Wednesday, May 18, 2011

बच्चे भी कमाल के जिज्ञासु होते हैं Amazing curious students

बच्चे भी कमाल के जिज्ञासु होते हैं | Amazing curious students.
बच्चे भी बस बच्चे ही होते है बस कहीं से उठा लाये पत्ते पर चिपकी हुई एक थैली . जो कि ऐसे फडफडाती थी जैसे उस थैली के अंदर कोई कैद हो.ये क्या है? यह क्या है?
चिल्लाते हुवे मेरे पास आये;
शायद इस विद्यालय मे मेरा 5-6 वर्षों के ठहराव का और विज्ञान  कल्ब गतिविधियों का यही  वो दूरगामी परिणाम है जिस के मद्देनजर विज्ञान प्रसार ने देश भर मे विपनेट क्लबों के गठन का कार्य शुरू किया था. आज स्कूल का हर एक बच्चा यह जानता है कि अपनी जिज्ञासा  को कहाँ पर ले कर जाना है अब बच्चे पहले की तरह झेंपते शर्माते नही है बस फट जिज्ञासा को उचित प्लेटफार्म पर ला खड़ा करते है ग्रामीण क्षेत्र  के झेपिलें शर्मीले बच्चे यदि इस प्रकार अपनी छोटी मोटी खोजे जारी रखें तो सरकार द्वारा विज्ञान प्रसार के लिए खर्चा गया एक एक पैसा सार्थक हो गया लगता है |
असल  मे बच्चे जो पत्ते पर चिपकी हुई थैली नुमा संरचना ले कर आये थे वह किसी कीट इंसेक्ट का प्यूपा अवस्था था 
बच्चों को 
अंडा >लार्वा >प्यूपा >पूर्ण कीट 
अवस्थाओं के बारे मे समझाने के बाद एक प्रस्ताव रखा गया कि क्या वो देखना चाहते है कि इस मे से क्या निकलेगा तो वो सहर्ष तैयार हो गए 
एक बीकर लाया गया,बीकर मे वो प्यूपा डाल कर,एक कागज मे हवा के लिए सुराख कर के बाँध कर रख दिया गया.
अगले ही दिन देखते है कि कोई परिवर्तन नहीं हुआ 
फिर अगले दिन देखते है कि बीकर मे एक हरी सुंदर सी तितली है बच्चे खुश हो जाते हैं और थोड़ा प्रयास करने के बाद वो तितली उड़ कर पौधों पर बैठ जाती है; 
प्यूपा जो लाया गया
प्रयोग के लिए तैयार बीकर
निकल गयी तितली तीसरे दिन















उड़ गयी तितली

प्यूपा की खाली झिल्ली


खुश है सब अपनी नयी खोज पर









बच्चे भी खुश  और उनके मास्टर जी भी खुश और आप ?
देखें यह हमारा उस तितली का उड़ने के प्रयासों का चलचित्र 
    
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Saturday, May 14, 2011

विज्ञान पहेली-15 Science Quiz-15 (और Science Quiz-14 का उत्तर)

विज्ञान पहेली-15 Science Quiz-15 (और Science Quiz-14  का उत्तर)
मेंढक का विच्छेदन Dissection of Frog
इस पहेली का जवाब है मेंढक का विच्छेदन Dissection of Frog 
इस  पहेली का जवाब

Indranil Bhattacharjee ........"सैल"

जी ने देकर  फिर से लगातार तीसरी बार इस कल्ब की पहेली को जीता है इनको बहुत बहुत बधाईयाँ और दूसरे स्थान  पर रहे हैं श्री  श्री आशीष मिश्रा  जी (इनकी सही जवाब की टिप्पणी अचानक कही गायब हो गयी )
इस बार पहेली कुछ अस्पष्ट सी थी परन्तु फिर भी आप सब का बहुत बहुत धन्यवाद जी  

