Friday, May 01, 2015

विज्ञान गतिविधियों लाभान्वित होते विद्यार्थी science activities

विज्ञान गतिविधियों से लाभान्वित होते विद्यार्थी  Science  Activities  in School  
विज्ञान के कम लागत के प्रयोग 
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर मे कक्षा तत्परता कार्यक्रम CRP के तहत बहुत सी ज्ञानवर्धक गतिविधियाँ आयोजित करवायी जा रही हैं। इन गतिविधियों मे  विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने विज्ञान के कम लागत के प्रयोग करके दिखाये व उनको  बच्चो से भी करवा कर देखा, जिसमें बच्चों ने बहुत आनन्द लिया व ज्ञानार्जन किया। इन प्रयोगों की खास बात यह थी कि ये सारे प्रयोग माडल वेस्ट पदार्थों से बनाए गए थे। 
इन प्रयोगों मे बच्चों को भौतिकी मे विधुत, चुम्बकत्व, गति, आघूर्ण, बल, गुरुत्व, आवेश, वायु दबाव, बरनौली, पास्कल, आर्कमिडिज, न्यूटन, प्रकाश का अपवर्तन, प्रकाश का परावर्तन, प्रकाश का विक्षेपण, विधुत मोटर व डायनमो, विधुत फ्लस्क, आवेश विसर्जन, घर्षण, चलचित्र, पम्प, ध्वनि की उत्पत्ति एवं संचरण आदि सिद्धांतों नियमों के नवाचारी प्रयोग करके दिखाये।
कक्षा तत्परता कार्यक्रम (सीआरपी)
प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र धींगड़ा 
प्रधानाचार्य श्री नरेंद्र कुमार धींगड़ा ने सभी अध्यापकों द्वारा करवाए गए कक्षा तत्परता कार्यक्रम का निरीक्षण किया और बच्चो द्वारा किये गए काम को सराहा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण बच्चो मे भी बहुत क्षमताएं होती है उन्हें अवसर और मार्गदर्शन दुए जाने की आवश्यकता रहती है यदि इन बच्चों को उचित प्लेटफार्म व अवसर प्रदान किया जाए तो ये भी अपनी प्रतिभा का और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं और कक्षा तत्परता कार्यक्रम  इस मार्ग मे एक सार्थक पहल है। 
नरेंद्र धींगड़ा बताया कि सारे साल स्लेबस पूरा कराने की उलझनों में फसे विज्ञान अध्यापक के पास अब एक बेहतरीन अवसर है कि वो सी आर पी कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विज्ञान गतिविधियां करवा कर बच्चो को विज्ञान शिक्षा के प्रति आकर्षित कर सकता है और साथ ही अपने हुनर का प्रदर्शन करके शिक्षा जगत में अपनी योग्यता भी सिद्ध कर सकता है। इस विज्ञान संचार व जागरूकता कार्य की कमान उन्होंने विद्यालय के विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल को सौपी उन्होंने बालको को खेल खेल में विज्ञान, कम लागत से विज्ञान माडल, विज्ञान प्रश्नोत्तरी, विज्ञान पजल्स, प्रकृति भ्रमण आदि गतिविधियां करवा कर विज्ञान शिक्षण को और भी मजेदार बना दिया है।
 विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि हरियाणा शिक्षा विभाग ने राज्य के विद्यालयों में प्रवेश उत्सव के दौरान सभी छात्र छात्राओं में पठन-पाठन के प्रति रूचि उत्पन्न करने के लिए कक्षा तत्परता कार्यक्रम (सीआरपी) लागू किया है। कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न उपयोगी गतिविधियां करवाए जाने के आदेश हैं। शिक्षकों को प्रवेश उत्सव के बाद संजिदगी से कक्षा तत्परता कार्यक्रम कार्यक्रम को चलाने आदेश दिए गए हैं। सीआरपी के तहत पहली कक्षा से लेकर बारहवी कक्षा तक के लिए विभाग ने विशेष मॉड्यूल भी विद्यालयों में उपलब्ध हैं।
बच्चों के सार्वागीण विकास के तहत उन्हें विज्ञान, बैंक प्रणाली, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, डाक घर, अल्प बचत, स्वास्थ्य सुरक्षा, सामुदायिक सहयोग भावना का विकास, रुचिकर गणितीय
गतिविधियां, योगा, प्रकृती भ्रमण, जल संरक्षण के तरीके, कीटनाशियों व उर्वरकों के प्रयोग की हानियाँ, बेस्ट आउट आफ वेस्ट, दैनिक क्रियाकलापों के वैज्ञानिक सिद्धांत समझना, सुलेख, कथा लेखन, पेंटिंग, क्ले मोडलिंग, जीवन रक्षा गुर, प्राथमिक चिकित्सा, किताबों पर जिल्द बाँधना व ठोस कचरा प्रबंधन, पुस्तकालय जाने की आदत विकसित करना, योगासन के जरिये स्वास्थ्य शिक्षा, बच्चो में नैतिक मूल्यों के विकास हेतु राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय नायको के जीवन का परिचय, सम्पूर्ण सवच्छ्ता, लिंगानुपात सम्बन्धित ज्ञान आदि गतिविधयां करवाई जा रही है। 
बालको ने विभिन्न वैज्ञानिक नियमों और सिद्धांतों को दर्शाते विज्ञान माडलो को बनाया और उनका प्रदर्शन किया। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर मे कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा छह से दस तक के विद्यार्थियों ने अपने द्वारा बनाए गए विज्ञान प्रदर्शों का प्रदर्शन अध्यापको व्कि अन्य बालको के सम्मुख किया। विद्यालय के बच्चे कक्षा तत्परता कार्यक्रम के अंतर्गत बहुत उत्साह से भाग ले रहे हैं और उनको सभी विषयों मे बहुत कुछ नया नया सीखने को मिल रहा है। तीन चार दिनों के अभ्यास
मे ही बच्चे विज्ञान गतिविधियों मे अभूतपूर्व परिणामों का प्रदर्शन कर रहे है। विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व अन्य अध्यापको के मार्गदर्शन मे अरुण व संतोष सन्तोष ने आज्ञाकारी गेंद बना कर घर्षण को समझा। गगन ने यांत्रिक ऊर्जा को दिखाता कम्पन पंखा बनाया। निर्मला ने रदरफोर्ड का प्रयोग का प्रदर्श बनाया। वंशिका ने सिगरेट के दुष्प्रभाव दिखाता श्वशन तंत्र का वर्किंग माडल बनाया। इतेश ने चुम्बकत्व ने विधुत मोटर का वर्किंग माडल बनाया। 
कक्षा सात के बच्चो ने अपकेन्द्र्ण व अभिकेंद्र्ण बल पर आधारित विज्ञान खिलौना बनाया।किसी ने विधुत प्रेरण पर तो किसी ने वायु दबाव को दर्शाता माडल बनाया। बालकों ने सोलर हाउस, राकेट का माडल, होवरक्राफ्ट व उत्प्लावन बल को समझाता प्रदर्श बना कर अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। 

