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Tuesday, December 27, 2016

राज्य स्तरीय २४वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस State Level 24th NCSC


राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (नेशनल चिल्ड्रन्स साइंस कांग्रेस) 2016-17 का राज्य स्तरीय आयोजन – उद्घाटन सत्र
विद्यालयीन छात्र-छात्राओं को भविष्य में वैज्ञानिक शोधकार्यो हेतु पृष्ठभूमी तैयार करने तथा उनकी वैज्ञानिक चेतना को जागृत कर उनकी वैज्ञानिक अभिरूचि को उजागर करने उसे पहचानने तथा उनकी वैज्ञानिक संकल्पनाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करने के लिए भारत सरकार के विज्ञान एंव प्रोद्योगिकी विभाग, राष्ट्रीय विज्ञान एंव प्रोद्योगिकी एंव संचार परिषद नई दिल्ली, हरियाणा विज्ञान एंव प्रोद्योगिकी परिषद पंचकुला एवं हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सयुंक्त तत्वाधान मे जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांफ्रेस का आयोजन किया जाता है। इस कार्यक्रम में 10 से 17 वर्ष के बच्चे (बाल वैज्ञानिक) भारत सरकार के विज्ञान एंव प्रोद्योगिकी विभाग द्वारा दिये गये मुख्य विषय अन्तर्गत विभिन्न उप-विषयों के अंतर्गत किसी भी स्थानीय समस्या पर अपने शोध पत्र तैयार कर उसका प्रस्तुतीकरण करते हैं। 
इस कार्यक्रम की मुख्य विशेषता यह हैं कि इसमे किसी प्रकार के प्रतिदर्श (माडल) नही बनाये जाते हे तथा सिर्फ स्थानिय समस्याओं पर ही सर्वेक्षण, केस स्टडी व प्रयोग आधारित कार्य पर आधारित विधियों से शोघ पत्र तैयार कर उसका प्रस्तुतीकरण पोस्टर, चार्ट, ट्रान्सपेरेन्सी व पीपीटी के सहयता से किया जाता है। इस कार्यक्रम मे परियोजना बनाने तथा शोध कार्य को किस प्रकार सम्पन्न करवाया जाए व विषय-उपविषय की संपूर्ण जानकारी के लिए राज्य संसाधन कार्यशाला का आयोजन प्रत्येक वर्ष के जून माह में किया जाता है तथा इसी की निरन्तरता में जिला स्तरीय मार्गदर्शक अध्यापक कार्यशाला का आयोजन जुलाई माह तक किया जाता है। 
इन कार्यशालाओ में जिले के सभी विद्यालयों के विज्ञान शिक्षक-शिक्षिका या प्रवक्ता भाग लेते हैं। वर्ष 2016 एवं 2017 हेतु यह परियोजनाए भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्यागिकी विभाग द्वारा घोषित मुख्य विषय ‘‘ संपोषणीय विकास के लिए विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार‘‘‘ अन्तर्गत उप-विषय 1.प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, 2.खाद्य एवं कृषि, 3.ऊर्जा, 4. स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण, 5.जीवन शैली एवं जीविका 6. आपदा प्रबंधन तथा 7.प्राचीन ज्ञान प्रणाली के अन्तर्गत विभिन्न शीर्षकों पर राज्य के 20 जिलों से 117  बाल वैज्ञानिकों ने राज्य स्तरीय आयोजन में महर्षि मार्कण्डेश्वर विश्वविद्यालय, मुलाना, जिला अम्बाला में भाग लिया। इस बाल विज्ञान समेलन का उद्घाटन 14 नवम्बर को हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री पी.के. दास (आईएएस) ने दीप जला कर किया। 15 नवम्बर को बाल विज्ञान समेलन का समापन 15 नवम्बर को हरियाणा विज्ञान एंव प्रोद्योगिकी परिषद, पंचकुला के निदेशक श्री राजीव रंजन (आईएएस) ने विजेताओं और प्रतिभागियों को पदक व पुरस्कार वितरित करके किया।
24वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (राज्य स्तरीय) का उद्घाटन 14 नवम्बर 2016 को हरियाणा विद्यालय शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री पी.के. दास (आईएएस) ने किया। श्री दास ने सर्वप्रथम एम एम यूनिवर्सिटी मुलाना जिला अम्बाला के यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग कालेज कैम्पस में हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यकर्ताओं द्वारा लगाई गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। चमत्कारों का पर्दाफाश प्रदर्शनी में श्री ब्रह्म प्रकाश सैनी ने विभिन्न तथाकथित चमत्कार करके दिखाए और साथ ही उनका पर्दाफाश भी किया और उन चमत्कारों के पीछे के विज्ञान को भी समझाया। 