इस पहेली के जवाब को एक सत्य घटना से बताया जाएगा सन् 1983 की बात है एक 12-13 वर्ष का बच्चा मकान की तीसरी मंजिल से पड़ोस के मकान मे देखता है कि एक लड़का अपने घर के आंगन मे मेज़ पर कुछ कर रहा है गोरा रंग अधिक होने के कारण उस लड़के को देसी अंग्रेज की छेड़ से बुलाया जाता था, कोतुहलवश वो बच्चा नीचे उतर कर देसी अंग्रेज के घर की तरफ भागता है और रास्ते मे जो भी मिला उस को भी साथ लेता  गया कहता हुआ 'पता नहीं देसी अंग्रेज क्या कर रहा है|'
देसी अंग्रेज के घर पहुँच कर सब बच्चे यह देखते है कि वो किसी जीव को काट रहा है पहचान  कर एक दम  जीव के मेंढक होने कि घोषणा कर दी जाती है और सब ध्यान से देखने लगते है| यह क्या  है? यह क्या  कर रहे है? देसी अंग्रेज ने बताया कि मेरे जीव विज्ञान के प्रैक्टिकल मे मेंढक को काट कर उस के भीतरी अगों को देखने समझने का होता है फिर वो उस के अंगों के नाम निडिल लगा लगा कर बताने लगा जैसे यह ह्रदय,फेफड़े,अमाशय,छोटी आंत,बड़ी आंत,यकृत,धमनी,शिरा आदि अंग/अंगक  दिखाए |
उस बच्चे ने तभी ये सोचा कि वह भी यही पढ़ाई करेगा जिस मे मेंढक का विच्छेदन Dissection of Frog किया जाता है और उस ने किया 
मेरे बहुत से दोस्त कोमर्स और आर्ट्स की कक्षाओं से बायो लैब मे मेंढक का विच्छेदन देखने आते थे और मन मे कहीं दबी आवाज़ सुनाई देती थी हमने क्यूँ विज्ञान संकाय नहीं लिया. 
मैंने अपने विद्यार्थी जीवन मे  मेंढक,तिलचट्टा,खरगोश,अर्थवोर्म,फिश  का विच्छेदन किया और बहुत सीखा 
मेंढक,खरगोश,फिश सप्लायर अपने फ़ार्म से हमारे कोलिज को सप्लाई करता था तिलचट्टा,अर्थवोर्म हमने खुद पकडे थे |
परन्तु आज पशु प्रेम के चलते मेंढक का विच्छेदन Dissection of Frog स्लेबस से हटा दिया गया है स्कूलों की लैब्स मे मेंढक की सप्लाई करने वाले एजेंट अपने मेंढक फ़ार्म चलाते थे वो कोई खेतों और तालाबों से मेंढक थोड़े पकड़ कर लाते थे ये सम्भव ही नहीं हो सकता,इन पशु प्रेमियों को अपनी राजनीति का  धंधा चमकाने के लिए कोई और मुद्दा ना मिला तो इस महत्वपूर्ण प्रयोग को हटवा दिया | स्कूलों से ज्यादा मेंढक तो होटलों और रेस्त्रोरेंटों मे पलेटों मे परोसे जा रहे है |
मेरी शिक्षाविदों से यह सलाह है कि कक्षा नवम से बायोलोजी के पाठ्यक्रम मे कम से कम मेंढक,काक्रोच,केंचुवो,टिड्डी का विच्छेदन जरूर होना चाहिए | 
कुछ तो हम वैसे ही बेकार से स्लेबस को पढ़ रहें हैं कुछ ये नास मारने पर उतारूं है बाकी देश के शिक्षाविद कोई मुर्ख हैं जो वहां मेंढक का विच्छेदन अनिवार्य है |

