Tuesday, January 31, 2012

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का भ्रमण National Physical Laboratory New Delhi

राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला का भ्रमण भाग-१ National Physical Laboratory New Delhi Part-1
National Physical Laboratory
देश की राजधानी दिल्ली मे बहुत कुछ ऐसा भी है जो विज्ञान शिक्षार्थियों,शोधार्थियों के लिए बहुत महत्व रखता है ऐसा ही एक स्थान मुझ अपने दिल्ली मे एन.पी. एल. अतिथिगृह प्रवास के दौरान देखने को मिला.
डा.आर.पी.पन्त के साथ 
यह स्थान है राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला,पूसा न्यू दिल्ली जिसके बारे मे कहा जाता है A Premier Research Laboratory in India in the Field of Physical Sciences.
9 से 12 जनवरी 2012 के दिल्ली दौरे मे मेरी NPL देखने की इच्छा पूरी हुई. मै अपने मित्र मैसूर कर्नाटक के अध्यापक महेश चंद्र और भुवनेश्वर ओडिसा के नवीन जी के साथ राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला पहुंचा.थोड़ी सी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद हम पहुंचे सबसे पहले डा.आर.पी.पन्त जी की लैब 'सामग्री अभिलक्षण प्रभाग' (Materials Characterization Division) मे,जहां डा.पन्त ने हमे विस्तार से चुम्बकीय तरल पदार्थ(magnetic fluids) के बारे मे बताया.चुम्बकीय-द्रव,चुंबकीय नैनोकणों के कोलाइडयन निलंबन हैं 
ferrofluid 
इसे ferrofluid भी कहा जाता है फेरोफल्युड एक तरल है जो चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिती मे शक्तिशाली ढंग से चुम्बकीय हो जाता है यह एक  कोलाइडयन निलंबन की तरह है जो नैनोस्केल माप के फेरोमेगनेटिक कण किसी करियर द्रव मे लटके रहते हैं.इन फेरोमेगनेटिक कणों का व्यास 10 नैनोमीटर या उस से भी कम होता है.फेरोफल्युड या द्रव बनाने के लिए तीन पदार्थ चाहियें.बनाने की विधि यहाँ देखें. 
१.आर्द्रक १०%(surfactant 10%)
२.चुम्बकीय ठोस पदार्थ जैसेFeCl3,FeCl2 5 %(Magnetic Solid)  
३.कैरियर या सम्वाहक द्रव 85 % (85% Carrier)
 surfactant के रूप में oleic एसिड,और वाहक द्रव कणों निलंबित के रूप में मिट्टी के तेल का प्रयोग किया जा सकता है.
डा.आर.पी. पन्त जी ने बताया कि फेरोफल्युड के बहुत अनुप्रयोग है इसका प्रयोगों का भविष्य बहुत ही उज्जवल है.फेरोफल्युड का उपयोग कैंसर से लड़ने के लिए किया जाता है.डा.आर.पी.पन्त ने हमें बताया कि फेरोफल्युड का उपयोग कृषि मे किये जाने की अपार सम्भावनाएं हैं यदि ऐसा हो जाता है तो यह एक नयी कृषि क्रान्ति होगी.यहाँ हमने फेरोफल्युड के बारे मे और भी बहुत सी जानकारियाँ मिली. डा.पन्त ने हमें बताया कि जनवरी २०१३ मे एन.पी.एल.फेरोफल्युड पर क अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस आयोजित करवाने जा रहा है जिसमे देश विदेश से वैज्ञानिक,डेलिगेटस भाग लेंगें.डा.पन्त ने हमें इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस मे भाग लेने के लिए प्रेरित किया.यदि कोई इस अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस मे भाग लेना चाहता है तो वो इस लिंक 13th ICMF  पर जा कर अपना पंजीकरण करवा सकता है. 
फेरोफल्युड के कुछ अन्य उपयोग...... 
१.कुछ इलेक्ट्रोनिक युक्तियों मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
२.यांत्रिक अभियांत्रिकी मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
३.अंतरिक्ष यान और विमान निर्माण तकनीक मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
४.विश्लेषणात्मक उपकरण बनाने मे फेरोफल्युड का प्रयोग होता है.
५.थर्मोमेग्नेटिक ऊष्मा संवहन मे 
६.प्रकाशिकी मे 
७.विभिन्न प्रकार की कलात्मक आकृतियाँ बनाने मे जैसे बेबिलोनियन स्तम्भ आदि   
बाकी का विवरण आगामी किस्तों मे वर्णित किया जाएगा ........ 

प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा

Saturday, January 14, 2012

वैज्ञानिक सोच के लिए विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन International Conference on Science Communication for Scientific Temper

वैज्ञानिक सोच के लिए विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 
International Conference on Science Communication for Scientific Temper
                                            विज्ञान रिपोर्ट Science Reporting 

            
NASC काम्प्लेक्स PUSA,नयी दिल्ली 
NASC काम्प्लेक्स PUSA,नयी दिल्ली में 10 to 12 January 2012 तक चल रही अंतर्राष्ट्रीय कांफ्रेंस सम्पन्न हुई.
सी.एस.आई.आर.-निस्केयर,विज्ञान प्रसार,एन.सी.एस.टी.सी. नेटवर्क-DST के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय   कांफ्रेंस में देश-विदेश से आये बहुत सारे विज्ञान संचारकों,वैज्ञानिकों,शिक्षाविदों एवं सरकारी नुमाइंदों ने भाग लिया और वैज्ञानिक सोच विकसित करने में विज्ञान संचार पर अपने शोधपत्र पढ़े और महत्वपूर्ण विचार सांझे किये.  
राष्ट्रीय कृषि विज्ञान काम्प्लेक्स के ए.पी.शिंदे आडिटोरियम में १०-०१-२०११ को सुबह १० बजे इस  अंतर्राष्ट्रीय   कांफ्रेंस का उद्घाटन हुआ था    
उद्घाटन सत्र का दृश्य 
गौहर रज़ा जी, महेश भट्ट जी  
इस  उद्घाटन सत्र  को निम्न महानुभावों ने संबोधित किया 
१. श्री गौहर रज़ा
२. श्री महेश भट्ट 
३. श्री गंगन प्रताप सिंह 
४, श्री जस्टिस मारकंडेय काठ्जू
५. श्री बर्नाड स्चिएले 
६. श्री बी.एम. भार्गव
७. श्री सुबोध मोहंती 
उद्घाटन सत्र  
आडिटोरियम 
श्री जस्टिस मारकंडेय काठ्जू जी ने बहुत ही अच्छे तरीके से समझाया कि सही मायने में लोकतंत्र और वैज्ञानिक सोच क्या है उनके अनुसार सही मायने में आधुनिक विज्ञान ही हमें मानव समाज को और अधिक सुखी बना सकता है आपने कहा कि वैज्ञानिक ज्ञान परमाणु बम भी बना सकता है और उसी को परमाणु ऊर्जा में बदल कर मानव जीवन सुखमय भी बना सकता है आपने प्राचीन भारतीय विज्ञान के विकास पर भी प्रकाश डाला दशमलव और जीरो शून्य भारत की देन है लाख,करोड़,अरब,खरब,पदम,नील,शंख तक संख्याएँ हमारी ही देन हैं. 
NASC,PUSA New Delhi का यह आडिटोरियम बहुत ही सुंदर बड़ा और अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिगोचर है.इसमें एक राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्राहलय भी है जिस में बहुत ही ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी और नज़ारे हैं प्राचीन काल से लेकर आज तक के कृषि विकास का बड़ा ही नयनाभिराम नज़ारा है.सभी को यह राष्ट्रीय कृषि विज्ञान संग्राहलय जरूर देखना चाहिए.
 डा.अरविन्द मिश्रा जी एवं मैं 
उद्घाटन सत्र  के बाद चायकाल में मै बनारस काशी से आये डा.अरविन्द मिश्रा जी से मिला आपको मै ब्लॉग के माध्यम से लगभग डेढ़ वर्षों से जानता हूँ परन्तु ! कईं बार अवसर बने भी परन्तु संयोगवश मुलाक़ात न हो सकी, आप सच में वैज्ञानिक सोच के स्वामी हैं आप नए विज्ञान संचारको के साथ सहयोगात्मक भावना और मार्गदर्शन के फलस्वरूप ही मैं   मास्टर एक विज्ञान ब्लोगर बन सका.
डा.अरविन्द मिश्रा स्वय एक सत्र की अध्यक्षता करेंगे इस सत्र में विज्ञान गल्प सम्बन्धित पेपर प्रस्तुत किये जायेंगे.संयोगवश मेरा सत्र भी ठीक उसी समयांतराल पर है जब डा. मिश्रा जी का इसलिए मै साईंस फिक्शन के इस सत्र का लाभ नहीं उठा सका.  
कांफ्रेंस हाल 
विश्वस्तरीय कांफ्रेंस हाल में आयोजन का प्रबंध किया गया था विभिन्न कांफ्रेंस हाल में १२ समानांतर सत्रों में सभी वक्ताओं ने तीनो दिन अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किये. 

अब मै लखनऊ से आये एक अन्य ब्लोगर,कथाकार और विज्ञान ब्लोगर श्री जाकिर अली रजनीश जी से भी मिला इन से भी मेरी पहली बार मुलाक़ात हुई वैसे इनसे फोन पर कभी कभी बात हो जाती थी
इनके साथ मुलाकात भी यादगार रहेगी.
अब मुझे पता चला कि हमें मिलने दिल्ली के अन्य ब्लोगर साथी भी आ रहे हैं 
बात हो ही रही थी कि देखते हैं कि संतोष त्रिवेदी जी आ चुके हैं.
आप भी बहुत ही हसमुख और पेशे से अध्यापक हैं और कुशल ग्लेक्सी मोबाइल ऑपरेटर भी आपसे बहुत सी काम की बाते सीखीं.