सी आर पी गतिविधियों में विज्ञान किटस् का भी बेहतर उपयोग हो रहा है   

दर्शन लाल ने यह भी बताया कि सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत शिक्षा विभाग द्वारा सभी विद्यालयों को दो दो विज्ञान प्रयोगिक किट्स भी उपलब्ध करवाई गयी हैं जिनमें सौ से भी अधिक विज्ञान गतिविधयां करवाए जाने की सामग्री दी गयी है और यह सामान विज्ञान पाठ्य पुस्तक में वर्णित सभी गतिविधियों को करवाए जा सकने में सक्षम हैं। इन विज्ञान किट्स का उपयोग सी आर पी के दौरान किया जा रहा है। यह विज्ञान किट्स बहुत ही बेहतरीन और सम्पूर्ण है जिनके द्वारा बहुत से प्रयोग कम समय में व भारी उपकरणों  के बगैर ही करवाए जा सकते हैं।  आजकल भी समाज में विभिन्न अंधविश्वास व्याप्त है, अंधविश्वास एक वैश्विक समस्या बनी हुई है। कुछ शातिर लोग समाज में कार्यरत हैं जो कि यदाकदा अपना शिकार फांस कर उस परिवार का भविष्य बर्बाद कर देते हैं। सी आर पी के दौरान विज्ञान शिक्षक बच्चों को अंधविश्वास निवारण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अखबारों में खबरों की कतरने 




दर्शन लाल बवेजा विज्ञान अध्यापक राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर द्वारा प्रस्तुत  

Thursday, March 12, 2015

सोख्ता गड्ढा बनायें और जल बचायें Soakage pit for proper disposal of waste water

सोख्ता गड्ढा  बनायेंऔर जल बचायें Soakage pit for proper disposal of waste water
हैंडपम्प, पानी पीने की जगह पर शुद्ध जल की एक बड़ी मात्रा बेकार जाती है जो की नाली में बह  जाती है या फिर वहीँ आस पास एकत्र हो कर कीचड़ बनाती है इन स्रोतों के पास वेस्ट जल एकत्र होता रहता है जो मच्छरों को खुला निमंत्रण देता है जिस कारण बीमारियाँ फैलती है।

क्लब सदस्यों ने विद्यालय में ये ही समस्या देखी और फैसला लिया के जल पीने के स्थान पर एक सोख्ता गड्ढा बनाया जाएगा।

आओ जाने सोख्ता गड्ढा  क्या होता है ?
1mx1mx1m का एक खड्ढा जो की बेकार हुए शुद्ध जल को पुनः भूमि के भीतर पहुंचाने का कार्य करता है
इस को घरों में भी बनाया जा सकता है।
यह सोख्ता गड्ढा हैण्डपम्पो के पास बनाया जाए तो बहुत लाभ होता है ।
बनाने की विधि:-निम्न बिंदुओं के अनुरूप कार्य कर के हम इसको बना सकते है।

1.सोख्ता गड्ढा वहीँ बनायें जहाँ पानी वेस्ट होता हो।

soakage_pit-1 soakage_pit-2

2. सोख्ता गड्ढा की लम्बाई,चोड़ाई और गहराई =1मीx1मीx1मी  

3. इस गड्ढे के बीचो बीच 6 इंच व्यास का 15 फीट का बोर करें (उपर के दो चित्र)

soakage_pit-3 IMG_3592 soakage_pit-5

4. अब इस् बोर में पिल्ली ईंटों (नरम ईंटों) की रोड़ी भरें।
5. अब नीचे 1/4 भाग में 5 इंच x 6 इंच साईज़ के ईंटों के टुकड़े,फिर 

1/4 भाग में 4 इंच x 5 इंच साईज़ के ईंटों के टुकड़े भर देते है। (उपर के तीन चित्र)

soakage_pit-6 soakage_pit-7

6. शेष 1/4 भाग में बजरी (2इंचx2इंच साईज़) भर देते है।
7. अब 6 इंच की एक परत मोटे रेत की बना देते है। (उपर के दो चित्र)

8. एक मिट्टी का घड़ा या पलास्टिक का डिब्बा लेकर उस में सुराख कर देते है फिट उस में नारियल की जटाएं या सुतली जूट भर देते है यह इसलिए कि पानी के साथ आने वाला ठोस गंद उपर ही रह जाएगा और कभी कभी सफाई करने के लिए भी सुविधा हो जाएगी।

soakage_pit-8 soakage_pit-9

9. अब निकास नाली को इस घड़े या डिब्बे के साथ जोड़ देते है वेस्ट पानी इस में सबसे पहले आएगा।   
10. खाली बोरी से गड्ढे को ढक देते है।
11. बोरी के उपर मिट्टी डाल कर गड्ढे को ईंटों से बंद कर देते है।

