Wednesday, August 31, 2011

21 जून 2011 को क्लब सदस्यों ने ज्ञात की पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth date june 21,2011

21 जून 2011 को क्लब सदस्यों ने ज्ञात की पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth date june 21,2011
21 जून 2011 सबसे लंबे दिन  को क्लब सदस्यों सलोनी,अभीजीत,चारु,पलक,स्पर्श व पार्थवी ने पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने के लिए एक प्रयोग किया.इस प्रयोग की विधि का जिक्र इस पोस्ट से पहली पोस्ट मे किया जा चुका है.
 पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने के लिए किया प्रयोग 
पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की इरैटोस्थनिज़ गणनाEratosthenes' measurement of the Earth's circumference   विधि का प्रयोग कर के इन क्लब सदस्यों ने  पृथ्वी की परिधि ज्ञात की.
इस प्रयोग को करने के लिए एक छड चाहिए होती है जो पृथ्वी पर खड़ी की जा सके यानी जैसे क्रिकेट की विकेट होती है उसे हम जमीन मे गाड़ देते हैं या फिर लकड़ी के तख्ते पर एक स्टिक छडी खड़ी कर लेते हैं.
21 जून के दिन 11 AM से 1 PM के बीच इस स्टिक को जमीन पर खडा कर के प्रत्येक 4 मिनट के बाद परछाई की लम्बाई ज्ञात करते हैं 
और इस प्रकार की सारणी मे लिख लेते हैं 
समय
छड की ऊँचाई
परछाई की लम्बाई 
11 AM
75 cm
26cm
11.04 AM
75 cm
24 cm
11.08 AM
75 cm
22 cm
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11.56 AM
75cm
10 cm
12 Noon
75 cm
9.1 cm
12.04 PM
75 cm
9.3 cm
12.08 PM
75 cm
10.6 cm
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12.56 PM
75 cm
20.02 cm
01.00 PM
75 cm
20.08 cm

यहाँ से हमे दो गणनाएं प्राप्त होती हैं 
छड की लम्बाई                       = 75 cm             ........( हमने खुद इतनी बड़ी छड ली )
परछाई की न्यूनतम लम्बाई = 9.1 cm   
अब इन दोनों गणनाओं की सहायता से हम सूर्य का कोण ज्ञात कर सकते है.
बायें हाथ के समकोण त्रिभुज मे,    
लम्ब = 9.1 cm
आधार = 75 cm
tan Q = 9.1/75


tan Q  = 0.121333

Q = tan-1(0.121333)

Q = 6.92°


यहाँ से हमें सूर्य का उन्नयन कोण प्राप्त हो गया.
हम जानते हैं कि मध्य प्रदेश के उज्जैन नामक शहर से कर्क रेखा गुजरती है हमने इस कैलकुलेटर की सहायता से यमुनानगर (हरियाणा) से उज्जैन (मध्य प्रदेश) के बीच की दूरी ज्ञात कर ली.

दो शहरों के बीच की दूरी ज्ञात करने का केलकुलेटर यहाँ है.


उज्जैन से यमुनानगर की सरोजिनी कालोनी के बीच की दूरी = 776 किलोमीटर


अब सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि के सूत्र से पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर ली.

   पृथ्वी की परिधि = (दूरी x 360) सूर्य का उन्नयन कोण  
                  
 पृथ्वी की परिधि =(776 x 360) / 6.92
                                       
हल करने पर,
पृथ्वी की परिधि =  40370 किलोमीटर                        
पृथ्वी की परिधि (स्टैंडर्ड) = 40075 किलोमीटर 
सदस्यों की गणना मे त्रुटि  =  0.73 %                          


City
यमुनानगर
Country
India
Date
21 June 2011
Solar Noon (UT)
Latitude
30°08’ N
Longitude
77°17’ E
Gnomon
75cm
Shadow
9.1 cm
Angle
6.92°



Circumference of Earth experimental 
 40370 km
Error
 o.73 %
  • अभी अगली पोस्ट मे दो और तरीके आपको बताए जायेंगे जिन से हम पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर सकते हैं 

    प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
  • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
    विज्ञानं संचार में अपना योगदान दें इस ब्लॉग के फालोअर बन कर    

Tuesday, August 16, 2011

पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth


पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth

पृथ्वी की परिधि 40075 किलोमीटर है जो कि 24901 मील (24,901.55 miles 40,075.16 kilometers).
के बराबर होती है अगर आप इक्वेटर के उपर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से जमीन  समुन्दरों को लांघते हुए  बिना रुके 24 घंटे चलते रहो तो पृथ्वी पूरा चक्कर  करने मे लगभग 17 दिन लगेंगे.
आप खुद भी पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर सकते हो
इसके लिए आप को एक सूत्र प्रयोग करना होगा
पृथ्वी की परिधि = 2 x पाई x पृथ्वी की त्रिज्या

पाई का मान 22/7=3.1415 लगभग लेते है
जबकि पृथ्वी की त्रिज्या = 6371.1 किलोमीटर है
सूत्र मे मान डालने पर
पृथ्वी की परिधि = 2 x 3.1415 x 6371.1 = 40,075 किलोमीटर  
 पाई का मान दशमलव के बाद जितने अधिक अंकों तक लेंगे उतना ही अधिक शुद्ध परिधि प्राप्त होगी.
आपको जान कर हैरानी होगी यदि हम उत्तरी ध्रुव से दक्षणी ध्रुव के बीच पृथ्वी की परिधि ज्ञात करें तो वो और भी अलग होगी क्यूंकि पृथ्वी पूरी गोल नहीं है.ध्रुवों पर पृथ्वी की परिधि थोड़ी सी कम है.
ध्रुव से ध्रुव पृथ्वी की परिधि पृथ्वी की परिधि = 40008 किलोमीटर है.
इक्वेटर और ध्रुवों की तरफ से पृथ्वी की परिधि मे 67 किलोमीटर का अंतर है
यदि हम तुलना की दृष्टी से देखें तो चंद्रमा की परिधि 10,921 किलोमीटर है. 
 बृहस्पति की परिधि 500000 किलोमीटर है.  
आओ कुछ और गणनाओं को जाने :
पृथ्वी की परिधि किलोमीटर मे =
40,075 km
पृथ्वी की परिधि  मीटर मे =40,075,000 meters
पृथ्वी की परिधि सेंटीमीटर मे = 4,007,500,000 centimeters
पृथ्वी की परिधि मील मे = 24,901 miles
पृथ्वी की परिधि फीट मे = 131,477,280 feet
पृथ्वी की परिधि इंच मे = 1,577,727,360 inches
हम पृथ्वी की परिधि की गणना खुद भी कर सकते हैं
प्राचीन ग्रीकवासी अपने विकसित किये गए तरीके से पृथ्वी की परिधि निकाला करते थे उनकी विधि बहुत ही साधारण थी . अगर हमारी पृथ्वी समतल है तो हमारी धूप मे बनने वाली परछाई सब जगह एकसमान होगी (जैसा कि निम्न चित्र की बाईं तस्वीर मे दिखाया गया है) परन्तु ऐसा नहीं है हमारी पृथ्वी समतल नहीं गोल है इस कारण हमारी परछाई दो अलग अलग स्थानों पर अलग अलग लम्बाई की होगी. (जैसा कि निम्न चित्र की दाईं तस्वीर मे दिखाया गया है) आप भी दो दोस्त अगर दो अलग अलग स्थानों पर रहते हों तो आप दोनों मिल कर ग्रीकवासीयों की विधि से पृथ्वी की परिधि ज्ञात कर सकते हो.
    
इरैटोस्थनिज़ Eratosthenes
पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की इरैटोस्थनिज़ गणना
Eratosthenes' measurement of the Earth's circumference
इरैटोस्थनिज़ Eratosthenes एक ग्रीक गणितज्ञ, शोक कवि,एथेलीट,भूगोलवेत्ता,खगोलशास्त्री और संगीतकार भी थे उन्होंने एक गणना विधि का आविष्कार किया. इनका काल 276 BC - 194 BC था.इन्होने ही सर्वप्रथम जियोग्राफी शब्द का प्रयोग किया. सर्वप्रथम प्राचीन यूनानी विद्वान इरैटोस्थनिज़ ने भूगोल को धरातल के एक विशिष्टविज्ञान के रुप में मान्यता दी.

