Wednesday, October 20, 2010

आओं एक मैजिक ट्रिक सीखें Learn a magic trick


आओं एक मैजिक ट्रिक सीखें  Learn a magic trick
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आज बच्चो ने एक मैजिक ट्रिक सीखी
पर उन को पहले ये बताया गया कि जादू- वादू कुछ नहीं होता बस ये तो कुछ  ट्रिक्स, विज्ञान के नियम/सिद्धांत, रसायनों की क्रियायें, हाथ की सफाई, खास तैयार किये गए उपकरणों के प्रयोग और दृष्टी-भ्रम पर आधारित होते है।
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ऊपर दिए गए चित्रों के क्रमवार हम इस ट्रिक मे ये जाने सीखेगें कागज फटने के बाद भी वह कैसे साबुत रह गया।
1. दो पेपर नेपकिन लो, एक जैसे व रंगीन हों।
2. पहले  पेपर नेपकिन को चार फोल्ड कर के ऊपर से 2इंच काट लो।
3. काट कर निचला सिरा फेंक देते है।
4. ऊपर के सिरे को एक हाथ की मुटठी मे छिपा लेते है।  
नोट यहाँ तक का काम छुपा कर करते है 
5. सब लोगों को दूसरा वाला पेपर नेपकिन दिखते है और बोलते है देखो ये साबुत है फटा हुआ नहीं है।
6 व 7  . सावधानी से इस यानी दूसरे पेपर नेपकिन को उसी हथेली मे जिस मे वो कागज का टुकड़ा छिपाया है मे मुट्ठी मे ले लेते है।
8 व 9. अब किसी से भी मुटठी से बहार वाले पेपर नेपकिन को फाड़ने को देते है पहले पेपर नेपकिन के टुकड़े को कस कर पकड़ते है जब वो फाड़ने के ज़ोर लगायेगा तो ऊपर वाला टुकड़ा छोड़ देंगे।
सब समझेंगे कि पेपर नेपकिन फट गया है। परन्तु वो तो वो वाला टुकड़ा था जो छुपाया गया था। 
10.अब सब को पेपर नेपकिन खोल कर दिखा दें।
वो तो फटने के बाद भी साबुत निकलेगा सब खुश होंगे।
यह  वीडियो भी देखे अगर और जानना चाहते हो तो
 
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प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा, विज्ञान अध्यापक, यमुना नगर, हरियाणा

Tuesday, October 19, 2010

लो और नए विज्ञान चुटकले आये Science Joks

लो और नए विज्ञान चुटकले आये Science Joks

1. अध्यापक (छात्र से)- मैंने तुम्हें कुत्ते पर एक साईंस नोट लिखने को कहा था, लिख के क्यों नही लाये।
छात्र (अध्यापक से)- मैंने जैसे ही कुत्ते के ऊपर लिखने के लिए पेन रखा वो भाग गया। 


2. वैज्ञानिक -इस फार्मूले के पीछे मेरे 5 साल निकल गए |
छात्र -इसका मतलब सर आपने इसे इजाद करने मे बहुत मेहनत की 
वैज्ञानिक -  इजाद तो यह एक हफ्ते मे हो गया था लेकिन इसको बेचने मे 5साल लगे |


3. डॉक्टर (मरीज से)- अब तुम बिल्कुल ठीक हो गये हो फिर भी क्यों डर रहे हो?
मरीज (डॉक्टर से)- जिस गाड़ी से मेरा एक्सीडेंट हुआ था उस पर लिखा था फिर मिलेंगे। 


4.एक आदमी मनोचिकित्सक के पास गया। बोला -डॉक्टर साहब मैं बहुत परेशान हूं। जब भी मैं बिस्तर पर लेटता हूं, मुझे लगता है कि बिस्तर के नीचे कोई है। जब मैं बिस्तर के नीचे देखने जाता हूं तो लगता है कि बिस्तर के ऊपर कोई है। नीचे, ऊपर, नीचे, ऊपर यही करता रहता हूं। सो नहीं पाता। कृपा कर मेरा इलाज कीजिये नहीं तो मैं पागल हो जाऊंगा।
डॉक्टर- तुम्हारा इलाज लगभग दो साल तक चलेगा। तुम्हें सप्ताह में तीन बार आना पड़ेगा। अगर तुमने मेरा इलाज मेरे बताये अनुसार लिया तो तुम बिलकुल ठीक हो जाओगे।
मरीज- पर डॉक्टर साहब, आपकी फीस कितनी होगी?
डॉक्टर- सौ रूपये प्रति मुलाकात.. मरीज गरीब आदमी था। बेचारा फिर आने को कहकर चला गया।
लगभग छ: महीने बाद वही आदमी डॉक्टर को सड़क पर घूमते हुये मिला।
डॉक्टर- क्यों भाई, तुम फिर अपना इलाज कराने क्यों नहीं आये? मनोचिकित्सक ने पूछा।
मरीज- सौ रूपये प्रति मुलाकात में इलाज करवाऊं इतने पैसे मेरे पास नही थे? मेरे पड़ोसी ने मेरा इलाज सिर्फ बीस रूपये में कर दिया आदमी ने जवाब दिया।
अच्छा! वो कैसे?
दरअसल वह एक बढ़ई है। उसने मेरे पलंग के चारों पाए सिर्फ पांच रूपये प्रति पाए के हिसाब से काट दिये।

5. एक वैज्ञानिक( आँखों के डॉक्टर से)- डाक्साब मुझे सब दो दो दिखाई पड़ते है |
आँखों का डॉक्टर (वैज्ञानिक से)- तुम्हे चारों को दो दो दिखाई पड़ते है |


डॉक्टर (वैज्ञानिक से) - मोटापे का एक ही इलाज है, तुम रोज सिर्फ 300 ग्राम सलाद,दो मुठ्ठी भुने चने ,500 फल कोई भी,4-5गिलास पानी और मलाई उतरा ढूध पिया करो |
वैज्ञानिक(मुस्कराते हुवे डॉक्टर से)-ये सब  खाना खाने से पहले या खाने के बाद लेना है । 


6.डॉक्टर (मरीज के मित्र से)- अगर आप एक घंटा पहले आ जाते तो हम इन्हें बचा लेते।
मरीज का मित्र- डॉक्टर साहब आधे घंटे पहले तो इनका एक्सीडेंट हुआ था। 



7. तुम्हारी सबसे बड़ी शक्ति क्या है?
जी मेरी पत्नी..
और सबसे बड़ी कमजोरी?
जी दूसरे की पत्नी.. 

8. महिला- ‘मेरे वैज्ञानिक पति की ख़ास विशेषता यह है कि वे खराब से खराब चीज़  की भी ख़ूब बढ़ा-चढ़ाकर प्रशंसा किया करते हैं।’ 
पड़ोसन- ‘ठीक कह रही हो बहन, तभी वे तुम्हारी तारीफ़ों के पुल बांध रहे थे।’


9. डाकू मंगल सिंह वैज्ञानिक के घर में घुस आया
डाकू: सोना(Au) कहां है। जल्दी बताओ।
वैज्ञानिक
(मुस्कराते हुवे डॉकू से)- पूरा घर खाली है जी,जितना सोना  है सो जाओ।


10.वैज्ञानिक-यह कैसी सब्जी बनाई है, गोबर जैसा स्वाद आ रहा है।
वैज्ञानिक की नोकरानी - हे भगवान! न जाने इन्होंने क्या-क्या खाया है। गोबर का भी स्वाद पता है।

Wednesday, October 13, 2010

नाचती नेफ्थालिन की बाल्स Dancing Naphthalene Balls

नाचती नेफ्थालिन की बाल्स Dancing Naphthalene Balls
आज मेरी दसवी कक्षा के बच्चों  ने पाठ अम्ल क्षार व लवण में साइंस रूम गतिविधियों के अंतर्गत नाचती नेफ्थालिन की बाल्स का प्रयोग कर के देखा और सीखने का आनंद लिया
बालको की हाथ से प्रयोग करवाने की मेरी वचनब्द्धता का अनुपालन करते हुए मैंने उनके चेहरे पर आत्मविश्वास वो देखा जैसे वो खुद को वैज्ञानिक समझ रहे हों.........  
आवश्यक सामग्री:

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 नेफ्थालिन की बाल्स जिसे प्यार से  फिनायल की  गोलियाँ भी कहते है
एसीटिक एसिड यानी सिरका या विनेगर  सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट या मिठ्ठा सोडा  पानी ,काँच का बीकर(या काँच का बर्तन)  

कैसे नचाएंगे बाल्स को?
500 ml के बीकर  मे 400 ml पानी लो
तीन चम्मच सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट या मिठ्ठा सोडा घोलो
फिर दो चम्मच एसीटिक एसिड यानी सिरका या विनेगर डालो
कार्बन डाई आक्साईड गैस बनेगी
फिर बीकर मे 5 फिनायल की गोलियाँ डालो और 3-4 मिनट इंतज़ार करो
देखा गोलियाँ कैसे ऊपर नीचे जाने लगती है जैसे प्यार से डांस कर रही हों
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ऐसा क्यूँ हुआ ?
गोलियों की सतह पर कार्बन डाई आक्साईड गैस के बुलबुलें जमा होने शुरू हो जाते है जिस कारण वो फिनायल की गोलियाँ ऊपर उठ जाती है (आर्कमिडीज सिद्धांत) ऊपर जा कर गोलियों की सतह पर कार्बन डाई आक्साईड गैस के बुलबुलें फट जाते है और गोलियाँ भारी हो जाती है और नीचे आती है
Bubbles of CO2 settle on the surface of the balls, thereby decreasing its density. When the balls rise to the surface, the bubbles break and the balls sink.
देखे वीडियो -
 
प्रस्तुति:- दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा
Technorati Tags: Naphthalene Balls, नेफ्थालिन की बाल्स, science, 

Saturday, October 09, 2010

बोतल मे टॉर्नेडो बना कर देखना Water Tornado In A Bottle

बोतल मे टॉर्नेडो बना कर देखना  Water Tornado In A Bottle
बवंडर(Tornado) एक विनाशकारी चक्रवातीय,खतरनाक हवा का घूर्णन स्तंभ है यह एक पाईपनुमा हवा का घूर्णन स्तंभ है जो  की पृथ्वी और तूफानी बादलों(cumulonimbus,क्यूम्यलोनिम्बस) के सम्पर्क से बनता है व कई बार मेघपुंज बादल cumulus cloud और आधार(पृथ्वी) के साथ संपर्क में भी बनता देखा गया है|
"आमतौर पर बवंडर को अमेरिका के कुछ निश्चित क्षेत्रों में देखा जाता है। यह भारत में भी कभी कभार नजर आ जाता है|  बवंडर हवा के भारी दबाव और बादलों के कई तह से बनता है। पानी/धूल मिटटी  की धारनुमा लकीर आसमान से बनती है और जमीन पर से पानी/धूल मिटटी  ऊपर की तरफ खींचती है।"
बवंडर कई आकारों में आते हैं लेकिन कीप के रूप का जिसका संकीर्ण अंत  पृथ्वी छूता है और वृहद अंत मलबे और धूल से भरा बादल की तरफ होता है|
ज्यादातर बवंडर(Tornado) की पवन गति 40 मील प्रति घंटा(64 किमी/घ) और 110 मील प्रति घंटा(177किमी/घ),औरचोड़ाई250 फीट(75 मीटर) के लगभग होती है| बवंडर बनने के बाद खत्म होने से पहले कई किलोमीटर तक चलता है |
  

बोतल मे बवंडर का बनना :-
परियोजना  कार्य के अंतर्गत आज बोतल मे बवंडर बना कर उस के बारे मे जाना गया
दो लीटर की दो बोतले लो 
उन  के ढक्कन मे सुराख़ (१.५ cm) कर लो 
दोनों ढक्कनों को टॉप से चिपका लो ,फेवी क्विक या अल्फी से 
एक  बोतल मे (नीचे वाली) मे 2/3यानी दो तिहाई पानी भर लो 
कोई  भी रंग डाल कर पानी को हलका सा रंगीन कर लो 
ढक्कन  के युग्म मे से एक साइड के ढक्कन को इस पानी से भरी बोतल पर चड़ा दो 
अब  ऊपर वाले ढक्कन पर खाली दूसरी बोतल चड़ा दो 
अब  बोतलों को पलट दो 
यानी भरी बोतल ऊपर व खाली बोतल नीचे 
जैसे  ही पानी नीचे वाली बोतल मे जाना शुरू होगा तो ऊपर वाली बोतल मे कीप जैसी संरचना बनेगी जो नीचे से संकीर्ण और ऊपर से चौड़ी होगी

यह ही है बोतल मे टॉर्नेडो बवंडर 
यह एक बोतल मे भी बन सकता है 

एक  दो लीटर की बोतल मे पानी ले कर

उस के ढक्कन मे १ सेंटी मीटर का सुराख बना लो

फिर ढक्कन कस दो बोतल को उल्टा करदो 

सुराख के नीचे हाथ रख कर बोतल को गोल गोल एक ही दिशा  मे घुमाओ

ढक्कन से हथेली हटा लो

पानी नीचे गिरेगा और बोतल मे बनेगा टॉर्नेडो



प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा



Thursday, September 30, 2010

वातशंकू,वात दिग्दर्शक बनाना Windsock Making

वातशंकू,वात दिग्दर्शक एक शंकुवाकार कपडे की नली होती है इसका उपयोग वायु कि दिशा और सापेक्ष गति मापने के लिए किया जाता है| विंडशोक का प्रयोग हवाईअड्डे और केमिकल फेक्ट्री मे किया जाता है | 
यह बच्चों दवारा बनाया जाने वाला सबसे लोकप्रिय प्रयोग या विज्ञान खिलौना है |
आज क्लब सदस्यों ने  अपनी परियोजना को आगे बढ़ाते हुवे वात दिग्दर्शक
बनाया
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इसके  लिए एक पुराने सिन्थेटिक कपडे के वर्गाकार पीस मे से चित्रानुसार शंक्वाकार  टयूब काट लेते है इस टयूब का एक वृत्ताकार  सिरा  कम से कम एक फीट (१२ इंच) व्यास का होना चाहिए और दूसरा ६ इंच व्यास का होना चाहिए और टयूब की लम्बाई १ मीटर कम से कम हो | टयूब रूप मे सिलने के बाद इसके दोनों  वृत्ताकार सिरों मे एक धातु की तार पीरों देते है ताकि दोनों वृत्ताकार सिरे खुले रहें और अब व्यास के साथ एक धागा Y प्रकार से बाँध देते है और इस को एक लंबे डंडे से बांध कर जमीन से ९० डिग्री का कोण बनाते हुवे खड़ा कर देते है | 
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जब हवा चलती  है तो वातशंकू,वात दिग्दर्शक का छोटा वाला सिर वायु के बहने की दिशा की तरफ उड़ेगा उस दिशा की तरफ कम्पास यानी चुम्बकीय सुई से एक दम सही दिशा ज्ञात कर लेते है  और नोट कर लेते है फिर कई दिनों के आंकड़े एकत्र कर के यह पता लगाया की वायु मे किस फ्रीक्वेंसी से दिशा बदली आज कल परुवा हवा चल रही है |   
वायु की सापेक्ष गति ज्ञात करने के लिए टयूब का डंडे के साथ बनने वाला कोण देखा जाता है कोण अधिकतम ९० डिग्री होने की दशा मे वायु की गति अधिकतम होगी |(Windspeed is indicated by the windsock's angle relative to the mounting pole; in low winds, the windsock droops; in high winds it flies horizontally.)
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आज बच्चों ने अपना वातशंकू,वात दिग्दर्शक बनाना सीखा  और जरूरी प्रयोग किये जैसे दिशा का पता लगाना ,वायु की गति का अनुमान |



 

 

प्रस्तुति:- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा

द्वारा--दर्शन बवेजा ,विज्ञान अध्यापक ,यमुना नगर ,हरियाणा