छात्र नहीं करेंगे चीरफाड़ जीव विज्ञान की पढ़ाई के दौरान अब मेंढ़क और दूसरे जानवरों की चीरफाड़ पर रोक लगेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से गठित विशेषज्ञों की एक कमेटी ने इस संदर्भ में अंतिम फैसला ले लिया है। इसकी आधिकारिक घोषणा आज होगी। जीव विज्ञान के विभिन्न विषयों की उच्च शिक्षा में प्रायोगिक अध्ययन के लिए विभिन्न जंतुओं की चीरफाड़ की जाती है। इस चीरफाड़ के विकल्प तलाशने के लिए बनाई गई कमेटी (एक्सपर्ट कमेटी टू कंसिडर डिसकंटीन्यूएशन ऑफ डिसेक्शन ऑफ एनिमल्स इन जूलॉजी, लाइफ साइंसेज) कोर मैम्बर्स और एक्सपर्ट के दो समूहों में बंटी थी। कमेटी की इस सप्ताह शुरू हुई कॉन्फ्रेंस के दौरान शनिवार को यह फैसला लिया गया कि स्नातक स्तर पर जंतुओं के विच्छेदन पर पूर्ण रोक लगेगी। लैब में केवल फैकल्टी ही आसानी से उपलब्ध किसी प्रजाति के जंतु का विच्छेदन कर छात्रों को दिखा सकेंगे, वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर भी जो छात्र विच्छेदन नहीं करना चाहें उन्हें इसके स्थान पर जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) से जुड़े प्रोजेक्ट करने का विकल्प दिया गया है, मगर इस स्तर पर केवल चूहों के विच्छेदन की ही अनुमति दी गई है। उच्च शिक्षण संस्थानों को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972 और प्रिवेंशन ऑफ क्रुअलिटी टू एनिमल एक्ट 1960 का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। बायोलॉजी और जूलॉजी पढ़ाने वाले संस्थानों में विच्छेदन पर निगरानी के लिए कमेटी भी बनाई जाएगी। विच्छेदन के विकल्पों की कमेटी की मीटिंग में सिफारिश की गई है। राजस्थान यूनिवर्सिटी में इसके विकल्पों को लागू कराने के प्रयास किए जाएंगे। - डॉ. रीना माथुर, सदस्य, एक्सपर्ट कमेटी नए सिलेबस में 25 से घटाकर 5 अंक किए एमडीएस यूनि., अजमेर में एकेडमिक काउंसिल में एक प्रस्ताव पास कर जंतु विच्छेदन को कम करने का पहला प्रयास किया है। यूनिवर्सिटी के जूलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. के.के. शर्मा ने एक नया सिलेबस तैयार कर जंतु विच्छेदन के टॉपिक के 25 से घटाकर 5 अंक कर दिए हैं।जीव विज्ञान की पढ़ाई के दौरान जंतुओं के प्रति क्रूरता को रोकने के लिए कोर कमेटी गठित की थी, जिसने अंतत: स्नातक स्तर पर जंतु विच्छेदन पर रोक लगाने का फैसला लिया है। - डॉ. बी. के शर्मा, सदस्य, कोर कमेटी(दैनिक भास्कर)

पारदर्शी मेंढक रोकेंगे जीवित मेंढकों की चीरफाड़

www.livehindustan.com
आप छात्र हैं और डॉक्टर बनना चाहते हैं। लेकिन प्रयोगों के दौरान मेंढक काटना पड़ेगा इसके चलते कई बायोलॉजी छोड़ देते हैं। या फिर आप पशु प्रेमी हैं मेढकों की चीड़फाड़ आपको पसंद नहीं तो वैज्ञानिकों ने इसका निदान ढूंढ लिया है।
अब जिंदा मेढकों को काटने के लिए मोम की प्लेट पर सुइयों से बींधने की जरूरत नहीं पडे़गी, क्योंकि प्रयोगों में इस्तेमाल के लिए खास तौर पर विकसित पारदर्शी मेढक अगले छह महीनों में प्रयोगशालाओं तक पहुंच रहे हैं।
करीब दो साल पहले प्रयोगशाला में तैयार पारदर्शी मेढकों के बाद अब जापान के ही वैज्ञानिकों ने पारदर्शी मछलियां भी तैयार करने में सफलता हासिल कर ली है और उन्हें आशा है कि अगले छह महीनों में प्रयोगशालाओं और स्कूलों के लिए इनकी बिक्री शुरू हो जाएगी। मेंढकों की ही तरह पारदर्शी गोल्डफिश का भी धड़कता दिल बाहर से ही नजर आता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अब काफी हद तक परीक्षणों के लिए उन्हें मारने की जरूरत नहीं पडे़गी। प्रयोगों के दौरान स्कूलों में ही बच्चों को मेंढक काटना पडता है जिसके चलते कई छात्र जीव विज्ञान विषय ही छोड़ देते हैं। यही नहीं पशु प्रेमी भी वर्षों से मेढकों के काटे जाने पर उंगलियां उठाते रहे हैं।
जापान की माय यूनीवर्सिटी के जीव विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर यूताका तमारू का कहना है कि पिगमेंट के न होने के कारण इस गोल्डफिश की त्वचा एकदम पारदर्शी है जिससे इसका न केवल धड़कता दिल धक-धक करता बाहर से ही साफ दिखाई देता है, बल्कि आंख के ऊपर दिमाग तथा अन्य अंग भी काम करते हुए देखे जा सकते हैं।
यूताका ने कहा कि अब वैज्ञानिकों को इनके अंगों पर परीक्षण करने के लिए उसका शरीर काटकर देखने की जरूरत नहीं होगी, क्योंकि अधिकांश परिस्थतियों में अब उनके अंगों पर पड़ने वाले असर को बाहर से ही काम करते या उन पर परीक्षण के असर को बिना काटे ही देखा जा सकेगा। माय यूनिवर्सिटी तथा नगोया यूनिवर्सिटों के संयुक्त प्रयासों से तैयार ये 'राइकिन' नाम की यह गोल्डफिश करीब बीस साल तक जिन्दा रहेगी तथा इसकी लंबाई भी करीब दस इंच और वजन दो किलो तक बढा़या जा सकेगा।
हिरोशिमा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्रोफेसर मासायूकी सुमीदा का कहना है कि अब इन पारदर्शी मेढकों का बडे़ पैमाने में उत्पादन शुरू कर दिया गया है और संभवतः इसी साल ये पारदर्शी मेंढ़क प्रयोग के लिए उपलब्ध हो सकेंगे। उन्होंने बताया कि अगले छह माह के भीतर ये मेंढक प्रयोगशालाओं तथा स्कूलों तक पहुंच जाएंगे। दस हजार येन यानी लगभग सवा पांच हजार रुपये के इस एक मेंढक को देश विदेश के लोग घरों में पालने के लिए भी खरीद सकेंगे। साभार www.livehindustan.com
प्रमाणपत्र 
उपर की दोनों खबरों से यह सिद्ध होता है कि यह प्रक्रिया जरूरी तो ही इस के लिए सवा  पांच हज़ार का मेंढक जिस संस्थान मे खरीद कर बच्चों को दिखाया जाएगा वहां कोई गरीब का बच्चा तो पढ़ नहीं सकता और यह सवा पांच हज़ार का मेंढक कितने वर्ष ज़िंदा रहेगा इतने पैसों मे 100 मेंढक आ सकते हैं और मेंढक पालको को रोज़गार भी मिलेगा अलग से क्यों जी ?

