Sunday, November 04, 2012

आभासी डाक टिकेट संग्रह Virtual Postage Stamps collection

आभासी डाक टिकेट संग्रह Virtual Postage Stamps collection

आभासी डाक-टिकट संग्रहिकीः वैज्ञानिक जन-समुदाय हेतु एक नवीन उपकरण
कभी-कभी जब आपको कोई पत्र मिलता है तो उस पर चिपकी डाक टिकट पर आपका ध्यान यका-यक चला जाता है, और हो सकता है आप उस डाक टिकट का संग्रह भी कर लें। ऐसा आपके साथ ही नहीं होता, बल्कि अधिकांश डाक टिकट प्रेमी लोगों के साथ ऐसा ही हेाता है। शायद तभी डाक-संग्रह की विधा का एक शौक के रूप में विकास हुआ होगा। आज डाक-टिकट संग्रहिकी हर उम्र के लोगों का एक ऐसा शौक है जो न केवल खाली समय को रचनात्मक तरीके से गुजारने, नये दोस्त बनाने तथा किसी देश के इतिहास, सांस्कृति, पेड़-पौधे, जीव जन्तुओं आदि को जानने व पहचानने का अच्छा माध्यम हैं। इसके अलावा आप अगर कला के क्षेत्र में भी शौक रखते हैं तो आपकी रचनात्मकता को एक नई दिशा देने के लिए यह गतिविधि एक नया आयाम देगी। शायद इन्हीं कारणों से इस शौक को सभी गतिविधियों का बादशाह कहा जाता है।
डाक-टिकट संग्रहिकी जिसे अंग्रेजी में फिलेतली (Philately) कहते हैं, यह एक फ्रैंच शब्द का अंग्रेजीकरण है जिसे 1864 में जॉर्ज हरपिन ने गढ़ा था। डाक संग्रह आज एक शौक के रुप में महत्वपूर्ण विधा है जो आज केवल डाक-टिकट एकत्र करने व डाक का इतिहास जानने तक ही समिति नहीं है। आज यह एक व्यापार का रूप भी ले चुकी है। पुराने समय के राजा-महाराजा कई चुनिंदा व दुर्लभ डाक-टिकटों को मुँह मांगे दाम देकर अपने व्यक्तिगत संग्रह में रखना अपनी शान समझते थे। आज डाक-टिकट संग्रहिकी शौक के अलावा पूर्ण विषय का रुप ले चुकी है और जिसमें शामिल है डाक-टिकटें, उसके डिजाइन, उपयोग हुए कागज, प्रिंटिंग का तरीका, चिपकाने के लिए लगाए गोंद आदि। आज यह आवश्यक नहीं है कि मंहगी व दुलर्भ टिकट आपके पास हो, किसी अजायबघर में भी जाकर आप शौक पूरा कर सकते हैं।
समय के साथ-साथ यह शौक कुछ महंगा हुआ और शायद मनोरंजन के अन्य साधन उपलब्ध होने के कारण, लोगों के इस शौक में कुछ कमी आई। परन्तु इन्टरनेट और वेव (वर्ल्ड वाइड वेव) के आने और उसके फैलाव से अब यह शौक पुनः एक नये अवतार के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। जैसे कि आप सभी जानते हैं इन्टरनेट नया व आधुनिक माध्यम है। आंकड़े प्रविष्ट करने, आंकड़ो तथा दस्तावेजी फाइलों की खोज, ई-मेल, चैट समाचार, रोजगार की तलाश, उत्पादन, सूचना, नेट सर्फिंग, मनोरंजन, प्रतियोगिता, रेल एवं हवाई टिकट, सॉफ्टवेयर तथा गेम डाउनलोड इत्यादि-इत्यादि
इन सबसे के लिए इन्टरनेट एक आवश्यक प्रौद्योगिकी है। यहां यह जान लेना आवश्यक है कि इन्टरनेट स्वयं कोई जानकारी या सूचना नहीं हेाती बल्कि इन्टरनेट सभी उपयुक्त व और भी अनेक सेवाएं जैसे वैव (वल्र्ड वाइल्ड वेव www) का हिस्सा है। वेव दस्तावेजों को खोजने, तस्वीरों, एनिमेशन तथा विडियों को देखने, श्रव्य फाइलों को सुनने, बोलने ओर बोली हुई आवाज सुनने और दुनिया में किसी भी सॉफ्टवेयर पर चलने वाले कार्यक्रमों को देखने में हमारी मदद करता है। बशर्ते हमारे कम्प्यूटर में इन सब सेवाओं को पाने के लिए जरूरी हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर उपलब्ध हों। सन् 1992 में जहां इन्टरनेट का उपयोग करने वालो की संख्या कुछ हजारों में थी आज वह संख्या अरब में हो चुकी है। यानि अब हम इतने लोगों से प्रत्यक्ष रूप से आपस में जुड़ सकते हैं। आज हम विभिन्न वेव सर्वर पर बहुत-सी जानकारियों को खोज सकते हैं, उन्हें डाउनलोड कर सकते हैं ओर अपने दोस्तों व साथियों के साथ बांट सकते हैं।
इन्टरनेट के इस सूचना क्रांति ने डाक टिकट संग्रहिकी को एक नये रूप् में जन्म दिया है, जिसे आभासी डाक संग्रहिकी कहते हैं। आभासी डाक संग्रहिकी ने आज हमें बिना लागत या कम लागत की विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए एक नया माध्यम उपलब्ध करवाया है।
आओ इसके बारे में कुछ ओर जाने तथा किस प्रकार इस विधा को विज्ञान लोकप्रियकरण के लिए उपयोग किया जा सकता है। 
आज दुनिया के कई देशों में आभासी डाक संग्रहण विषय पर कई क्लब, वेव साइट व कम्यूनिटी उपलब्ध हैं। आप चाहे तो स्वयं भी उनके सदस्य या हिस्सा बन सकते हैं या अपनी कम्यूनिटी बना सकते हैं।
आभासी डाक-टिकट संग्रहिकीः वैज्ञानिक जन-समुदाय हेतु एक नवीन उपकरण
आभासी डाक-टिकट संग्रहिकीः (Virtual Philately) डाक टिकटे एकत्र करने की एक नवीन रोमांचक तथा अल्प-कीमत विधि तथा दुनिया का सबसे अधिक लोकप्रिय एवं शिक्षाप्रद शौक बनता जा रहा है।
डाक-टिकट एकत्र करने की आधुनिक विधि में भौतिक रूप में असली डाक-टिकट एकत्र करने की बजाय डाक-टिकटों की तस्वीरें, जो असंख्य फिलेतली वेबसाइट्स पर निशुल्क उपलब्ध हैं, कॉपी और पेस्ट की जाती है। इन तस्वीरों का प्रयोग करते हुए कोई भी अपना डाक-टिकट संग्रह बना सकता है तथा इनको शीट के ऊपर व्यवस्थित कर बिल्कुल वास्तविक डाक-टिकटों की तरह प्रदर्शित कर सकता है।  अगर आप चाहें तो आभासी डाक टिकट संग्रहण प्रदर्शनियों में भी भाग ले सकते हैं।
अगर आपके पास या स्कूल के विज्ञान क्लब में इन्टरनेट युक्त कम्प्यूटर या लैपटॉप है और इस शौक में आप रुचि रखते हैं, तो आप आसानी से इस शौक का आनन्द ले सकते हैं।
आभासी डाक-टिकट संग्रहिकी के लाभ
1. दुनिया के किसी भी देश में मनपंसद डाक-टिकट माऊस के एक क्लिक मात्र से तुरंत प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करती है।
2. व्यक्ति की रूचि में सहजता से विविधता उत्पन्न करती है क्योंकि यह डाक-टिकट संग्रहण के थीम व विषयों के अनंत विकल्प प्रदान करती है।
3. बाजार से डाक-टिकट खरीदने और ढूंढने मे लगने वाले धन और समय की बचत करती है।
4. वास्तविक डाक-टिकटों को संभाल कर रखने में अपेक्षित सावधानी को भी कम करती है।
5. कोई भी व्यक्ति दुर्लभतम् तथा सबसे महंगी डाक-टिकटे देख व प्राप्त कर सकता है।
6. वास्तविक डाक-टिकटों के संग्रहण की समस्या से निजात दिलाती है।
7. कोई भी व्यक्ति किसी भी समय एक सीडी की सहायता से यह संग्रह देख सकता है।
8. बाजार से डाक-टिकट खरीदने और ढूंढने मे लगने वाले धन और समय की बचत करती है।
9. यह डाक-टिकट के बारे में सही पहचान तथा ज्ञान द्वारा उत्कृष्ट ज्ञानार्जन अवसर तथा शैक्षिक मूल्य प्रदान करता है।
10. यह वर्गीकरण और व्यवस्थापन के वैज्ञानिक कौशल सीखने में सहायता करती है।
11. यह खुशी और आनंद के साथ दुनिया भर से ज्ञानार्जन हेतु मूल्यवान संसाधन उपलब्ध कराती है।
12. यह विश्वभर के आभासी डाक-टिकट संग्रहक समुदाय का हिस्सा बनने व उनसे परस्पर-संवाद विकसित करने के अवसर प्रदान करती है।
13. यह अंतर-विद्यालयी फिलेटेली प्रदशर्नियों जैसे जयपुर में हुई स्कूलपलेक्स के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय आभासी फिलेटेली प्रदशिर्नियां (एक्सपेनेट) में भाग लेने का भी अवसर प्रदान करती है।
14. चूंकि डाक-टिकट संग्रहण को अब केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा प्रोजेक्ट के रूप में मान्यता दे दी गई है, इसलिए आभासी संग्रहण को प्रोजेक्ट कार्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
आभासी डाक टिकट संग्रह कैसे करें
आभासी टिकट संग्रह की थीम या विषय सूचि
यदि कोई व्यक्ति आभासी टिकट संग्रह करना चाहे और इसके लिए तैयार हो तो लिखने के लिए एक नोटबुक, पेन और उपरोक्त दिशानिर्देश पुस्तिका लेकर इंटरनेट से जुड़े कम्प्यूटर पर बैठ जाए तथा निम्नलिखित सर्वप्रथम अपनी रुचि के विषय, जिस पर आप डाक-टिकट का संग्रह करना चाहते हैं, को लिखे (आप बाएं चित्र में दिए विषयों में से भी चुन सकते हैं)
अब कम्प्यूटर को स्विच आन कर इंटरनेट से जोड़े। कोई भी सर्च इंजिन जैसे गूगल इत्यादि खोले और इसमें टाइप करें टोपिकल फिलाटेली अथवा फिलाटेली (Philately) से संबंधित अन्य कोई लिंक खोले और सर्च करें।
इस साइट के पेज खोलें तथा वांछित डाक-टिकटों की तस्वीरों को कॉपी करें और एक नए फोल्डर में इनको सुरक्षित (सेव) करें। तथा इनको अपने थीम का नाम दें।
सेव की गई तस्वीरों का संक्षिप्त विवरण कॉपी करें अथवा लिखें, यदि विवरण वैबसाइट पर दिया गया हो तो ठीक है अन्यथा अन्य वैबसाइटों से ढूंढे।
विभिन्न लिंक से लगभग 120-140 डाक टिकटों (अपने थीम से संबंधित) को सेव करें।
अब एक बार फिर से कागज और पेन का प्रयोग करते हुए अपने थीम पर, जिस पर आभासी डाक-टिकट संग्रह तैयार करना, संक्षिप्त प्रस्तावना लिखें।
आभासी संग्रह के लिए हमेशा सफेद पृष्ठभूमि में ए-4 आकार की खड़ी (उर्ध्वाधर) शीट का प्रयोग करें।
पृष्ठ संख्या 1
गणितज्ञ थीम के अंतर्गत आपका पेज ऐसा दिखेगा
अब एक योजना अथवा प्रस्तावना पृष्ठ तैयार कीजिए। 16 साइज के फोंट में काले रंग का प्रयोग करते हुए थीम का शीर्षक लिखें। थीम का संक्षिप्त परिचय लिखे, जिसके लिए 20-25 पंक्तियां नोट की गई थी। काले रंग के अलावा अन्य कोई रंग प्रयोग न करें। यह पृष्ठ संख्या 1 कहलायेगी।
योजना अथवा प्रस्तावना पृष्ठ में संक्षिप्त प्रस्तावना लिखने के पश्चात् जो जगह बचती है उसमें एम एस वर्ड की सहायता से एक टेबल सारणीबनाएं। इस सारणी में पृष्ठवार उपशीर्षक तथा प्रत्येक पृष्ठ पर प्रदर्शित तस्वीरों की संख्या एवं उपशीर्षकों के विवरण भरें।
प्रत्येक ए-4 आकार के पृष्ठ (शीट) पर चारों तरफ कुछ हाशिया छोड़ते हुए एमएसवर्ड की सहायता से (3 गुना 3) वर्गाकार अथवा आयताकार सारणी तैयार करें।
गणितज्ञ थीम के अंतर्गत आपका पेज ऐसा दिखेगा
भिन्न-भिन्न शीट हेतु अलग-अलग शीर्षक तैयार करें, लेकिन एक फ्रेम में 16 से अधिक न हों।
अब सुरक्षित रखी गई (सेव) तस्वीरों वाले थीम के फोल्डर को खोलें, उनके थम्बनोल दृश्य को देखें तथा विभिन्न शीट में बनाए गए वर्गों अथवा आयतों में लिखे शीर्षकों के अनुसार इन तस्वीरों को एक-एक कॉपी-पेस्ट करें। प्रत्येक वर्ग अथवा आयत में डाक-टिकट तस्वीर के नीचे उसका संक्षिप्त विवरण पहले बताए अनुसार काले रंग से लिखें। अक्षरों के फोंट का आकार विवरण हेतु 12 तथा उप-शीर्षक हेतु 14 होना चाहिए।
याद रहे कि संग्रह के एक पृष्ठ में सामान्यतया 8-10 डाक-टिकट तस्वीरों से अधिक न हो, अन्यथा पृष्ठ भरा-भरा दिखेगा। मूल डाक-टिकटों के आकार में तस्वीरें न डाली जाएं, अन्यथा यह जालसाजी (नकल) मानी जाएगी। यदि संभव हो तो प्रथम मुख्य पृष्ठ तथा लघु आकार शीट थीम से संबंधित एक या दो तस्वीरें कॉपी करें तथा इनको उपयुक्त शीट पर पेस्ट करें। इससे संग्रह में फिलेटेली के वास्तविक गुणों का एहसास होगा।
अन्य शीट (पृष्ठों) की अनुक्रम संख्या लिखें। योजना अथवा प्रस्तावना पृष्ठ के सबसे नीचे दाई और कोने में अपना नाम, कक्षा एवं क्लब का नाम लिखें। अंततः प्रत्येक पृष्ठ का ध्यानपूर्वक अवलोकन करें तथा यदि कोई त्रुटि हो उसे ठीक करें। संग्रह को सुरक्षित (सेव) करें। दो सी.डी. (कॉम्पेक्ट डिस्क) एक प्रदर्शनी या किसी प्रतियोगिता के लिए दूसरी को संदर्भ हेत मास्टर कॉपी के तौर पर तैयार की जाए। इस तरह कोई भी इस संग्रह का पॉवर पॉइंट प्रजेंटेशन भी (बिना अधिक श्रम के) तैयार कर सकता है।
यहाँ से डाक टिकट कोपी-पेस्ट करें 
साभार बी. कु. त्यागी (वैज्ञानिक)
Shri B.K.Tyagi
Scientist- D
यहाँ पर प्रकाशन दर्शन लाल बवेजा सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर हरियाणा 

Wednesday, October 24, 2012

विश्वास और तुषार के ग्रुप ने मापी सबसे सही पृथ्वी की परिधि Results of Circumference of Earth Experiment

प्रयोग व कार्यशाला में कक्षा पांच से ग्याराह तक के चुनिन्दा विद्यार्थी
विश्वास और तुषार के ग्रुप ने मापी सबसे सही पृथ्वी की परिधि Results of Circumference of Earth Experiment
विश्वास, तुषार व अंकुर की टीम
23 सितम्बर को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल, सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर mukund lal public school yamunanagar में पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग करवाया गया था। इस प्रयोग व कार्यशाला में कक्षा पांच से ग्याराह तक के चुनिन्दा विद्यार्थियों को इरैटोस्थनीज प्रयोग के संदर्भ में उन्नयन कोण, त्रिकोणमिति सूत्रों, सूर्यकोण मापन, न्यूनतम परछायी, अक्षांशीय व देशान्तर रेखाओं, पृथ्वी की परिधि, पृथ्वी की त्रिज्या ज्ञात करने की सैद्धान्तिक व प्रायोगिक जानकारियाँ दी गई थी। इस प्रयोग में यमुनानगर जिले के कुल 55 विद्यार्थियों ने 11 समूहों में भाग लिया था। इन विद्यार्थियों के प्रयोगों से प्राप्त आंकड़ों को  प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनीज प्रयोग संस्था को फ्रांस भेजा गया था जहां इन सभी समूहों के आंकड़ों को अन्य देशों से प्राप्त आंकड़ों के साथ सम्मिलित गणना करके पृथ्वी की परिधि ज्ञात की गयी थी।

प्रयोग के परिणाम का ज्यामितीय आरेख
क्लब समन्वयक दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक ने बताया कि इस प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय परिणाम प्राप्त हो चुके हैं जिसमे सबसे शुद्ध गणना के आधार पर मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल के समूह संख्या नवम के छात्र विश्वास, तुषार व अंकुर को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है इन तीनो छात्रों व इनकी मार्गदर्शक विभागाध्यक्ष डाक्टर ममता वर्मा को अंतर्राष्ट्रीय इरैटोस्थनीज संस्था फ्रांस की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय इ-ट्विनिग़ प्रमाणपत्र से नवाजा जाएगा।

मलेशिया के कुआनतान के एस ऍम के आलोर आकार
इस बार दुनिया भर के विभिन्न देशों के स्कूल कालेज के विद्यार्थियों ने सितम्बर विषुव के दिन इस प्रयोग को किया, जिसमे मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल के तुषार व विश्वास इस समूह को मलेशिया के कुआनतान के एस ऍम के आलोर आकार स्कूल के विद्यार्थियों की गणना के साथ सम्मिलित किया गया। कुआनतान की यमुनानगर से अक्षांशीय दूरी 2922 किलोमीटर है। 26.6 डिग्री सूर्यकोण के अंतर के साथ दोनों स्कूलों के सम्मिलित गणना से पृथ्वी की परिधि 39,546 किलोमीटर प्राप्त हुई, जिसकी मानक पृथ्वी की परिधि 40,075 किलोमीटर से 1.3 प्रतिशत त्रुटि दर्ज की गयी।

बच्चों में आधारभूत विज्ञान संकल्पनाओ को प्रायोगिक तौर पर हाथ से करके देखने के लिए प्रयोग करने वाले सी वी रमन विज्ञान क्लब के इन विजयी सदस्यों को मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य श्रीमती शशि बाठला, प्रयोग के राष्ट्रीय संयोजक श्री दीपक कुमार  व  प्रयोग के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक मिस्टर एरिक वायसी ने बधाई और शुभकामनाये दी हैं।

अगला प्रयोग 21 दिसम्बर सबसे छोटे दिन (विंटर सॉल्स्टाइस) को किया जाएगा।
अखबार अमर उजाला में .......
              

Thursday, October 18, 2012

ब्रौंक्स हाई स्कूल ऑफ साइंस : एक विज्ञान विद्यालय ऐसा भी Bronx HS of Science

ब्रौंक्स हाई स्कूल ऑफ साइंस : एक विज्ञान विद्यालय ऐसा भी  Bronx HS of Science

उस स्कूल में कौन अपने बच्चे नहीं पढ़ाना चाहेगा जहां नोबल पुरस्कार विजेता और पुलित्जर पुरस्कार विजेताओं की नर्सरी तैयार होती है। आज अमर उजाला अखबार व अंतर्जाल पर विभिन्न साइटों पर एक ऐसे ही एक स्कूल की जानकारी मिली जहां के कुल 8 भूतपूर्व छात्रों को महान नोबल पुरस्कार मिला है। 7 को भौतिकी में और इस बार पहला रसायन में मिला है। तो क्यूँ ना क्लब सदस्यों को ऐसे स्कूल से वाकिफ करवाया जाए जहां बचपन से ही ऐसा वातावरण तैयार किया जता है कि बाल मन में विज्ञान के क्षेत्र में शोध करने की प्रेरणा मिले। भारत में भी ऐसे स्कूलों की खास आवश्यकता है जो खेल और विज्ञान में देश को उत्कृष्ट बालक खोज कर दे और वो बालक वैज्ञानिक और खिलाड़ी बन कर देश का नाम रोशन कर सकें 

      न्यूयॉर्क सिटी का यह हाई स्कूल इन दिनों सुर्खियों में है, क्योंकि पिछले दिनों इस स्कूल के एक पूर्व छात्र रॉबर्ट लेफकोविट्ज को इस वर्ष रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार दिया गया है। यह कदाचित अकेला ऐसा हाई स्कूल है, जिसके आठ पूर्व छात्रों को विज्ञान के क्षेत्र में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

वर्ष 1938 में स्थापित यह स्कूल अमेरिका के आम सार्वजनिक हाई स्कूलों की तरह ही है, लेकिन इसे विज्ञान की प्रारंभिक शिक्षा के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। गणित एवं विज्ञान की पढ़ाई के लिए मशहूर इस स्कूल में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान की भी पढ़ाई होती है। इस स्कूल में दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिये होता है, जिसमें हर वर्ष लगभग 20,000 से ज्यादा छात्र हिस्सा लेते हैं। पहले इस स्कूल में लड़कों को ही दाखिला मिलता था, लेकिन इसके पहले प्रिंसिपल मोरिस मेइस्टर के प्रयासों से वर्ष 1946 से इसमें लड़कियों को भी दाखिला मिलने लगा। उन्होंने इस स्कूल पर अपनी गहरी छाप छोड़ी थी। मसलन, उन्होंने स्कूल भवन के लिए हरे और सुनहरे रंग का चयन किया, जो क्रमशः क्लोरोफिल एवं सूर्य का प्रतीक है और दोनों रंग जीवन के लिए जरूरी होते हैं।
न्यूयॉर्क के अन्य स्कूलों की तरह इसे भी सरकारी सहायता प्राप्त है, पर यहां विज्ञान की पढ़ाई के लिए विशेष कार्यक्रम हैं। यहां छात्रों को शोध के लिए एक परामर्शदाता और प्रयोगशाला की आधुनिक सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यह स्कूल नोबल के लिए ही नहीं, बल्कि छह पूर्व छात्रों द्वारा पुलित्जर पुरस्कार हासिल करने के लिए भी जाना जाता है। नोबल पुरस्कार पाने वाले पूर्व छात्रों के चित्र वाला एक पोस्टर दरवाजे पर लगा है, इस स्कूल की 17 एथलेटिक्स टीम भी हैं।
(अमर उजाला अखबार)


प्रस्तुति: सी.वी.रमन साइंस क्लब यमुना नगर, हरियाणा
द्वारा: दर्शन बवेजा,विज्ञान अध्यापक,यमुना नगर, हरियाणा


Thursday, October 04, 2012

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर World Space Week 2012

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह पर होंगे विभिन्न कार्यक्रम  World Space Week 2012
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह, प्रत्येक वर्ष विश्व अंतरिक्ष सप्ताह संगठन और संयुक्त राष्ट्र के बाह्य अंतरिक्ष मामलों का विभाग के सयुंक्त समन्वयन में पूरी दुनिया के 65 देशो में विश्व अंतरिक्ष सप्ताह 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक मनाया जाता है इस दिन 4 अक्टूबर 1957 को पहला मानव निर्मित उपग्रह स्पुतनिक प्रथम  अंतरिक्ष में भेजा गया था 
इस वर्ष 2012 के लिए विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की थीम, " मनुष्य की सुरक्षा और सलामती के लिए अंतरिक्ष" "स्पेस फार ह्यूमन सेफ्टी एंड सिक्यूरिटी" The theme of the WSW 2012 is ‘Space for Human Safety and Security’ है इस वर्ष यह थीम अंतरिक्ष में विभिन्न मानव गतिविधियों द्वारा मानवता के दैनिक जीवन में सुधार का जश्न मनाने के लिए चुना गया है
अंतरिक्ष में पृथ्वी अवलोकन, दूरसंचार और नेविगेशन सेटेलाईट रोजाना मानव और पर्यावरण के हित और सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किये जा रहे हैं
इन विभिन्न प्रकार के उपग्रहों की मानव कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका है आज मनुष्य इन सेटेलाइट्स की मदद से मानवीय सहयता के प्रयास स्वरूप दूरदराज के क्षेत्रों के लिए भोजन और दवाओं के वितरण की योजना बनाने और सहयता सामग्री वितरण में सहयोगी है
शहरी फैलाव की मॉनीटरिंग, समुद्री मार्ग के सुरक्षा, खोज और बचाव कार्य सहयता, हवा की गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर जांचने, वनोन्नमूलन व मरूस्थल के फैलाव की मॉनीटरिंग और जंगल की आग, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की वजह से नुकसान का आंकलन करना व उन को रोकने के प्रयासों में अंतरिक्ष उपग्रहों मानव कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं
1999 में "अंतरिक्ष मिलेनियम सम्मेलन में अंतरिक्ष और मानव विकास के लिए वियना घोषणा" में, मानव और पर्यावरण सुरक्षा के प्रमुख वैश्विक मुद्दों को हल करने के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने की सहमति व्यक्त की गई थी
इस घोषणा के जवाब में दो महत्वपूर्ण योजनाओं की पहल की गयी थी, जिन में एक तो ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आई सी जी) और दूसरी इंटरनेशनल चार्टर "अंतरिक्ष और मेजर आपदाओं" पर अंतर्राष्ट्रीय समिति का गठन किया गया था
आई सी जी को संयुक्त राष्ट्र समिति द्वारा 2001 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और ग्लोबल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम के उपयोग पर चर्चा करने के लिए दुनिया भर को लाभ पहुंचाने प्रयोग किया जाता है
दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक ने बताया कि इस विश्व अंतरिक्ष सप्ताह में सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्य विभिन्न स्पेस गतिविधियों में भाग लेंगे जिस में मुख्य रूप से रात्री आकाश अवलोकन, खगोलीय पिंडों की पहचान, विश्व अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रश्नोत्तरी, मिनी दूरदर्शी बनना, रात्री आकाश में स्टार काउंटिंग, सूर्य घड़ी बनाना, विश्व के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिकों व अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन व कार्यों पर चर्चा, जल राकेट, भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और चंद्रयान अभियान पर गोष्ठी, कृत्रिम उपग्रहों के लाभ व हानि पर वाद विवाद प्रतियोगिता व पेंटिंग प्रतियोगिता, विज्ञान व अंतरिक्ष फिक्शन कहानी वाचन  आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा 
अमरउजाला अखबार में ... 
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दिनांक 4 -10-12 
गातिविधि  दिवस -1 Activity Day-1

क्लब सदस्यों ने सीखा रात्री आकाश अवलोकन और स्टार गेजींग


क्लब सदस्यों का उत्साह

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के प्रथम गातिविधि दिवस के अवसर पर आज सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों को रात्री आकाश अवलोकन और स्टार गेजींग की  गातिविधि करवाई गयी

क्लब सदस्यों ने विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल के मार्गदर्शन में रात्री आकाश का अवलोकन किया और तारा, ग्रह, उपग्रह, तारामंडल व कईं खगोलीय पिंडो के बारे में जाना

रात्री आकाश में ग्रह और तारे में चमकने  और टिमटिमाने के अनुसार अंतर जानकर बच्चे बहुत उत्साहित थे आजकल  रात्री आकाश में बृहस्पती ग्रह सुलभता से दर्शन हेतु उपलब्ध है 
क्लब सदस्य आकाश दर्शन का लुत्फ़ उठाते हुए

अक्टूबर महीने के आकाशदर्शन चार्ट के अनुसार क्लब सदस्यों ने राशिचक्र तारामंडल भी पहचानने का दावा किया है

इसी कड़ी में दूसरी गातिविधि में क्लब सदस्य अंतरिक्ष विज्ञान गल्प कहानी लेखन प्रतियोगिता में भाग लेंगे और तीसरी गातिविधि में क्लब सदस्य आज राकेट का माडल बनाएंगे और वायु दबाव के प्रयोग से उसको उड़ा कर अंतरिक्ष यान प्रमोचन के सिद्धांत को प्रयोगिक तौर पर जानगें  
अक्टूबर महीने का आकाश दर्शन चार्ट

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अवसर पर सातों दिन अलग अलग अंतरिक्ष और खगोलीय गतिविधियां करवाई जायेंगी
 
















अमर उजाला अखबार में.......


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दिनांक 5 -10-12 
गातिविधि  दिवस -2 Activity Day-2
Writing Space Science Fiction and Fantasy competition
अंतरिक्ष  विज्ञानगल्प कथा लेखन प्रतियोगिता 


आज विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अंतर्गत दिवस 2 गातिविधि के अंतर्गत क्लब सदस्यों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान गल्प कथा लेखन प्रतियोगिता करवाई गयी, जिस में 63 क्लब सदस्यों ने भाग लिया और कागज पर अपनी कल्पनाओं को उकेरा। कोई अंतरिक्ष यात्री बन कर दूसरे ग्रह पर गया तो कोई पृथ्वी को बचाने के लिए एलियंस से ही भिड़ गया किसी को दूसरी आकाश गंगा तक जाना है तो कोई अमरता का जल लेने किसी अन्य ग्रह पर पहुँच गया। क्लब समन्वयक विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बताया कि विज्ञान और कल्पना का गहरा नाता होता है,  मनुष्य पहले कल्पना करता है कि ऐसा होना चाहिए और बाद में विज्ञान उस कल्पना को साकार रूप देता है। इस प्रतियोगिता में लिखी गयी कल्पनाओं में बच्चों ने दिखा दिया कि विज्ञान और तकनीकी में ही वो शक्ति है जो मनुष्य के जीवन को और सुखमय बना सकती है और कल्पनाओं को भी साकार कर सकती हैं।
इस प्रतियोगिता में पलक, पारस, अमन, सोनाक्षी, रीमा, आंचल, आरुषि, शगुन, अवनि, इशप्रीत, जसमीत, काजल, पार्थवी आदि क्लब सदस्यों की कहानियां चयनित की गयी और 10 अक्टूबर को विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अंतिम दिवस पर विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। 

अमर उजाला अखबार में.......

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दिनांक 6 -10-12 
गातिविधि  दिवस -3 Activity Day-3

Rocketry Model Rockets Competition
राकेट का माडल बनाना

राकेट्री टीम अपने बनाये राकेट के साथ
आज विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अंतर्गत गातिविधि दिवस 3 के अंतर्गत क्लब सदस्यों ने राकेट का माडल बनाया और उसे उड़ाया भी। बच्चो में सदा यह जिज्ञासा रहती है कि अंतरिक्ष में कैसे जाया जाता है इसी जिज्ञासा को शांत करने के उद्देश्य से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर के विज्ञान के छात्रों ने बोतल से राकेट का माडल बनाया।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बच्चों को रॉकेट का सिद्धांत बताया और फिर बच्चो ने वेस्ट मेटीरियल से अपना राकेट का माडल बनाया। 
बोतल और सायकिल के वाल्वसेट के प्रयोग से बनाया गया यह माडल राकेट पानी और वायु को उच्च दबाव पर भर कर छोड़ने से 50 फीट उपर तक गया जिसे देख कर बच्चे बहुत उत्साहित हुए वे न्यूटन के क्रिया प्रतिक्रिया के नियम के प्रायोगिक सत्यापन से रूबरू हुए।




आवश्यक सामग्री 
आवश्यक सामग्री
एक कोल्ड ड्रिंक की 2 लीटर की बोतल
सायकिल की ट्यूब का वाल्वबाडी सेट
चार्ट पेपर
सेलो टेप
हवा भरने का पम्प आदि।


वालसेट बोतल में फिट करना
नियम और सिद्धांत
वायु दबाव
न्यूटन का क्रिया प्रतिक्रिया का तीसरा नियम।  

बनाने की विधि
एक कोल्ड ड्रिंक की 2 लीटर की बोतल लो।
उस के मुँह के 6 इंच नीचे एक आधा सेंटीमीटर का छिद्र करो।
उस छिद्र में धागे की मदद से वाल्वबाडी का सबसे बड़ा भाग फसाओ। 

नट कसते हुए
वाल्व के उपर नीचे रबर ट्यूब के टुकड़े भी लगाओ ताकि वायु लीक ना हो सके।
 वाल्व का नट कस दो। 




चार्ट पेपर का एक शंकु

अब आपका राकेट तैयार है।
सुंदर दिखाने के लिए मोटे चार्ट पेपर का एक शंकु बना कर टेप से चिपका देते हैं।



बोतल में पानी भरते हुए
क्रियाविधि

बोतल में 200 ml पानी भर देते हैं।







दायें हाथ का अंगूठा फसा लेते हैं

बोतल के मुहं में दायें हाथ का अंगूठा फसा लेते हैं ताकि हवा लीक ना हो सके।









हवा पम्प करतेहुए
हवा भरने के पम्प को वाल्व में कस कर लगभग 20 बार हवा पम्प करते हैं।


अब राकेट को उपर की और 45 डिग्री का कोण बनाते हुए सावधानी से अंगूठा निकाल लेते हैं।


अंगूठा निकालते ही माडल रॉकेट पानी और हवा के मिश्रण को तेजी से बाहर फेकता हुआ उपर उठ जाता है।






लांचिंग करते हुए

सरोजिनी कालोनी के पार्क में

आज विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की जानकारी आम आदमी तक भी पहुंचाने के उद्देश्य से सरोजिनी कालोनी के पार्क में इस राकेट के प्रमोचन का पुनः प्रदर्शन किया गया। उपस्थित जनसमुदाय ने क्लब और बच्चों के वैज्ञानिक चेतना के इस प्रयास की सराहना की।     
 

समुदाय में प्रदर्शन

इस माडल को बनाने में अनिकेत, अंशुल, कपिल चौहान, सलमान, शुभम, लवली, गौरव, निशा, अंजू, आरती, अनु, सोनिया, पूजा, दिव्या, आंचल, पलक, पारस, अमन, सोनाक्षी, रीमा, आंचल, आरुषि, शगुन, अवनि, इशप्रीत, जसमीत, काजल, स्पर्ष, पार्थवी आदि क्लब सदस्यों ने योगदान  दिया। 
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दिनांक 7 -10-12 
गातिविधि  दिवस -4 Activity Day-4


Discussions on the life and works of Space Scientists and Astronauts - speaker Reema Kumar
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन व कार्यों पर चर्चा - वक्ता रीमा कुमार

date 07-10-12




बच्चों ने किया कल्पना चावला और नील आर्मस्ट्रोंग को याद
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की गतिविधियों के अंतर्गत आज सी. वी. रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन व कार्यों पर चर्चा में भाग लिया। इस परिचर्चा कार्यक्रम में बच्चों ने नील आर्मस्ट्रोंग, एडविन एल्ड्रिन जूनियर, यूरी गागरिन, राकेश शर्मा, कल्पना चावला, सुनीता विलियम, विक्रम साराभाई, डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, माधवन नायर आदि अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के जीवन पर प्रकाश डाला गया। मुकंद लाल पब्लिक स्कूल की छात्रा व सक्रिय क्लब सदस्या रीमा कुमार ने अन्य क्लब सदस्यों को प्रभावशाली तरीके से मार्स रोवर क्यूरियोसिटी, भारतीय चंद्रयान अभियान, गाड पार्टिकल, डार्क मैटर, सन स्पाट, इसरो और नासा के बारे में बताया।
क्लब समन्वयक विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बताया कि सुनीता विलियम्स ने किसी महिला के अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताने का रिकार्ड बनाया है। भारतीय मूल की अमेरिकी नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने किसी महिला के अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा समय बिताने का और अंतरिक्ष में चहलकदमी का पेगी व्हिटसन के रिकॉर्ड तोड़ दिया है और अंतरिक्ष में सुनीता ने किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री के द्वारा सबसे अधिक समय तक कुल चहलकदमी करने का नया रिकॉर्ड कायम किया है।
इस चर्चा में आंचल काम्बोज, पलक बत्रा, स्पर्ष गम्भीर ने भी अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला और नील आर्मस्ट्रोंग को भावभीनी श्रद्धांजली दी गयी।
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह की आगामी गतिविधियों में अंतरिक्ष पेंटिंग प्रतियोगिता, कृत्रिम उपग्रहों को जानो और अंतरिक्ष में मानव का बढ़ता हस्तक्षेप लाभ व हानि पर वाद-विवाद प्रतियोगिता की जायेगी।
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दिनांक 8-10-12 
गातिविधि  दिवस -5 Activity Day-5

Group Discussion on Advantages and Disadvantage of Artificial Satellites
कृत्रिम  उपग्रह के फायदे नुकसान पर समूह वाद - विवाद



समूह वाद - विवाद
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के छठे दिवस की गतिविधियों के अंतर्गत आज सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्यों ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर में कृत्रिम  उपग्रहों के फायदे नुकसान व अंतरिक्ष में बढ़ रहे मानव हस्तक्षेप पर समूह वाद – विवाद का आयोजन किया गया इस कार्यक्रम में कक्षा आठ व कक्षा नौं के छात्र छात्राओं ने भाग लिया।

दो दो समूह में क्लब सदस्यों ने पहले अंतरिक्ष विज्ञान और कृत्रिम उपग्रहों के फायदे बताए, छात्र कपिल कुमार ने बताया कि उपग्रह तकनीक के कारण ही दूरसंचार के साधन टेलीफोन, फैक्स, इंटरनेट, टेलीविजन आदि काम करते हैं।  उपग्रह संचार प्रणाली के द्वारा ही मौसम की  मोनिटरिंग की जाती है जिससे वर्षा, बाढ़, चक्रवात, अतिवृष्टी, दावानल, बर्फबारी आदि प्राकृतिक आपदाओं का पता लगता है। उपग्रह संचार प्रणाली की नयी तकनीक  द्वारा ही आजकल कृषि की  मोनिटरिंग की जाती है जिस में फसल का रकबा, बीमारी आदि का पता मिनटों में लगाया जा सकता है। कृत्रिम उपग्रह से जीपीएस प्रणाली से सड़क, वायु, जल परिवहन में बहुत लाभ लिए जा रहें हैं। रिमोट सेंसिंग के द्वारा उन दुर्गम स्थानों का अध्ययन किया जा रहा है जहां पहुँच पाना अतिकठिन होता है। अंशुल ने बताया कि इन सब प्रत्यक्ष लाभों के अलावा कृत्रिम उपग्रहों  के  और भी कुछ लाभ हैं जिन से हम सुदूर अंतरिक्ष अन्य आकाश गंगाओं व अपने सौर मंडल की महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं।

निशा ने कहा कि बिना कृत्रिम उपग्रहों के मोबाइल फोन मात्र प्लास्टिक के खिलोने ही तो हैं मोबाइल फोन अंतर्राष्ट्रीय काल पूर्णतया उपग्रहीय दूरसंचार प्रणाली के उपर निर्भर है आज अगर हमे यहां से न्यूयार्क बात करनी है तो यह चंद सेकिंड्स की दूरी पर ही तो है। देश की रक्षा और सीमाओं की सुरक्षा, विज्ञान और खोज, नेविगेशन, ट्रैकिंग, मानचित्रण सब कार्य उपग्रहीय प्रणाली से ही तो सरल व सुलभ हो पायें हैं।

दूसरी तरफ कृत्रिम उपग्रह प्रणाली व अंतरिक्ष में मनुष्य बढ़ते के हस्तक्षेप पर चिंता व्यक्त करते हुए सलमान, लवली, पारुल ने कहा कि इस हस्तक्षेप से ओजोन की परत को नुकसान पहुंचता है और दुश्मन देश के जासूसी उपग्रहों से देश की सुरक्षा को खतरा पहुँच सकता है। आंतकवादी इस अत्याधुनिक तकनीक का लाभ उठा कर कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं। शुभम सोनिया व ज्योती ने स्पेस वार पर चिंता व्यक्त की अंतरिक्ष युद्ध मानवता के लिए खतरा है क्यूंकि यह सैद्धांतिक रूप से सम्भव हो चुका है कि अंतरिक्ष में मिसाइल आदि अस्त्रों को स्टोर कर के रखा जा सकता है और वहाँ से किया गया एक वार आणविक बम्ब जितना नुकसान करेगा।

इस ग्रुप डिस्कशन के निर्णायक के रूप विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने कहा कि इस प्रकार का वाद-विवाद बच्चों को उनके ज्ञान में वृद्धी के लिए सहायता करता है और वो अपने तर्क प्रस्तुत करने की योग्यता को विकसित करतें है। अंत में कृत्रिम  उपग्रहों के फायदे नुकसान व अंतरिक्ष में बढ़ रहे मानव हस्तक्षेप पर इस समूह वाद – विवाद में कपिल चौहान के ग्रुप को बेहतरीन पक्ष रखने के लिए विजेता घोषित किया गया
अमर उजाला अखबार में.......
दैनिक भास्कर अखबार में .........
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दिनांक 9,10-10-12 
गातिविधि  दिवस -6,7 Activity Day-6,7
अंतरिक्ष  विज्ञान पर चित्रकला प्रतियोगिता
Painting Competition on Space Science



अंतरिक्ष विज्ञान पर पेंटिंग प्रतियोगिता

विश्व अंतरिक्ष सप्ताह का पेंटिंग प्रतियोगिता के साथ समापन 

आज विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अंतर्गत गतिविधि दिवस 7 के अंतर्गत सी वी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान विषय पर एक पेंटिंग प्रतियोगिता करवाई गयी जिस में 17 क्लब सदस्यों ने भाग लिया। बच्चों ने अपनी कल्पनाओं के अंतरिक्ष को कागज पर रंगों के साथ उतार कर स्याह अंतरिक्ष को रंगीन बना दिया। अन्तराष्ट्रीय अंतरिक्ष सप्ताह संगठन व स्पेस संस्था नई दिल्ली के सहयोग से विश्व समुदाय के साथ मिल कर भारतीय बच्चों ने देश भर में इस आयोजन का आनंद लिया व ज्ञानअर्जन किया। अन्तराष्ट्रीय अंतरिक्ष सप्ताह संगठन के राष्ट्रीय सयोंजक श्री सी बी देवगन ने सी वी रमन विज्ञान क्लब यमुनानगर के आयोजको व सदस्यों को बधाई दी है विजेताओं के पुरस्कार व प्रमाण पत्र शीघ्र डाक द्वारा पहुंचा दिए जायेंगे   
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने बताया कि विश्व के 65 देशों के साथ मिल कर इस अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में सातों दिन अलग अलग गतिविधियां करवाई गयी। विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के इस आयोजन में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर, मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी, सेंट थामस स्कूल जगाधरी के क्लब सदस्यों ने भाग लिया था। 
सी वी रमण विज्ञान क्लब द्वारा सात दिनों तक विभिन्न स्पेस गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिस में मुख्य रूप से रात्री आकाश अवलोकन, खगोलीय पिंडों की पहचान, विश्व अंतरिक्ष कार्यक्रम पर प्रश्नोत्तरी, मिनी दूरदर्शी बनना, रात्री आकाश में स्टार काउंटिंग, सूर्य घड़ी बनाना, विश्व के महान अंतरिक्ष वैज्ञानिकों व अंतरिक्ष यात्रियों के जीवन व कार्यों पर चर्चा, भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और चंद्रयान अभियान पर गोष्ठी, कृत्रिम उपग्रहों के लाभ व हानि अंतरिक्ष में बढ़ रहा मानवीय हस्तक्षेप विषयों पर पर वाद विवाद प्रतियोगिता, अंतरिक्ष विज्ञान विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता, विज्ञान व अंतरिक्ष विज्ञान पर गल्प कथा लेखन आदि कार्यक्रमों का आयोजन किया गयासभी विजेताओं व प्रतिभागियों के नाम राष्ट्रीय सयोंजक को भेज दिए गए हैं। 
आज की इस पेंटिंग प्रतियोगिता में आंचल प्रथम, पलक द्वितीय व स्पर्ष को तृतीय स्थान मिला   और वाद विवाद प्रतियोगिता में कपिल चौहान को, भाषण प्रतियोगिता में रीमा कुमार को, साइंस फिक्शन कहानी लेखन में आरुषि व शगुन को पुरस्कार के लिए चुना गया। राकेट्री माडल बनाने में अंशुल व अनिकेत को पुरस्कार के लिए चुना गया। 
विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के इस सफल आयोजन में हिमांशु, योगेश, किरण, अनिकेत, अंशुल, कपिल चौहान, सलमान, शुभम, लवली, गौरव, निशा, अंजू, आरती, अनु, सोनिया, पूजा, दिव्या, आंचल, पलक, पारस, अमन, सोनाक्षी, रीमा, आंचल, आरुषि, शगुन, स्पर्श गम्भीर, अवनि, इशप्रीत, जसमीत, काजल, पार्थवी आदि क्लब सदस्यों का  योगदान  सराहनीय रहा। 
 अमर उजाला अखबार में.......
दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक यमुनानगर हरियाणा