Friday, January 28, 2011

मैग्नीशियम के रिबन का वायु में दहन Combustion of Magnesium Metal in Air

मैग्नीशियम धातु को वायु में जलाया जा सकता है यह वायु में जल कर मैग्नीशियम आक्साईड MgO बनता है इस बनने वाले मैग्नीशियम आक्साईड को एकत्र कर के आगामी प्रयोगों के लिये रख लेते है|
मैग्नीशियम Mg धातु चमकीला श्वेत, ठोस पदार्थ है यह पृथ्वी पर पाए जाने वाले तत्वों में आठवाँ स्थान रखता है और भार के अनुपात में यह २% है|
imp-1

आज इस को जला कर देखा गया पहले बच्चो को इस धातु से परिचित करवाया गया प्रयोगशाला में यह रिबन के रूप में उपलब्ध थी

 



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मैग्नीशियम Mg के रिबन को पहले रेगमाल से रगड कर टेस्टटयूब होल्डर या चिमटे  में पकड कर जलते स्प्रिट लैम्प की लो के पास लाया गया







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गर्म होने के कुछ ही पलों में यह चमकदार ज्वाला के साथ जलना शुरू कर देता है जलने की क्रिया के फलस्वरूप सफेद रंग की राख बनती है इस् राख को कांच की एक प्लेट में एकत्र कर लेते है यह राख MgO मैग्नीशियम आक्साईड की होती है
  इस अभिक्रिया की रासायनिक समीकरण   
  2Mg+O2-------->2MgO  है |
   
सफ़ेद गाढ़ा धुँआ उठता है और तेज चमकदार लो बनती है आँखों से दूर रख कर और सेफ्टी गोगल्स पहन कर प्रयोग किया जाता है|
imp-4



इस दहन के दौरान बनने वाली राख को एक परखनली में एकत्र कर लेते है|



 



imp-5


इस परखनली में थोड़ा सा पानी डालते है और हिला कर घोलते है|
MgO + H2O → Mg(OH)2



 



imp-6



अब इस जल और मैग्नीशियम आक्साईड MgO के विलयन में 2-3 बूंदे यूनिवर्सल इंडीगेटर की डालते है




 


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तब इस विलयन के रंग को नोट करते है जो कि पर्पल कलर है इस का मिलान कलर सूचि से करने पर पता चला कि इस का ph मान 9-10 के बीच है









जल और मैग्नीशियम आक्साईड MgO के विलयन की प्रकृती क्षारीय 9-10 very much alkaline in nature है|

प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा

Monday, January 24, 2011

विद्युत चुम्बक कैसे बनाये Electro Magnet

आवश्यक सामग्री…एक शुष्क सेल(बड़े वाला), एक लोहे की कील, कपड़ा चढ़ी हुई कॉपर (ताम्बे) की तार, आल पिन या स्टेपलर की पिने।
सिद्धांत...जब लोहे की कील पर किसी चालक तार की कुंडली बना कर विधुत प्रवाहित की जाती है तो वाह लोहे की कील चुम्बक की भांति व्यवहार करती है ये है विद्युत चुम्बकत्व (Electro Magnetism)
बनाने की विधि...यह मॉडल बनाने के लिए एक लोहे की कील पर कपड़ा चढ़ी कॉपर(ताम्बे) की तार की कुंडली बना लेते है (कपड़ा चढ़ी कॉपर ताम्बे की तार आपके स्कूल की विज्ञान प्रयोगशाला में होगी वहाँ से ले ले) तार के दोनों सिरों से कपड़ा उतार ले चित्रानुसार एक सिरे को सेल( बेटरी)के धन (+) भाग और दूसरे सिरे को ऋण (-) भाग से टच करने से लोहे की कील विद्युत चुम्बक (Electro Magnet) बन जायेगी।
अब इस विद्युत चुम्बक की सहायता से आप आल पिन या स्टेपलर की पिने चिपका कर देखे,वे पिने लोहे की इस कील से चिपक जाती है इस प्रकार बन जाती है आपकी विधुत चुम्बक।
elect mag-11elect mag-22  
यह मॉडल कक्षा 6 के विद्यार्थियों में बहुत लोकप्रिय है व उन के पाठ्यक्रम में भी है। मैंने बच्चों को स्कूल से कपड़ा चडी हुई ताम्बे की तार दी और उन्हें ब्लैक बोर्ड पर इसको बनाने की विधि बता दी कक्षा 6 के बच्चों ने कील और सेल का इंतजाम खुद किया और बना लाये अपनी अपनी विधुत चुम्बक।
अब उन के अनुभव सुने जिनको सुन कर आनंद हुआ की सीखने की जिज्ञासा हाथ से कर के देख लेने पर संतुष्ट होती है। साधनों की कमी से ग्रसित ग्रामीण इलाको के विद्यालय और सिखावनियों (मास्साबों) की अरुचि विज्ञान जैसे रूचि कर विषय को भी नीरस बना देती है।     
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा

Thursday, January 20, 2011

98वीं भारतीय विज्ञान कोंग्रेस चेन्नई की झलकियां 98 ISC SRM Uni. Chennai

98वीं भारतीय विज्ञान कोंग्रेस चेन्नई की झलकियां 98 ISC SRM Uni. Chennai
इस बार SRM Uni चेन्नई बना इस महान विज्ञान कांग्रेस का होस्ट,आओ अब देखे इस की कुछ झलकियां
३-१-२०११ उदघाटन समारोह
माननीय प्रधान मंत्री श्री मनमोहन सिंह जी ने किया  उदघाटन
inauguration-61 inauguration inauguration-21 inauguration-22 inauguration-28   
फिर जलाई गयी विज्ञान ज्योत माननीय श्री कपिल सिब्बल जी के कर कमलों द्वारा
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यहाँ पर विभिन्न विभागों की तरफ से एक विज्ञान प्रदर्शनी लगाई गयी जिस में बहुत ज्ञानवर्धक जानकारी हासिल की सब ने
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4-१-२०११ को हुआ बाल विज्ञान कांग्रेस का उदघाटन समारोह
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५-१-२०११ को,बाल विज्ञान कांग्रेस के और नज़ारे देखें इस इवेंट में बाल वैज्ञानिकों को अपने शोध पत्र वरिष्ट वैज्ञानिकों के समक्ष प्रस्तुत करते है|
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६-०१-२०११ को बाल विज्ञान कांग्रेस का हुआ समापन समारोह
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रंगा रंग सांस्कृतिक कार्यक्रम देखे तमिलनाडु का ज़वाब नहीं
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खाओ पीओ ऐश करो मित्रों
क्या लज़ीज़ खाने परोसे गए वाह
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नोबल लेक्चर
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और अब ७-०१-२०११ को समापन समारोह
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सभी फोटो SRM Uni Chennai सोजन्य से
प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

Friday, January 14, 2011

विज्ञान पहेली -4 Science Quiz -4 (औरScience Quiz -3 का उत्तर)

विज्ञान पहेली -4 Science Quiz -4 (और पहेली -3 का उत्तर)
अफ़सोस के साथ बताना पड़ रहा है पिछली पहेली की तरह इस पहेली का जवाब भी कोई ना दे सका श्री राम बंसल,बंटी द मास्टर स्ट्रोक,आशीष मिश्र जी ने बहुत कोशिश की परन्तु काफी नजदीक पहुँच कर भी टारगेट ना हिट कर सके खैर 
अब मैंने तो बताना ही है इसका ज़वाब 
तो फिर लीजिए 
यह चित्र कपलान  टर्बाइन Kaplan Turbine का नॉन वर्किंग माडल  है साईंस मयुजिय्म्स में यह माडल या प्रतिदर्श जरूर लगा होता है|
यह एक नोदक प्रकार की टर्बाइन होती है जिसका प्रयोग कम ऊँचाई व अधिक जल वाले स्थान पर किया जाता है इसका आविष्कार 1913 में आस्ट्रियन प्रोफेसर विक्टर कपलान ने किया था इस  में एक शाफ्ट रनर लगा होता है जिस पर समयोज़क ब्लेड 2 से 6 और अधिक लगे होते है इन ब्लेडों पर जब पानी अधिक प्रवाह से पड़ता है तब इसकी बनावट के कारण फ्रांसिस टर्बाइन की अपेक्षा इस पर कम घर्षण पैदा होता है| इस  का प्रयोग हाइड्रो पावर जनरेशन में काफी क्रांतिकारी रहा |
A type of turbine, developed around 1913 by the Austrian enginer Viktor Kaplan (1876–1934), that has two or more blades, the pitch of which is adjustable; it resembles a marine propeller. The turbine may have gates to control the angle of the fluid flow into the blades.

Kaplan turbines are well suited to situations in which there is a low head and a large amount of discharge. The adjustable runner blades enable high efficiency even in the range of partial load, and there is little drop in efficiency due to head variation or load.

As a result of recent developments, the range of Kaplan turbine applications has been greatly increased. They are being applied, for example, in exploiting many hydro sources previously discarded for economic or environmental reasons, and have also been used as wind turbines. The adjustable runner blades add to the complexity of construction of a Kaplan turbine. The runner blade operatin.
यहाँ तीन प्रकार की  Pelton, Francis and Kaplan की कार्य प्रणाली की तुलना जरूर देखें |
ये  है असली की कपलान टर्बाइन

मैंने भी देखी हुई है असली में एक कपलान टर्बाइन :-)
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विज्ञान पहेली -4 Science Quiz -4
अब है विज्ञान पहेली -4 की बारी 
किसी  सज्जन ने टेक्निकल पहेली की मांग की थी तो लो जी इस  बार टेक्निकल पहेली -4 



यहाँ  श्रेणीक्रम (In Series) में दो टंगस्टन फिलामेंट incandescent lamp वाले बल्ब 30 वाट और 60 वाट के लगे है|





220 वोल्ट की घरेलू विधुत धारा प्रवाहित करने पर 30 वाट का बल्ब अधिक चमकता है और  60 वाट का बल्ब कम चमकता है 









अब मैंने दोनों बल्ब्स का स्थान अदल-बदल दिया यानी 30 वाट को 60 वाट के स्थान पर60 वाट को 30 वाट के स्थान पर, और अब भी

220 वोल्ट की घरेलू विधुत धारा प्रवाहित करने पर 30 वाट का बल्ब अधिक चमकता है और  60 वाट का बल्ब कम चमकता है |






 इसका हल मै बता देता हूँ 
दोनों बार में 30 वाट का ही बल्ब अधिक चमकेगा
हल इस चित्र में देखें

30 W के बल्ब का प्रतिरोध अधिक होने के कारण अधिक ऊष्मा उत्सर्जित करेगा और चमकेगा 
Q=I2.R.t

Q/t= I2.R

Q/t =V2/R

यानि प्रति सेकंड ऊष्मा उत्सर्जन
H1=(145)2/1613
    =21025/1613= 13.03 j/s
H2=(73)2/807
    =5329/807= 6.60 j/s
अत् कम शक्ति का बल्ब श्रेणीक्रम में अधिक चमकेगा

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अब  आज का सवाल यह है कि 
यदि इन दोनों  बल्बों की जगह मैं 15 W व 20 W के CFL (compact fluorescent lamp) लगा दूं तो वो किस प्रकार से चमकेंगे(यानी क्या होगा?) कारण सहित उत्तर बताना है ??
 

आरम्भ दिनाँक - 15-01-2011


बंद  दिनाँक (९ शाम)- 30-01-2011








प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा
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