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विज्ञान पहेली -15 ........ Science Quiz -15
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यह  क्या है ? What is this ?
हिंट :- ३५ सालों तक लगातार प्रति वर्ष ६० एक की कीमत ४०० रूपये तो हुए ३५*६०*४०० = आठ लाख चालीस हज़ार रूपये वाह बेटा वाह यह बिजनेस पहले क्यूँ नहीं किया शुरू
पिताजी यह बिजनेस अभी आया है भारत मे .......
हेली का जवाब 23-5-2011, 8 बजे तक दे सकते है |
हेली का परिणाम 23-5-2011, 9 बजे |
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Tuesday, May 10, 2011

विधुत मोटर का एक साधारण सा माडल Simplest Electric Motor

विधुत मोटर का एक साधारण सा माडल  Simplest Electric Motor
आज कक्षा सात के बच्चे अपने फ्री पीरियड में मेरे पास आये और बोले सर आप ने कहा था कि परीक्षाओं के बाद आप को मै एक विधुत मोटर का एक साधारण सा माडल बना कर दिखाऊंगा तो अब बना के बताओ,मैंने कहा जरूर पहले तुम बताओ कि आप ने मोटर कहाँ कहाँ देखी है स्कूल में सभी  बच्चे ग्रामीण परिवेश के होने के कारण एक बात मेरी समझ में यह आती है कि इन बच्चों  देखने के लिए कम चीज़े मिलने के कारण ये हर चीज़ को देखते हैं बड़े ही ध्यान से हैं, इनके आस पास सिमित दायरा और सिमित वस्तुएँ ही होती है जब कि शहरी परिवेश होने के कारण शहरी बच्चों को अपेक्षाकृत ज्यादा नईं नई वस्तुएँ देखने को मिलती है |
एक बच्चें ने बताया कि मै रोज घास काटने की मशीन की मोटर को देखता हूँ और नलके की मोटर को भी मुझे उनका चलना अच्छा लगता है.
बच्चों ने बताया विधुत मोटरें सी.डी.प्लेयर,आटा चक्की,ट्यूबवेल,घास काटने की मशीन,हैंडपम्प,दर्जी की सिलाई मशीन,दूध बिलोने की मशीन,पंखें,कूलर एक के बाद एक दनादन बताते चले गए.
जरूरी सामान एकत्र कर के जल्द ही बनाई गयी एक सिम्पल सी विद्युत मोटर.
यह क्यूँ  व कैसे बनी क्या सिद्धांत है इसमें किसी की कोई रूचि नहीं थी बस वो तो इस को घूमना देखना चाहते  थे और कक्षा सात के बच्चों को तो बस ये मतलब होता है कि कोई नयी चीज़ बनी है और अब वो भी बना कर देखेंगे.
पिछले कीलों के संतुलन वाले प्रयोग को लगभग सभी बच्चों बना और कर के देखा.
आवश्यक सामग्री : दो बेलनाकार चुम्बक,एक ताम्बे की तार,एक १.५ वोल्ट का शुष्क सेल.
अब  सेल को चुम्बकों के उपर खडा कर देते है और ताम्बे की तार का लूप बना कर सेल की पीतल की टोपी के उपर रख देते हैं नीचे से खुला तार का ह्रदयाकार लूप चुम्बकीय क्षेत्र में उत्त्पन्न बल से वृताकार घूमने लग जाता है और काफी देर तक घूमता रहता है
चुम्बक की धातु विधुत की सुचालक है और तार भी जब परिपथ पूरा होता है यानी तार का सिरा चुम्बक से स्पर्श करता है तो सामान ध्रुवों के प्रतिकर्षण के कारण वेह सिरा धकेला जता है और विपरीत ध्रुवों के आकर्षण के कारण दुसरा सिरा आकर्षित किया जाता है यह क्रिया बार बार दोहराई जाती है और लूप घूमने लगता है.
सब बच्चों ने ताली बजाई और जमूरा खुश हुआ,किसी बच्चे ने सामान ले लिया कि मै बना के देखता हूँ फिर सब बारी बारी बना कर देखेंगे, सीखेंगे तोड़ फोड़ कर सामान वापस कर देंगे.
