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Wednesday, October 24, 2012

विश्वास और तुषार के ग्रुप ने मापी सबसे सही पृथ्वी की परिधि Results of Circumference of Earth Experiment

प्रयोग व कार्यशाला में कक्षा पांच से ग्याराह तक के चुनिन्दा विद्यार्थी
विश्वास और तुषार के ग्रुप ने मापी सबसे सही पृथ्वी की परिधि Results of Circumference of Earth Experiment
विश्वास, तुषार व अंकुर की टीम
23 सितम्बर को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर mukund lal public school yamunanagar में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया था। इस प्रयोग व कार्यशाला में कक्षा पांच से ग्याराह तक के चुनिन्दा विद्यार्थियों को इरैटोस्थनीज प्रयोग के संदर्भ में उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति सूत्रों, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं, पृथ्वी की परिधि, पृथ्वी की त्रिज्या ज्ञात करने की सैद्धान्तिक व प्रायोगिक जानकारियाँ दी गई थी। इस प्रयोग में यमुनानगर जिले के कुल 55 विद्यार्थियों ने 11 समूहों में भाग लिया था। इन विद्यार्थियों के प्रयोगों से प्राप्त आंकड़ों को  प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनीज प्रयोग संस्था को फ्रांस भेजा गया था जहां इन सभी समूहों के आंकड़ों को अन्य देशों से प्राप्त आंकड़ों के साथ सम्मिलित गणना करके पृथ्वी की परिधि ज्ञात की गयी थी।

प्रयोग के परिणाम का ज्यामितीय आरेख
क्लब समन्वयक दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक ने बताया कि इस प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय परिणाम प्राप्त हो चुके हैं जिसमे सबसे शुद्ध गणना के आधार पर मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल के समूह संख्या नवम के छात्र विश्वास, तुषार व अंकुर को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है इन तीनो छात्रों व इनकी मार्गदर्शक विभागाध्यक्ष डाक्टर ममता वर्मा को अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनीज संस्था फ्रांस की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय इ-ट्विनिग़ प्रमाणपत्र से नवाजा जाएगा।

मलेशिया के कुआनतान के एस ऍम के आलोर आकार
इस बार दुनिया भर के विभिन्न देशों के स्कूल कालेज के विद्यार्थियों ने सितम्बर विषुव के दिन इस प्रयोग को किया, जिसमे मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल के तुषार व विश्वास इस समूह को मलेशिया के कुआनतान के एस ऍम के आलोर आकार स्कूल के विद्यार्थियों की गणना के साथ सम्मिलित किया गया। कुआनतान की यमुनानगर से अक्षांशीय दूरी 2922 किलोमीटर है। 26.6 डिग्री सूर्यकोण के अंतर के साथ दोनों स्कूलों के सम्मिलित गणना से पृथ्वी की परिधि 39,546 किलोमीटर प्राप्त हुई, जिसकी मानक पृथ्वी की परिधि 40,075 किलोमीटर से 1.3 प्रतिशत त्रुटि दर्ज की गयी।

बच्चों में आधारभूत विज्ञान संकल्पनाओ को प्रायोगिक तौर पर हाथ से करके देखने के लिए प्रयोग करने वाले सी वी रमन विज्ञान क्लब के इन विजयी सदस्यों को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती शशि बाठला, प्रयोग के राष्ट्रीय संयोजक श्री दीपक कुमार  व  प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक मिस्टर एरिक वायसी ने बधाई और शुभकामनाये दी हैं।

अगला प्रयोग 21 दिसम्बर सबसे छोटे दिन (विंटर सॉल्स्टाइस) को किया जाएगा।
अखबार अमर उजाला में .......
              

