Sunday, January 28, 2018

चन्द्रग्रहण, सुपरमून, ब्लूमून व ब्लड मून एक साथ Lunar Eclipse, Super Moon, Blue Moon and Blood Moon

चन्द्रग्रहण, सुपरमून, ब्लूमून व ब्लड मून एक साथ Lunar Eclipse, Super Moon, Blue Moon and Blood Moon
'खगोलीय घटनाओं का आनंद लें इनसे डरे नही'
खगोलीय घटनाओं का सभी के लिए अपने अपने अपने मतानुसार विशेष महत्व होता है। ज्योतिषी इसे ज्योतिषिय मान्यताओं से जोड़ कर देखता है तो खगोलशास्त्री, विज्ञान शिक्षक, विद्यार्थी व वैज्ञानिक इसे अनुसंधान व ज्ञानार्जन के उद्देश्यों से देखता है।
विद्यार्थियों को समसामयिक खगोलीय घटनाओं से अपडेट रखने व उनको ये खगोलीय घटनाये दिखाने का सबसे बड़ा लाभ यह होता है कि वो इससे जुड़े विज्ञान को समझ कर इनसे सम्बंधित काल्पनिक कथाओं व इनसे जुड़े अंधविश्वासों से मुक्त हो सकेंगे। उनकी रुचि अंतरिक्ष व खगोलविज्ञान में बढ़ेगी जिससे वो इस क्षेत्र में अपना कैरियर बनाने का भी मन बना सकते हैं। क्योंकि विज्ञान की अन्य शाखाओं के मुकाबले खगोलविज्ञान व अंतरिक्ष विज्ञान  मे अभी बहुत सी नई खोजों व अविष्कारों की अपार सम्भावनाएं शेष हैं।
कक्षा पांच में ही बच्चों को पढ़ा दिया जाता है कि जब चंद्रमा पृथ्वी के पीछे उसकी  उपच्छाया व प्रच्छाया में आता है तो सूर्य का प्रकाश चन्द्रमा तक नही पहुंच पाता इस कारण चंद्रमा नही दिखाई पड़ता। इस स्थिति को चंद्रग्रहण कहते हैं। चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। चंद्रग्रहण को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है।
चंद्रमा का अपना प्रकाश नही होता वह सूर्य के प्रकाश से चमकता है।
क्यों है 31 जनवरी 2018 महत्त्वपूर्ण?
खगोलीय घटनाओं ने सदा से ही मनुष्य को आकर्षित किया है। प्राचीन मानव भी हैरत में पड़ जाता था कि रोज एक ही जगह से देखने पर भी चंद्रमा के आकार परिवर्तन क्यों होता है? पूर्ण चंद्र व अमावस्या उसे अचंभित करते थे। निरन्तर अवलोकन व प्रेक्षण से मानव ने चंद्रकलाओं को समझा।
31 जनवरी को चंद्रमा की कईं सारी खगोलीय घटनाएं एक साथ घटित हो रही हैं ऐसा संयोग 35 वर्ष के बाद बन रहा है। 31 जनवरी को चन्द्रग्रहण, सूपर मून, ब्लू मून, ब्लड मून खगोलीय घटनाएं घटित होंगी। ऐसा पहले 30 दिसम्बर 1982 को घटित हुआ था। पृथ्वी के एक स्थान पर रहने वाले व्यक्ति के लिए खगोलीय घटनाओं की पुनरावृत्ति बहुत लंबे समय बाद होती है इसलिए इन घटनाओं का आनन्द लेना चाहिए न कि इनसे डर कर घर में दुबकना चाहिये।
आओ सुपरमून को जानें।