हरियाणा विज्ञान मंच के कार्यकर्ता राजेश कुमार और सीता राम द्वारा लगाई गयी पुस्तक प्रदर्शनी सह विक्रय केंद्र का अवलोकन किया जहां विज्ञान मंच, एकलव्य भोपाल समेत बहुत से विज्ञान प्रकाशकों की विज्ञान साहित्य व अन्य पुस्तकों का अवलोकन किया। श्री वेदप्रिय ने आरिगेमी कार्नर लगाया। श्री सतबीर नागल और श्री महावीर नरवाल ने मुख्य अतिथि को प्रदर्शनी का अवलोकन करवाया। 
हरियाणा विज्ञान मंच के यमुनानगर जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा द्वारा लगाए गए विज्ञान गतिविधि स्टाल का भी अवलोकन किया। इस स्टाल पर उन्होंने विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल द्वारा बनायी व विकसित की गयी कम लागत/शून्य लागत की पाठ्यक्रम आधारित विज्ञान मॉडल्स को देखा। श्री बवेजा ने बताया की ये विज्ञान गतितिविधियां स्थानीय उपलब्ध सामग्री से बहुत कम लागत से बनायी गयी हैं जिन्हें मेरे स्कूल के बच्चे भी बनाते हैं और अपने साइंस बाक्स में संग्रहित करते हैं। वहां मुख्य अतिथि ने बच्चों द्वारा बनाई गयी हारबेरियम फार्इल  और डाक टिकेट संग्रह (फिलेटली) व विज्ञान स्क्रैप बुक्स का भी अवलोकन किया।   
श्री दास ने दीप प्रज्वलन के पश्चात अपने सम्बोधन में उपस्थित बाल वैज्ञानिकों,  मार्गदर्शक अध्यापकों, जिला समन्वयकों, हरियाणा विज्ञान मंच और भारत  ज्ञान विज्ञान समिति के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि.......
आज मुझे इस विज्ञान के कार्यक्रम में शामिल होने पर बहुत ख़ुशी हो रही है क्यूंकि आज का दिन बहुत ख़ास हैं आज चार चार विशेष आयोजन एक साथ हैं। आज का दिन कार्तिक पूर्णिमा का दिन है जिस दिन दार्शनिक, योगी, धर्म सुधारक, समाज सुधारक, कवि, देशभक्त और विश्वबंधु गुणों के स्वामी श्री गुरुनानक देव जी का जन्म हुआ था। आज ही भारत के पहले प्रधानमंत्री व बच्चों के चाचा नेहरु का भी जन्मदिन है और बाल दिवस भी। आज ही जहां का मैं हूँ यानि कटक (ओडिशा) में बाली यात्रा के प्रारम्भ का दिवस भी है बाली यात्रा कार्तिक पूर्णिमा के दिन शुरू होती है जो बाली, सुमात्रा, श्रीलंका व श्याम आदि द्वीपों के साथ हमारे (भारत) समुद्री व्यपार से सम्बंधित थी। पहले इंजिन नहीं था तो जलयान हवा की दिशा में पवन बल द्वारा पाल से चलते थे और नाविकों को पता होता था कि आज के दिन से ही वायु हमारे अनुकूल होगी और वो यात्रा शुरू करते थे, यह उस समय का विज्ञान ही तो था जो काल गणना व अनुभव आधारित ज्ञान का संग्रह था जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता रहा और आज भी जारी है। 
 आज जो आप सब महानुभाव यहाँ एकत्र हुए हो और जो कर रहे हो ये भी एक उत्सव है एक सभ्यता का, एक ज्ञान का और एक संभावना का कि जिसमे हम अपने ज्ञान के दायरे को और भी समृद्ध कर सकते हैं। आज के दिन एक नहीं चार सम्मेलन एक साथ हो रहे हैं जिसके लिए मैं खुद को खुशकिस्मत समझता हूँ और आप सब को मैं बधाईयाँ देता हूँ।
मैं बहुत वर्षों से विज्ञान मंच के साथ जुड़ा हुआ हूँ जब पानीपत में साक्षरता मिशन पानीपत की चौथी लड़ाई के रूप में लड़ी जा रही थी तब मैं इस संस्था के साथ मिलकर कमोबेश कुछ न कुछ काम करता रहा था। हम हर रोज अपने आदर्शों के क्रियान्वन की लड़ाई लड़ते हैं किसी दिन हम जीत जाते हैं किसी दिन हम हार जाते हैं, जिस दिन हम जीत जाते है खुश होते हैं और जिस दिन हम हार जाते हैं मायूस हो जाते हैं। अगले ही दिन फिर नयी ऊर्जा के साथ फिर कार्य में लग जाते हैं ये हमारा अपने आदर्शों पर विशवास ही होता है जो हमे हारने नहीं देता है। पिछले 30 वर्षों से यह संस्था (भारत ज्ञान विज्ञान समिति) विज्ञान के लिए, ज्ञान के आलोक के लिए अंधविश्वास के विरुद्ध, रूढ़ीवाद के विरुद्ध लड़ती रही है। यह संस्था अपने आदर्श के प्रति, विज्ञान के प्रति निष्ठा का एक परिचय है। एक प्राचीन परिभाषा के अनुसार 'आदमी और जानवर में मुख्य फर्क उसकी आकृति या रंग से नहीं हैं।'