Friday, September 21, 2012

22 व 23 सितम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने की तैयारियां जोरों पर measurement of circumference of earth on september equinox

22 व 23 सितम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने की तैयारियां जोरों पर Measurement of Circumference of Earth on September Equinox



22 सितम्बर को होंगें दिन और रात बराबर



सूर्य अपनी सामयिक चाल में आकाश से, वर्ष में दो बार, 21 मार्च और 23 सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है। इन दिनों भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह के एकदम लम्बवत पड़ती हैं।

पृथ्वी 24 घंटे में अपनी धुरी पर एक बार घूमने के साथ ही एक साल में सूरज का भी चक्कर पूरा कर लेती है। लेकिन अयनांश की गणना के कारण एक दिन कभी आगे तो कभी पीछे हो जाता है।  इसी कारण दिन -रात की बराबर अवधि कभी 22 सितम्बर और कभी 23 सितम्बर को आ जाती है।  इस वर्ष अयनांश की गणना के कारण यह दशा 22 सितम्बर को बन रही है। 22-23  सितम्बर के दिन को विषुव या इक्विनॉक्स कहा जाता है। आज दिन और रात दोनों का समय बराबर होगा।  दिन 12 घंटों का तो रात भी 12 घंटों की होगी। 
मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल


इस अवसर पर सी.वी.रमण विज्ञान क्लब के सदस्य मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल में पृथ्वी की परिधि नापने का प्रयोग 23 सितम्बर को करेंगे। जिसमे 10 समूहों में बच्चे विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल, स्कूल अध्यापको के मार्गदर्शन में पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग की आवश्यक गणनाएं करेंगें।  


इस दिन सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण दिन-रात बराबर होंगे। भूमध्य रेखा पर स्थित प्रदेशों में सूर्योदय और सूर्यास्त अपेक्षाकृत अधिक देर से होता है। ऐसे स्थानों पर वर्ष भर, सैद्धांतिक रूप से, १२ घंटों के दिन और रात होते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में दिन का समय मौसम के अनुसार बदलता रहता है। जब इसके उत्तर में शीतकाल में दिन छोटे और रात लंबी होती हैं, तब इसके दक्षिण में ग्रीष्मकाल में दिन लंबे व रातें छोटी होती हैं। वर्ष के दूसरे छोर पर मौसम दोनों गोलार्धों में एकदम उलटे होते हैं। किंतु भूमध्य रेखा पर दिनमान के साथ साथ मौसम भी समान ही रहता है। भूमध्य रेखा 14  देशों के स्थल या जल से होकर जाती है। पृथ्वी की सतह पर अधिकतर भूमध्य रेखीय क्षेत्र समुद्र का भाग है। भूमध्य रेखा के आस-पास के स्थान अंतरिक्ष केंद्र के लिए अच्छे होते हैं।  इक्वाडोर देश भूमध्य रेखा पर है  जिसके आधार पर ही इस देश का नाम रखा गया है भूमध्य रेखा इक्वाडोर को दो भागों में विभाजित करती है। इसकी राजधानी क्विटो और सबसे बड़ा शहर गुआयाकिल है। जहां दोपहर को सूर्य एकदम लम्बवत होगा और परछाई शून्य हो जायेगी।

प्रगति विज्ञान संस्था
गौरतलब है कि प्रगति विज्ञान संस्था मेरठ और इरेटोस्थनीज़ संस्था फ्रांस के संयुक्त तत्वाधान पूरे भारत में बीस से भी अधिक स्थानों पर 45  टीम की 22 व 23 सितम्बर को पृथ्वी की परिधि नापने की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। पृथ्वी की परिधि यानि अर्थ एक्क्स्पेरिमेंट के राष्ट्रीय संयोजक दीपक शर्मा जी ने बताया कि वर्षों की अथक मेहनत के बाद पूरे भारत में एक समूह बन कर तैयार हो चुका है जो कि अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ मिल कर लगभग 2300 वर्ष पुरानी 
Eratosthenes
इरेटोस्थनीज़ विधि से पृथ्वी की परिधि ज्ञात करेगा। दीपक शर्मा जी ने यह भी बताया कि यह प्रयोग वर्ष में चार बार किया जाता है मार्च विषुव, जून अयनांत, सितम्बर विषुव, दिसम्बर अयनांत चार ऐसी सूर्य स्तिथियां हैं जब सूर्य भूमध्य रेखा, कर्क रेखा और मकर रेखा पर होता है। इस बार 22  व 23 सितम्बर 2012 को शरद विषुव को सूर्य भूमध्य रेखा पर होगा और यदि कोई व्यक्ति भूमध्य रेखा पर खड़ा हो तो सूर्य उसे सीधे अपने सिर के ऊपर दिखाई देगा और एक निश्चित समय पर उस  की परछाई शून्य हो जायेगी। इसका यह भी अर्थ है कि आधा ग्रह पूरी तरह प्रकाशित होता है और इस समय दिन और रात लगभग बराबर होते हैं। सूर्य अपनी सामयिक चाल में आकाश से, वर्ष में दो बार, २१ मार्च और २३ सितंबर को भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर से गुजरता है। इन दिनों भूमध्य रेखा पर सूर्य की किरणें पृथ्वी की सतह के एकदम लम्बवत पड़ती हैं। भूमध्य रेखा पर स्थित प्रदेशों में सूर्योदय और सूर्यास्त अपेक्षाकृत अधिक देर से होता है। ऐसे स्थानों पर वर्ष भर, सैद्धांतिक रूप से, १२ घंटों के दिन और रात होते हैं, जबकि भूमध्य रेखा के उत्तर और दक्षिण में दिन का समय मौसम के अनुसार बदलता रहता है। जब इसके उत्तर में शीतकाल में दिन छोटे और रात लंबी होती हैं, तब इसके दक्षिण में ग्रीष्मकाल में दिन लंबे व रातें छोटी होती हैं। वर्ष के दूसरे छोर पर मौसम दोनों गोलार्धों में एकदम उलटे होते हैं। किंतु भूमध्य रेखा पर दिनमान के साथ साथ मौसम भी समान ही रहता है।
भूमध्य रेखा

भूमध्य रेखा 14  देशों के स्थल या जल से होकर जाती है। पृथ्वी की सतह पर अधिकतर भूमध्य रेखीय क्षेत्र समुद्र का भाग है। भूमध्य रेखा के आस-पास के स्थान अंतरिक्ष केंद्र के लिए अच्छे हैं गुयाना अंतरिक्ष केंद्र, कौरोऊ, फ्रेंच गुयाना भूमध्य रेखा पर ही स्थित है। कीनिया गणतंत्र पूर्वी अफ्रीका में भूमध्य रेखा पर स्थित है। इक्वाडोर देश भूमध्य रेखा पर है  जिसके आधार पर ही इस देश का नाम रखा गया है  भूमध्य रेखा इक्वाडोर को दो भागों में विभाजित करती है। इसकी राजधानी क्विटो और सबसे बड़ा शहर गुआयाकिल है।

इस बार सितम्बर विषुव पर भारत के राज्यों हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, जे एंड के, गुजरात, असम, महाराष्ट्र  राज्यों में पृथ्वी की परिधि को नापने का प्रयोग एक साथ 22  व 23 सितम्बर को किया जा रहा है  अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी के रूप में इस बार इस प्रयोग में अंतर्राष्ट्रीय सहयोगी फ्रांस से अंतर्राष्ट्रीय सयोंजक एरिक वैसी के साथ अर्जेंटाइना, स्पेन, मलेशिया, जर्मनी, कनाडा,स्लोवेनिया, मोरक्को, रोमानिया, सर्बिया, माल्टा, इजिप्ट व यू एस ए देशों से बच्चे भाग लेंगें। इसके बाद परिणामों की गणना करके अंतर्जाल पर भी उपलब्ध कराया जायेगा, जिस में सभी समूह अपने अपने प्रयोग से प्राप्त आकडों को घोषित करेंगे और फिर इन आंकड़ों का प्रयोग करके विभिन्न देशों के युग्म बना कर सम्मिलित गणना की जायेगी और परिणाम निकाले जायेंगे।
प्रयोग के लिए तैयार बच्चे

दीपक शर्मा जी ने बताया कि इस प्रयोग की कमान विभिन्न राज्यों में उनके राज्य सयोंजक और जिला सयोंजक सम्भालेंगे जिनमे हरियाणा यमुनानगर से दर्शन लाल, यू. पी. बागपत से योगेश कुमार,गाजियाबाद से रोहणी गोले, मेरठ से मतीन अंसारी, पूना से डाक्टर अशोक कुमार, दिल्ली से रंजीता रानी, अश्विन कुमार भट्ट, ओ एन शुक्ल, जम्मू से जफरुल्लाह खान, कश्मीर से जावेद मंसूर, असाम से गणेश, भुज से नागेन्द्र गौड़ जोशी प्रयोग का प्रतिनिधित्व करेंगें। 22 तारीख को बाल चेतना वेबसाईट पर इस प्रयोग का सीधा प्रसारण मेरठ से होगा। 


श्री दीपक शर्मा
इस प्रयोग के इतिहास के बारे में बताते हुए श्री दीपक शर्मा जी ने बताया कि भारत में वो अकेले ही इस प्रयोग को करने चले थे और देखते ही देखते बहुत बड़ी संख्यां में विद्यार्थी, अध्यापक, विज्ञान संचारक, वैज्ञानिक और आमजन उनके साथ जुड़ते चले गये और आज यह स्तिथि है कि पृथ्वी की परिधि को नापने का यह प्रयोग पूरे भारत में एक लोकप्रिय विज्ञान और गणित की गातिविधि बन कर आकर्षण का केन्द्र बन रही है। भारत में उज्जैन देश का वह शहर हैं जो कि कर्क रेखा पर स्थित है और प्राचीनकाल से ही शुद्ध कालगणना के लिए विख्यात रहा है। 21 जून को प्रगति विज्ञान संस्था के कुशल मार्गदर्शन में हरियाणा के यमुनानगर के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल उज्जैन जा कर ये प्रयोग कर चुके हैं जहां के आंकड़ों का प्रयोग करके विश्व समुदाय के साथ आंकड़ो के तुलनात्मक अध्ययन से पृथ्वी की स्टीक परिणाम प्राप्त हुए हैं और नगण्य त्रुटि के साथ मानक परिधि सत्यापित हुई।

अभी  जारी........
अमर  उजाला में ......

 दैनिक भास्कर में .....
 एक अन्य खबर दिल्ली में भी नपेगी परिधि ......


प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा


 

Saturday, August 11, 2012

रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला Two days Workshop on Robotics

रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला लगाई गयी Two days Workshop on Robotics
दिनांक  11 अगस्त 2012
मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल में रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरु, सी॰ वी॰ रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर, रोबोसिस इंडिया संगठन, नई दिल्ली तथा भारतीय भौतिकी शिक्षक परिषद, यमुनानगर के संयुक्त तत्वाधान में मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल, सरोजिनी कालोनी यमुनानगर में प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाटला के मार्गदर्शन में रोबोटिक्स पर दो दिवसीय कार्यशाला का आरम्भ हुआ। 
कार्यक्रम का आरम्भ मुख्य अतिथि यमुना इंस्टीच्यूट ऑफ इंजीनियरिंग ऍण्ड टैक्नोलॉजी के ऍप्लाइड साइंसिज विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर के॰ सी॰ ठाकुर ने दीप जलाकर किया। उन्होंने रोबोटिक्स में अभियांत्रिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला। क्लब सचिव दर्शन लाल बवेजा ने वर्कशॉप की रूप-रेखा की जानकारी देते हुये आधुनिक विज्ञान में रोबोटिक्स के महत्व पर प्रकाश डाला। सूचना प्रोद्यौगिकी विशेषज्ञ श्रीश बेंजवाल ने रोबोटिक्स में कम्प्यूटर विज्ञान के प्रयोग की जानकारी दी।
इस कार्यशाला में दिल्ली से आये विशेषज्ञ कक्षा 10 से 12 के विद्यार्थियों को दो दिनों तक रोबोटिक्स का सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक ज्ञान देंगे और बच्चों से रोबोट के मॉडल भी बनवाएंगे। विशेष तौर पर तैयार की गयी रोबोटिक किट्स से बच्चे रोबोट का क्रियात्मक मॉडल तैयार करेंगे। रोबोट शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को प्रारंभिक स्तर के रोबोट बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जायेगा। उम्मीद है कि इस रोबो शिक्षा कार्यशाला से बच्चों की मानसिक क्षमता बढ़ेगी। 
दिल्ली के रोबोसिस इंडिया संगठन के यश कुमार, मुहम्मद सादिक व सुनील कुमार इस कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षण अधिकारी हैं।
क्लब प्रवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि इस दो दिन की कार्यशाला में विभिन्न स्कूलों के कुल 35 छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। यहाँ से चुने गए कुछ छात्र आगामी चरण की कार्यशाला में प्रवेश करेंगे। कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिए जायेंगे। इस अवसर पर प्रोफेसर के॰ सी॰ ठाकुर, डॉ॰ चन्द्रशेखर शर्मा, संजय शर्मा, श्रीश बेंजवाल, डॉ॰ ममता वर्मा, साधना मेहता, देवेन्द्र कुमार, रविन्द्र पुँज आदि का योगदान सराहनीय रहा।
अखबारों  में ......
दिनांक  12 अगस्त 2012
मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल में दो दिवसीय रोबोटिक्स कार्यशाला संपन्न
आज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजिनी कॉलोनी यमुनानगर में सी. वी.रमण विज्ञान क्लब के सौजन्य से चल रही दो दिवसीय रोबोटिक्स कार्यशाला सम्पन्न हुई। इस कार्यशाला में 35 विद्यार्थि
यों और 8 अध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
इस कार्यशाला में छात्रों को रोबोट बनाने सिखाए गए और विभिन्न प्रकार के रोबोटों का प्रदर्शन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला के प्रथम चरण में छात्रों ने रोबोटिक्स का सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्त किया और द्वितीय चरण में स्वयं अपने हाथों से रोबोट बनाए। पाँच–पाँच छात्रों के समूह में कुल सात रोबोट बनाकर उनका क्रियात्मक प्रदर्शन किया गया।
स्कूल की प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाठला ने कहा कि इस तरह के कार्यशालाएँ छात्रों में विज्ञान शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने में सहायक साबित होती हैं। भविष्य में हमारे जीवन में रोबोटों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी और हमारे दैनिक जीवन के विभिन्न कार्य रोबोटों द्वारा ही संचालित किए जाएँगे। यातायात, अन्तरिक्ष विज्ञान, चिकित्सा, खनन, रक्षा, व्यावसायिक कार्यों, स्वचालित वितरण प्रणालियाँ रोबोटों द्वारा ही संचालित होंगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में चयनित होने वाले छात्र आगामी चरण की कार्यशाला में प्रवेश करेंगे।
प्रशिक्षण चार समूहों में दिया गया।
समूह संख्या 1


समूह संख्या 2
समूह संख्या 3
समूह संख्या 4
दिल्ली से आए प्रशिक्षण अधिकारियों यश कुमार, मुहम्मद सादिक तथा सुनील कुमार ने रोबोटिक्स की सैद्धान्तिक एवं प्रायोगिक जानकारी दी। रोबोट मॉडलों का डेमो भी दिखाया गया।
रोबोट शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को प्रारंभिक स्तर के रोबोट बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया। छात्रों ने विशेष तौर पर तैयार की गई रोबोटिक किट्स से रोबोट के क्रियात्मक मॉडल तैयार किए।
कार्यशाला के समापन पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर के सी ठाकुर, चन्द्रशेखर शर्मा तथा डॉ. ममता वर्मा द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर दर्शनलाल बवेजा, श्रीश बेंजवाल, साधना मेहता, देवेन्द्र कुमार आदि का योगदान सराहनीय रहा।
अखबारों  में .....
अमर उजाला
दैनिक भास्कर

प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा