आंकड़ों को  प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनीज प्रयोग संस्था को फ्रांस भेजा गया था जहां इन सभी समूहों के आंकड़ों को अन्य देशों से प्राप्त आंकड़ों के साथ सम्मिलित गणना करके पृथ्वी की परिधि ज्ञात की गयी थी।

प्रयोग के परिणाम का ज्यामितीय आरेख
क्लब समन्वयक दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक ने बताया कि इस प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय परिणाम प्राप्त हो चुके हैं जिसमे सबसे शुद्ध गणना के आधार पर मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल के समूह संख्या नवम के छात्र विश्वास, तुषार व अंकुर को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है इन तीनो छात्रों व इनकी मार्गदर्शक विभागाध्यक्ष डाक्टर ममता वर्मा को अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनीज संस्था फ्रांस की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय इ-ट्विनिग़ प्रमाणपत्र से नवाजा जाएगा।

मलेशिया के कुआनतान के एस ऍम के आलोर आकार
इस बार दुनिया भर के विभिन्न देशों के स्कूल कालेज के विद्यार्थियों ने सितम्बर विषुव के दिन इस प्रयोग को किया, जिसमे मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल के तुषार व विश्वास इस समूह को मलेशिया के कुआनतान के एस ऍम के आलोर आकार स्कूल के विद्यार्थियों की गणना के साथ सम्मिलित किया गया। कुआनतान की यमुनानगर से अक्षांशीय दूरी 2922 किलोमीटर है। 26.6 डिग्री सूर्यकोण के अंतर के साथ दोनों स्कूलों के सम्मिलित गणना से पृथ्वी की परिधि 39,546 किलोमीटर प्राप्त हुई, जिसकी मानक पृथ्वी की परिधि 40,075 किलोमीटर से 1.3 प्रतिशत त्रुटि दर्ज की गयी।

बच्चों में आधारभूत विज्ञान संकल्पनाओ को प्रायोगिक तौर पर हाथ से करके देखने के लिए प्रयोग करने वाले सी वी रमन विज्ञान क्लब के इन विजयी सदस्यों को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती शशि बाठला, प्रयोग के राष्ट्रीय संयोजक श्री दीपक कुमार  व  प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक मिस्टर एरिक वायसी ने बधाई और शुभकामनाये दी हैं।

अगला प्रयोग 21 दिसम्बर सबसे छोटे दिन (विंटर सॉल्स्टाइस) को किया जाएगा।
अखबार अमर उजाला में .......
              

Monday, September 24, 2012

मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग संपन्नCircumference of Earth Experiment at MLPS ynr



मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग संपन्न  Circumference of Earth Experiment at MLPS ynr 
मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग संपन्न
उन्नयन कोण
आज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया। इस प्रयोग व कार्यशाला का उद्घाटन प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाटला ने किया। कार्यक्रम में सबसे पहले दो घंटे बच्चों को इरैटोस्थनीज, उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं आदि की सैद्धान्तिक जानकारियाँ दी गई। इस प्रयोग में 10 समूहों में कुल 50 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
50 बाल वैज्ञानिक
11 बजे से 12:30 बजे तक सीवी रमण विज्ञान क्लब के प्रभारी दर्शन लाल ने बच्चों को यह प्रयोग करना सिखाया जिसमें पाँच-पाँच विद्यार्थियों का समूह बनाकर जमीन पर लंबवत खड़ी नोमोन (छड़ी) की परछायी को चार-चार मिनट के अंतराल पर नाप कर दर्ज किया गया। छड़ी की परछायी जब घटते-घटते न्यूनतम हो जाती है तो उसे माप लेते हैं और त्रिकोणमिति के सूत्रों की सहायता से सूर्यकोण ज्ञात कर लेते हैं। इसके बाद विशेष प्रकार की गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की गई तथा परिणामों को फ्राँस की अंतर्राष्ट्रीय संस्था को ईमेल द्वारा भेजा गया।
विहंगम दृश्य
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस प्रयोग में बहुत से देशों के बच्चे भाग ले रहे हैं। इनमें फ्राँस, अर्जेंटीना, स्पेन, मलेशिया, जर्मनी, कनाडा, स्लोवेनिया, मोरक्को, रोमानिया, सर्बिया, माल्टा, मिश्र तथा अमेरिका आदि देशों के बच्चे शामिल हैं। भारत में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू तथा कश्मीर, गुजरात, असम, महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों के बच्चे इस प्रयोग को 21, 22 और 23 सितंबर को कर रहे हैं। 27 सितंबर को इस प्रयोग को करने वाले सभी देशों के बच्चे एक अंतर्राष्ट्रीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये आपस में रूबरू होंगे और प्रयोग से संबंधित अपने अनुभव साँझे करेंगे तथा प्रयोग के परिणाम घोषित किए जाएँगे। सबसे कम त्रुटि के साथ पृथ्वी की परिधि मापने वाले समूह को अंतर्राष्ट्रीय प्रमाण पत्र से नवाजा जाएगा।
इस अवसर पर काजल, अमन, पारस, कार्तिक, सक्षम, स्पर्श, विभूति, मीली, वंशिका आदि प्रतिभागियों ने यह प्रयोग करना सीखा। 
इस अवसर पर डॉ॰ ममता वर्मा, मेघा शर्मा, गीतू साहनी, किरण मनोचा, दर्शन लाल, श्रीश बेंजवाल शर्मा, संजय शर्मा आदि ने सहयोग दिया।

प्रयोग  से प्राप्त आंकड़े जिन्हें भेजा गया है।


अखबारों में भी इस प्रयोग की धूम मची रही।

अमर उजाला अखबार 



आज  समाज अखबार


हरियाणा का दैनिक ट्रिब्यून

इस प्रयोग के विडियो देखें

एक और देखें 

प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा
 

Sunday, June 24, 2012

पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग हुआ सम्पन्न Earth experiment complete


पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग हुआ सम्पन्न Earth experiment complete
आज सी वी रमण विज्ञान क्लब सरोजिनी कालोनी के सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग के अंतिम चरण में उज्जैन से प्राप्त आंकड़ों को स्थानीय आंकड़ों के साथ  मिला कर गणना की और पृथ्वी की परिधि ज्ञात की। 
हालांकि यह आंकड़े प्रगति विज्ञान संस्था और अंतर्राष्ट्रीय इरेटोस्थनीज़ संस्था को भी भेज दिए गए हैं तब तक उज्जैन और डोंगला के परिणामों से यमुनानगर के परिणामों की गणना से यह देख लिया जाए कि अपने क्लब सदस्यों के परिणाम कैसे रहे।     
भारतीय काल गणना केन्द्र पद्म श्री डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, डोंगला तहसील महिदपुर जिला उज्जैन
क्लब समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि इस प्रयोग के लिए स्टीक आंकड़े प्राप्त करने के लिए वह खुद प्रवक्ता संजय शर्मा के साथ उज्जैन की जीवाजी व डोंगला काल गणना वेधशाला जंतर मंतर गए थे वहाँ उन दोनों ने 20 से 22 जून तक कर्क रेखा पर स्थित तीन अलग अलग जगह प्रयोग करके प्रेक्षण लिए गए। 
उज्जैन की जीवाजी काल गणना वेधशाला जंतर मंतर
जंतर मंतर जीवाजी वेधशाला उज्जैन और भारतीय काल गणना केन्द्र पद्म श्री डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, डोंगला तहसील महिदपुर जिला उज्जैन के प्रेक्षण और यमुनानगर के प्रेक्षण से प्राप्त रीडिंग  को सूत्रों में प्रतिस्थापित करके पृथ्वी की परिधि इरेटोस्थनीज़ विधि से ज्ञात की गयी। 
क्या है विधि
क्लब के पदाधिकारी प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि सबसे पहले दो स्थानों का चयन किया जाता है जहां प्रयोग किया जाना है उन दो स्थानों में यदि एक स्थान ऐसा है जो कि कर्क रेखा स्थित पर है। 21 जून को जिस समय वहाँ शंकु यंत्र की परछाई शून्य हो जाती है तो उस समय वहाँ सूर्य का उन्नयन शून्य प्राप्त होगा।
डोंगला का गूगल अर्थ चित्र
उसी समयांतराल में यह प्रयोग दूसरी युग्म टीम किसी दूसरे स्थान पर कर रही होती है जो की कर्क रेखा से अच्छी खासी अक्षांशीय दूरी पर हो। दोनों टीमों के न्यूनतम परछाई से प्राप्त उन्नयन कोणों के अंतर को सूत्र में दोनों स्थानों के बीच अक्षांशीय दूरी के साथ प्रतिस्थापित किये जाने पर हल करके पृथ्वी की परिधि ज्ञात हो जाती है। इस प्राप्त परिणाम को पृथ्वी की मानक परिधि के साथ तुलना करके त्रुटि ज्ञात की जाती है जितनी कम त्रुटि होगी उतना ही स्टीक परिणाम माना जाएगा। पृथ्वी की परिधि का स्टैंडर्ड मान 40075 किलोमीटर है।
पाठयांक 
Group
Group Leader
Gnomon
Shadow
Angle
Yamunanagar Group-1
Aman Kamboj
100 cm
12.2 cm
6°57' = 6.956°
Yamunanagar
Group-2
Simran, Vishvaas 
49.5 cm
5.80 cm
6°40' = 6.683°
Yamunanagar
Group-3
Arun
50 cm
5.7 cm
6°30' = 6.504°
परिणाम इस प्रकार रहे
अमन और उसकी टीम
युग्म टीम एक में पहला प्रयोग किया अमन और उसकी टीम ने सरोजिनी कालोनी में जिनको 100 सेमी शंकु यंत्र की न्यूनतम परछाई प्राप्त हुई 12.2 सेमी और गणना से सूर्य का उन्नयन कोण प्राप्त हुआ 6.95 डिग्री और दूसरी टीम ने प्रयोग किया उज्जैन के जंतर मंतर में जहां परछाई की न्यूनतम लम्बाई प्राप्त हुई शून्य सेमी जिस कारण कोण का मान शून्य प्राप्त हुआ। सूत्र में यह मान प्रतिस्थापित करने पर इस युग्म टीम को पृथ्वी की परिधि 40058 किलोमीटर प्राप्त हुई। इस टीम का त्रुटि प्रतिशत 0.04 प्रतिशत रहा।
सिमरन और विश्वास और उसकी टीम
युग्म टीम दो में पहला प्रयोग किया सिमरन और विश्वास और उसकी टीम ने इंदिरा गार्डन कालोनी में जिनको 49.5 सेमी के शंकु यंत्र पर न्यूनतम परछाई प्राप्त हुई 5.8 सेमी और गणना से सूर्य का उन्नयन कोण प्राप्त हुआ 6.68 डिग्री और इस युग्म की दूसरी टीम ने प्रयोग किया उज्जैन से 30 किलोमीटर उत्तर दिशा में महिदपुर तहसील के गावं डोंगला की डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला, जहां परछाई की न्यूनतम लम्बाई प्राप्त हुई शून्य सेमी जिस कारण कोण का मान शून्य प्राप्त हुआ। सूत्र में यह मान प्रतिस्थापित करने पर इस युग्म टीम को पृथ्वी की परिधि 40041 किलोमीटर प्राप्त हुई। इस टीम का त्रुटि प्रतिशत 0.08 प्रतिशत रहा।
क्या है लाभ?
सिर पर सूर्य
दर्शन लाल ने बताया कि आधुनिक विज्ञान ने भौतिकवाद को बढ़ाया है मनुष्य को अपने प्राचीन विज्ञान को नहीं भूलना चाहिए क्योंकि प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों व खगोलविदों ने साधनों के आभाव में वर्षों के प्रायोगिक अनुभव से काल गणना करना सीखा और समस्त विश्व को भी सिखाया यदि ऐसा है तभी तो विदेशों से खगोलविद आज भी स्टीक काल गणना के लिए उज्जैन आते है। इस बार भी इस दुर्लभ दृश्य के गवाह बनने के लिए देश भर के खगोल वैज्ञानिकों के साथ आम लोग भी उज्जैन जिले के इस छोटे-से गांव में उमड़ पड़े।  22 जून से सूर्य सायन कर्क राशि में प्रवेश करके दक्षिण की ओर गति करना प्रारंभ कर देगा। ज्योतिष शास्त्र की जुबान में इसे सूर्य का दक्षिणायन होना कहा जाता है। इसके बाद रात के मुकाबले दिन लगातार छोटे होते जाते हैं। मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग करोडो रुपयों की लागत से उज्जैन जिले में कर्क रेखा पर भारतीय काल गणना केन्द्र पद्म श्री डा. विष्णु श्रीधर वाकणकर वेधशाला व शोधकेन्द्र का निर्माण करवा रहा है। यहीं पर कोणार्क सूर्य मंदिर की तर्ज पर विशाल सूर्य मंदिर निर्माण का प्रस्ताव भी है। दोनों के बन जाने पर उज्जैन जिला विश्व के नक़्शे पर एक और कुम्भ मेले ‘खगोलविदो का कुम्भ’ के लिए विश्वविख्यात हो जाएगा।
शून्य परछाई की स्थिति
साल में चार बार इस प्रयोग से पृथ्वी की परिधि ज्ञात करके यमुनानगर जिले के 120 बच्चे लाभान्वित होते हैं और शुद्ध देसी काल गणना विधि के ज्ञानवर्धन से लाभान्वित होते हैं व उनके मन में प्राचीन भारतीय विज्ञान के प्रति सम्मान व जिज्ञासा उत्पन्न होती है।
अगली  पोस्ट में अंतर्राष्ट्रीय इरेटोस्थनीज़ संस्था के सदस्य देशो के बच्चों के साथ परिणाम इस प्रकार रहे, 
अखबारों में खबर .....
 प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा