Wednesday, October 05, 2011

23सितम्बर 2011 को क्लब सदस्यों ने ज्ञात की पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth date September 23,2011

23सितम्बर  2011 को क्लब सदस्यों ने ज्ञात की पृथ्वी की परिधि Circumference of the Earth date September  23,2011
मानवेंद्र शर्मा के नेतृत्व मे 
सी.वी.रमन विज्ञान क्लब यमुनानगर के सदस्यों ने विषुव के अवसर पर पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने का प्रयोग किया. क्लब सदस्यों ने क्लब बाल सचिव मानवेंद्र शर्मा के नेतृत्व मे अपनी १० साथियों की टीम के साथ जिमखाना क्लब के साथ खाली पड़े मैदान मे यह पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने का प्रयोग किया.
विषुव एक भागोलिक समय-बिंदु है जो की २३ सितम्बर के दिन होता है इस दिन और रात एक बराबर होते हैं. जैसा कि हम जानते हैं कि पृथ्वी अपनी धुरी पर २३½° झुकी हुई है सूर्य के चारो और चक्कर लगते हुए पृथ्वी का एक गोलार्ध सूर्य के एक तरफ रहता है और फिर दूसरा गोलार्ध सूर्य की और रहता है वर्ष मे दो बार ऐसी स्तिथि भी आती है जब जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है। इस स्थिति को विषुव या इक्विनॉक्स कहा जाता है। इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है.
क्लब के सचिव दर्शन लाल ने बताया कि यह स्तिथि पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की सबसे बेहतर स्तिथि होती है. आज के दिन सूर्य बिलकुल भूमध्य रेखा पर होता है यदि ऐसी स्तिथि मे दो शहर  जो एक दूसरे से 500-600 किलोमीटर दूर हो वहां पर भी कोई दूसरी टीम यही प्रयोग कर के सूर्य का कोण ज्ञात करे तो दोनों कोणों की मदद से इरैटोस्थनिज़ की विधि से पृथ्वी की परिधि की गणना की जाती है क्लब सदस्यों की इस काम मे मदद करने मे अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनिज़ टीम के सदस्यों मे पूरी दुनिया मे जगह जगह यह प्रयोग किये जिस के नतीजे  ईमेल कर दिए गए हैं अब सभी सदस्य वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने के अगले चरण मे प्रवेश करेंगे. सभी क्लब सदस्यों को इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था के द्वारा प्रमाणपत्र दिया जायेगा.
 डा.चन्द्रशेखर शर्मा के साथ 
क्लब के रिसोर्स पर्सन्स डा.चन्द्रशेखर शर्मा ने बताया कि एक वर्ष मे चार दिन ऐसे आते है बस उन्ही चार दिनों मे कईं देशो के बच्चे मिल कर संस्था के सहयोग से यह अर्थ एक्सपेरिमेंट करते है वो चार दिन विषुव मार्च मे, समर सॉल्स्टाइस जून मे फिर विषुव सितंबर मे और विंटर सॉल्स्टाइस दिसंबर मे आते है विषुव को दिन रात बराबर होते हैं और समर सॉल्स्टाइस व विंटर  सॉल्स्टाइस को क्रमश  सबसे बड़ा दिन और रात होती है. अब क्लब सदस्य दिसम्बर मे विंटर सॉल्स्टाइस के दिन फिर से यह प्रयोग करेंगे और उस दिन और अधिक बच्चे इस मे शामिल किये जायेंगे.

पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने की इरैटोस्थनिज़ गणना Eratosthenes' measurement of the Earth's circumference   विधि का प्रयोग कर के इन क्लब सदस्यों ने  पृथ्वी की परिधि ज्ञात की.
इस प्रयोग को करने के लिए एक छड चाहिए होती है जो पृथ्वी पर खड़ी की जा सके यानी जैसे क्रिकेट की विकेट होती है उसे हम जमीन मे गाड़ देते हैं या फिर लकड़ी के तख्ते पर एक स्टिक छडी खड़ी कर लेते हैं.
23सितम्बर  2011 को क्लब सदस्यों  11 AM से 1 PM के बीच इस स्टिक को जमीन पर खडा कर के प्रत्येक 4 मिनट के बाद परछाई की लम्बाई नापते रहे और इस सारणी मे नोट करते रहे. 
माप सारणी मे लिख लेते हैं 
समय
छड की ऊँचाई
परछाई की लम्बाई 
11:30 AM
80 cm
53cm
11.34 AM
80 cm
52 cm
11.38 AM
80 cm
50 cm
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11.58 AM
80cm
41 cm
12.02 Noon
80 cm
40.5 cm
12.04 PM
80 cm
41 cm
12.08 PM
80 cm
41.5 cm
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12.26 PM
80 cm
44 cm
12.36 PM
80 cm
45 cm
यहाँ से हमे दो गणनाएं प्राप्त होती हैं 
छड की लम्बाई                       = 80 cm            
परछाई की न्यूनतम लम्बाई = 40.5 cm   
अब इन दोनों गणनाओं की सहायता से हम सूर्य का कोण ज्ञात कर सकते है.
City
यमुनानगर
Country
India
Date
23सितम्बर  2011 
Location
सेक्टर  17
Latitude
30°08’ N
Longitude
77°17’ E
Gnomon
80 cm
Shadow
40.5 cm
Angle
26.85°

इस प्रयोग मे अर्जुन,आदित्य,मानवेंद्र,शाश्वत,हृतिक,पारस,मेघा,मानस,प्रदीप,शुभम,विपिन,राहुल व नीरज ने दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक और डा.चन्द्रशेखर शर्मा के मार्गदर्शन मे यह गतिविधि सम्पन्न की.

नतीजे प्राप्त हो गए हैं 
पीट रोड peet road मलेशिया के SMK st Thomas स्कूल के बच्चो की गणना के अनुसार, 
City
Jalan gambut
Country
Malaysia
Date
21 June 2011
Solar Noon (UT)
Latitude
03°49’N = +3,8167°
Longitude
103°20’E
Gnomon
80 cm
Shadow
40.5 cm
Angle
01°22’ = 01.375°

हल करने पर,
पृथ्वी की परिधि =  41290 किलोमीटर                        
पृथ्वी की परिधि (स्टैंडर्ड) = 40075 किलोमीटर 
सदस्यों की गणना मे त्रुटि  = 3.031 %            
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा 

द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

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Friday, September 23, 2011

सोडियम धातु की जल से क्रिया Reaction of Sodium and Water

सोडियम धातु की जल से क्रिया Reaction of Sodium and Water
जब भी सोडियम धातु का जिक्र आता है तो याद आता है यह वो धातु है जो पानी मे आग लगा देती है जी हां सही सुना है आपने.
 सोडियम अत्यंत सक्रिय यानी क्रियाशील धातु है ये खुली नहीं रखी जा सकती इसको मिट्टी के तेल किरोसिन आयल मे रखी जाती है हवा मे खुला रखा जाने पर यह आक्सीजन से क्रिया कर लेती है और आक्साईड बनाती है.सामान्यतः धातुएँ कठोर होती हैं परन्तु सोडियम अपवाद है यह इतनी नरम होती है की यह धातु चाकू से भी कट जाए.
vanderkrogt.net
सोडियम धातु को चाकू से काटा जा सकता है.
सक्रिय धातु होने के कारण बहुत समय तक सोडियम धातु का निर्माण करना आसानी से  नहीं  हो सका। 1807  में इंग्लैंड के एक वैज्ञानिक डेवी ने द्रव सोडियम हाइड्राक्साइड के वैद्युत अपघटन द्वारा इस तत्व का सर्वप्रथम निर्माण किया.
सोडियम की जल से क्रिया सम्पूर्ण हो जाने के बाद जो पानी बचता है उस मे फिनोफ्थलिन के दो बूंदें  डालने से घोल का रंग गुलाबी हो जाता है अर्थात यह घोल क्षारीय प्रकृति का है.  
यदि सोडियम धातु के छोटे से टुकड़े पर पानी की बूंदे डाली जाएँ तो सोडियम हाइड्रोआक्साईड NaOH
क्षार बनता है और हाइड्रोजन गैस बनती है.  
2 Na + 2 H2       > 2 NaOH + H2
आज सोडियम धातु की जल से क्रिया का प्रयोग किया गया पहले बच्चो को सोडियम धातु से परिचित करवाया गया फिर प्रयोग किया गया 
सोडियम धातु से बहुत से चमत्कार कर के कईं दशको से मदारी जादूगर और तथाकथित सयाने अपनी रोजी रोटी चला रहें हैं मदारी लकड़ियों, हड्डियों नारियल, हवन कुण्ड पानी छिड़क कर आग लगाने का चमत्कार इसी धातु तत्व सोडियम की मदद से ही करते हैं.
इस प्रयोग को देखने के बाद कम से कम यह बच्चे इन तथाकथितों के झांसे मे नहीं आयेंगे.
यही मकसद होता है किसी देश मे वैज्ञानिक चेतना के प्रसार का जिस के लिए विज्ञान संचारक दिन रात विज्ञान संचार का काम करते हैं.
देखें यह वीडियो जिस मे सोडियम की जल से क्रिया दिखाई गयी है.


        
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Saturday, September 10, 2011

गुब्बारा क्यूँ नहीं फटा why balloon not to burst ?

गुब्बारा क्यूँ नहीं फटा  why balloon not to burst?
उत्सुकतापूर्वक देखते अब क्या होने वाला है ?
आज के प्रयोग मे यह दिखाया गया कि उष्मा का अवशोषण पानी के द्वारा कर लिए जाने से गुब्बारा नहीं फटता.
इया प्रयोग के लिए हम दो गुब्बारे balloon लेते है एक गुब्बारे को फूला कर मोमबत्ती या स्प्रिट लैम्प  की लो के उपर ले जाते हैं तो गुबारा ठा कर के फट जाता है.
ऐसा इसलिए होता है जब गुब्बारे की सतह का ज्वलनशील मेटेरियल उष्मा के सम्पर्क मे आता है तो ज्वलन बिंदु आने पर गुब्बारे का मेटेरियल जलने लगता है और अंदर हवा होने के कारण वो फट जाता है और तेजी से हवा बाहर रिलीज़ होती है जिस कारण मोमबत्ती या लैम्प भी बुझ जाता है.
दुसरा गुब्बारा लो उस मे पानी भर लो और फिर उस को फुलाओ. फूलने पर हम देखते हैं कि गुब्बारे के तल पर पानी दिखाई देता है अब हम गुब्बारे को फूला कर मोमबत्ती या स्प्रिट लैम्प  की लो के उपर ले जाते हैं तो गुब्बारा नहीं फटा,ऐसा क्यूँ नहीं हुआ?
मोमबत्ती या स्प्रिट लैम्प  की लो द्वारा उत्पन्न उष्मा Heat पानी द्वारा अवशोषित कर ली जाती है जिस कारण गुब्बारे की सतह का ज्वलनशील मेटेरियल अपने ज्वलन ताप तक नहीं पहुँच पाता है इस कारण नहीं फटता है 
है ना मजेदार कम लागत मे विज्ञान प्रयोग 
क्या कहना है जी      
    • प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
    • द्वारा :-दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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