अपना उद्देश्य सफल हा हा ....
बीज डालेंगे तभी तो पौधे उगेंगे,बनेंगे पेड़ फिर ही तो देंगे फल.
देखो यह चलचित्र  देसी है पर है तो अपना 



प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Saturday, May 07, 2011

विज्ञान पहेली-14 Science Quiz-14 (और Science Quiz-13 का उत्तर)

विज्ञान पहेली-14 Science Quiz-14 (और Science Quiz-13 का उत्तर)
बड़ी खुशी से सूचित किया जाता है की इस  पहेली -१३  के विजेता बने हैं,

Indranil Bhattacharjee ........"सैल"

आपको  बहुत बहुत बधाईयाँ …….
दूसरे  स्थान पर रहे श्री रजनीश कुमार तीसरे स्थान पर रहे श्री आशीष मिश्रा  
श्री राज भाटिया जी का भी धन्यवाद ...
आप सब को भी बधाईयां ...........
यह अणु यूरिया का है यूरिया के कृत्रिम निर्माण से पहले पूरी दुनिया में बर्जेलियस का सिद्धान्त माना जाता था कि कि यूरिया जैसे कार्बनिक यौगिक सजीवों के शरीर के बाहर बन ही नहीं सकते तथा इनको बनाने के लिए प्राण शक्ति की आवश्यकता होती है।यूरिया को सर्वप्रथम १७७३ में मूत्र में फ्रेंच वैज्ञानिक हिलेरी राउले ने मूत्र  में खोजा था परन्तु कृत्रिम विधि से सबसे पहले यूरिया बनाने का श्रेय जर्मन वैज्ञानिक  फ्रिएद्रीच वोहलर को जाता है।इन्होंने सिल्वर आइसोसाइनेट से यूरिया का निर्माण किया तथा स्वीडेन के वैज्ञानिक बर्जेलियस के एक पत्र लिखा कि मैंने बिना वृक्क (किडनी) की सहायता लिए कृत्रिम विधि से यूरिया बना लिया है। 
आज  यह माना जाता है कि क्रेग वेंटर John Craig Venter पहला वैज्ञानिक है जो ईश्वरीय शक्ति से खेला  Play with God और उस ने प्रयोगशाला में पहली कोशिका कृत्रिम रूप से बनाई इस से कईं साल पहले Play with God का कारनामा वैज्ञानिक  फ्रिएद्रीच वोहलर Friedrich Wöhler (31 July 1800 - 23 September 1882)  कर चुके थे |
यह  लेख पढ़ कर आप जान सकते हैं कि कौन है पहला वैज्ञानिक जो है इस खिताब का असली हकदार 
यूरिया का उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में होता है।  आज़ाद भारत में अब कृषि मे आत्मनिर्भरता बहुत बड़ी चुनोती थी इसके लिए भूमि का अधिक प्रयोग,सिंचाई के साधन,और उचित उर्वरकों की आवश्यकता थी इस लक्ष्य को पाने के लिए हरित क्रांति की मुहीम चलाई गयी तब देश के नेता लोग भी कुछ देश के बारे में सोचा करते थे और सेवक भी हुआ करते थे 
यूरिया ने देश की हरित क्रान्ति को कामयाब बनाने में बहुत योगदान दिया आज हम यह तो कह देते हैं कि रासायनिक खादे खतरनाक हैं परन्तु आज़ाद भारत के लोगो का पेट भरने के लिए आधुनिक कृषि को अपनाया जाना  जरूरी था |  
आज़ादी के समय मोटा आनाज ज्यादा उगाया जाता था क्यूंकि इस के लिए अधिक सिंचाई और ज्यादा कृषि क्रियाएँ आवश्यक नहीं थी मानसून का जुआ खेल कर किसान इसे उगा देता था गेहूं को अधिक नज़ाकतों की आवश्यकता थी आम जन मोटा अनाज खाता था और किसी खास मेहमान के आने पर बनती थी गेहूं कनक की रोटियां | जैसा कि इस पुराने पंजाबी गीत में स्पष्ट है कि कनक के मन्न यानी गेहूं की  रोटी की क्या खास बात थी |  
नहरों ,ट्यूबवेल,नया बीज,सघन खेती  यूरिया और किसानों की कमरतोड मेहनत ने गेहूं को सुलभ बना दिया | 