चंद्रमा पृथ्वी के चारो ओर अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी के चक्कर लगाता है। परिक्रमा पथ दीर्घवृत्ताकार होने के कारण वह एक बार पृथ्वी से अधिकतम दूरी से व एक बार न्यूनतम दूरी से गुजरता है। तो एक समय ऐसा भी आता है जब चंद्रमा पृथ्वी से न्यूनतम दूरी पर स्थित होता है। यदि उस दिन पूर्णिमा भी हो  तो यह परिघटना सुपरमून कहलाती है। ऐसी स्थिति आने पर चंद्रमा उस दिन अन्य पूर्णिमाओं के अपने आकार से 14 प्रतिशत  बढ़ा व 30 प्रतिशत अधिक चमकदार दिखाई देता है। यह स्थिति एस्ट्रो फोटोग्राफर्स के लिए बेहतरीन शॉट्स लेने के लिए उत्तम होती है। सुपरमून शब्द सर्वप्रथम अमेरिकी खगोलविद रिचर्ड नोल द्वारा वर्ष 1979 में प्रयोग किया गया था। सुपरमून कोई आधिकारिक खगोलीय शब्द नहीं है।
' पूर्ण चंद्रमा का अपने परिक्रमा पथ पर पृथ्वी से न्यूनतम दूरी पर होना सुपरमून है।'
आओ जाने क्या हैं ब्लू मून?
वर्ष मास गणना के दो तरीके हैं एक सौर वर्ष व दूसरा चंद्र वर्ष। एक सौर वर्ष के 12 महीनों (365.24 दिन) में 12 चंद्र मास के कुल दिनों (354.36 दिन) से कुछ दिन (5.88 दिन) अधिक होते हैं। इसलिए प्रत्येक 2.7154 वर्ष के अंतराल पर एक मौसम खंड में 3 की बजाय 4 पूर्णिमाएँ पड़ती हैं। इस स्थिति को साधारण शब्दों में कहें तो किसी एक सौर महिने में दो बार चंद्रमा का पूरा निकलना ब्लू मून कहलाता है। इस वर्ष 2 जनवरी को पूर्णिमा थी और अब 31 जनवरी को भी पूर्णिमा है इसलिए 31 जनवरी के पूर्ण चंद्रमा को ब्लू मून नाम दिया गया। खगोल विज्ञान में फार्मर्स अल्मनक द्वारा दी गयी  ब्लू मून की इस परिभाषा को सबसे अधिक मान्यता प्राप्त है।
'ब्लू मून एक खगोलीय मौसम में एक अतिरिक्त पूर्णिमा के अस्तित्व की घटना को कहते है।'
क्यों कहते हैं ब्लड मून (ताम्र चंद्र) ?
चंद्रोदय के समय चंद्रमा जैसे ही पृथ्वी की छाया में आएगा तो उसका रंग ताम्बे के रंग जैसा (हल्का लाल) प्रतीत होता है। इस स्थिति में अंतरिक्ष मे चंद्रमा पृथ्वी की परछाई क्षेत्र में होता है तो उस तक सूर्य का प्रकाश केवल पृथ्वी के वायुमंडल से होकर पहुंचता है। मात्र क्रिश्चियन मान्यताओं में ही ब्लड मून का जिक्र है।
यह दुर्लभ नजारा लेने का समय व स्थान:
31 जनवरी से एक दिन पहले आप एक जगह निर्धारित करले जहाँ से पूर्वी दिशा में चंद्रमा को अच्छे से देखा जा सके। आपके शहर या गाँव में 31 जनवरी को चंद्रोदय जितने बजे होगा उस समय से पूर्व वहाँ पहुँच जाएं।
यमुनानगर में 31 जनवरी को चंद्रोदय का समय सायं 5 बजकर 21 मिनट है। अगर मौसम ने साथ दिया तो ये ग्रहण 31 जनवरी को 6 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 42 मिनट के बीच नजर आएगा। ये नजारा लेने के लिए खुले मैदान में जाकर क्षितिज के साथ से ही चन्द्रोदय के समय से ही उसे देखना होगा। इसके अवलोकन के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नही होती है। अवलोकन स्थल के आसपास ऊंचे भवन व पेड़ न हों।
इसे भारत के साथ-साथ इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जायेगा। इसे अमेरिका के अलास्का, हवाई और कनाडा में भी अवलोकित किया जा सकेगा।
मिडिया रिपोर्टस
पंजाब केसरी व दैनिक जागरण

Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
7404241300
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Saturday, December 30, 2017

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया Circumference of Earth Experiment

पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया Circumference of Earth Experiment
(23 सितम्बर 2017 को)
सी वी रमन विज्ञान क्लब सदस्यों ने पृथ्वी की परिधि मापने का प्रयोग किया गया
अर्जुन पार्क सरोजिनी कालोनी में सी वी रमन विज्ञान क्लब के सदस्य क्लब प्रभारी दर्शन लाल विज्ञान अध्यापक के नेतृत्व में एकत्र हुए और उन्होंने पृथ्वी की परिधि नापने के प्रयोग से सम्बंधित गणनाएं की। सूर्य की धूप में लंबवत खड़ी छड़ी जिसे नोमोन कहते हैं की परछायी को नाप कर विभिन्न गणितीय गणनाओं से पृथ्वी की परिधि ज्ञात की जाती है। 

क्लब प्रभारी दर्शन लाल ने बताया की 23-24 सितम्बर इक्विनॉक्स के दिन सैद्धान्तिक रूप से दिन व रात बराबर होते हैं और आज के बाद दिन छोटे और रात लंबी होनी शुरू हो जाती हैं। पृथ्वी की परिधि ज्ञात करने में एक साथ बहुत से देशों के बच्चे भाग लेते हैं। वह एक नेटवर्क के जरिये अपने अपने स्कूल में प्रयोग करते हैं जिनकी सम्मिलित गणना से परिणाम निकाले जाते हैं। 
अगला प्रयोग 21-22 दिसम्बर को किया जाएगा। 
आज के प्रयोग में पार्थवी, पालक, पारस, अर्श, अनुष्का, अंशिका राणा, दृष्टि, संयम, सृष्टि, अंशिका शर्मा ने भाग लिया। 





Darshan Lal Baweja
Science Teacher Cum Science Communicator
Secretary C V Raman Science Club Yamunanagar
Distt. Coordinator NCSC, Haryana Vigyan Manch Rohtak
Master Trainer for Low/Zero Cost Science Experiments And Hobby Development
09416377166
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विज्ञान का लोकप्रियकरण Popularization of Science


विज्ञान का लोकप्रियकरण Popularization of Science
डाइट तेजली में अध्यापकों को विज्ञान पढ़ाने के आसान तरीके सिखाये गए
कार्यक्रम के अंतर्गत हरियाणा राज्य में विज्ञान के लोकप्रियकरण ये लिये प्रयास किये जा रहें हैं। 
सर्व शिक्षा अभियान, एससीईआरटी गुडगाँव, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, जिला शिक्षा/मौलिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय यमुनानगर, के सयुंक्त तत्वाधान में प्रमोशन आफ साइंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विज्ञान अध्यापको का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) तेजली में हुआ। जिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान तेजली में कार्यक्रम अधिकारी डाक्टर संजीव कुमार व प्रभारी दुष्यंत चहल के साथ मास्टर ट्रेनर्स दर्शन लाल बवेजा, निधि बंसल ने इस ट्रेनिग की शुरुआत की।
जिला यमुनानगर के चयनित टीजीटी विज्ञान अध्यापकों को संबोधित करते हुए प्रवक्ता दुष्यंत चहल ने विज्ञान अध्यापकों से गतिविधि आधारित शिक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम समन्वयक डाक्टर सुरेश कुमार ने विज्ञान अध्यापकों को शिक्षण के दौरान विज्ञान कक्ष व विज्ञान किट्स के भरपूर उपयोग के लिये प्रेरित किया। 
आज के प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले चरण में मास्टर ट्रेनर दर्शन लाल बवेजा ने ध्वनि उत्पादन, संचरण व विस्तारण संबंधित प्रयोग करके दिखाए गए। 
जिसमे ध्वनि कम्पन से उत्पन्न होती है, ध्वनि संचरण लिए माध्यम की आवशयकता, ध्वनि का तारत्व व विस्तारण, प्रतिध्वनि, पराश्रव्य ध्वनि, आवर्त्ती, आवर्तकाल, ध्वनि का परावर्तन आदि को सरल विज्ञान प्रयोगों के द्वारा समझाया व जीवन में इनके उपयोगों को उल्लेखित किया। मास्टर ट्रेनर प्रवक्ता रसायन निधि बंसल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रशिक्षुओं से पत्तियों के शिरा विन्यास, पौधों की जड़ों के प्रकार, अमल क्षार लवण जांच, उदासीनीकरण अभिक्रिया संबंधित प्रयोग करवा कर देखे।
इस कार्यक्रम में इंद्रजीत सिंह, अमित वर्मा, अनिल कुमार, सुरजीत सिंह गिल, गुरुप्रीत सिंह, अनिल शर्मा, मंजीत कौर, मनदीप कौर, संजय, अनिता वर्मा, परवीन कुमारी, परीक्षा गर्ग, किरण लता, पवन, हरविंदर कौर, दीपक शर्मा, अमृत पाल सिंह आदि विज्ञान अध्यापकों ने भाग लिया।


Darshan Lal Baweja
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गर्म होने पर जल अणुओं का ऊपर उठाना Heating of molecules of liquid

गर्म होने पर जल अणुओं का ऊपर उठाना Heating of molecules of liquid
गतिविधि का नाम: गर्म होने पर जल अणुओं का ऊपर उठाना।
आवश्यक सामग्री: 2 काँच की डेक्स्ट्रोज/ग्लूकोज वाली खाली बोतले, रबर कार्क बोरर, पानी गर्म व सामान्य, पोटैशियम परमेगनेट या लाल रंग दो दो फीट के 2 प्लास्टिक के पाइप के टुकड़े आदि
सिद्धांत/नियम: जब किसी तरल को गर्म किया जाता है, उसका तापमान बढ़ता है। अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, आणविक गति बढ़ जाती है और द्रव के अणु ऊपर की ओर उठते है।
प्रयोग विधि: 1. बोतलों की रबर स्टॉपर में पहले से ही मौजूद दो दो सुराखों को पाइप जितना बड़ा कर लेते हैं ताकि पाइप के टुकड़े उन सुराखों में से आरपार जा सकें।
2. नीचे वाली बोतल में गर्म व रंगीन पानी भरो ऊपर की जाने वाली बोतल में सामान्य ताप का रंगहीन पानी भरे व रबर स्टॉपर कस लें।
3. ठंडे पानी की बोतल को ऊपर ले जाये।
4. हम देखते हैं कि नीचे वाली बोतल से गर्म व रंगीन पानी किसी भी एक पाइप से ऊपर की ओर जाने लगता है और दूसरे पाइप से ऊपर वाली बोतल से सामान्य ताप वाला पानी नीचे वाली बोतल में शिफ्ट होना शुरू हो जाता है।
5. ऐसा पानी के गर्म किये जाने पर उसके अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाने के कारण हुआ होता है और वे ऊपर की बोतल में चढ़ने लगते हैं जबकि ठंडे पानी के अणु नीचे गति करने लगते हैं।
दर्शन लाल बवेजा, विज्ञान अध्यापक

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Thursday, December 28, 2017

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला 25 NCSC Resources person's training workshop

25वीं राबाविका रिसोर्स पर्सन्स कार्यशाला यमुनानगर 25 NCSC Resources person's training workshop 
(जुलाई 2017 में आयोजित हुई)
डॉ विजय दहिया
प्रधानाचार्या शशि बाठला
व्यक्तिगत व समुदायिक स्वच्छता को जागरूक करते प्रोजेक्ट बनाएं बाल विज्ञानी : डॉ विजय दहिया
विज्ञान परियोजनाओं के माध्यम से बच्चे स्थानीय समस्याओं का हल निकालने का प्रयास करें : शशि बाठला
राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (एन सी एस सी) की एकदिवसीय अध्यापक प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित हुई और यह विज्ञान सम्मेलन अक्टूबर माह में होगा।
मुकंद लाल पब्लिक स्कूल सरोजिनी कालोनी मे राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस की गाइड टीचर ट्रेनिंग वर्कशाप आयोजित हुई जिसमे जिले के निजी व राजकीय विद्यालयों के 80 विज्ञान अध्यापकों और प्राध्यापकों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण कार्यशाला में विभिन्न विषयों के रिसोर्स पर्सन्स ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को ‘टिकाऊ विकास के लिए विज्ञान, तकनीकी और नवाचार’ विषय पर अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने के लिए प्रशिक्षित किया। 
विद्यालय की प्रधानाचार्या शशि बाठला ने उपस्थित विज्ञान अध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता के माध्यम से विज्ञान प्रोजेक्ट बनाने से बच्चे अपने आसपास की सामान्य व गंभीर समस्याओं से रूबरू होते हैं और वो उनका हल निकलने का प्रयत्न करते हैं जिससे वो विज्ञान को नजदीकी से समझ पाते हैं। विज्ञान प्रोजेक्ट करने से बच्चों के सर्वांगीण विकास को बल मिलता है। 
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में सिविल हस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डाक्टर विजय दहिया ने उपस्थित अध्यापकों को स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण विषय पर अपना व्यख्यान दिया। डाक्टर दहिया ने बताया कि स्वस्थ शरीर धनदौलत से भी बड़ी आवश्यकता है। व्यक्तिगत स्वच्छता, उचित पोषण, मानसिक प्रसन्नता के साथ साथ सामुदायिक स्वच्छता भी महत्वपूर्ण आवश्यकता है। 
डाक्टर दहिया ने अध्यापकों से बच्चों को सीवरेज ड्रेनेज ओर वाटर सप्लाई पाइप्स की पुनर्व्यवस्था पर परियोजना बनाने का आव्हान भी किया। 
 दर्शन लाल बवेजा
मुख्याध्यापक प्रदीप सरीन
जिला समन्वयक दर्शन लाल बवेजा ने बताया की हरियाणा विज्ञान मंच रोहतक द्वारा आयोजित इस विज्ञान सम्मेलन में बालक अपने परियोजना शोधपत्रों को साक्ष्यों सहित प्रस्तुत करते हैं। उन्होंने आज यह आव्हान किया की प्रत्येक विज्ञान अध्यापक/ प्राध्यापक को विज्ञान शिक्षण के साथ साथ विज्ञान संचारक भी बन जाना चाहिए। देश को विज्ञान चेतना की अति आवश्यकता है। शिक्षण को मात्र रोजगार का साधन मत बनाएं। समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए विज्ञान को जन आन्दोलन बनाएं और विज्ञान संचार की मुहीम से जुड़ें। गौरव कुमार ने ने टिकाऊ विकास और कृषि विषय पर बच्चों से प्रोजेक्ट करवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया की मिटटी की जांच, फसल चक्र, कीट पाठशाला, मांगअनुरूप फसल उत्पादन, कीटनाशकों के आर्गेनिक विकल्पों, फ़ूड प्रोसेसिंग, देसी खाद, बीजों की वेरायटी और सामूहिक खेती पर बच्चों को परियोजनाएं तैयार करवाने की बहुत आवश्यकता है। 
मंडेबरी के राजकीय उच्च विद्यालय के मुख्याध्यापक प्रदीप सरीन ने खाद्य व कृषि विषय पर अपना व्यख्यान दिया। आवश्यकतानुसार और भूख मिटाने जितना भोजन ही थाली में ले ताकि भोजन व्यर्थ न जाये। 
बुड़िया से प्रवक्ता रसायन सुमन शर्मा ने प्राकृतिक संसाधन और टिकाऊ विकास विषय पर बच्चो से प्रोजेक्ट बनवाने का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने नदियों, पहाड़ों, जंगलों, खनिज भंडारों और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और संवर्धन करने की आवश्यकताओं पर बल दिया। 
तेजली से गणित अध्यापक श्रीश कुमार शर्मा ने टिकाऊ विकास में परम्परागत तरीकों और देशज विधियों पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने गत वर्ष के एक प्रोजेक्ट का वर्णन भी किया। 
गत वर्ष की विजेता ग्रुप लीडर प्रभनूर कौर कक्षा आठ ने अपनी टीम के साथ एक परियोजना की प्रस्तुती दी जिससे उपस्थित अध्यापकों को प्रोजेक्ट बनाने की बारीकियां पता लग सकी। 
इस प्रशिक्षण कार्यशाला में प्रदीप सरीन, आर पी गांधी, दीपक शर्मा, दीपिका , राकेश कुमार, ममता वर्मा, मंजू आर्या, पूजा कालरा, छाया सैनी, विशाल, मनदीप कौर, अभिषेक वर्मा, हरदीप सिंह, सोनू, निधि बंसल स्मृति शर्मा आदि मौजूद रहे।