आदमी और जानवरों में भिन्नता का अंतर यह है कि आदमी एक तर्कशील एनिमल (जानवर) है जिसके पास तर्क है, तार्किक शक्ति है। तर्क मात्र समाजविज्ञान का हिस्सा नहीं है, तर्क सभी विज्ञानों का रेखांकित हिस्सा है। विज्ञान के अपने सार्वत्रिक नियम होते हैं जो अपवादों को छोड़ कर पूरी धरती पर लागू होते हैं। 
संस्था द्वारा चमत्कारों के के खिलाफ जागरूकता संचार की प्रशंसा करते हुए श्री पी की दास ने कहा कि चमत्कार क्या हैं? चमत्कार और विज्ञान परस्पर विरोधी विचार हैं। जब किसी बच्चे को चुम्बक पहली बार दिखाया जाता है और उस पर लोहे का पैसा चिपक जाता है तो यह अवस्था उसके लिए तब तक मिरेकल है जब तक कोई भी पारम्परिक विज्ञान उसे यह ना बता दे कि यह चुम्बक का गुण ही है कि वह कुछ धातुओं को अपनी और आकर्षित करती है। यह बताने वाला पारम्परिक ज्ञान इतिहास, भौतिकी या कोई अर्जित अनुभव या वैज्ञानिक सिद्धांत हो सकता है। प्रकृति में कोई ऐसी घटना घटित होती है जो कि अद्भुद है, नयी है, अभी तक ना खोजी गयी प्राकृतिक घटना है, तो उसको क्या कहा जाएगा? प्रथम दृष्टया उसको तब तक चमत्कार कहा जाएगा जब तक हमारा तार्किक और प्रश्न उठाने वाला दिमाग उस सत्य की खोज नहीं कर लेगा। विज्ञान यहीं से शुरू होता है जब मैं यह कहूँ कि 'नहीं मैं इसको स्व अनुभव से जानूंगा'। वैज्ञानिक दिमाग, तार्किक शक्ति और सिलसिलेवार खोजी व विश्लेषण विधि के प्रयोग चमत्कारों की व्याख्या हो जाती है। अपने सम्बोधन में जब आपने श्राद्ध और काली बिल्ली का किस्सा सुना कर मनगढ़ंत तरीके से ऊपजी घटना को एक परम्परा बनने की व्याख्या की तो उपस्थित सभी श्रोता लोटपोट हो गए। ओडिशा में बहुत पहले एक किसान ने जब अपने पिता की बरसी पर कौवों के लिए छत पर भोजन परोसा तो उस भोजन को एक काली बिल्ली खा जाती थी। उस किसान ने काली बिल्ली को टोकरी के नीचे कैद करके कौवों को भोजन परोसा और हर फिर वह वर्ष वह ऐसे ही करने लगा, बाकी गांव वालों ने भी इस समस्या से निजात पाने के लिए इसको दोहराया। उनके वंशजों ने भी यही किया कालान्तर मे जब काली बिल्लियाँ कम होने लगी और अब लोग बरसी के अवसर पर एक दिन पहले आसपास के गावों से काली बिल्ली मांग कर लाकर उसे टोकरी के नीचे कैद करके कौवों को भोजन परोसते रहे, अब यह वहां का एक रीतिरिवाज बन चुका है। ये मैंने क्यूँ कहा? हर एक प्रथा युक्ति संगत नहीं है, ये हमारे समाज से जुड़ी एक प्रथा है जिसका प्रचलन जारी और उस में नयी बातों का योग हुआ है। यह प्रथा विज्ञान नहीं हो सकती है? हम विज्ञान की शिक्षा लेते हैं वो केवल एमएससी या पीएचडी की डिग्री पाने के लिए नहीं है जब तक हम उसका उपयोग समाजोत्थान और कल्याण के लिए न करें। तुम सब जो बाल वैज्ञानिक और मार्गदर्शक अध्यापक यहाँ आये हो आपके आने का मकसद यदि यह है कि आप एक अच्छा प्रोजेक्ट बना लो और प्रस्तुत करके प्रथम आओ और इनाम जीत लो। नहीं, आपकी जिम्मेदारी यह है कि क्या आपके आसपास सब कुछ वैज्ञानिक तरीके से हो रहा है? क्या साइंटिफिक टेम्परामेंट विकसित हो चुका है? आपका उसकी वृद्धी के लिए क्या प्रयास है ? यदि हम ऐसा प्रयास नहीं करेंगें तो  होगा ये कि  हम खुद को तो उपर उठाते रहेंगें और हम 21वीं शताब्दी में होंगें और कुछ लोग अभी 18वीं शताब्दी में होंगे। अगर हम ऐसा बर्ताव करते रहेंगें तो ‘सबका देश हमारा देश नहीं होगा’ कुछ का देश अलग और हमारा देश अलग तरह का होगा। हमे खोजी प्रवृती का होना चाहिए। जरूरी नहीं है की बड़ी बड़ी युनिवर्सिटीज और भारी डिग्रियों में ही साइंस हो, ‘वहां चलो जहां अभी तक कोई नहीं गया’ अन्वेषण और खोजी प्रवृति के होते कोई अनपढ़ भी साइंटिफिक हो सकता है। कुछ नया करना जिसमे कोई खोज समाहित हो वह विज्ञान है। भारत में इंजीनियर बहुत अच्छे तैयार होते हैं जो सामान बहुत अच्छा बनाते और बेचते हैं परन्तु ये वो ही सामान बनाते जो पहले से बन रहा है कुछ नया नहीं बनाते है। हमे ऐसा माहौल बनाना है जहां हम कुछ नया बना सके और नहीं तो कम से कम वैज्ञानिक सोच तो अपना सकें। प्यारे बच्चों जो तुम आज यहां एकत्र हुए हो तुम बहुत खुशनसीब हो तुम्हे अवसर मिला है की तुम कोई ऐसा कार्य कर सको और अपने अंदर की सम्भावना को तलाश कर सको। हर किसी को ये मौका नहीं  मिलता और मुझे ये उम्मीद है कि आप इस मौके को जाया नहीं जाने दोगे। तुम अपनी उड़ान पूरे मन से भर सकोगे। समाज का विज्ञानोत्थान कर सकोगे। आप अपने समाज को साइंटिफिक टेम्पर से चलाने के लिए तैयार कर सको। कोई भी क्रान्ति एक दिन में नहीं होती यह एक धीमी प्रक्रिया है हो सकता है अभी आप के दिमाग में कोई आईडिया हो जिसे आप धीरे धीरे एक दिन साकार करलो और वो दिन आप किसी विश्वविद्यालय में हों और कोई क्रांतिकारी खोज कर दो। वैज्ञानिक क्रान्ति हांडी में चावलों के पकने की तरह एक धीमा परन्तु ग्रेज्युअल  प्रोसेस है जिसका पता तभी लगता है जब चावल पक चुके होते हैं। बच्चों तुम्हारे अंदर बहुत सम्भावना है मैं उन सम्भावनाओं को देख पा रहा हूँ। तुम्हारे चेहरे साइंटिफिक टेम्पर से चमक रहे हैं। कोई भी गतिविधि हो वो एन्जॉयफुल होनी चाहिये, उसमे मजा आना चहिये। जरूरी नहीं है कि हर किसी को हर एक काम में मजा लेकिन जिस काम में मजा आये उसे वह दिल लगा कर करे। आज तुम जिस विज्ञान गतिविधियों में शामिल हुए हो निसंदेह इसमें आपको मजा आता है इस लिए प्यारे बच्चों आप आनन्दमयी गतिविधियों में शामिल होकर अपने जीवन को आनन्दमय बनाओ यही मेरी आपको शुभकामनाएं हैं। धन्यवाद
श्री पी. के. दास के इस प्रेरणादायी सम्बोधन के दौरान बच्चों और अध्यापकों ने बहुत बार करतल ध्वनि से अपनी ख़ुशी का इजहार किया। उनके चेहरों पर वैज्ञानिक चेतना नवजागरण की खुशी झलक रही थी। 
श्री दास के आगमन से राज्य स्तरीय बाल विज्ञान सम्मेलन में नयी ऊर्जा का संचार हुआ। इसके लिए हम सभी राज्य कार्यकारणी, जिला समन्वयक, मार्गदर्शक अध्यापक और बाल वैज्ञानिक माननीय श्री पी के दास का शुक्रिया अदा करते हैं। 






Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
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जिला स्तरीय २४वीं बाल विज्ञान कांग्रेस Distt level 24th CSC-2016

जिला स्तरीय २४वीं बाल विज्ञान कांग्रेस Distt level 24th CSC-2016
रुशाली, ईशान, कनिका, रुकसाना, स्नेहा, प्रभनूर राज्य स्तर के लिए चयनित
विज्ञान प्रतियोगिता में बेटियों ने राज्य स्तर के लिए चयनित होकर बाजी मारी और जीते स्वर्ण पदक
सेक्टर 17 स्थित स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल जगाधरी में चौबीसवीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में जिले भर के 178 बाल वैज्ञानिकों ने भाग लिया। जिले के विभिन्न ग्रामीण व शहरी विद्यालयों के बाल वैज्ञानिकों ने 'टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनिकी और नवाचार' मुख्य विषय पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये। 
बाल वैज्ञानिकों ने 9 उपविषयों पर प्रोजेक्ट कार्य किया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्या अनीता काम्बोज, प्रदीप सरीन ने दीप जला कर किया। अनीता काम्बोज ने अपने सम्बोधन में कहा की विज्ञान प्रदर्शनियों और विज्ञान गतिविधियों से विज्ञान की जटिलताओं को समझने व हाथ से बच्चों को प्रयोग करके सीखने का आंनद प्राप्त होता है। जिला समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि विज्ञान कांग्रेस के साथ साथ बहुत सी अन्य विज्ञान गतिविधियों का भी संचालन किया गया जिसमें बाल वैज्ञानिकों ने विलुप्त हो चुके व खतरे में पड़े जीवों के मॉडल्स से जैव विकास के प्रक्रम को समझाया। 
बच्चों ने अपने डाक टिकटों का संग्रह, सिक्कों का संग्रह, विज्ञान बॉक्स, विज्ञान माडलों का प्रदर्शन किया। मंच संचालन व इवेंट प्रबंधन गौरव कुमार वालिया ने किया।
हरियाणा विज्ञान मंच के सदस्य सुरेन्द्र गोयल, जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील काम्बोज व राजपाल पांचाल ने बताया कि राज्य स्तरीय आयोजन के लिए विवेकानंद पब्लिक स्कूल सेक्टर 17, होली मदर पब्लिक स्कूल कांसेपुर रोड, मुकंद लाल पब्लिक स्कूल, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पाबनी कलाँ, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय हरिपुर काम्बोज के बाल वैज्ञानिकों ने विजय हासिल की। 
इस आयोजन में पुस्तक प्रदर्शनी, कम लागत की विज्ञान गतिविधियां, चमत्कारों का पर्दाफ़ाश, विज्ञान ड्रामा, विज्ञान प्रदर्शनी, पोस्टर प्रदर्शनी का भी प्रदर्शन किया गया।
मोके पर ज्योतिका डांग, रीना मल्होत्रा, गौरव कुमार, ओम प्रकाश सैनी, सुमन शर्मा, राजपाल पांचाल, राजकुमार धीमान, विकास पुंडीर, श्रीश शर्मा, आर पी गांधी, दीपक शर्मा सहित 32 अध्यापकों ने भी भाग लिया।
अन्य फोटोग्राफ्स 






अख्बार्र में 

 Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
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Saturday, September 03, 2016

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला 24th NCSC Workshop for Teachers

राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला 24th NCSC Workshop for Teachers
विज्ञान गतिविधियाँ बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक - अनीता काम्बोज
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला सम्पन्न,यह बाल विज्ञान सम्मेलन अक्टूबर में होगा  
स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल सेक्टर 17 जगाधरी में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की गाइड टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप आयोजित हुई जिसमे जिले के निजी व राजकीय विद्यालयों के 80 विज्ञान अध्यापकों और प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में राज्य भर से आये विभिन्न विषयों के रिसोर्स पर्सन्स ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को ‘टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीकी और नवाचार’ विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट बनाने के लिए ट्रेंड किया। 
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि भारत सरकार के विज्ञान एवं तकनीकी विभाग द्वारा प्रायोजित इस विज्ञान सम्मेलन में बालक अपने शोधपत्रों को साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आव्हान किया की प्रत्येक विज्ञान अध्यापक/प्राध्यापक को विज्ञान शिक्षण के साथ साथ विज्ञान संचारक भी बन जाना चाहिए। देश को विज्ञान चेतना की अति आवश्यकता है। शिक्षण को मात्र रोजगार का साधन मत बनाएं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए विज्ञान को जन आन्दोलन बनाएं और विज्ञान संचार की मुहीम से जुड़ें।
विद्यालय की प्रधानाचार्या अनीता काम्बोज ने उपस्थित अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि विज्ञान के विभिन्न प्रोजेक्ट बनाने से बच्चे अपने आसपास की सामान्य व गंभीर समस्याओं से रूबरू होते हैं और वो उनका हल निकलने का प्रयत्न करते हैं जिससे वो विज्ञान को और नजदीकी से समझते पाते हैं। विज्ञान के प्रोजेक्ट करने से बच्चों के सर्वांगीण विकास का बेहतर पोषण होता है। प्रधानाचार्या ने हर जिले में सार्वजनिक विज्ञान पुस्तकालयों, वाचनालयों और प्रयोगशालाओं की आवश्यकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की हरियाणा में एक साइंस सिटी जैसा विज्ञान संग्राहलय और विज्ञान केंद्र होना चाहिए जहां बच्चों को उनकी विज्ञान सम्बंधित सभी जिज्ञासाओं का जवाब मिल सके।     
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सिविल हस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजय दहिया ने स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर दहिया ने बताया कि व्यक्तिगत स्वच्छता जितनी आवश्यक है उतनी ही आवश्यक सामुदायिक स्वच्छता भी है। समाज और कारपोरेट दोनों वर्गो को चाहिए कि चिकित्सा के सामुदायिक केन्द्रों में आवश्यक सहूलियतों को बढ़ावा देने के लिए कोंट्रीब्यूट्री विधि अपनायें। हस्पतालों को जो सुविधाएं चाहिए, स्कूलों को जो आवश्यकताएं है उनको दान या सहयोग से पूरा करें। ग्रामीण आपसी सहयोग से गांव के बीमार व्यक्तियों को आपातकालीन जैसी स्थिति में जिला स्तर या पीजीआई तक पहुंचाने की व्यवस्था कर सकते हैं जिससे बीमार की जान को बचाया जा सके। उन्होंने अध्यापकों को व्यक्तिगत और सामुदायिक स्वच्छता पर सर्वे और प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट बनवाने के लिए प्रेरित किया और टिकाऊ विकास के तहत हस्पतालों और स्कूलों के भवनों की मुरम्मत को कारसेवा जैसे सामुदायिक सहयोग वाले तरीके से हल किया जाए और इसके लिए स्थानीय समितियां बने सम्बन्धित प्रोजेक्ट बच्चो को बनवाये जाए।       
हिसार कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डाक्टर महावीर नरवाल ने टिकाऊ विकास और कृषि विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट करवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया की मिटटी की जांच, फसल चक्र, कीट पाठशाला, समयानुसार व मांगनुसार फसल उत्पादन, कीटनाशकों के आर्गेनिक विकल्पों, फ़ूड प्रोसेसिंग, देसी खाद, बीजों की वेरायटी और सामूहिक खेती पर बच्चों को परियोजनाएं तैयार करवाने की बहुत आवश्यकता है।   
डी ए वी गर्ल्स कालेज से डाक्टर ईनाम मुहम्मद ने खाद्य व कृषि विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर ईनाम ने दालों और तिलहन की फसलों के लिए माहौल तैयार करने सम्बंधित हरियाणा को चार जोन में बाँट कर बहुत ज्ञानवर्धक कृषि बटवारा प्रस्तुत किया। उनके अनुसार बच्चे किसानो को प्रेरित करें कि अब गैर परम्परागत खेती को अपनाना समय की मांग है और किसान देश/विदेश का कृषि पर्यटन के तहत भ्रमण करें और कृषी नवाचार को अपनाएँ।   
हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक के सचिव व एनसीएससी के राज्य सयोंजक श्री सतबीर नागल ने विज्ञान को बच्चों की पहुँच तक लाने में राष्ट्रिय बाल विज्ञान सम्मेलन के उद्देश्यों को अध्यापकों के समक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बाल विज्ञान कांग्रेस को महज प्रतियोगिता बनाकर ना देखा जाए आवश्यकता है कि इस इवेंट का प्रयोग बच्चों को विज्ञान के निकट लाने और विज्ञान को बच्चों की पहुँच तक लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने बाल विज्ञान कान्ग्रेस की नियमावली से भी अध्यापक प्रशिक्षुओं को अवगत करवाया। श्री नागल ने बताया कि हरियाणा विज्ञान मंच एक वोलियेंटरी साइंस पोपुलराईजेशन संस्था है जो आपसी सहयोग से हर फिल्ड के एक्सपर्ट विद्वानों की स्वेच्छिक सेवायें लेकर एक बेहतर वैज्ञानिक माहौल तैयार करने के लिए कार्यरत है जिससे कि मानवता की भलाई हो सके।    
जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर सुनील कुमार काम्बोज ने आपदा प्रबंधन विषय पर प्रोजेक्ट बनाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि 14-15 जुलाई व उसके बाद की दो बरसातों ने यमुनानगर के हालात दो तीन घंटों के लिए आपातकालीन प्राकृतिक हालातों जैसे बना दिए थे जिससे लिए समाज और सम्बन्धित महकमे हतप्रभ रह गए और सोचने पर मजबूर हो गए कि भविष्य में किसी बड़ी आपदा से वो कैसे लड़ पायेंगे। उन्होंने बच्चों को शहर के बेहतर व नवाचारी मास्टर प्लान पर बच्चों को प्रोजेक्ट करवाने का आव्हान किया जिससे कि बच्चे अपनी समस्याओं का बेहतर हल प्रदान कर सकें।      
रसायन विज्ञान के अध्यापक गौरव वालिया ने ऊर्जा टिकाऊ विकास के संदर्भ में अपना व्यख्यान दिया। उन्होंने ऊर्जा के नवीकरणीय साधनों के उपयोग और दैनिक जीवन में ऊर्जा की कटौती करने पर प्रोजेक्ट वर्क करवाने के लिए अध्यापकों को प्रशिक्षित किया। 
प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा ने प्राकृतिक संसाधन और टिकाऊ विकास विषय पर बच्चो से प्रोजेक्ट बनवाने का प्रशिक्षण दिया। 
उन्होंने नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खनिज भंडारों और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और एनरिच करने की आवश्यकताओं पर बल दिया। 
उन्होंने कहा कि उतना खोदो, उतना काटो, उतना दोहो की आने वाली पीढ़ियाँ भी उन नेमतों  का उपयोग कर सकें जो प्रकृति ने सबके लिए बराबर प्रदान की हैं। 
मनुष्य अपने भविष्य को कब्रासीन न कर पाए ऐसे प्रयास किये जायें। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर प्रोजेक्ट करवाने सम्बन्धित प्रशिक्षण प्रदान किया।  
गणित अध्यापक श्रीश कुमार शर्मा ने टिकाऊ विकास में परम्परागत तरीकों और देशज विधियों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया की खाद्यानो के भंडारण, जल के उचित भंडारण, कम जल की खेती के देशज उपाय, खाद्य पदार्थों की गुणवता और उसमे मिलावट के देशी तरीके, दादी माँ के नुस्खे  और रसोईघर को बनाओ ओषधालय, आत्मरक्षा के देशज तरीके, गणनाओं के परम्परागत तरीकों पर बच्चों को परियोजनाएं बनवाने के लिए अध्यापक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रदान किया।  
गत वर्ष की विजेता ग्रुप लीडर श्रेया केसवानी ने अपनी टीम के साथ एक परियोजना की प्रस्तुती भी दी जिससे उपस्थित अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने की बारीकियां पता लग सकी।
 इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदीप सरीन, जरनैल सिंह सांगवान, डाक्टर विजय त्यागी, सुरेन्द्र गोयल, प्रोफेसर के सी ठाकुर, आर पी  गांधी, राजकुमार धीमान, दीपक शर्मा, विकास पुंडीर, ज्योतिका डांग, अश्वनी गर्ग, दीपिका देशवाल, राकेश कुमार, मंजू आर्या, पूजा कालरा का सहयोग सराहनीय रहा।   
अखबारों में  




  Darshan Lal Baweja
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Saturday, July 16, 2016

राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस का प्रशिक्षण कार्यशाला State Level Workshop

राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस की प्रशिक्षण कार्यशाला
14-15 जुलाई को आयोजित हुई विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क,

हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग व हरियाणा विज्ञान मंच के सयुंक्त तत्त्वाधान में हरियाणा में 24वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान सम्मेलन का बिगुल बज उठा है। 14 व 15 जुलाई को जाट भवन रोहतक में हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक द्वारा राज्यस्तरीय संसाधन व्यक्ति हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिले से इस कार्यशाला में प्रशिक्षण लेने के लिए विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल, प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा व गौरव कुमार वालिया ने भाग लिया। 