खैर अब है बारी विज्ञान पहेली -14 की
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विज्ञान पहेली -14 ........ Science Quiz -14
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यह क्या  है ? What is this ? 
हिंट  : कितना आवश्यक था यह काम  परन्तु अब  यह बंद हो गया   .....
हेली का जवाब 15-5-2011, 8 बजे तक दे सकते है |
हेली का परिणाम 15-5-2011, 9 बजे |
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
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Thursday, May 05, 2011

अब किसकी बारी है ? ओबामा Whose turn is it now? Obama

अब किसकी बारी है ? ओबामा 
डीएनए डिटेक्टर
ट्रिंग ट्रिंग ........ट्रिंग ट्रिंग ..
CIA के ऑफिस में फोन घरघराता है और पूछा जाता है अब किस को खोज के मारना है बताओ मैंने ऐसी विधि और मशीन बना ली है जो पृथ्वी पर किसी भी जीवित और मृत प्राणी को खोज कर बता देगा आप को ओसामा बिन लादेन को खोजने में 10 वर्ष लग गए पर अब नहीं लगेंगे मेरी DNA खोजी मशीन में 10 मिनट में पता लग जाएगा कि अमुक व्यक्ति जिसे आप खोज रहे हैं वो कहाँ है?
CIA अधिकारी नहीं ऐसी मशीन नहीं हो सकती है आप का दावा अगर सही नहीं साबित हुआ तो आप को अपराधी घोषित किया जा सकता है | ठीक है आप मेरे को एक मोका देवें मै आप को अमुक व्यक्ति को खोजने में मदद करूँगा | ठीक है आप की कोई खास आवश्यकता है ? जी हाँ मुझे वांछित व्यक्ति का बाल नाख़ून या कोई एक कोशिका चाहिए जिस में DNA  मोजूद हो | 
अगले दिन, CIA इस मशीन को अजमाने के लिए अपने एक ऑफिसर का डीएनए नमूना देते है  मशीन के स्कैनर पर रखते ही मशीन के कम्प्यूटर के मोनिटर पर हलचल साफ़ दिखाई देती है कुछ देर सर्च के बाद परिणाम आता है कि मशीन से बीस  मीटर दूरी पर ही है यह व्यक्ति और उस तक जाने का नक्शा आता है तो पता चलता है वो तो CIA के भवन में ही है |
वाह यह तो चमत्कार हो गया तुरंत राष्ट्रपति जी को सूचित किया जाता है और आगामी योजना पर काम शुरू हो जाता है और आविष्कारक को इस गुप्त योजना का मुख्य बना दिया जाता है अब जल्द ही सब आतंकियों को खोज कर मार गिराया जाएगा | 
 यह विज्ञान कथा कक्षा आठ के छात्र कपिल राणा  ने लिखी    
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा