Monday, October 07, 2013

अंतरिक्ष प्रदर्शनी एवं एक दिवसीय धूम केतु कार्यशाला Space Exhibition and One Day Workshop on Comet ISON

अंतरिक्ष प्रदर्शनी एवं एक दिवसीय धूमकेतु कार्यशाला Space Exhibition and One Day Workshop on Comet ISON
आज स्थानीय मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी, यमुनानगर में सीवी रमन विज्ञान क्लब के सहयोग अन्तरिक्ष सप्ताह के चौथे दिन की गतिविधियों का आयोजन करवाया गया। जिसके तहत अन्तरिक्ष विज्ञान से सम्बन्धित स्पेस माडल प्रदर्शनी व एक दिवसीय धूम केतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने अन्तरिक्ष विज्ञान से सम्बन्धित बहुत से मॉडलों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी का शुभारम्भ विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती शशि बाटला ने किया। 

विद्यार्थियों ने अन्तरिक्ष यान, परग्रही जीव, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण, चन्द्रयान अभियान, इसरो, नासा, अन्तरिक्ष यात्री, मंगल ग्रह अन्वेषण, स्पेस कॉलोनी, कृत्रिम उपग्रह संचालन से सम्बन्धित मॉडल बनाकर सबका मन मोह लिया।
एक दिवसीय धूम केतु कार्यशाला 
विश्व अन्तरिक्ष सप्ताह के अन्तर्गत एक अन्य कार्यक्रम मे एक दिवसीय धूम केतु कार्यशाला का भी आयोजन किया गया जिसमें कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से पधारे श्री राजपाल पाँचाल ने प्रतिभागियों को दूरदर्शी का इतिहास एवं नाइट स्काइ वॉचिंग से सम्बन्धित व्याख्यान दिया।

कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से ब्रह्माण्ड दर्शन
सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ श्रीश बेंजवाल ने कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से ब्रह्माण्ड दर्शन प्रक्रिया की जानकारी दी। दर्शन बवेजा ने धूमकेतू एवं मिथक विषय पर व्याखान दिया, विद्यालय की  विज्ञान प्रवक्ता रोमी बख्शी ने पावर प्वाइँट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से प्रतिभागियों को सौरमण्डल के रहस्यों से अवगत कराया। 
विद्यार्थियों ने भी अपने व्याख्यान दिए
विशषज्ञों के अलावा विद्यालय के   विद्यार्थियों ने भी पावर प्वाइँट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपने व्याख्यान दिए विद्यार्थियों ने भी पावर प्वाइँट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से अपने व्याख्यान दिए जिसमें श्रेया ने सोलर सिस्टम पर, नेहा ने धूमकेतुओं का इतिहास, आँचल काम्बोज ने आइसॉन धूमकेतु की सौरमंडलीय  यात्रा पर प्रस्तुति देकर पुरस्कार व प्रमाण पत्र प्राप्त किये।





सीवी रमन विज्ञान क्लब के सहयोग से गत प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार भी प्रदान किये गये। आज के कार्यक्रम मे ममता वर्मा, किरण मनोचा, पूजा कालरा, साधना मेहता, साक्षी त्रिखा, शिव कुमार अध्यापक उपस्थित रहे।
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Sunday, October 06, 2013

रोल प्ले के माध्यम से जाना धूमकेतू को Role Play on WSW

रोल प्ले के माध्यम से जाना धूमकेतू को Role Play on WSW
सौरमंडल मे धूमकेतु का पथ  
आज विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के तीसरे दिन सी वी रमण विज्ञान क्लब के सदस्यों ने रोल प्ले व सोलर सिस्टम का रेखाचित्र माडल के द्वारा धूमकेतु व अन्य खगोलीय पिंडो का अध्यन किया। आज बच्चों ने पार्क मे आये स्थानीय कालोनी निवासियों को भी सूर्य, ग्रहों और पुच्छल तारे के बारे मे बताया। अगले माह दृश्यमान पुच्छल तारे आइसोन के बारे मे जान कर सभी लोग बहुत उत्साहित थे और उन्होंने क्लब सदस्यों व मुकुंद लाल पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों से इस धूमकेतु के बारे मे बहुत सी जानकारियां हासिल की।
क्या है ये पुच्छल तारा ? 
धूमकेतू बनाया 
क्लब प्रभारी विज्ञान अध्यापक दर्शन बवेजा ने पुच्छल तारों के बारे मे बताया कि यदा कदा  एक चमकता धूमकेतु रात के  आसमान में दिखाई पड़ता है। नक्षत्रों के बीच धीरे धीरे गुज़रते हुए उसका  एक धुंधला  सा सिर  और लम्बी पूंछ बनती  जाती है।  इस दृश्य ने हमेशा से ही मानव को मंत्रमुग्ध कर दिया है और इसके इर्द गिर्द कई कहानियों, मिथक कथाओं  और अंधविश्वासों  ने जन्म लिया है। सौर  मंडल में   धूमकेतु  सबसे अविकसित  वस्तु है। धूमकेतु में वाष्पशील पदार्थ बहुत ज्यादा मात्रा  में पाए जाते हैं, जिसके कारण यह बहुत ही  महत्वपूर्ण और अनोखे पिंड हैं। उनकी इस खासियत से पता चलता है कि  धूमकेतु सूर्य से बहुत दूरी पर बने थे और तब से बहुत ही कम  तापमान पर सरंक्षित भी हैं।

धूमकेतु से क्यों डरते थे लोग ?
रोल प्ले के माध्यम से 
पुराने ज़माने में लोगो के हर कार्य व व्यवस्था का सूचक आकाश ही होता था। उनकी  सूर्योदय, सूर्यास्त, चाँद का घटना बढ़ना, तारों की निश्चित चाल और आकृति पर पैनी नजर होती थी । धूमकेतु अचानक बिना किसी चेतावनी के आ जाने वह उसको किसी दिव्य चेतावनी के रूप में लेते थे और किसी अनहोनी के धटने से आशंकित होकर डर जाया करते थे। हर पुरानी  सभ्यता में इनका रिकार्ड रखा था। धूमकेतु का  सबसे पहला   रेखाचित्र  चीन की सिल्क किताब में ईसा पूर्व  दूसरी शताब्दी में मिलता है।

प्राचीन भारत के इतिहास मे भी धूमकेतु का ज़िक्र है 
सौरमंडल मे धूमकेतु का पथ  
अभी तक धूमकेतु के कोई भी प्राचीन चित्रों का पता नहीं चला है। प्राचीन साहित्य में ज़रूर इनका ज़िक्र है। अथर्ववेद  में धूमकेतु व उल्का पिंड से रक्षा के लिए प्रार्थना है। धूमकेतु के प्रकट होने का उल्लेख महाभारत और रामायण में भी है। छठी शताब्दी में वराहमिहिर ने करीब एक हज़ार धूमकेतु और उन्हीं  के समान अन्य पिंडों को अपनी पुस्तक बृहतसाम्हित में  संकलित  और वर्गीकृत किया। उसी किताब में कुछ धूमकेतु के मार्गों का विवरण भी है।  उसमें कालकेतु नाम के धूमकेतु का वृत्तांत है जो वेगा नाम के तारे के पीछे छिपा है। तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती ने उन्नीस सौ दस ईस्वी में हेली धूमकेतु के स्वागत में उस समय एक छंद लिखा जब बाकी सब लोग घबराए हुए थे।

अठ्ठाईस नवम्बर 2013 को आइसोन धूमकेतू सूर्य के सबसे नजदीक होगा।



Saturday, October 05, 2013

दिन के समय की जा सकने वाली खगोलीय गतिविधियां Daytime Astronomy activities

दिन के समय की जा सकने वाली खगोलीय गतिविधियां Daytime Astronomy activities 
Safe Sun View 
गतिविधियों द्वारा विज्ञान सीखने के लिए लिए महंगे उपकरणों की ज़रुरत नहीं होती। कोई भी बहुत ही कम खर्च में विज्ञान के  बहुत रोचक और   महत्त्वपूर्ण प्रयोग और गतिविधियां कर सकता है। 
आज विश्व अंतरिक्ष सप्ताह के अंतर्गत बच्चो को दिन के समय की जा सकने वाली  विभिन्न खगोलीय गतिविधियां करवाते हुए विज्ञान संचारक दर्शन बवेजा ने बच्चों को बताया कि इस अदभुद सृष्टि की जांच/पड़ताल करने के लिए हमारे आँख, कान, हाथ और दिमाग बहुत ही शक्तिशाली वैज्ञानिक औजार हैं।  


ISON Model 
आज की गातिविधि मे स्थानीय सरोजिनी कालोनी के अर्जुन पार्क मे क्लब सदस्यों ने आइसोन धूमकेतु के माडल बनाए। धूमकेतु के माडल बनाने के लिए उन्होंने गेंद, प्लास्टिक की पेकिंग जाली, जुराब, रंगीन कागज, रुई व धागों का प्रयोग किया। बच्चो ने अपने हाथो से धूमकेतू के माडल बना कर धूमकेतु के बारे मे जाना व आपसी वार्तालाप से नवम्बर महीने मे दिखाई देने वाले आइसोन पुच्छल तारे के बारे मे जाना।

बच्चो ने एक और खगोलीय गतिविधि करके बातों ही बातों मे सौरमंडल मे ध्रुव तारा, तारामंडल, राशिचक्र, दिशाओं व अक्षांशीय रेखाओं के बारे मे सैद्धान्तिक व प्रायोगिक जानकारियाँ हासिल की। एक अन्य गातिविधि मे बच्चों ने सोलर फिल्टर की मदद से सुरक्षित सूर्य अवलोकन का आनंद लिया और यह भी जाना कि सूरज को कभी भी सीधे ही नहीं देखना चाहिये। सूर्य अवलोकन सेफ सोलर फिल्टर से या फिर सूरज को प्रक्षेपित करके ही देखना चाहिये, एक सुरक्षित सौर फ़िल्टर सूर्य के प्रकाश की तीव्रता को एक लाख गुना कम कर देता है।

आज की गातिविधि मे अवनी, काजल, ईशप्रीत, पारस बतरा, पलक, आंचल, अमन, वंशिका सैनी, स्पर्ष गम्भीर, गौरव, तुषार, कुषाण व लविश आदि ने सक्रियता से भाग लिया व ज्ञानवर्धन किया।