कैसे किया इरैटोस्थनिज़ ने अपना प्रयोग ...
इरैटोस्थनिज़ ने पृथ्वी की परिधि नापने के लिए मिस्र के आस्वान क्षेत्र में साइने नामक स्थान को अपना प्रयोगस्थल बनाया
माना मैं साइने Syene मे रहता हूँ और मैं यह भी जानता हूँ कि ग्रीष्म अयनांत summer solstice 21 जून के दिन इस शहर मे सूर्य सीधा मेरे सिर पर रहता है और ठीक इसी वक्त मेरा एक अन्य दोस्त जो की यहाँ से 800 किलोमीटर दूर अलक्जेंडरिया मे रहता है वह वहां किसी खम्बे की ऊँचाई और उस की न्यूनतम परछाई की लम्बाई से सूर्य के उन्नयन कोण का मान 7°12' (the angle of elevation of the sun was 7°12') पाता है.
गणना करने पर,
अलक्जेंडरिया से Syene के बीच की दूरी =7°12'/360°
(क्यूंकि पृथ्वी गोलाकार है इसलिए 360° से प्राप्त उन्नयन कोण को भाग दिया)
                                                           =1/50
अर्थार्त अलक्जेंडरिया से Syene के बीच की दूरी पृथ्वी की कुल परिधि की 1/50 है.
और यह ज्ञात था कि अलक्जेंडरिया से Syene के बीच की दूरी 800 किलोमीटर है.
हल करने पर,
पृथ्वी की कुल परिधि = 800 x 50/1 = 40,000 किलोमीटर    
इरैटोस्थनिज़ की पृथ्वी की परिधि की गणना मे कुछ त्रुटि रह गयी थी परन्तु उस जमाने मे यह ज्यादा महत्वपूर्ण था कि पृथ्वी की परिधि और पृथ्वी की त्रिज्या ज्ञात की जा सकी.
क्लब सदस्यों के द्वारा यमुनानगर मे पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने का प्रयोग २१ जून २०११ को किया गया जल्द ही उस प्रयोग की पोस्ट लगाई जायेगी.


  • प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
  • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Thursday, August 04, 2011

किस ने बुझा दी मेरी मोमबत्तियाँ ? Blow out candles

किस ने बुझा दी मेरी मोमबत्तियाँ ? Blow out candles 
बच्चों के मुहँ  पर बस एक ही बात रहती है बस सर कोई प्रयोग कर के दिखाओ, 
असल मे बच्चे बहुत जिज्ञासु होते है और अगर उन को ये आभास हो जाए कि कोई है जो उन की जिज्ञासा को शांत कर सकता है तो बस उस अध्यापक के पीछे पीछे सारे .. सर जी ..सर जी ...
चलो फिर करते हैं एक प्रयोग कि 
मोमबत्तियाँ बुझ जाएँ और पता भी ना चलें किस ने बुझाई तो ऐसा जादू  देखने के लिए सब ने हाँ कर दी और लग पड़े सामान एकत्र करने. 
क्या क्या चाहिए ??
सोडियम बाईकार्बोनेट (मीठा सोडा), एसेटिक एसिड (सिरका), काँच का पारदर्शक बर्तन, कुछ जलती हुई मोमबत्तियाँ   
कैसे किया जाए यह ??
NaHCO3
CH3COOH
काँच के पारदर्शक बर्तन मे दो चम्मच सोडियम बाईकार्बोनेट (मीठा सोडा) लेकर उस मे तनु एसेटिक एसिड (सिरका) डाल देते है थोड़ी सी झाग बनती है जो कि बाद मे बननी बंद हो जाती है अब इस काँच के बर्तन को उठा कर थोड़ा सा तिरछा कर के जलती हुई मोमबत्तियों के पास ले जाते हैं वो बुझती चली जाती हैं.
सब वाह वाह करते हैं.
CO2




क्यूँ हुआ ऐसा ??  
सोडियम बाईकार्बोनेट (मीठा सोडा) की एसेटिक एसिड (सिरका) के साथ काँच के पारदर्शक बर्तन मे रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप CO2 गैस बनती है जब बर्तन को उठा कर थोड़ा सा तिरछा कर के जलती हुई मोमबत्तियों के पास ले जाते हैं वो बुझती चली जाती हैं. क्यूंकि CO2 कार्बन डाईआक्साईड गैस जलती हुई वस्तु की आग को बुझा देती है. 
ये है इस की रासायनिक क्रिया की समीकरण  
NaHCO3 + CH3COOH  ----> CO2 + H2O  + CH3COONa 


देखें यह विडियो 





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Saturday, July 30, 2011

विज्ञान प्रदर्शनियों का निर्णायक मंडल कैसा हो? fair judgment of science exhibition, how ?


विज्ञान प्रदर्शनियों का निर्णायक मंडल कैसा हो?

गत १५ वर्षों मे कईं बार मैंने विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनियों मे बच्चों के प्रदर्शों का मूल्यांकन करने वाले निर्णायक मंडल के ऐसे ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने मे छात्रों को उलझते देखा है कि सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ कि निर्णायक मंडल का चयन आयोजन समिति के पदाधिकारियों के द्वारा बस यूँ ही कर लिया जाता है या किसी मापदंड का प्रयोग इनके चयन मे भी किया जाता है.

मैंने विज्ञान की एक प्रतियोगिता मे देखा था कि एक कमरे मे एक मीटिंग हो रही थी गलती से किसी को खोजते मै उस कमरे मे पहुँच गया तो मुझे पता चला कि ये निर्णयको का ओरियेंटेशन कार्यक्रम चल रहा है जिस मे विशेषज्ञ द्वारा नियुक्त किये गए निर्णायक मंडल को कैसे कैसे मूल्यांकन किया जाना है उस के टिप्स दिए जा रहे थे. किन किन बिंदुओं को ध्यान मे रखा जाए ये भी बताया गया था और वहां मैंने एक खास बात यह भी सुनी की नवाचार को विशेष महत्व दिया जाये.

मैंने बहुत सी जिला,राज्य,राष्ट्रीय व संस्थाओं की विज्ञान प्रदर्शनियों व प्रतियोगिताओं मे बच्चो को भाग दिलवाया है और उन पर कोई दबाव नहीं देकर सहज भाव से जवाब देने के लिए प्रेरित किया और यहाँ तक भी कहा कि डरने की कोई जरूरत नही है यदि निर्णयको के किसी प्रश्न का जवाब नहीं दिया गया तो तुमने डरना नहीं है और गलत जवाब नहीं देना है.

एक बार ऐसी स्तिथि उत्त्पन्न हो गयी जब एक विद्यार्थी से एक निर्णायक ने उस के प्रतिदर्श मे से एक गत्ते का बना समांतर चतुर्भुज पैरल्लोग्राम उठा कर उस के आयतन वोल्यूम का सूत्र पूछ लिया. वो बच्चा हैरान हो कर मेरी तरफ देखने लगा. तब मैंने मुहँ पर ऊँगली रख कर उस बच्चे को चुप रहने यानी कोई उत्तर ना देने का इशारा किया. 
एक बार एक वर्किंग माडल को देख कर एक निर्णायक साहेबान बोले,क्या यह प्रैक्टिकली काम कर लेगा?

एक अन्य बच्चे से पूछा ‘बता बे तैने इस मे क्या आविष्कार किया’ ? निर्णायक का यह प्रश्न पूछना हास्यास्पद है की उस मोडल मे क्या आविष्कार है ये तो उस ने खुद पता लगाना है.

असल मे जब से निर्णायकों के लिए मानदेय देने का प्रावधान शुरू हुआ है तब से कुछ आयोजक ऐसे लोगो को भी जज बनाने लग पड़े है जिन्हें वो खुश रखना चाहते हैं २५० रुपयों से लेकर ५०० रुपयों तक नगद मानदेय देने का प्रावधान या फिर उन्हें गिफ्ट देकर सम्मानित करने का प्रावधान कुछ गडबड जरूर पैदा करता है. आयोजन समिति के पास १० से १२ निर्णायकों की व्यवस्था करना काफी मशक्कत का काम होता है इस कारण भी आनन फानन मे निर्णय जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए बस शैक्षणिक योग्यता या फिर पद नाम देख कर चुन लिया जाता है.

निर्णायक मंडल को निष्पक्ष हो कर काम करना चाहिए ये निर्णय देने की पहली और न्यूनतम शर्त है. आयोजन समिति को भी स्कूल स्तर के मूल्यांकन के लिए कम से कम स्नातक कालेज़  स्तर कर के प्राध्यापक,प्रोफेसर,वैज्ञानिक या इनके अलावा इंजीनियर्स की सेवाएं लेनी चाहियें. हर कार्यक्रम मे मूल्यांकन शीट दी जाती है जिस मे मूल्यांकन के अंक निर्धारित होते है जैसे एक विख्यात विज्ञान प्रतियोगिता की मूल्यांकन शीट कईं वर्ष पहले कुछ निम्न प्रकार से  होती थी.

नवाचार ६० अंक + प्रस्तुतीकरण  २० अंक + फाईल १० अंक + समस्या की सार्थकता व टीम वर्क १० अंक  = १०० अंक

परन्तु मैंने कईं विज्ञान प्रदर्शनियों मे माडल मे नवाचार की बजाय बच्चे के प्रस्तुतीकरण मात्र को को चयन का आधार बनते देखा है और बाद मे जजो से बात करने पर यह भी सूना की बच्चा बहुत बढ़िया बोला.परन्तु ऐसा केवल ब्लोक एवं जिला स्तर जैसे निचले स्तर पर ही देखा है क्यूंकि ब्लाक या जिला स्तर पर खास तौर पर निर्णायकों का चयन ही गंभीरता से नहीं किया जाता.
NCERT की यह गाइड लाइन स्पष्ट कहती है कि प्रस्तुतिकरण अंतिम व गौण बिंदु है.  
NCERT की यह गाइड लाइन

एक बच्चा जो ग्रामीण परिवेश के सरकारी स्कूल का है वह  शहरी क्षेत्र के अंग्रेजी माध्यम के पब्लिक स्कूल के बच्चे के समान प्रस्तुति नहीं दे पायेगा और वो भी अंग्रेजी माध्यम मे,हिंदी माध्यम का बच्चा तो दिक्कत महसूस करेगा.ऐसी स्थिति मे जहां ग्रामीण और शहरी,हिंदी और अंग्रेजी माध्यम,सरकारी और प्राईवेट स्कूलों की कोई सम्मिलित विज्ञान स्पर्धा  हो वहां पर निर्णय को अनुपातिक बाँट लेना चाहिए तांकि केवल वो ही बच्चे व्यवस्था का लाभ ना उठा सके जिन के पक्ष मे पहले से निर्णायक,धन,सुविधाएँ और अध्यापकों और अभिभावकों का भरपूर सहयोग पहले से ही है.

ग्रामीण क्षेत्र मे अभिभावकों के पास दो वक्त रोजी रोटी कमाने से ही फुर्सत नहीं मिलती कि वो अपने बच्चों को कोई रचनात्मक सुपोर्ट दे सकें ऐसे मे वो और उन के बच्चे पूर्णतया स्कूल के अध्यापकों पर ही निर्भर होते है अध्यापक की उसकी क्षमता मुताबिक़ तैयारी करवाता है और ले जाता है बच्चे को भाग दिलवाने और फिर वो सिस्टम का शिकार हो जाए तो बच्चे के कोमल मन पर बुरा असर पड़ता है.

निर्णायक मंडल का चुनाव आयोजन समिति के लिए एक बहुत बड़ा काम होना चाहिए जिसे अक्सर हल्के फुल्के ले लिया जाता है.यदि जिले से ही कुछ अध्यापकों का निर्णायकों के रूप मे चयन करना है तो कम से कम यह भी देखा जाए कि अमुक निर्णायक ने क्या कभी अपने सेवा काल के दौरान राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों  पहुंचाया है यानी भाग दिलवाया है  या कम से कम किसी बड़े स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी को देखा मात्र भी है या नहीं,बस तुष्टिकरण के लिए ही तो नही निर्णय जैसा महत्वपूर्ण कार्य उन्हें सौंप दिया गया है.

सेमीनार,भाषण,प्रदर्शनी,नाटक,निबन्ध,क्विज ये पांच-छह विज्ञान स्पर्धाएं बच्चो को वर्ष भर के दौरान करवाई जाती हैं इन सब मे बच्चा अपने द्वारा कौशल दस्तकारी नवाचार कल्पनाशीलता का प्रदर्शन केवल विज्ञान प्रदर्शनी मे ही कर सकता है.ये तो इस देश का दुर्भाग्य है कई कि प्रतिभाओं का चयन ही नहीं हो पता और सिफारशी उपर जा कर फेल हो जाते हैं
ये किसी मोडल के लिए पूछे गए आदर्श प्रश्न यहाँ दे रहां हूँ आप यहाँ एक अच्छा निर्णायक होने के गुणों को पढ़ सकते हैं .

  • How did you come up with the idea for this project?
  • What did you learn from your background search?
  • How long did it take you to build the apparatus?
  • How did you build the apparatus?
  • How much time (many days) did it take to run the experiments?
  • How many times did you run the experiment with each configuration?
  • How many experiment runs are represented by each data point on the chart?
  • Did you take all data (run the experiment) under the same conditions, e.g., at the same temperature (time of day) (lighting conditions)?
  • How does your apparatus (equipment) (instrument) work?
  • What do you mean by (terminology or jargon used by the student)?
  • Do you think there is an application in industry for this knowledge (technique)?
  • Were there any books that helped you do your analysis (build your apparatus)?
  • When did you start this project? or, How much of the work did you do this year? (some students bring last year's winning project back, with only a few enhancements)
  • What is the next experiment to do in continuing this study?
  • Are there any areas that we not have covered which you feel are important?
  • Do you have any questions for me?
  • प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
  • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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