12. अब तैयार हो गया सोख्ता गड्ढा (उपर के तीन चित्र)

soakage_pit-13     soakage_pit-12
अब यह गड्ढा प्रतिदिन लगभग 500 लीटर बेकार पानी को 5-6 सालों तक सोख्ता रहेगा।

soakage_pit-14   नोट : Gड्ढे की गहराई एक मीटर से कम ना हो क्यूँकी 0.9 मीटर तक जमीन में एरोबिक जीवाणु aerobic bacteria होते है ये जीवाणु वेस्ट पानी के कार्बनिक पदार्थों का विघटन करते है और पानी को स्वच्छ करते है।
खड्ढे की लम्बाई चोड़ाई बढाई जा सकती है पर गहरी 1 मी. से अधिक ना हो क्यूंकि एरोबिक जीवाणु 0.9 मी. से नीचे वायु के आभाव में जीवित नहीं रहते और तब जीवाणु द्वारा होने वाली प्रक्रिया नहीं हो पाती और गन्दा जल ही जमीन में चला जाएगा।

स्कूल के अलावा यह सोखता खड्डा नजदीकी गावं पालेवाला में भी बनाया गया जिस का वीडियो यहाँ देखें। 




दर्शन लाल बवेजा , विज्ञान अध्यापक , राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय अलाहर खंड रादौर  जिला यमुना नगर,हरियाणा

Saturday, January 31, 2015

विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop

विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop
Science Kit
विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला Science Kit Training Workshop
जिला स्तरीय विज्ञान किट प्रशिक्षण कार्यशाला जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में सम्पन्न हुई। इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले भर से आये तीस विज्ञान शिक्षको को एनसीआरटी द्वारा डिजाइन की गयी विज्ञान किट का प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण दिया गया। इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्घाटन डाईट के प्रधानाचार्य श्री तेजपाल सिंह ने किया और इस कार्यशाला का संचालन संस्थान की प्रशिक्षण समन्वयक श्रीमती गीता ढींगरा ने किया। प्रशिक्षण के दौरान मास्टर ट्रेनर के रूप में विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल व नरेंद्र सिंह (प्रवक्ता  रसायन) थे। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में जिले के छह खण्डों से विभिन्न विद्यालयों से आये तीस विज्ञान अध्यापको ने भाग लिया। यह प्रशिक्षु अध्यापक अब इस कार्यशाला के तृतीय व अंतिम चरण में अपने अपने बलाक के शेष अध्यापको को प्रशिक्षण प्रदान करेंगें। कार्यशाला में एनसीआरटी द्वारा डिजाइन की गयी दोनों प्राथमिक व अपर प्राथमिक विज्ञान किट्स का प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत यह किट्स विज्ञान शिक्षको को तीन वर्ष पूर्व उपलब्ध करवाई गयी थी, इन उपयोगी विज्ञान किट्स में यूजर मेनुअल के आभाव में विज्ञान शिक्षको को इस किट्स से सभी प्रकार की विज्ञान गतिविधियां करवाने में बहुत दिक्कत होती थी क्यूंकि यह विज्ञान किट्स सामान की सूची से भी वंचित थी जिस कारण इन किट्स में शामिल कुछ गैरपरम्परागत व नव डिजाइन किये गए उपकरणों के नाम तक विज्ञान शिक्षको को मालूम नहीं थे और निरिक्षण के दौरान इन उपयोगी किट्स के प्रयोग ना किये जाने के कारण पूछने पर विज्ञान शिक्षक बताते थे की इस किट का प्रशिक्षण उन्हें दिलवाया जाए तभी इन किट्स का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। यह विज्ञान किट विज्ञान पाठ्य पुस्तको में उपलब्ध सभी गतिविधियों को करवाए जा सकने के मद्देनजर डिजाइन की गयी थी परन्तु यूजर मेनुअल व सामान के नामो की लिस्ट के बगैर यह बहुउपयोगी किट विज्ञान कक्षों में बंद पडी थी।  
इन प्रशिक्षण कार्यशालाओं के प्रथम चरण में एससीआरटी गुडगाँव में मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षण दिया गया जहां एनसीइआरटी और अन्य संस्थानों के विज्ञान किट्स एक्सपर्टस को आमंत्रित किया गया था। उसके बाद इस प्रशिक्षण कार्यशालाओं के द्वितीय चरण में जिला स्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। बहुत ही उपयोगी व नवाचार से युक्त इन किट्स के प्रशिक्षण में एम टी दर्शन लाल व नरेंद्र सिंह ने योजनाबद्ध तरीके से पहले सभी प्रशिक्षुओं को इन दोनों किट्स में उपलब्ध करवाए गए उपकरणों के नामो व उनकी विशेषताओं से परिचित करवाया और फिर इन उपकरणों से किये जा सकने वाले विज्ञान प्रयोगों और विज्ञान गतिविधियों को सूचीबद्ध तरीके से अध्यापको को नोट करवाया।
सर्वप्रथम भौतिकी के प्रयोग व गतिविधियाँ करवाई गयी जिन में मुख्यतः प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन और विक्षेपण, विद्युत जनित्र,  विद्युत घंटी, विद्युत प्रेरण, विद्युत मोटर, स्थिर वैद्युत आवेश, चुम्बकीय बल रेखाएं, आयतन, घनत्व, आर्कमडीज का सिद्धांत, बर्नौली का नियम, बहु परावर्तन, चुम्बक के विभिन्न प्रकार, चुम्बकीय सुई, पृष्ठ तनाव आदि से सम्बंधित विभिन्न गतिविधियाँ करवाई गयी और साथ ही में रसायन विज्ञानं की गतिविधियों में डब्लू ट्यूब से कार्बन डाई आक्साइड गैस, हाइड्रोजन गैस का बनना व जल का वैद्युत अपघटन, उदासीनीकरण से सम्बंधित गतिविधियाँ व प्रयोग करवाए गए। जीव विज्ञान की गतिविधियों के अंतर्गत प्याज की झिल्ली की कोशिका, रन्ध्र व जंतु कोशिका की अस्थाई स्लाइडे बनानी सिखाई गयी व किट में उपलब्ध डाईशेक्सन माइक्रोस्कोप और सयुंक्त सूक्ष्मदर्शी के प्रयोग का भी अभ्यास करवाया गया।
इन सब के अलावा विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने कम लागत के विज्ञान प्रयोग, मेरा विज्ञान बाक्स, विज्ञान क्विज व पजल्स के माध्यम से भी विज्ञान शिक्षण को प्रभावी बनाने का प्रशिक्षण दिया। पावर पाइंट प्रस्तुतिकरण के द्वारा विज्ञान शिक्षण व विज्ञान संचार के विभिन्न नवाचारी पहलुओं से अध्यापको को रूबरू करवाया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान विज्ञान अध्यापको ने विज्ञान शिक्षण में प्रभावी सुधार विषय पर समूह चर्चा भी की जिस में निरंजन सिंह विज्ञान अध्यापक के सुझाव पर सभी विज्ञान अध्यापको ने सहमती प्रकट की जिस में कक्षा छह से दस तक विज्ञान विषय में प्रयोगात्मक कार्य करवाने के लिए प्रति सप्ताह तीन पीरियड दिए जाने की मांग राखी गयी।
विज्ञान अध्यापको को संबोधित करते हुए डाईट के प्रधानाचार्य श्री तेजपाल सिंह ने बताया की जिस प्रकार इलेक्ट्रॉन और सौरमंडल का कोई भी ग्रह चंद सेकंड भी अपनी गति को धीमा नहीं कर सकता और ना ही लेट हो सकता है ठीक उसी प्रकार अध्यापको को भी समय का पाबन्द होना चाहिए तभी समाज और शिक्षा का भला हो सकता है। जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी और जिला गणित विशेषज्ञ अनिल गुप्ता ने भी विज्ञान शिक्षको को संबोधित किया व विज्ञान की विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों व विज्ञान प्रदर्शनियों बारे अध्यापको को अवगत करवाया। जिला शिक्षा अधिकारी श्री उदय प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बेहतर परीक्षा परिणामो के लिए शिक्षकों से सहयोग मांगा जिसके जवाब में अध्यापको ने भी उनको सहयोग देने का विश्वास जताया।
विज्ञान अध्यापक दर्शन लाल ने अध्यापको को हॉट एयर बैलून का सिद्धांत समझाते हुए डाईट के मैदान में हॉट एयर बैलून उड़ा कर दिखाया। उन्होंने बताया की जब हवा को आग से गर्म किया जाता है तो हवा गर्म होकर हल्की हो जाती है व उपर उठती जिस कारण बैलून उपर उठता है,  अध्यापको ने इस बैलून को उड़ाने में सहयोग किया व अपने विद्यालय के बच्चों के समक्ष भी हॉट एयर बैलून गतिविधि को करवाए जाने की इच्छा जताई।
विज्ञान अध्यापको ने विज्ञान किट की गतिविधियों व प्रयोगों को अपने हाथ से करके देखा व उनका बार बार अभ्यास किया व अपने अपने विद्यालयों में इन किट्स के भरपूर उपयोग का आश्वासन दिया। इस ट्रेनिंग कार्यक्रम में जिला भर से आये अध्यापको में खेम लाल, मुकेश, गुलशन, अमित, रवि, कश्मीरी लाल, सुशील, राकेशमोहन, संजीव, गिरीश, संजय, रुस्तम अली, सुरेन्द्र, विजय कुमार, परमजीत इंदरजीत सिंह, राजेश, आदेश, राजिंदर, विरेंदर, विपिन, स्वीटी, मधु मेहता, सुमन, रंजना गुप्ता, अनिता वर्मा, निरंजन सिंह आदि ने भाग लिया।

Friday, November 28, 2014

जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस 22NCSC Distt level

जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस  22NCSC Distt level 
आठ टीमों का हुआ राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ चयन
बाल वैज्ञानिकों ने मौसम और जलवायु सम्बन्धित शोध पत्र प्रस्तुत किए
विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग भारत सरकार द्वारा एन सी एस टी सी नेटवर्क, हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग पंचकुला व हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक, जिला विज्ञान उन्नति समिति व शिक्षा विभाग यमुनानगर के सयुंक्त तत्त्वाधान मे करवाई जाने वाली जिला स्तरीय बाईसवी राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुडा सेक्टर सत्रह जगाधरी मे सम्पन्न हुई। 
जिसमे शैक्षिक समिति के समन्वयक जे एस सांगवान, प्रदीप सरीन, जिला विज्ञान विशेषज्ञ डाक्टर विजय त्यागी, दर्शनलाल, सन्दीप गुप्ता ने शिरकत की और विद्यालय की प्रधानाचार्य श्रीमती अनीता काम्बोज ने कार्यक्रम की शुरुआत की और प्रधानाचार्या ने अपने सम्बोधन द्वारा बाल वैज्ञानिकों का उत्साहवर्धन किया।
इस बाल विज्ञान सम्मेलन मे एक सौ बीस बाल वैज्ञानिकों और तीस मार्गदर्शक अध्यापको व आयोजको ने भाग लिया। 
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कॉंग्रेस का इस वर्ष का मुख्य विषय आओ मौसम और जलवायु को समझें रखा गया है। इस प्रतियोगिता में ग्रामीण और शहरी वर्ग से सभी प्रकार के विद्यालयों के बाल वैज्ञानिक भाग लेते हैं और अपने शोधपत्र पढते हैं।
प्रतियोगिता के परिणाम
छह से सात दिसम्बर को रोहतक मे

आयोजित होने वाली राज्य स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिये जिन बाल वैज्ञानिकों का चयन हुआ उनमे से टीम के ग्रुप लीडर केशवी स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुड्डा जगाधरी, आँचल काम्बोज मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी यमुनानगर, श्रुति व यशश्वी स्वामी विवेकानन्द पब्लिक स्कूल हुड्डा जगाधरी, विधि मुकुन्द लाल पब्लिक स्कूल सरोजनी कॉलोनी यमुनानगर, हर्षित
राजकीय व मा वि बूड़िया, रजत राजकीय व मा वि तलाकौर, रिज़वाना राजकीय उच्च विद्यालय तेजली अपने शोध पत्रों का राज्य स्तर पर प्रस्तुतीकरण करेंगें।
इस अवसर पर मौसम एवं जलवायु थीम पर एक विज्ञान प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया
।
जिस मे दीक्षांत, शिवांग प्रथम, लविश, सत्यम द्वितीय और हेमन्त व अभिषेक तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस अवसर पर मौसम एवं जलवायु थीम पर एक पोस्टर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया जिस मे शिवांगी प्रथम और शगुन धीमान ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
प्रतियोगिता मे प्रस्तुत किये गए शोध पत्रों के शीर्षक
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया कि स्कूली बच्चो की पीएचडी कही जाने 
वाली इस प्रतियोगिता मे बाल वैज्ञानिकों ने मौसम बदलाव का त्वचा पर प्रभाव, मौसम के पैरामीटर्स मापने की अपनी प्रयोगशाला 

मौसम बदलने पर स्कूल मे बच्चों की हाजरियों पर पड़ने वाले प्रभाव, ठोस कचरा प्रबंधन की दुर्व्यवस्था के कारण मौसम पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन और कार्बन फूट प्रिंट और मौसम व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन, बदलते मौसम के अनुसार कपड़े पहनावे की आदतों मे बदलाव, बदल रहे मौसम मे डेंगू के मच्छरों का प्रतिरोधकता विकसित कर लेने से मानव पर प्रभावों का अध्ययन आदि शीर्षकों के अंतर्गत अपने शोधपत्र पढ़े।
इस कार्यक्रम में ज्योतिका डाँग, विकास पुंडीर, भूपिन्द्र खत्री, श्रीश बेंजवाल शर्मा, सुबुही, राजकुमार धीमान, ओम प्रकाश सैनी, गौरव, रीना मल्होत्रा, सन्दीप गुप्ता, इन्दु अरोड़ा, योगेन्द्र शर्मा, सीमा अरोड़ा, विजय कौशिक, विकास पुंडीर, गोपाल शर्मा, मनीषा का सक्रिय योगदान रहा। 
निर्णायक मंडल में डॉ॰ अमर जीत सिंह खालसा कॉलेज, श्री राजपाल पांचाल कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय तथा श्री सन्दीप गुप्ता विज्ञान अध्यापक बक्कर वाला से थे।








Saturday, November 15, 2014

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पुच्छल तारे पर उतारा स्पेसक्राफ्ट Rosetta mission’s

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने पुच्छल तारे पर उतारा स्पेसक्राफ्ट Rosetta mission’s 
बहुत वर्षों से ये हसरत थी खगोल वैज्ञानिकों की कि पुच्छल तारे के वो अनखुले पन्ने भी खोले जाएं जिनको पढ़ कर ब्रह्मांड के उन रहस्यों को भी जाना जाए कि आखिर इन ग्रहों तारों का निर्माण किन किन चरणों मे हुआ है इसी जिज्ञासा वश पुच्छल तारे के नजदीक जाकर या फिर उसकी सतह पर पहुँच कर उस के बारे मे जाना जा सके इसी प्रयासों के फलस्वरूप यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने एक बहुत बड़ी कामयाबी के मुकाम को छुआ है और धूमकेतु को फतेह कर लिया है एजेंसी ने अंतरिक्ष में स्थित 67P नाम के धूमकेतु पर अपना लैंडर स्पेसक्राफ्ट उतार दिया अंतरिक्ष के अभियानों मे ऐसा ऐसा पहली बार हुआ है जब स्पेसक्राफ्ट को किसी धूमकेतु की सतह पर सुरक्षित उतारा गया है।
आज सी वी रमण विज्ञान क्लब यमुनानगर के सदस्यों को क्लब समन्वयक व दर्शन लाल बवेजा ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो मार्च 2004 को यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने अपना हैरतअंगेज रोजेटा मिशन लॉन्च किया था तब इसे कल्पना मात्र माना जा रहा था। रोजेटा पूर्व दस  वर्षों मे पचास  करोड़ किलोमीटर से भी अधिक लंबा फासला तय करके 67P धूमकेतु के पास पहुंचा। जहां वैज्ञानिकों ने रोजेटा के संलग्नक लैंडर स्पेसक्राफ्ट फाइली को इस राकेट से अलग किया और इस से अलग होने के बाद फाइली ने सात घंटे की यात्रा की और धूमकेतु की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग कर ली और जैसे ही लैंडिंग की सूचना मिली तो यूरोपियन स्पेस एजेंसी वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को गले मिल कर बधाइयां दी। दर्शन लाल ने बच्चो को यह भी बताया कि यूरोपियन स्पेस एजेंसी के वैज्ञानिकों को फाइली से सिग्नल मिलने शुरू हो गए हैं पता चला है जिस पुच्छल तारे की सतह पर यह उतारा गया है उस की सतह बर्फीली है।
कितना बड़ा है 67P धूमकेतु
67P धूमकेतु जिस पर फाइली को लैंड करवाया गया है उसका आकार 4 किलोमीटर की चौड़ाई का है। जबकि लैंडर स्पेसक्राफ्ट फाइली का आकार एक कपड़े धोने की मशीन जितना है। यह पृथ्वी से इतनी दूर है कि इससे मेसेजिंग मे एक सन्देश के आने और जाने मे एक घंटे लगभग समय लगता है।
खगोल वैज्ञानिक क्या जानना चाहते है इस मिशन से?
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि मनुष्य की पहुँच से दूर इस खगोलीय पिंड के अध्ययन से सौरमंडल के बहुत से अज्ञात रहस्य पता लग सकते हैं। नेपच्यून ग्रह के पथ के बाहर विशाल धूमकेतुओं का एक बहुत विशाल झुरमुट है जिसे उर्ट क्लाउड कहते हैं। वहाँ से यदा-कदा इन धूमकेतुओं परिवार से कोई धूमकेतु सूर्य की प्रभावी गुरुत्व सीमा में आ जाता है और दीर्घवृत्तीय कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करने लगता है। वैज्ञानिकों के एक बड़े वर्ग का यह भी मानना है कि भूतकाल मे पृथ्वी पर जीवन के लिए जरूरी कच्चा माल धूमकेतुओं से ही आयातित हुआ था। फ़्रेड होइल और कुछ खगोलविद ऐसा मानते आये हैं कि अब से कोई साढ़े छह करोड़ वर्ष पहले एक विशालकाय धूमकेतु के पृथ्वी से आ टकराने से विशालकाय प्राणी डायनासोर का सफाया हुआ था और वैज्ञानिकों का मानना है कि धूमकेतु के अध्ययन करने से सौर मंडल कैसे बना यानी इसके निर्माण की पहेली को सुलझाया जा सकता है सौरमंडल के अस्तित्व से आने लेकर अभी तक इनमें खास बदलाव नहीं हुआ है।