बाएं से दायें
१. महेश चंद्र कर्नाटक से
२. डा. अरविन्द मिश्रा जी
३. मैं दर्शन लाल बवेजा
४. श्री संतोष त्रिवेदी जी
५. डा.जाकिर अली 'रजनीश' जी

फिर सब ने मिल कर चाय काफी का आनंद उठाया 
निमिष कपूर जी से बातचीत की 
निमिष जी के पास प्रेस मीडिया कवरेज का चार्ज था इसलिए वे काफी वयस्त थे .
सब ने विज्ञान ब्लोग्स के बारे में चर्चा की और ब्लोग्स के माध्यम से विज्ञान संचार को एक नयी तकनीक के तौर पर पसन्द किया गया और चर्चा की गयी की आगामी महीनो में विज्ञान ब्लोगिंग पर एक वर्कशाप करवाई जाए जिसमें नए और कार्यरत विज्ञान संचारकों को अंतर्जाल के प्रयोग में निपुण किया जाए.
हिंदी विज्ञान पत्रिका 'विज्ञान प्रगती' के प्रमुख श्री प्रदीप शर्मा जी से मुलाकात 
Development communication Chairperson : Dr Ashwini Kumar, TISS

दिनांक ११-०१-२०१२ को ट्रेनिंग हाल में सत्र -९ 
Invited Speaker: Dr. N Raghuram

      Darshan Lal:  Role of Science Blogs in Developing Scientific Temper through Digital Media 
     शीर्षक: डिजिटल मिडिया के माध्यम से वैज्ञानिक सोच उत्पन्न करने में विज्ञान चिट्ठाकारी की भूमिका
                  Seemin Rubab:Communicating Science through Thematic Philately
                     श्री अजय शेओपुरी जी ने CSIR-NISCAIR Tube: A novel way to communicate science के बारे ने बताया कि CSIR-NISCAIR ट्यूब फेमस YOU ट्यूब की ही तरह से है जहां आप अपने विज्ञान सम्बंधित वीडयो अपलोड कर सकते है इनका काम विशेष रूप से सराहा गया हमारा सी.वी.रमण विज्ञान क्लब भी अपने वीडियो इस टयूब पर अपलोड करेगा ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चे व बड़े भी लाभान्वित हो सकें.



 Anu Yadav E–teaching, influence of new technology on education system and in eveloping scientific temper
       Neerja Raghvan: Innovative methods & creative aids for communicating science
दिल्ली से आये मिलने के लिए श्री अविनाश वाचस्पति जी और संतोष त्रिवेदी जी 
                        ब्लोगर्स चिट्ठाकार विचार-विमर्श करते हुए और साथ में धूप का आनंद लेते हुए   
                                शहीदों को नमन करने भी गए 'अमर जवान ज्योति'India Gate
                      NPL का बेहतरीन गेस्ट हाउस,उच्च स्तरीय प्रबन्ध ठहरने में कोई परेशानी नहीं हुई  
        कर्नाटक से आये महेश  चंद्र जो कि रसायन विज्ञान के प्रवक्ता हैं और बहुत ही क्रियात्मकता के मास्टर हैं 
 इस सम्मेलन में भाग लेने की एक और भी उपलब्धि रही कि हमने 'राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला'का भ्रमण किया 
     इसकी विस्तृत रिपोर्ट अगली पोस्ट में की जायेगी यह अनुभव अविस्मणीय था आयोजको का धन्यवाद 
  श्रीमान गौहर रज़ा जी के साथ बात की विज्ञान संचार पर और आपका धन्यवाद बधाई सफल आयोजन की
                   एक महत्वपूर्ण चर्चा और विमर्श हुआ इस सत्र में अध्यक्ष थे इंजी. श्री अनुज सिन्हा जी 
        तर्कशील विचारों से भरपूर इस चर्चा में ओजस्वी विचारक हैं श्री स्यामल चक्रवर्ती कोलकाता वि.वि से 
युवा वक्ताओं को भी शामिल किया गया का. प्रवीन खान ने अपने विद्यार्थी जीवन को उद्घृत करते हुए बताया            कि आज का युवा विद्यार्थी किस प्रकार से वैज्ञानिक सोच का स्वामी बन सकता है. 
                           समापन सत्र  Valedictory Session






    श्री सुबोध मोहंती  
और इस प्रकार समापन हुआ इस वैज्ञानिक सोच के लिए विज्ञान संचार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का दिनाकं १२-०१-२०११ को .

प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा



Thursday, December 29, 2011

पानी की बूँद उपर कैसे चढ़ी ?A drop of water.

पानी की बूँद उपर कैसे चढ़ी ? A drop of water.
इस प्रयोग में बताया गया है कि बुलबुला उपर कैसे चढ़ा,बच्चों की जिज्ञासा अब इतनी बढ़ चुकी है कि वो गतिविधियों को देखते है और साथ के साथ उस को बना भी डालते हैं . आओ जाने कैसे हुआ यह ?
आवश्यक सामग्री : एक इंजेक्शन की खाली शीशी,एक पेन का खाली रिफिल (5 cm) का टुकड़ा,शीशी की रबर की ढक्कन,पानी आदि 
सिद्धांत : वायु गर्म होने पर फैलती है. 
पानी की बूँद डालते हुए 
कार्य विधि : शीशी की रबर कैप में किसी नोकदार कील या तार से छेद कर लेते हैं फिर बाल पेन के खाली रिफिल का 5 cm का टुकड़ा काट लेते हैं इस रिफिल के टुकड़े को रबर कैप में किये गए छेद में डाल देते हैं और ढक्कन को शीशी पर चढ़ा देते हैं अब इस रिफिल पाईप में दो तीन बूंद पानी की डालते हैं.
नोट यदि पानी रिफिल में नीचे न जा रहा हो तो थोड़ा सा ढक्कन ढीला कर के फिर कस देते है. अब अपनी दोनों हथेलियों को जोर जोर से रगड़ते हैं जब वो बहुत हर्म हो जाए तो शीशी को हथेलियों में लेते हैं तब हम क्या देखते है कि पानी की बूँद नली में उपर चढ़ने लगती है .
शीशी को पकडना 
ऐसा क्यूँ हुआ ? : जब हम गर्म हथेलियों में शीशी को पकड़ते हैं तो शीशी के अंदर की वायु गर्म होती है और गर्म हो कर वायु फैलती है और उपर जाती है यह गर्म  हुई वायु  रिफिल में से आगे जाती है क्यूंकि एक वो ही मार्ग है गमन के लिए और उस मार्ग का रास्ता रोका है पानी की बूँद ने, अतैव वायु पानी की बूँद को भी आगे धकेलती है और पानी नी बूँद बाहर निकल जाती है.
इस प्रयोग में हमने गर्म वायु का विस्तार और सम्पीडन समझा.
इस प्रयोग का विडियो भी देख सकते है जो की एक बच्चे ने किया है 
प्रस्तुति :- सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर हरियाणा
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Wednesday, November 23, 2011

एक पाईप का पम्प Single Pipe Pump

एक पाईप का पम्प Single Pipe Pump
केवल एक 3/4 ईन्च व्यास के पाईप के टुकड़े को पम्प की तरह से प्रयोग किया जा सकता है इसके लिए 
आवश्यक सामग्री : एक दो फुट लम्बा पी.वी.सी. का ३/४ इंच व्यास का पाईप का टुकडा,एक बाल्टी पानी  
कार्यविधि  :  एक हाथ से पाईप को पकड लेते हैं और दुसरे हाथ की हथेली को पाईप के उपरी सिरे पर रख लेते हैं और अब निचले सिरे को पानी की बाल्टी में डुबो कर पाईप को तेज़ी से उपर नीचे करते हैं इस दौरान उपर हथेली को हटाते रहते हैं ताकि हवा बहार निकल सके, 
हम क्या देखते हैं की हथेली वाली तरफ से पानी निकलने लगता है। 
देखें इस प्रयोग का वीडियो 
द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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Monday, October 31, 2011

विज्ञान चिट्ठाकारी: विज्ञान शिक्षण-अधिगम की एक अभिनव तकनीक Science Blogging: an innovative technique for Teaching-Learning of Science


Science Blogging: an innovative technique for Teaching-Learning of Science
विज्ञान चिट्ठाकारी: विज्ञान शिक्षण-अधिगम की एक अभिनव तकनीक

प्रस्तावना:-
साइंस ब्लॉगिंग यानि कि विज्ञान चिट्ठाकारिता विज्ञान को हर विद्यार्थी, शिक्षक और जन सामान्य तक पहुँचाने का एक नया तरीका है। साइंस ब्लॉगिंग ने विज्ञान प्रचार के वैश्विक प्रयासों में एक नयी स्फूर्ति भर दी है। वैसे अंग्रेज़ी भाषा में तो विज्ञान के लिए बहुत कुछ है परन्तु अंतर्जाल की दुनिया में हिन्दी व अन्य क्षेत्रीय भाषा में अभी हाल ही में इस नवाचारी तकनीक का पदार्पण हुआ है। इस तकनीक का इस्तेमाल कुछ ही विज्ञान लेखक कर रहे हैं। निसंदेह विज्ञान शिक्षण-अधिगम और विज्ञान संचार के क्षेत्र में यह अभिनव प्रयास अंतर्जाल (इंटरनेट) के जरिये ही संभव हुआ है। आज का युग इंटरनेट का युग है। संचार के समस्त साधनों में अति उन्नत तकनीक है ये अंतर्जाल का महाजाल जिसका फैलाव विश्वव्यापी है। इंटरनेट की पहुँच आज जन सामान्य तक हो चुकी है और दुनिया में इसके उपयोगकर्ता बहुत तेजी से बढ़ रहें हैं। आज कोई यदि ज्ञान की खोज में निकलता है तो वो पुस्तकालय के साथ साथ इंटरनेट को भी प्राथमिकता देने लगा है। तो फिर ऐसे में विज्ञान शिक्षा क्यूँकर पीछे रहे आज हर घर हर विद्यालय में शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों अंतर्जाल के माध्यम से विज्ञान शिक्षण-अधिगम की बुलंदियों को छू सकते हैं। इंटरनेट ने तो पिछले एक दशक से भी कम समय में विज्ञान संचार के तरीके में क्रान्ति ला दी है परन्तु हिन्दी विज्ञान चिट्ठाकारिता 2007-08 से ही प्रकाश में आई और आते ही द्रुतगति से फैली। आज हिन्दी में विज्ञान चिट्ठाकारिता के अच्छे-खासे लेखक और पाठक हैं। हिन्दी माध्यम के साथ साथ अंग्रेज़ी और क्षेत्रीय भाषाओं के भी पाठक विज्ञान चिट्ठों पर अपना ज्ञान बढ़ाते हैं। आजकल विज्ञान शोध, कोचिंग, मार्गदर्शन (व्यवसायिक व शैक्षणिक) जैसे कार्य अंतर्जाल पर किये जा रहे हैं। शोधकर्ता अपने शोधपत्र और संदर्भ सूची भी खुली चर्चा के लिए ऑनलाइन रखते हैं। अंतर्जाल पर लिखी गई वैयक्तिक डायरियाँ ही ब्लॉग (हिन्दी नाम चिट्ठा) कहलाती हैं। इन चिट्ठों का लेखन, सम्पादन, प्रकाशन का कार्य खुद लेखक (चिट्ठाकार) द्वारा ही होता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इस में कम्प्यूटर का अधिक ज्ञान आवश्यक नहीं है। मात्र 5-6 दिनों के प्रशिक्षण के बाद कोई भी शिक्षित व्यक्ति चिट्ठाकारी शुरू कर सकता है। हिन्दी में टाइप ना जानते हुए भी आजकल सॉफ्टवेयर की मदद से रोमन स्टाइल में हिन्दी लिखी जा सकती है।
सारणी संख्या-1
चिट्ठाकारिता के शब्दों की परिभाषाएँ
ब्लॉग (चिट्ठा) = वेब + लॉग
ब्लॉगर (चिट्ठाकार) = वह व्यक्ति जिस का कोई ब्लॉग हो और वो ब्लॉगिंग (चिट्ठाकारी) करता हो। 
ब्लॉगरोलिंग (चिट्ठाभ्रमण) = एक के बाद एक ब्लॉग देखते रहने की प्रक्रिया।
फॉलो करना (अनुसरण करना) = इस प्रक्रिया में कोई भी जी-मेल या अन्य  उपयोक्ता अमुक ब्लॉग का  प्रशंसक बन सकता है।
ऍग्रीगेटर (संकलक/संग्राहक) =  ऐसी वेबसाइट जो कि विषय आधारित चिट्ठों और उन की पोस्टों को संकलित करके एक जगह दिखाती है।
आर आर ऍस (फीड) = इस सुविधा के जरिये चुने गए चिट्ठों की नयी प्रकाशित पोस्टों को चिट्ठे तक जाए बिना ही सीधे ही प्राप्त किया जा सकता है।          

विज्ञान चिट्ठाकारिता (साइंस ब्लॉगिंग) की आवश्यकता क्यों?
विज्ञान शिक्षण के क्षेत्र में नित नई चुनौतियों के मद्देनजर विज्ञान संचार के लिये यह आवश्यक हो जाता है कि विज्ञान संचारक, संचार के प्रत्येक उस उन्नत व नवाचार माध्यम को चुने जिसके जरिये वो विज्ञान के प्रत्येक ज्ञानपिपासु और जनसामान्य तक पहुँच सके। इन्फॉर्मेशन टैक्नोलोजी (I.T.) के द्वारा आज इस मकसद में कामयाबी प्राप्त हो चुकी है। जब कोई हिन्दी माध्यम में शिक्षा ग्रहण करने वाला पूर्व माध्यमिक या माद्यमिक स्तर का छात्र किसी विज्ञान जानकारी और विज्ञान प्रदर्शनी के लिए मॉडल बनाने के लिए अंतर्जाल तक पहुँचता है तो उसे विभिन्न  वेबसाइटों पर सम्बन्धित ज्ञान का भण्डार मिलता है परन्तु सब कुछ अंग्रेजी में, ऐसी स्तिथि में उसे भाषा माध्यम की दिक्कत पेश आती है।
विज्ञान ब्लॉगिंग शुरू करने के उद्देश्य:-
1.    विज्ञान शिक्षा का प्रचार प्रसार।
2.    विज्ञान क्लब गतिविधियों को जन सामान्य तक पहुँचाना।
3.    विज्ञान मॉडल बनाने की विधियों को हिन्दी में प्रचारित करना।
4.    विज्ञान अध्यापक होने के नाते समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करना।
5.    विज्ञान को सरल और मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत करना।
6.    अंतर्जाल पर हिन्दी में विज्ञान प्रचार करना।
7.    क्लब गतिविधियों का संचालन और लिखित संग्रह तैयार करना व विश्व समुदाय तक अपनी गतिविधियाँ पहुँचाना।
8.    विज्ञान सूचनाओं की तत्क्षण रिपोर्टिंग।
इसलिए मैंने (दर्शन लाल) व मेरी सहयोगी श्रीमती इंदु अरोड़ा ने मिल कर 2 वर्ष पूर्व  सी॰ वी॰ रमन विज्ञान क्लब के बैनर तले हिन्दी विज्ञान चिट्ठाकारी शुरू की और 3 विज्ञान ब्लॉग शुरू किये जिन की सिलसिलेवार जानकारी निम्न सारणी में है।
सारणी संख्या-2
क्रम सं॰
विज्ञान ब्लॉग का नाम
विज्ञान ब्लॉग का वेब-पता
विज्ञान ब्लॉग का विवरण

1
विज्ञान गतिविधियाँ
Science Activities

www.sciencedarshan.in
इस ब्लॉग में विज्ञान माडल, विज्ञान पहेली, विज्ञान गतिविधियों, विज्ञान समाचार, विज्ञान जोक्स, विज्ञान सूचनाएँ, विज्ञान प्रयोग, अंधविश्वासों की वैज्ञानिक व्याख्या, विज्ञान रिपोर्टिंग आदि विषय शामिल हैं।
2
क्यों और कैसे विज्ञान में
http://kk.sciencedarshan.in
इस विज्ञान ब्लॉग में विज्ञान सम्बन्धी क्यों और कैसे का जवाब उदाहरणों और वीडियो के जरिये बहुत ही आसान और मनोरंजक तरीके से दिया जाता है।
3
हर रोज एक प्रश्न
http://darshansandbox.blogspot.com
इस ब्लॉग में रोजाना एक विज्ञान प्रश्न पूछा जाता है जिस का जवाब पाठकों को देना होता है। यदि वे जवाब ना दे सकें तो अगले दिन इसका जवाब विस्तार से दिया जाता है। 


इन विज्ञान ब्लॉगों पर अंतर्जाल से पाठक 5 प्रकार से आते हैं।
१.      विषय वस्तु को खोजते हुए पाठक जो कि गूगल सर्च जैसे सर्च इंजन से आते हैं।
२.     नियमित ब्लॉगर जो कि प्रतिदिन अपने पसंदीदा ब्लॉगरों के ब्लॉगों पर जाते हैं।
३.   ब्लॉग के अनुसरणकर्ता, लाइव रीडर, ऍग्रीगेटर फीड और इमेज सर्चर (फोटो का पीछा करते हुए)।
४.     संदर्भ सूचना से।
५.    अन्य ब्लॉगों से लिंक के जरिए।
६.      ब्लॉग संचालक के निमंत्रण पर।
७.    अन्य सोशल नेटवर्किंग साइटों से।
ब्लॉगों से प्राप्त आँकड़े (30-09-2011 तक): सारणी संख्या-4

नोट: उक्त आँकड़े www.blogger.com द्वारा निःशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं।     
आँकड़ों का विश्लेषण:-
विज्ञान गतिविधियाँ चिट्ठे पर प्रतिमाह औसत 1950 पाठक आते हैं और इस ब्लॉग की प्रतिमाह पोस्ट अद्यतन की औसत 8 है यानि कि महीने में 8 बार नयी जानकारी से ब्लॉग को अपडेट किया गया कुल 33105 पाठक ब्लॉग पर आये और उन्होंने कुल 805 दोतरफा संवाद के जरिये अपनी राय दी और जिज्ञासात्मक प्रश्न किये। इस विज्ञान चिट्ठे के 110+548+160 अनुसरणकर्ता हैं।
आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह विज्ञान ब्लॉग हिन्दी के उत्तम ब्लॉगों से एक है।
क्यों और कैसे चिट्ठे पर प्रतिमाह औसत 1000 पाठक आते हैं और इस ब्लॉग की प्रतिमाह पोस्ट अद्यतन की औसत 3 है यानि कि महीने में 3 बार नयी जानकारी से ब्लॉग को अपडेट किया गया। कुल 12005 पाठक ब्लॉग पर आये और उन्होंने कुल 241 दोतरफा संवाद के जरिये अपनी राय दी और जिज्ञासात्मक प्रश्न किये। इस विज्ञान चिट्ठे के 54+548+160 अनुसरणकर्ता हैं।
आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह विज्ञान ब्लॉग भी हिन्दी के उत्तम ब्लॉगों से एक है।
हर रोज़ एक प्रश्न ब्लॉग पर प्रतिमाह औसत 1167 पाठक आते हैं और इस ब्लॉग की प्रतिमाह पोस्ट अद्यतन की औसत 31 है यानि कि महीने में 31 बार (हर रोज़ एक बार) नयी जानकारी से ब्लॉग को अपडेट किया गया। कुल 3500 पाठक ब्लॉग पर आये और उन्होंने कुल 307 दोतरफा संवाद के जरिये अपनी राय दी और जिज्ञासात्मक प्रश्न किये। इस विज्ञान चिट्ठे के 110+548+160 अनुसरणकर्ता हैं।
आँकड़ों से स्पष्ट होता है कि यह विज्ञान ब्लॉग भी हिन्दी के उत्तम ब्लॉगों से एक है।
परम्परागत विज्ञान संचारक बनाम साइंस ब्लॉगर:-
परम्परागत विज्ञान संचार से तात्पर्य है कि संचारक पहले किसी विज्ञान प्रशिक्षण में भाग नई जानकारियाँ हासिल करेगा या फिर विज्ञान पत्रिकाएँ, जर्नल और अन्य सामग्री खरीद कर खुद को अपडेट करेगा और फिर लाभार्थियों को बुला कर विज्ञान संचार करेगा, परन्तु अब अंतर्जाल ने इस अपडेशन को आसान बना दिया है। विज्ञान चिट्ठाकार घर बैठे इंटरनेट पर उपलब्ध विश्वस्तरीय पत्रिकाओं ‘नेचर’ व ‘साइंस’ या अन्यत्र शोध-पत्रों को पढ़ कर अतिशीघ्र सूचनाओं को आसान भाषा यहाँ तक की क्षेत्रीय भाषा में भी अपने पाठकों तक पहुँचा रहा है।
अत: स्पष्ट है कि पारम्परिक विज्ञान संचारकों की तुलना में विज्ञान चिट्ठाकार अधिक ‘अप-टू-डेट’ है।
साइंस ब्लॉगिंग विज्ञान संचारकों के लिए वरदान है। 
विज्ञान संचारकों की विज्ञान शिक्षा के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। छात्र आमतौर पर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर पर विज्ञान शिक्षा से बचना चाहता है क्योंकि यह खर्चीली और कठिन पढ़ाई मानी जाती है।
ऐसी स्थिति में विज्ञान संचारक अपने प्रेरणादायक लेखों से विद्यार्थियों को प्रेरित कर सकता है और रुचिपूरक समाचारों से शोधकर्ताओं की नई-नई खोजों के समाचार दे कर छात्रों की रूचि को विज्ञान शिक्षा के लिए बढ़ा सकता है।
अंतर्जाल पर कुछ बेहतरीन हिन्दी विज्ञान चिट्ठे:-
अंतर्जाल पर अंग्रेजी के प्रभुत्व को टक्कर देती हिन्दी विज्ञान चिट्ठाकारी नित नये आयामों को छू रही है। बहुत से मानुष निस्वार्थ विज्ञान-प्रचार मुहिम को समृद्ध करने में ब्लॉगिंग के जरिए अपने ब्लॉगों पर हिन्दी और अन्य क्षेत्रीय भषाओं में विज्ञान संचार में जुटे हैं। यहाँ कुछ विज्ञान संचारकों ने अपने विज्ञान संगठन भी बना रखे हैं जिस के द्वारा वे दूर-दूर के और  विदेशों तक के विज्ञान ब्लॉगरों को सामुदायिक चिट्ठे पर महत्वपूर्ण विज्ञान लेखों को प्रकाशित करने के लिए अपने साथ जोड़े हुए हैं।
कुछ महत्वपूर्ण विज्ञान ब्लॉग (हिन्दी वाले):- सारणी संख्या-4
          नाम विज्ञान चिट्ठा
                    वेब पता (URL)
साईब्लॉग
विज्ञान विश्व
तस्लीम
साइंस ब्‍लॉगर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया
मीडिया डॉक्टर
क्यों और कैसे
विज्ञान गतिविधियाँ
ई-पण्डित (सूचना प्रौद्योगिकी)
अंतर्राष्ट्रीय रसायन वर्ष-2011
सर्प संसार
गणित और विज्ञान
अंतरिक्ष
स्वास्थ्य सब के लिए
पर्यावरण डाइजैस्ट
शोध या सर्वे
ना जादू ना टोना
विज्ञान चर्चा
वायेजर
खेती बाड़ी
Starts with a bang
Hindi Science Fiction
Ram ram bhai
Science blogs
Mera samast

उपरोक्त सूची हिन्दी तथा अंग्रेज़ी के कुछ ही ब्लॉगों का संग्रह है जब कि इनकी संख्या बहुतायत में है।
कुछ हिन्दी विज्ञान ब्लॉगों के मुख्य पृष्ठों के चित्र यहाँ दिए जा रहे हैं ताकि विज्ञान ब्लॉगों को पहचानने में आसानी हो सके। 
चित्र संख्या - 1
क्यों और कैसे विज्ञान में ब्लॉग का मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र .......
चित्र संख्या–
हर रोज एक प्रश्न ब्लॉग के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ...
चित्र संख्या – 3
 साईब्लॉग के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ...


चित्र संख्या –

तस्लीम के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ...
चित्र संख्या – 5
सबाई के मुख्य पृष्ठ का स्नैपशॉट चित्र ... 
चित्र संख्या –


उपर्युक्त चित्र देख कर स्पष्ट होता है कि विज्ञान चिट्ठे ब्लॉगर डॉट काम पर या फिर वर्डप्रैस द्वारा बनाये जा सकते हैं।
ब्लॉगर.कॉम पर ब्लॉग बनाना पूर्णतया निःशुल्क एवं बिलकुल ही सरल है तथा कम्प्यूटर का सामान्य ज्ञान रखने वाला कोई भी व्यक्ति इसे स्वयं बना सकता है। ब्लॉग की सामग्री तो गूगल के सर्वर पर निःशुल्क होस्ट होती है तथा डोमेन नेम वैकल्पिक है। आप चाहें तो अपना ब्लॉग पता ब्लॉगर पर http://myblogname.blogspot.com जैसा रहने दे सकते हैं या फिर स्वयं का डोमेन नेम लेकर http://myblogname.com जैसा सैट सकते हैं। यदि आप अपने ब्लॉग के डिजाइन पर अधिक नियन्त्रण चाहते हैं तथा ब्लॉग को प्रोफैशनल लुक देना चाहते हैं तो वर्डप्रैस का प्रयोग करें। वर्डप्रैस सॉफ्टवेयर (http://wordpress.org) स्वयं तो निःशुल्क है लेकिन इसके लिये डोमेन नेम तथा वेब होस्टिंग अनिवार्यतः चाहिये होती है। डोमेन नेम 500-800 रूपये प्रति वर्ष तथा वेब होस्टिंग लगभग 1000 रुपये प्रतिवर्ष का खर्च है। दोनों चीजों का इकट्ठा पैकेज लेने पर कम में भी पड़ जाती हैं।
विज्ञान संचारकों को जल्द से जल्द अब अपने-अपने विज्ञान चिट्ठे बना कर एक मुहिम छेड़ देनी चाहिये। 
विज्ञान चिट्ठाकारों को निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए।
ब्लॉग का नाम अलग और अच्छा सा रखना चाहिए। अच्छा सा नाम रखने से विज्ञान प्रेमी के साथ-साथ आम जन भी चिट्ठे की ओर आकर्षित होगा तथा नियमित पाठक एवं टिप्पणीकार बन जाएगा।
ध्यान रहे कि ब्लॉग नाम की पुनरावृत्ति ना हो। यह सुनिश्चित करने के लिये कि वाँछित नाम का ब्लॉग पहले से नहीं है, आप गूगल सर्च करके देख सकते हैं। कुछ नाम ऐसे हो सकते हैं जैसे ‘विज्ञान प्रवाह’, ‘विज्ञान सलिल’, ‘विज्ञान गंगा’, ‘भारतीय विज्ञान’, ‘विज्ञान प्रकाश’, ‘निहारिका’ आदि नाम रख सकते हैं।
विज्ञान चिट्ठे को ब्लॉग संकलक (ऍग्रीगेटर) से जोड़ कर ब्लॉग के पाठकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
संदर्भ:-
·         डॉ॰ अरविन्द मिश्रा, विज्ञान संचार का नया नजरिया, पृष्ठ-14 विज्ञान प्रगति–फरवरी 2010
·         विकिपीडिया पर विज्ञान पेज (http://hi.wikipedia.org/विज्ञान)
·         http://www.scidev.net/en/ (ऑनलाइन विज्ञान मैगजीन)
·         आरम्भिक विज्ञान कोश (गूगल पुस्तक ; लेखक - गोविन्द झा)
·         बाल ज्ञान-विज्ञान ऍन्साइक्लोपिडिया (गूगल पुस्तक; लेखक - राजेन्द्र कुमार राजीव)
·         विज्ञान शिक्षण (गूगल पुस्तक;  लेखिका - डॉ शशिकिरण पाण्डेय)
·         उपकार सामान्य विज्ञान (गूगल पुस्तक; लेखक - नार्थ डाकोटा)
·         विज्ञान का आनन्द (गूगल पुस्तक; लेखक - विश्वनाथ तिवारी)
·         पियर्सन सामान्य अध्ययन (गूगल पुस्तक; संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं के लिये उपयोगी)
·         उपकार सामान्य ज्ञान (गूगल पुस्तक; हिन्दी में)
·         विज्ञान प्रसार - भारत सरकार के विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 1989 में स्थापित एक स्वायत्तशासी संस्था, विज्ञान प्रसार का जालघर
·         विज्ञान विश्व - विज्ञान की नित नयी जानकारी अन्तर्जाल में उपलब्ध कराने वाला हिन्दी चिट्ठा (ब्लॉग)
·         भारत में विज्ञान की उज्जवल परम्परा (भारत का गौरव)
·         विज्ञान शब्दावली (गूगल पुस्तक; हिन्दी में)
·         विज्ञान गतिविधियाँ (मास्टर दर्शन लाल बवेजा का हिन्दी ब्लॉग)
·         भारत का वैज्ञानिक चिन्तन (प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत में वैज्ञानिक चिन्तन की गौरवशाली परम्परा को रेखांकित करता हिन्दी चिट्ठा)
·         विज्ञान में क्यों और कैसे (मास्टर दर्शन लाल बवेजा का हिन्दी विज्ञान ब्लॉग)
·         ई-पण्डित (सूचना प्रौद्योगिकी एवं हिन्दी ब्लॉगिंग/कम्प्यूटिंग सम्बन्धी जानकारियों से भरपूर चिट्ठा) - http://epandit.shrish.in
·         विज्ञान तथा तकनीकी शब्दावली आयोग का जालघर - यहाँ हिन्दी-अंग्रेजी वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली खोजी जा सकती है।
·         संवादसेतु-विज्ञान (हिन्दी चिट्ठा)

द्वारा :- दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर,हरियाणा
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