इस कार्यशाला में राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विज्ञान संचारक डी रघुनन्दन, सतबीर नागल,
वेदप्रिय, डाक्टर रणवीर सिंह दहिया, डाक्टर महावीर सिंह नरवाल, दीपा कुमारी, कृष्ण वत्स सहित अन्य रिसोर्स पर्सन्स ने सभी आठों उपविषयों पर प्रशिक्षण दिया।
जिला समन्वयक दर्शन लाल ने बताया कि राज्य भर से आये जिला समन्वयकों और अध्यापकों ने सभी उपविषयों व संभावित परियोजनाओं पर विचार विमर्श किया। इस बार का बालविज्ञान कांग्रेस का मुख्य विषय " टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार" है. जिसमे आगे आठ उपविषय है।
टिकाऊ विकास, स्वपोषी विकास या समग्र विकास, विकास की वह अवधारणा है जिसमें विकास की नीतियां बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि इससे मानव की न केवल वर्तमान आवश्यकताओं की पूर्ति हो,वरन् लम्बे समय तक मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति होती रहे। टिकाऊ विकास वास्तव में विकास की वह अवस्था है जिसमें मानवीय मूल्यों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रभावितों की पीड़ा को दूर करते हुए समाज में आर्थिक समानता व लम्बे समय तक प्रयोग में आने वाले आधारभूत ढाँचे से है।
डी रघुननंदन ने बताया कि किसी शहर के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की सुदृढ़ व्यवस्था का होना उस शहर के लिये सस्टेनेबल डेवलपमेंट है। जिस कारण लोग निजी वाहनों की निर्भरता से बचेंगें और अधिक यातायात के दुष्प्रभावों जैसे प्रदूषण, दुर्घटना आदि से भी महफूज़ रहेंगे। प्रोफेसर दीपा कुमारी ने ऊर्जा के टिकाऊ संसाधनों पर अपने विचार रखे, जिसमें बहुत सी गैर परम्परागत सतत् विकास की परियोजनाओं पर विमर्श हुआ। 
डॉक्टर महावीर सिंह नरवाल ने कृषि में सस्टेनेबल डेवलॅपमेंट के अंतर्गत कीट पाठशाला के प्रणेता दिवंगत डॉक्टर सुरेन्द्र दलाल के कार्यों पर प्रकाश डाला कि उन्होने किसानो को कीट पाठशाला के अंतर्गत इन्सेक्ट लिटरेसी में इतना ज्ञान दिया गया कि अब उन गावों के किसान (पुरूष, महिला व बच्चे) खेत मे कीटो और पत्तों में सुराख देख कर डरते नहीं हैं उन्हें पता हैं कि इस कीट का प्रकृत्तिक शत्रु इसे स्वत ही समाप्त और देगा और अगर अब कीटनाशक का छिड़काव किया तो वो मित्र व शत्रु दोनों को समाप्त कर देगा। कीट पाठशाला के अंतर्गत कीट साक्षरता कम लागत का टिकाऊ विकास है जो अनुभव हस्तांतरण के अंतर्गत पीढ़ियों तक वितरित और समृद्ध होगा। वेदप्रिय जी ने महत्त्वपूर्ण बिन्दुओ को उठाते हुए टिकाऊ विकास की अवधारणा को समझाया। डॉक्टर आर एस दहिया ने अपने वक्तव्य में बताया कि चिकित्सा के क्षेत्र में टिकाऊ विकास की बहुत आवश्यकता है। जहां 2000 कर्मचारियों की आवश्यकता है वहां 500 के स्टाफ से काम चलाया जा रहा है और स्वास्थ्य कर्मी काम के दबाव में है जबकि उसका सीधा सम्बन्ध लोगों की जिंदगियों से जुड़ा है। सतबीर नागल और कृष्ण वत्स ने बाल विज्ञान कांग्रेस के आयोजन और नियमो सम्बंधित बिन्दुओं पर प्रकाश डाला।
प्रवक्ता सुमन शर्मा व गौरव कुमार ने बताया की गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष के टोपिक में बाल वैज्ञानिकों के पास परियोजना को करने के लिए विस्तृत दायरा है। जिला स्तरीय अध्यापक कार्यशाला का आयोजन अगस्त में किया जाना प्रस्तावित है। कार्यशाला में राज्य भर से जिला समन्वयकों और अध्यापकों ने भाग लिया।
Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
09416377166